प्रधानमंत्री पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास पहल जिसे ‘पीएम-डिवाइन’ (PM-DevINE) कहा जाता है, असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। यह केंद्र सरकार की 100% फंडिंग वाली योजना है, जिसे अक्टूबर 2022 में शुरू किया गया था ताकि पूर्वोत्तर के राज्यों में विकास की उन कमियों को दूर किया जा सके जिन्हें दशकों से नजरअंदाज किया गया था।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक, इस योजना ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था का चेहरा बदल दिया है। पुराने और जर्जर सरकारी स्कूलों को अब आधुनिक स्मार्ट क्लासरूम और बेहतरीन सुविधाओं में बदला जा रहा है, जिससे गरीब बच्चों को भी निजी स्कूलों जैसी शिक्षा अपने घर के पास ही मिल रही है।
PM-DevINE योजना क्या है और क्यों लाई गई
पीएम-डिवाइन (PM-DevINE) को आप केंद्र सरकार की एक ऐसी खास योजना समझ सकते हैं, जिसका पूरा खर्चा यानी 100% पैसा केंद्र सरकार खुद उठाती है। इसे साल 2022-23 के बजट में खास तौर पर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों (जैसे असम, मेघालय, मणिपुर आदि) की जरूरतों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया था। अक्सर देखा गया है कि देश के अन्य हिस्सों के मुकाबले इन राज्यों में कुछ बुनियादी सुविधाओं की कमी रह गई थी।
इसी ‘डेवलपमेंट गैप’ यानी विकास की खाई को पाटने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सड़क बनाने से लेकर, बच्चों की पढ़ाई (शिक्षा), लोगों के इलाज (स्वास्थ्य), नए कारखाने लगाने (उद्योग) और महिलाओं व युवाओं को रोजगार देने (आजीविका) तक के हर जरूरी प्रोजेक्ट के लिए पैसा मुहैया कराती है।
सरकार ने इस योजना को चलाने के लिए एक लंबा रोडमैप तैयार किया है। साल 2022-23 से शुरू होकर 2025-26 तक के चार सालों के लिए सरकार ने कुल 6,600 करोड़ रुपए का एक बड़ा फंड सुरक्षित कर दिया है। योजना की शुरुआत को मजबूती देने के लिए पहले ही साल में 1,500 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए थे। इस पूरे काम की देखरेख की जिम्मेदारी ‘उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय’ (DoNER) को सौंपी गई है।
यह मंत्रालय यह सुनिश्चित करता है कि पैसा सीधे उन कामों में लगे जिनसे वहाँ के लोगों का जीवन आसान हो सके, जैसे कि सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाना या दूर-दराज के गाँवों तक पक्की सड़कें पहुँचाना। यह योजना किसी पुरानी स्कीम की जगह नहीं लेती, बल्कि उन कमियों को पूरा करती है जो बाकी योजनाओं से छूट गई थीं।
PM-DevINE कैसे काम करती है?
