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‘देश बचाना है तो बंगाल को बचाना होगा’: BJP नेता बीएल संतोष के बयान के मायने, क्या वाकई राजनीतिक से बढ़कर सभ्यतागत है पश्चिम बंगाल की लड़ाई?

बीजेपी नेता बीएल संतोष ने बंगाल में बीजेपी सरकार बनाने पर बल देते हुए कहा है कि बंगाल की लड़ाई राजनीतिक नहीं, सभ्यतागत है। देश को बचाना है तो बंगाल को बचाना होगा। घुसपैठ की वजह से डेमोग्राफी बदल रही है। इससे देश की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।

बंगाल से लगातार हो रहे घुसपैठ और उसकी वजह से हो रहा डेमोग्राफी बदलाव देश के लिए खतरनाक है। बंगाल की संस्कृति और उसकी पहचान को इससे खतरा पैदा हो गया है। राजनीतिक संरक्षण में हो रहा ये घुसपैठ बंगाल चुनाव के लिए ही अहम नहीं है, बल्कि इससे देश की सुरक्षा, संप्रभुत्ता जुड़ी हुई है। इसलिए बीजेपी नेता बीएल संतोष ने देश को बचाने के लिए बंगाल चुनाव को जीतने पर बल दिया है।

क्या कहा बीजेपी नेता बीएल संतोष ने?

बीजेपी नेता बीएल संतोष ने कहा है कि हमारे लिए बंगाल सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि एक सभ्यता को बचाने की लड़ाई है। उनका मानना है कि भारत को बचाने के लिए बंगाल को बचाना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि बंगाल में डेमोग्राफी बदलावों को रोकना और हर हाल में सरकार बनाना उनका लक्ष्य है, जिसे वे भारत के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।

सभ्यता बचाने की लड़ाई है बंगाल चुनाव

बीजेपी नेता बीएल संतोष बंगाल चुनाव को सियासी लड़ाई से बढ़कर बंगाल की संस्कृति और पहचान को बचाने की लड़ाई से जोडकर देखते हैं। बंगाल में लगातार हिन्दुओं का पलायन हो रहा है। यहाँ कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दु त्यौहारों का कई बार विरोध किया गया। कई बार दुर्गापूजा विसर्जन और मुहर्रम के जुलूस एक दिन होने पर विसर्जन की तारीख बदल दी गई।

प्रशासन ने दुर्गापूजा उत्सव को कैंसिल कर दिया। यही हाल राम नवमी जुलूस पर भी रहा। कई जगहों पर हिंसा और झड़पें हुई। होली- दिवाली जैसे पर्व मनाने के दौरान भी कई बार विवाद हुए। मार्च 2025 में बसंत उत्सव के दौरान शांतिनिकेतन के सोनाझुरी हाट में पर्यावरण संरक्षण का हवाला देते हुए होली समारोह पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस पर काफी बवाल भी हुआ।

राज्य में बढ़ रहे घुसपैठिए और डेमोग्राफी बदल रहा है

बंगाल में 2011 की जनगणना के मुताबिक, पूरे देश में हिन्दू आबादी घटी है। ये करीब 0.7 फीसदी कम हुई है जबकि पश्चिम बंगाल में हिन्दू आबादी 1.94 फीसदी घटी है। यहाँ मुस्लिम आबादी में 0.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ये तो 2011 के आंकड़े हैं। इससे पता चलता है कि राज्य में मुस्लिम की तुलना में हिन्दुओं की संख्या तेजी से घट रही है। इस बीच लगातार घुसपैठ बढ़ी है।

ये घुसपैठिए बंगाल के गाँव में घुस कर अपनी पैठ जमा लेते हैं। धीरे धीरे टीएमसी के संरक्षण में पहचान पत्र प्राप्त कर लेते हैं और भारत का नागरिक बन जाते हैं। यही वजह है कि बंगाल में 2001 में मुस्लिम आबादी 25 फीसदी थी, जो 2011 में बढ़कर 27 फीसदी के पार जा चुकी थी। बंगाल की 9.5 करोड़ की आबादी में करीब 2.5 करोड़ मुस्लिम हैं। ये दर्शाता है कि घुसपैठ कितना बड़ा सिरदर्द है।

