शादी का वादा कर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में कुंडली न मिलने का हवाला देकर विवाह से इनकार करना कानून की नजर में गंभीर अपराध होगा। दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी शख्स ने पहले शादी का भरोसा दिलाकर संबंध बनाए हों और बाद में ‘कुंडली न मिलने’ का बहाना बनाकर मुकर जाए तो यह BNS की धारा 69 के तहत धोखे से यौन संबंध बनाने या झूठे विवाह-प्रलोभन का मामला माना जा सकता है।
बार ऐंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 फरवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णाकांत शर्मा की बेंच ने इस मामले में फैसला दिया है। अदालत एक ऐसे आरोपित की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिस पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत बलात्कार का मामला दर्ज है। साथ ही उस पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 भी लगाई गई है। अदालत ने आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी।
क्या है मामला?
27 साल की एक महिला ने 3 जनवरी 2026 को दिल्ली के केशव पुरम थाने में शिकायत दर्ज कराई कि एक युवक ने शादी का झूठा वादा करके कई सालों तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में कुंडली न मिलने का बहाना बनाकर शादी से इनकार कर दिया।
महिला का कहना है कि वह आरोपित और उसके परिवार को 2018 से जानती थी। आरोपी ने जुलाई 2019 में पहली बार अपनी कार में उससे शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद उसके घर, द गोल्डन कीज होटल (अशोक विहार) और अन्य जगहों पर भी संबंध बनाए गए। महिला के अनुसार आखिरी बार 12 सितंबर 2025 को दिल्ली के शक्ति नगर में संबंध बनाए गए।
महिला ने पहले भी लिखित शिकायत दी थी लेकिन आरोपित और उसके परिवार ने शादी का भरोसा दिलाया, जिस पर उसने शिकायत वापस ले ली। बाद में जब शादी नहीं हुई तो उसने फिर से शिकायत दी। इसके बाद आईपीसी की धारा 376 (रेप) और बीएनएस की धारा 69 के तहत FIR दर्ज की गई।
पीड़िता ने जाँच के दौरान दावा किया कि आरोपित ने उसकी तस्वीरें लीक करने की धमकी दी थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता ने बताया कि आरोपित उसे बार-बार शादी का भरोसा देता था और इसी भरोसे पर कई बार शारीरिक संबंध बने। आरोपित ने उसे अपने परिवार और रिश्तेदारों से होने वाली पत्नी के रूप में मिलवाया गया था और वह पारिवारिक कार्यक्रमों में भी शामिल हुई।
पीड़िता के अनुसार, मई 2025 से आवेदक उससे दूर होने लगा और जून 2025 में कुंडली न मिलने का कारण बताकर शादी से मना कर दिया। बाद में उसने फिर शादी का भरोसा दिया और सितंबर 2025 तक कई बार शारीरिक संबंध बनाए। उसने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मौकों पर उस पर दबाव डाला गया और फोटो लीक करने की धमकी दी गई।
कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि पहले शादी का आश्वासन देने और बाद में कुंडली न मिलने का आधार लेकर विवाह से इनकार करना प्रथम दृष्टया (prima facie) इस बात पर प्रश्न खड़ा करता है कि आरोपित द्वारा किया गया वादा कितना ईमानदार था।
जस्टिस शर्मा ने कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से यह संकेत मिलता है कि बार-बार पीड़िता को यह भरोसा दिलाया गया कि उनकी शादी में कोई भी बाधा नहीं है। यहाँ तक कि आरोपित ने कुंडली मिलाए जाने को लेकर में भी आश्वासन दिया और कहा कि दोनों की कुंडलियाँ पहले ही मिल चुकी हैं।”
जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में लिखा है कि आरोपित ने चैट में शादी करने की बात कही थी। शर्मा ने लिखा, “कोर्ट के ध्यान में यह भी लाया गया है कि 14 सितंबर 2023 को एक चेट में आरोपित ने लिखा था, ‘kal hi shaadi kar rahe hain hum’ (कल ही शादी कर रहे हैं हम)। पहली नजर में इससे साफ पता चलता है कि कुंडली मिलान का मुद्दा पहले ही सुलझा लिया गया था।”

न्यायालय ने उन अन्य चैट्स के स्क्रीनशॉट भी देखे हैं जिन्हें पीड़िता ने जाँच अधिकारी को दिया था। ये चैट्स 2022 से 2025 के बीच की हैं जिनमें आवेदक ने पीड़िता को आश्वासन दिया था कि कुंडली मिलान का मुद्दा सुलझा लिया जाएगा और उनकी शादी में कोई बाधा नहीं है।
कोर्ट ने कहा, “इन्हीं आश्वासनों के आधार पर दोनों के बीच एक अवधि तक शारीरिक संबंध बनाए गए। बाद में आवेदक ने कुंडली न मिलने का कारण बताकर शादी से इंकार कर दिया। इस तरह का व्यवहार पहली नजर में यह सवाल खड़ा करता है कि आवेदक द्वारा किया गया शादी का वादा कितना सच्चा और वास्तविक था। ऐसा आचरण भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकता है। यह धारा विशेष रूप से उन मामलों से संबंधित है, जहाँ शादी का झूठा वादा या धोखे से शारीरिक संबंध बनाए जाते हैं।”
कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
कोर्ट ने माना कि आरोपित का यह कहना कि शादी केवल कुंडली न मिलने के कारण नहीं हो सकी उसके अपने ही व्यवहार और कई वर्षों तक दिए गए आश्वासनों से मेल नहीं खाता। कोर्ट ने कहा कि अगर कुंडली मिलान का मुद्दा आरोपित और उसके परिवार के लिए इतना महत्वपूर्ण था तो इसे शारीरिक संबंध बनाने से पहले ही इस विषय को स्पष्ट रूप से सुलझा लिया जाना चाहिए था।
कोर्ट ने आरोपित की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, “आरोपों की प्रकृति, अब तक की जाँच में मिली चीजें और इस तथ्य को देखते हुए कि मामले में अभी चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है कोर्ट जमानत नहीं देगा।”