पीएम-डिवाइन योजना के तहत काम करने का तरीका बहुत ही व्यवस्थित और पारदर्शी रखा गया है ताकि सरकारी पैसे का एक-एक रुपया सही जगह इस्तेमाल हो सके। इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इसके तहत छोटे-मोटे नहीं, बल्कि 20 करोड़ रुपए से लेकर 500 करोड़ रुपए तक के बड़े और असरदार प्रोजेक्ट्स ही हाथ में लिए जाते हैं।
यह योजना किसी दूसरी चल रही सरकारी स्कीम को बंद नहीं करती या उसकी जगह नहीं लेती, बल्कि इसका असली काम उन जरूरी सुविधाओं को पूरा करना है जो किसी कारणवश दूसरी योजनाओं से छूट गई थीं। नियमों के मुताबिक, इस पैसे का इस्तेमाल जमीन खरीदने, दफ्तर के स्टाफ की सैलरी देने या किसी खास व्यक्ति को निजी फायदा पहुँचाने के लिए नहीं किया जा सकता, बल्कि यह सिर्फ समाज के सामूहिक विकास के लिए है।
किसी भी प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले उसकी बारीकी से जाँच की जाती है और बड़े संस्थानों से तकनीकी टेस्ट करवाया जाता है। साथ ही, काम को एक तय समय सीमा के भीतर पूरा करने की सख्त शर्त होती है, ताकि जनता को मिलने वाली सुविधाओं में देरी न हो और हर प्रोजेक्ट का पूरा फायदा स्थानीय लोगों को समय पर मिल सके।
असम में स्कूल शिक्षा में कैसे आया बड़ा बदलाव
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का कहना है कि PM-DevINE योजना का सबसे शानदार और सीधा फायदा राज्य के उन बच्चों को मिल रहा है जो सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। पहले जहाँ सरकारी स्कूलों का नाम आते ही टूटी दीवारें या पुराने कमरों की तस्वीर सामने आती थी, अब वह पूरी तरह बदल रही है। इस योजना की मदद से स्कूलों का कायाकल्प किया जा रहा है।
अब वहाँ सिर्फ बोर्ड और चौक वाली पुरानी पढ़ाई नहीं होती, बल्कि स्कूलों में ‘स्मार्ट क्लासरूम’ बनाए गए हैं। इसका मतलब है कि अब बच्चे कंप्यूटर और बड़े डिजिटल पर्दों की मदद से पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही स्कूलों की इमारतों को नया रूप दिया गया है और वहाँ साफ पानी, शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएँ भी बेहतर की गई हैं।
यह सब इसलिए किया जा रहा है ताकि गाँव और कस्बों में रहने वाले बच्चों को भी वही आधुनिक सुविधाएँ मिलें जो बड़े शहरों के महँगे प्राइवेट स्कूलों में मिलती हैं। इस बदलाव को समझने के लिए मुख्यमंत्री ने पलाशबाड़ी में स्थित एक बहुत पुराने सरकारी स्कूल का उदाहरण दिया। यह स्कूल आजादी के कुछ साल बाद, यानी 1953 में बना था।
दशकों पुराना होने की वजह से इसकी हालत वैसी नहीं थी जैसी आज के दौर में होनी चाहिए, लेकिन पीएम-डिवाइन योजना ने इस स्कूल की पूरी शक्ल ही बदल दी है। अब वहाँ का माहौल इतना आधुनिक हो गया है कि देखकर लगता ही नहीं कि यह वही पुराना स्कूल है। मुख्यमंत्री का मानना है कि जब स्कूल की इमारत और वहाँ मिलने वाली सुविधाएँ अच्छी होती हैं, तो बच्चों का मन भी पढ़ाई में ज्यादा लगता है।
उनका कहना है कि यह सिर्फ दीवारों की मरम्मत या नई पेंटिंग का काम नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सोच को बड़ा बनाने की कोशिश है। जब बच्चे एक आधुनिक माहौल में पढ़ेंगे, तो उनमें आत्मविश्वास जागेगा और वे देश की तरक्की में अपना बड़ा योगदान दे पाएँगे।
गाँव के बच्चों के लिए शहर जैसी सुविधा अब घर के पास
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि PM-DevINE योजना का सबसे बड़ा फायदा असम के उन इलाकों को हुआ है जो शहरों से दूर हैं। पहले गाँव और छोटे कस्बों (अर्ध-शहरी इलाकों) में रहने वाले बच्चों के पास पढ़ाई के अच्छे साधन नहीं होते थे। अगर किसी बच्चे को अच्छी और आधुनिक शिक्षा चाहिए होती थी, तो उसे मजबूरी में अपना घर छोड़कर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है।