दरअसल पश्चिम बंगाल में एक घुसपैठिए एक वोटर की तरह है। बांग्ला भाषी होने की वजह से गाँव गाँव में फैले होते हैं। ये लोग पूरे बंगाल में मौजूद हैं, लेकिन बांग्लादेश से सटे मालदा, मुर्शिदाबाद, उत्तर दिनाजपुर जैसे इलाकों में इनकी संख्या 50 फीसदी तक पहुँच चुकी है। इसके अलावा उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना क्षेत्र में इसकी संख्या और ज्यादा है।

मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास कर चुके पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूँ कबीर के मुताबिक मुर्शिदाबाद में 70 फीसदी मुस्लिम आबादी है। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि बंगाल में डेमोग्राफी में कितना बदलाव आया है।

यह कोई इत्तफाक से नहीं है, बल्कि राजनीतिक संरक्षण में किया गया एक सुनियोजित और व्यवस्थित बदलाव है। बीजेपी के मुताबिक, 46 विधानसभा क्षेत्रों में, केवल एक दशक के भीतर मतदाताओं की जनसंख्या में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इनमें से ज्यादातर वे जिले हैं, जो बांग्लादेश से सटे हुए हैं। इससे पता चलता है कि डेमोग्राफी में कितना बदलाव आया है।

डेमोग्राफी बदलावों की वजह से सामाजिक तनाव और ध्रुवीकरण बढ़ा है। हिन्दू परिवारों को पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है। हिन्दुओं पर हमले बढ़े हैं।

बंगाल की पहचान और संस्कृति को खतरा

बंगाल में हिंदू परिवारों का लगातार पलायन हो रहा है और पारंपरिक त्योहारों व सांस्कृतिक रीति रिवाजों पर इसका असर पड़ रहा है। बंगाल की मूल पहचान को खतरा पैदा हो रहा है। हाल ही में मुर्शिदाबाद में पूर्व टीएमसी विधायक ने बाबरी मस्जिद बनाने के लिए शिलान्यास किया है। यहाँ बड़ी संख्या में मुस्लिम पहुँच रहे हैं।

अब सवाल ये उठता है कि बाबर जैसे आक्रांताओं के नाम पर मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने का क्या औचित्य है। जब राम जन्मभूमि के निर्माण के साथ ही बाबरी मस्जिद का नामोनिशान मिट गया तो फिर बाबर के नाम पर बंगाल में मस्जिद बनाना सामाजिक समरसता को कमजोर ही करता है। मुस्लिम तुष्टिकरण की वजह से ममता सरकार इसे रोक भी नहीं रही है। बल्कि खुद हुमायूँ कबीर ने बताया है कि बंगाल पुलिस उनकी मदद कर रही है।

माना जाता है कि राज्य की 294 सीटों में से 80-100 सीटों पर मुस्लिम वोट निर्णायक माने जाते हैं। ऐसे में ममता सरकार लगातार घुसपैठिए को संरक्षण देकर अपना वोट बैंक पुख्ता करने में लगी है। कहा ये भी जाता है कि 2011 और 2016 के चुनाव में ममता बनर्जी की सरकार इस घुसपैठियों के बदौलत सत्ता तक पहुँची। इससे पहले 2006 तक ये वोट बैंक लेफ्ट के साथ था।

बंगाल के घुसपैठ का असर असम, त्रिपुरा से लेकर बाकी पूर्वोत्तर राज्यों में भी पड़ा है। इसलिए असम के सीएम हेमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि घुसपैठियों के बंगाल द्वार को बंद करना देश के लिए बेहद जरूरी है। असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “यही असली बात है। असम और त्रिपुरा घुसपैठ के खिलाफ लड़ रहे हैं, वहीं बंगाल घुसपैठियों के लिए अपने दरवाज़े खोल रहा है। हमें पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश बॉर्डर पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। होम मिनिस्टर ने एक नेशनल ग्रिड का प्रस्ताव दिया है; हम इसका स्वागत करते हैं।”

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

बंगाल में घुसपैठ देश की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है। अक्सर घुसपैठिए अवैध कारोबार में संलिप्त होते हैं। अवैध हथियार से लेकर नशे के कारोबार में इनकी भूमिका पाई जाती है। आतंकवाद से लेकर स्थानीय अपराध तक में घुसपैठिए संलिप्त पाए गए। ऐसे में बीजेपी नेता बीएल संतोष ने ठीक ही कहा है कि देश के लिए बंगाल से ममता सरकार का जाना जरूरी है। ये बंगाल की पहचान और संस्कृति के लिए भी जरूरी है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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