गुजरात के ऐतिहासिक सोमनाथ मंदिर में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का शानदार आगाज हो गया है। गुरुवार (8 जनवरी 2026) को इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के नाम एक विशेष संदेश साझा किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में सोमनाथ मंदिर के उस गौरवशाली इतिहास को नमन किया, जो सदियों के संघर्ष और फिर से उठ खड़े होने की अद्भुत मिसाल है।
1000 साल पुराना जख्म और अटूट आस्था
प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि आज से ठीक एक हजार साल पहले, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने विदेशी आक्रांताओं का पहला बड़ा हमला झेला था। पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ पर बार-बार हमले हुए और उसे नष्ट करने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार भारत की सांस्कृतिक चेतना और मजबूत होकर उभरी।
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि यह भारत की उस अटूट आत्मा का प्रतीक है जिसे न तो कोई झुका सका और न ही कोई मिटा सका।
#SomnathSwabhimanParv का ये अवसर, भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय कितना ही कठिन और भयावह क्यों ना रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा…
— Narendra Modi (@narendramodi) January 8, 2026
सरदार पटेल और राजेंद्र बाबू के योगदान का स्मरण
अपने संदेश में पीएम मोदी ने आधुनिक भारत में सोमनाथ के पुनरुद्धार की कहानी भी बताई। पीएम मोदी ने लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल और केएम मुंशी के योगदान को याद किया, जिनके संकल्प से मंदिर का पुनर्निर्माण संभव हुआ।
प्रधानमंत्री ने 1951 के उस ऐतिहासिक पल का भी जिक्र किया जब देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने इस भव्य मंदिर का उद्घाटन किया था। उन्होंने बताया कि साल 2026 इस उद्घाटन की 75वीं वर्षगाँठ का गवाह बनेगा, जो राष्ट्र की एकता के लिए एक बड़ा अवसर है।
स्मृतियों को साझा करने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने अपनी पुरानी सोमनाथ यात्राओं की तस्वीरें साझा करते हुए भावुक यादें ताजा कीं। उन्होंने बताया कि कैसे साल 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की मौजूदगी में मंदिर के पुनरुद्धार के 50 साल पूरे होने का उत्सव मनाया गया था।
पीएम मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे भी अपनी सोमनाथ यात्रा की तस्वीरों को #SomnathSwabhimanParv के साथ साझा करें और उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दें जिन्होंने अपनी आस्था के लिए सर्वोच्च बलिदान दिए।

