नोएडा में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस का एक्शन लगातार जारी है। इसी कड़ी में पुलिस ने दो और आरोपितों हिमांशु ठाकुर और सत्यम वर्मा को गिरफ्तार किया है। जाँच में सामने आया है कि दोनों की भूमिका प्रदर्शन के दौरान भीड़ को भड़काने और हिंसा फैलाने में थी।
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस के आधार पर इनकी गिरफ्तारी की है और अब अन्य संदिग्धों की तलाश भी तेज कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आंदोलन को भड़काने के लिए पश्चिम बंगाल से भी युवकों का समूह आया था।
मार्च के अंतिम सप्ताह में पश्चिम बंगाल में बैठक हुई और वहाँ से मुख्य साजिशकर्ता आदित्य के पास तीन महिलाओं और एक युवक को भेजा गया था।
मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद से सीधा कनेक्शन
पुलिस जाँच में खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपित मुख्य साजिशकर्ता आदित्य आनंद के संपर्क में थे। हिमांशु ठाकुर घटना वाले दिन नोएडा में मौजूद था और लगातार आदित्य के संपर्क में था। इससे पहले पुलिस आदित्य आनंद को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर चुकी है।
पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य को इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। उसके खिलाफ पहले से ही गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है और फिलहाल उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
साजिश और नेटवर्क की जाँच तेज
जाँच एजेंसियों का मानना है कि यह हिंसा केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक सुनियोजित साजिश हो सकती है। पुलिस को आदित्य के ठिकाने से कुछ दस्तावेज और नोट्स मिले हैं, जिनमें श्रमिक आंदोलन को उग्र बनाने की रणनीति के संकेत हैं। STF अब इस मामले में फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट के स्रोतों की जाँच कर रही है।

