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जाँच में सही निकला ‘गुरुओं’ के अपमान का आतिशी का वीडियो, जानें- कैसे पंजाब और दिल्ली सरकार के बीच जंग का मैदान बनीं FSL लैब्स

यह पूरा विवाद अब केवल एक वीडियो या फॉरेंसिक रिपोर्ट तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह सीधे तौर पर AAP और BJP की राजनीति लड़ाई में बदल गया है। दोनों दलों के अपने-अपने दावे और अपनी-अपनी रिपोर्ट में हैं, पंजाब सरकार की कार्रवाई पर कई सवाल हैं जिनका जवाब पंजाब के विभागों को देना है।

दिल्ली विधानसभा से जुड़े एक विवादित वीडियो की फोरेंसिक जाँच के बाद अब दिल्ली की राजनीति में नया मोड़ ले लिया है। जिस वीडियो को आम आदमी पार्टी (AAP) लगातार ‘डॉक्टर्ड’ बताती रही और जिस आधार पर FIR तक दर्ज कराई गई, वही वीडियो फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में पूरी तरह ठीक पाया गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि ऑडियो और वीडियो दोनों में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं हुई है।

FSL रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने AAP और नेता विपक्ष आतिशी पर सीधा हमला तेज कर दिया है। BJP का सवाल है कि जब वीडियो असली साबित हो चुका है, तो क्या आतिशी अपने विधानसभा बयान पर माफी माँगेंगी या अब भी इनकार की राजनीति जारी रहेगी।

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने क्या बताया?

दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार (17 जनवरी 2025) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर FSL रिपोर्ट की जानकारी दी। उन्होंने कहा, “रिपोर्ट में कहा गया है कि जो ट्रांसक्रिप्शन दिया गया था और आॉडियो-वीडियो में जो था, उसमें कोई किसी प्रकार की छेड़खानी नहीं है।”

विधानसभा की कार्यवाही की ट्रांसक्रिप्ट (फोटो साभार: News18)

गुप्ता ने कहा, “विपक्ष ने जाँच की माँग की थी और सत्तारूढ़ दल ने भी माँग पर मुहर लगाई थी और जाँच का फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था। जब यह वीडियो जाँच के लिए चली गई तो अचानक 9 जनवरी को खबर आई कि पंजाब सरकार ने उसकी जाँच भी करा ली, रिपोर्ट भी आ गई और FIR भी दर्ज करा ली। आज इन सबका दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। वीडियो और ऑडियो में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।”

कैसे शुरु हुआ यह विवाद?

इस मामले की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को हुई जब शाम 4 बजे के आस-पास दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही के दौरान सदन के अंदर पक्ष-विपक्ष के बीच प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा के लिए बहस हो रही थी। इसी बीच में BJP के नेताओं ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने सदन की कार्यवाही के दौरान गुरुओं का अपमान किया है।

इसके अगले यानी 7 जनवरी 2026 को दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने आतिशी का सदन के भीतर बोलते हुए एक वीडियो शेयर किया। कपिल मिश्रा ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “कल जब दिल्ली विधानसभा में हो रहा था गुरुओं का सम्मान , तब नेता विपक्ष आतिशी ने बहुत भद्दी और शर्मनाक भाषा का इस्तेमाल किया। खुद सुनिए… क्या ऐसे व्यक्ति को पवित्र सदन में रहने का अधिकार है ?”

इस वीडियो में आतिशी कथित तौर पर कह रही हैं, “आप कराइए ना चर्चा, कुत्तों का सम्मान करो, गुरुओं का सम्मान करो।” यह वीडियो दिल्ली BJP के X हैंडल समेत कई नेताओं द्वारा शेयर किया गया था।

आतिशी ने क्या कहा?

आतिशी ने इस वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए BJP पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने 7 जनवरी को रात में X पर एक लंबा पोस्ट लिख जवाब दिया। आतिशी ने लिखा, “बीजेपी ने गुरु तेग़ बहादुर जी के नाम को गलत तरीके से इस्तेमाल किया और गुरु साहब का अपमान किया।”

उन्होंने आगे कहा, “वीडियो में मैंने बीजेपी के प्रदूषण की चर्चा से बचने और उनके विधान सभा में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर हुए प्रोटेस्ट के बारे में कहा है. ‘तो आप कराइये ना चर्चा, क्यों सुबह से भाग रहें हैं? कह रहें हैं, कुत्तों का सम्मान करो! कुत्तों का सम्मान करो! अध्यक्ष महोदय इस पर आप चर्चा कराइए।’ लेकिन बीजेपी ने झूठा सब-टाइटल लगा कर गुरु तेग बहादुर जी का नाम उसमें डाला।”

