सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मदुरै जिले में थिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित सिकंदर बदुशा अवुलिया दरगाह को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (9 फरवरी 2026) को मद्रास हाईकोर्ट के अक्टूबर 2025 के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने नेल्लिथोप्पू इलाके में मुस्लिमों को रोजाना नमाज पढ़ने पर रोक लगाते हुए सिर्फ रमजान और बकरीद के मौकों पर ही नमाज की इजाजत दी थी। साथ ही दरगाह परिसर में जानवरों की कुर्बानी पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई थी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की बेंच ने दरगाह के एक श्रद्धालु एम. इमाम हुसैन की अपील खारिज कर दी। अपील में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी, भले ही हाईकोर्ट ने मान लिया था कि 33 सेंट का नेल्लिथोप्पू इलाका दरगाह की संपत्ति है। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को ‘संतुलित’ करार देते हुए कहा कि इसमें हस्तक्षेप करने की कोई वजह नहीं है।
The Supreme Court has declined to interfere with the Madras High Court’s October 2025 judgment restricting religious practices at the Nellithoppu area atop the Thirupparankundram hills in Madurai district, Tamil Nadu. Upholding the High Court’s ruling, the apex court held that… pic.twitter.com/IBEpuZ47Z9
— ANI (@ANI) February 9, 2026
यह विवाद थिरुप्परनकुंद्रम मुरुगन मंदिर की पहाड़ी पर दरगाह के कब्जे से जुड़ा है। प्राचीन हिंदू मंदिर की इस पहाड़ी पर दरगाह का निर्माण सदियों पुराना है, लेकिन हिंदू संगठनों का दावा है कि पूरी पहाड़ी मंदिर की संपत्ति है। 1923 और 1931 के कोर्ट फैसलों में भी मस्जिद स्थल को छोड़कर बाकी हिस्सा मंदिर का बताया गया था।
बता दें कि हाल के वर्षों में मुस्लिम पक्ष ने पहाड़ी पर रोज नमाज, कुर्बानी और नाम बदलने की कोशिशें कीं, जिसका हिंदू संगठनों ने विरोध किया। कार्तिगई दीपम जैसे हिंदू उत्सवों में भी विवाद हुआ, जब DMK सरकार पर हिंदू अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगा।
मद्रास हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2025 में संतुलन बनाते हुए मुस्लिमों को सीमित अधिकार दिए, लेकिन रोजाना धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाई। हाईकोर्ट ने पशु बलि को भी प्रतिबंधित किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हाईकोर्ट का आदेश संतुलित है और इसमें बदलाव की जरूरत नहीं। मुस्लिम सिर्फ रमजान और बकरीद पर ही दरगाह में नमाज पढ़ सकते हैं, रोजाना नहीं। दरगाह परिसर में जानवरों की कुर्बानी पर रोक बरकरार रहेगी।”
यह फैसला दोनों समुदायों के बीच सदियों पुराने विवाद में संतुलन बनाने की कोशिश माना जा रहा है। हालाँकि ये साफ तौर पर हिंदू संगठनों की जीत है। वहीं, इस फैसले से मुस्लिम पक्षों में निराशा फैल गई है।

