हिंदू देवी-देवताओं पर विवादित टिप्पणी और यौन शोषण के आरोपित तमिल गीतकार वैरामुथु को निजी ट्रस्ट से मिला ज्ञानपीठ सम्मान

तमिल गीतकार और लेखक वैरामुथु (Vairamuthu) को ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया है। यह पुरस्कार भारतीय ज्ञानपीठ ट्रस्ट द्वारा दिया जाता है जो 1944 में स्थापित एक निजी साहित्यिक संस्था है और भारतीय साहित्य में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लेखकों को सम्मानित करती है।

इस घोषणा के साथ ही दो दशकों से अधिक समय बाद पहली बार किसी तमिल साहित्यकार को यह सम्मान मिला है। इससे पहले तमिल साहित्य जगत से दिवंगत लेखकों अखिलन और जयकांतन को यह पुरस्कार दिया जा चुका है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार (14 मार्च 2026) को वैरामुथु को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तमिल साहित्य को ज्ञानपीठ सम्मान के लिए 24 वर्षों तक इंतजार करना पड़ा। स्टालिन ने बताया कि वह उसी दिन वैरामुथु से मिले थे और जब पुरस्कार की खबर आई तब वे उनसे बातचीत कर रहे थे।

पुरस्कार की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए वैरामुथु ने कहा कि ज्ञानपीठ साहित्य में ‘सबसे महान से भी बड़ा सम्मान’ है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली बार तमिल कविता को यह पुरस्कार मिला है। उन्होंने कहा, “मैं यह पुरस्कार इस मिट्टी और लोगों को समर्पित करता हूँ।”

हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणियों को लेकर विवादों में रहे वैरामुथु

वैरामुथु कई बार हिंदू देवी-देवताओं पर की गई टिप्पणियों को लेकर विवादों में भी रहे हैं। 2018 में उनके खिलाफ पुलिस मामला दर्ज किया गया था, जब उन्होंने वैष्णव परंपरा की संत-कवयित्री अंदाल के बारे में विवादित टिप्पणी की थी।

उन्होंने अंदाल को ‘देवदासी’ बताया था, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए और कहा कि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। हिंदू कार्यकर्ताओं और धार्मिक नेताओं ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किए। इनमें सदागोपा रामानुजा (मनवाला मामुनी मठ) जैसे धर्मगुरुओं ने उनसे सार्वजनिक माफी की माँग की थी।

2025 में भी वैरामुथु एक और विवाद में घिर गए थे। कंबर कजगम द्वारा चेन्नई में आयोजित एक साहित्यिक कार्यक्रम में उन्होंने भगवान राम के बारे में टिप्पणी की थी। उन्होंने उस प्रसंग का उल्लेख किया जिसमें राम वानरराज बाली का वध करते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि कवि कंबन ने राम को सीता से बिछड़ने के कारण ‘मानसिक संतुलन खो बैठा’ हुआ दिखाया है।

इन टिप्पणियों की नेताओं और हिंदू संगठनों ने कड़ी आलोचना की। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने इन टिप्पणियों को ‘हिंदू विरोधी’ बताते हुए इनकी निंदा की और सवाल उठाया कि सत्तारूढ़ DMK ने इनसे खुद को अलग क्यों नहीं किया।

यौन उत्पीड़न के कई आरोप भी लगे

वैरामुथु पर यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप भी लग चुके हैं, जो 2018 में भारत के #MeToo movement के दौरान सामने आए थे। गायिका और डबिंग आर्टिस्ट चिन्मयी श्रीपदा ने सार्वजनिक रूप से उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया कि 2000 से 2006 के बीच कई घटनाएं हुईं।

चिन्मयी के अनुसार, स्विट्जरलैंड के लूसर्न शहर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वैरामुथु ने उन्हें अपने होटल के कमरे में आने के लिए कहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मना कर दिया तो वैरामुथु ने उनकी करियर खत्म करने की धमकी दी। चिन्मयी के आरोप के बाद कई अन्य महिलाओं ने भी इसी तरह के आरोप लगाए।

अमेरिका में रहने वाली संगीतकार सिंधुजा राजाराम ने मीडिया को बताया कि जब वह 18 वर्ष की थीं तो हॉस्टल कर्फ्यू से जुड़ी समस्या को लेकर उन्होंने वैरामुथु से संपर्क किया था। बाद में उन्हें एक स्टूडियो मीटिंग के लिए बुलाया गया और उनके मना करने के बावजूद वैरामुथु द्वारा उन्हें बार-बार निजी कॉल करते थे।

लाइट म्यूजिक गायिका भुवना शेषन ने भी वर्ष 2023 में आरोप लगाया कि 1990 के दशक के अंत में गीतकार वैरामुथु ने उन्हें एक कार्यक्रम के लिए मलेशिया साथ चलने का दबाव डाला था। जब उन्होंने मना किया तो उन्होंने कहा कि उनके पास उनका करियर बनाने या बिगाड़ने की ताकत है। इसके बाद उनके कई तय कार्यक्रम रद्द होने लगे।

हाल ही में गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने अभिनेता से नेता बने कमल हासन द्वारा वैरामुथु की तारीफ करने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। चिन्मयी ने कहा कि सिनेमा और राजनीति में ताकत रखने वाले पुरुष उन महिलाओं की बात अनसुनी कर रहे हैं, जिन्होंने गीतकार पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा, “अंत में पुरुष हमेशा अपने ब्रो, अंकल, दोस्तों और परिचितों का साथ देते हैं, चाहे कई महिलाएँ इससे आहत ही क्यों न हुई हों।”