विवाद के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब भेजा गया वीडियो

8 जनवरी को दिल्ली विधानसभा में इस पूरे विवाद ने निर्णायक मोड़ तब लिया, जब विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की माँग को स्वीकार करते हुए सदन की आधिकारिक ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को फॉरेंसिक साइंस लैब भेजने का आदेश दिया।

इसके बाद FSL ने मामले की गहन तकनीकी जाँच शुरू की। जाँच के दौरान वीडियो और ऑडियो दोनों की बारीकी से पड़ताल की गई, जिसमें सदन की कार्यवाही का शब्दशः ट्रांसक्रिप्शन, वर्बेटिम रिकॉर्ड और डिजिटल तकनीकी डेटा का आपस में मिलान किया गया ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि रिकॉर्डिंग में किसी तरह की छेड़छाड़ या एडिटिंग हुई है या नहीं।

पंजाब सरकार की फॉरेंसिक जाँच और कपिल मिश्रा पर FIR

9 जनवरी 2026 को पंजाब पुलिस ने एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए बताया कि जालंधर पुलिस कमिश्नरेट में दिल्ली विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष और विधायक आतिशी का एक ‘एडिटेड और छेड़छाड़ किया हुआ वीडियो’ सोशल मीडिया पर अपलोड और वायरल करने के मामले में FIR दर्ज की गई है। यह FIR इकबाल सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई है।

पंजाब पुलिस ने बताया, “मामले की जाँच वैज्ञानिक तरीके से की गई है और आतिशी के ऑडियो वाली वीडियो क्लिप कपिल मिश्रा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से डाउनलोड की गई थी और फॉरेंसिक जाँच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को भेजी गई थी।”

पंजाब पुलिस ने फॉरेंसिक रिपोर्ट को लेकर कहा, “फॉरेंसिक रिपोर्ट में यह सामने आया है कि सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रही वीडियो क्लिप में आतिशी ने अपने ऑडियो में ‘गुरु’ शब्द नहीं बोला है। इसके अलावा वीडियो में जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है ताकि कैप्शन में ऐसे शब्द डाले जा सकें जो आतिशी ने कभी नहीं बोले।” क्योंकि पंजाब में AAP की सरकार है तो शायद उन्हें पंजाब में केस करना मुफीद लगा होगा। हालाँकि, यह पूरा मामला दिल्ली की विधायक, दिल्ली के मंत्री और दिल्ली विधानसभा के भीतर का था।

कपिल मिश्रा का पलटवार

मंत्री कपिल मिश्रा ने इस FIR को लेकर पलटवार किया। मिश्रा ने X पर लिखा, “केजरीवाल जी , आपकी FIR और पुलिस का डर हमें डरा नहीं सकता दिल्ली विधानसभा के रिकॉर्ड में वीडियो है और सारी दुनिया ने वीडियो सुना है।”

मंत्री ने आगे लिखा, “उस दिन से आतिशी ने विधानसभा में आने की हिम्मत नहीं की जबकि विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें कई बार बुलाया पंजाब पुलिस पंजाब के अपराधों की जाँच छोड़कर आपके नेता विपक्ष द्वारा हुए अपराध पर पर्दा डालने का काम कर रहीं है आतिशी ने गुनाह किया लेकिन उन्हें बचाकर आप उससे भी बड़ा पाप कर रहें हैं।”

जालंधर की कोर्ट ने बिना कपिल मिश्रा को सुने दिया फैसला

15 जनवरी 2026 को जालंधर की एक अदालत ने कपिल मिश्रा से जुड़े फर्जी वीडियो मामले में कहा कि फॉरेंसिक जाँच में यह वीडियो एडिट और डॉक्टर्ड पाया गया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया है कि वे इस वीडियो को तुरंत हटाएँ। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि जिन लिंक और अकाउंट्स से यह वीडियो पोस्ट किया गया था, उन्हें भी हटाया जाए।

PTI द्वारा साझा की गई आदेश की कॉपी के मुताबिक, कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “वीडियो फाइल का विश्लेषण सीनियर कॉन्स्टेबल राकेश कुमार नंबर (सोशल मीडिया विशेषज्ञ) जो 2024 से टेक्निकल सेल में तैनात हैं, ने AI टूल ‘Gemini.ai’ का उपयोग करके किया है। जिससे पता चलता है कि वीडियो नकली और डिजिटल रूप से बदला हुआ है। इसके अलावा, जालंधर पुलिस कमिश्नर द्वारा मोहाली की राज्य फॉरेंसिक लैब को 8 जनवरी को एक पत्र भेजा गया है ताकि वीडियो फाइल में इस्तेमाल किए गए ऑडियो की फॉरेंसिक जाँच की जा सके। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट में बताया गया है कि जाँच और मेटाडेटा के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि ‘गुरु’ शब्द स्पीकर द्वारा नहीं बोला गया था।”