इस योजना के तहत सरकार ने शहर की भीड़-भाड़ के बजाय सीधे गाँव के स्कूलों को ‘अपग्रेड’ करना शुरू कर दिया है। इसका मतलब है कि अब गाँव का बच्चा भी अपने घर के पास ही उन्हीं सुविधाओं के साथ पढ़ रहा है जो पहले सिर्फ बड़े शहरों के बड़े स्कूलों में मिलती थीं। अब माता-पिता को भी इस बात की चिंता नहीं रहती कि अच्छी पढ़ाई के लिए उनके बच्चों को दूर जाना पड़ेगा।
स्कूलों में जो डिजिटल टूल्स और स्मार्ट क्लासरूम लगाए गए हैं, उन्होंने पढ़ाई के तरीके को बहुत मजेदार बना दिया है। पहले बच्चे सिर्फ किताबों को रटते थे, लेकिन अब स्मार्ट बोर्ड और वीडियो की मदद से वे मुश्किल से मुश्किल पाठ को देख और समझ सकते हैं। इससे पढ़ाई अब उबाऊ नहीं लगती, बल्कि बच्चों के लिए एक रोचक अनुभव बन गई है।
जब स्कूल में कंप्यूटर, इंटरनेट और अच्छी लैब जैसी सुविधाएँ मिलने लगती हैं, तो बच्चों में स्कूल जाने का उत्साह बढ़ जाता है। अधिकारियों का मानना है कि जब पढ़ाई आसान और खेल-खेल में होने लगती है, तो बच्चे बेहतर तरीके से सीखते हैं। कुल मिलाकर, पीएम-डिवाइन योजना ने शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे आधुनिक और हर बच्चे की पहुँच में ला खड़ा किया है।
शिक्षा सुधार के साथ नए स्कूलों की तैयारी
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में PM-DevINE योजना असम सरकार के उन बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है, जिससे राज्य की पूरी शिक्षा व्यवस्था को जड़ से सुधारा जा सके। मुख्यमंत्री ने साझा किया कि राज्य कैबिनेट ने असम भर में 100 नए सरकारी स्कूल खोलने का एक बड़ा फैसला लिया है, ताकि शिक्षा का नेटवर्क हर कोने तक फैल सके।
इस पूरी मुहिम का सबसे बड़ा मकसद यह है कि चाहे बच्चा अमीर हो या गरीब, उसे पढ़ाई के एक जैसे और बेहतरीन मौके मिलें। सरकार चाहती है कि आज के इन बच्चों को इतना काबिल बनाया जाए कि वे भविष्य में राज्य और देश की तरक्की के लिए एक मजबूत ‘मानव संसाधन’ बन सकें।
शिक्षा के जानकारों का भी यही कहना है कि जब केंद्र सरकार की पीएम-डिवाइन जैसी बड़ी योजनाएँ और राज्य सरकार की नीतियाँ एक साथ मिलकर काम करती हैं, तो जमीन पर इसके नतीजे बहुत शानदार निकलते हैं। जब अच्छे टीचरों के साथ-साथ स्कूलों में स्मार्ट क्लास और बढ़िया इमारत जैसी सुविधाएँ जुड़ जाती हैं, तो बच्चों के सीखने का स्तर अपने आप ऊपर चला जाता है।
सिर्फ स्कूल नहीं, हर क्षेत्र में विकास
पीएम-डिवाइन योजना का दायरा सिर्फ स्कूल और पढ़ाई-लिखाई तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे असम और उत्तर-पूर्व की तस्वीर बदलने वाला एक बड़ा अभियान है। आँकड़ों की बात करें तो अक्टूबर 2022 से लेकर 30 नवंबर 2025 तक इस योजना के तहत कुल 44 बड़े प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी जा चुकी है, जिन पर सरकार लगभग 5,728.79 करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
इन पैसों से न केवल सड़कें और अस्पताल बन रहे हैं, बल्कि नए बिजनेस शुरू करने के लिए ‘स्टार्टअप इकोसिस्टम’ को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इन सब कामों का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि इलाके के युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल गए हैं, जिससे लोगों की कमाई बढ़ी है और स्थानीय बाजार मजबूत हुए हैं।
इतना ही नहीं, इलाके में बाहरी निवेश लाने के लिए ‘राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025’ जैसा बड़ा आयोजन भी किया गया, जिसमें खेती, पर्यटन, IT, खेल और बिजली जैसे कई क्षेत्रों पर खास जोर दिया गया। साथ ही, कनेक्टिविटी को आसान बनाने के लिए ‘उड़ान’ योजना के तहत 90 हवाई रास्ते शुरू किए गए हैं, जिनसे अब 12 एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर स्टेशन (हेलीपोर्ट) आपस में जुड़ गए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि अब असम और उसके पड़ोसी राज्यों में आना-जाना और व्यापार करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो गया है।