कोर्ट ने कहा, “आवेदक/अभियोजन पक्ष का स्पष्ट कहना है कि यदि इस वीडियो का आगे भी प्रसार हुआ, तो इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है और सांप्रदायिक तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है। मेटा प्लेटफॉर्म्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक, एक्स (X) और टेलीग्राम को निर्देश दिया जाता है कि वे ऊपर बताए गए विशेष URL से जुड़े सभी कंटेंट को हटाएँ। कथित आपत्तिजनक सामग्री को तुरंत हटाया जाए और किसी भी स्थिति में अदालत का आदेश मिलने के 24 घंटे के भीतर इसे हटाना अनिवार्य होगा।”

IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कपिल मिश्रा से जुड़े फर्जी वीडियो मामले में न तो कपिल मिश्रा को और न ही किसी अन्य व्यक्ति को इस केस में पक्षकार बनाया गया। पंजाब सरकार ने इस मामले में केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ही पक्षकार बनाया। पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि संबंधित वीडियो फर्जी है। अपने आदेश में अदालत ने यह दर्ज किया कि ‘आवेदक (जो इस मामले में खुद पंजाब सरकार है) का मानना है कि यह वीडियो एडिट और डॉक्टर्ड है’।

सुनवाई के दौरान अदालत में केवल पंजाब सरकार के वकील मौजूद थे। वीडियो बनाने या पोस्ट करने वाले किसी व्यक्ति की ओर से कोई पक्ष अदालत के सामने नहीं रखा गया। पंजाब सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को वीडियो हटाने का आदेश दिया।

जालंधर कोर्ट के आदेश पर शनिवार (17 जनवरी 2026) को विजेंद्र गुप्ता ने कहा, “यह कोई अंतिम आदेश नहीं है बल्कि अंतरिम आदेश है। यह आदेश पूरी तरह सिर्फ एक फॉरेंसिक रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे कोर्ट में चुनौती देने का मौका नहीं दिया गया है। आतिशी के पास जब राजनीतिक जवाब नहीं बना तो पंजाब सरकार ने दबाव में एजेंसियों को आगे किया और उन्हीं के दबाव में यह आदेश हासिल किया है।”

पंजाब के DGP और FSL विभाग को नोटिस

विजेंद्र गुप्ता ने बताया है कि दिल्ली विधानसभा द्वारा पंजाब के FSL विभाग को नोटिस जारी किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई, इस संबंध में विभाग से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है। FSL को अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए 22 जनवरी तक का समय दिया जा रहा है।”

दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने इसे लेकर पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP), जालंधर के पुलिस आयुक्त और पंजाब पुलिस के विशेष डीजीपी (साइबर सेल) को भी नोटिस भेजा है।

आतिशी के खिलाफ नोटिस जारी

दिल्ली विधानसभा में सिख गुरुओं को लेकर कथित अपमानजनक टिप्पणी के मामले में विशेषाधिकार समिति ने आतिशी से लिखित स्पष्टीकरण माँगा है। विधानसभा अध्यक्ष ने आतिशी को सदन में उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर दिया था लेकिन वह 8 जनवरी को भी सदन में नहीं आईं।

आतिशी की अनुपस्थिति और किसी तरह की सफाई न दिए जाने को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने यह मामला विशेषाधिकार समिति को भेज दिया। इसके बाद विशेषाधिकार समिति के सभापति ने आतिशी को निर्देश दिया है कि वे इस पूरे मामले पर अपना-अपना लिखित बयान 19 जनवरी 2026 तक जमा करें।

आगे की राह

यह पूरा विवाद अब केवल एक वीडियो या फॉरेंसिक रिपोर्ट तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह सीधे तौर पर AAP और BJP की राजनीति लड़ाई में बदल गया है। दोनों दलों के अपने-अपने दावे और अपनी-अपनी रिपोर्ट में हैं, पंजाब सरकार की कार्रवाई पर कई सवाल हैं जिनका जवाब पंजाब के विभागों को देना है और आने वाले दिनों में ये जवाब भी इस मामले में आगे की राह तय करेंगे। फिलहाल, दोनों पार्टियों में से कोई भी अपनी बात से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

BJP का आरोप है कि पंजाब सरकार की मशीनरी का इस्तेमाल दिल्ली की राजनीति को प्रभावित करने के लिए किया गया। यदि यह धारणा मजबूत होती है, तो इसका असर पंजाब में AAP की ‘ईमानदार और अलग राजनीति’ की छवि पर पड़ेगा। AAP के लिए चुनौती यह है कि वह एक तरफ अपने नेता दावे को सही साबित करे और दूसरी तरफ यह चुनौती भी है कि वह बताए कि सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग नहीं हुआ।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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