‘भारत को समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान जरूरी’: 50000 वर्ग फुट में फैले संस्कृत भारती के हेडक्वार्टर ‘प्रणवह’ का मोहन भागवत ने किया उद्घाटन, जानिए क्या है इसका उद्देश्य

दिल्ली में अक्षय तृतीया के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने संस्कृत भारती के नए ‘प्रणव:’ कार्यालय का उद्घाटन किया। इस दौरान वैदिक परंपरा के अनुसार गौपूजन और शतचंडी यज्ञ का आयोजन किया गया। यह कार्यालय संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित है।

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने ‘प्रणव’ को सृष्टि का मूल नाद बताते हुए कहा कि इस नाम से शुरू हुआ काम पूर्णता की ओर बढ़ेगा। उन्होंने संस्कृत को भारत का प्राण बताते हुए कहा कि यह केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और जीवन-दृष्टि की आधारशिला है।

भागवत ने कहा कि भारत को सही मायने में समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान जरूरी है, क्योंकि इसमें हमारी ज्ञान परंपरा, दर्शन और जीवन मूल्यों का भंडार समाहित है। उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भारतीय भाषाओं को जोड़ने वाली कड़ी है और इसके माध्यम से अन्य भाषाओं को भी आसानी से सीखा जा सकता है।

संभाषण पद्धति से आसान बनेगी संस्कृत

संस्कृत सीखने के तरीके पर जोर देते हुए मोहन भागवत ने ‘संभाषण पद्धति’ को सबसे सरल और प्रभावी तरीका बताया। उन्होंने कहा कि अगर संस्कृत को बोलचाल में लाया जाए तो इसे आसानी से सीखा जा सकता है। उन्होंने संस्कृत को लोकभाषा बनाने की अपील की और संस्कृत संभाषण शिविर इस दिशा में काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि किसी भी कार्य में निरंतरता, धैर्य और उद्देश्य की स्पष्ट समझ जरूरी होती है।

‘प्रणव’ की खासियत

संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संगठन मंत्री जयप्रकाश गौतम ने बताया कि नया ‘प्रणव’ भवन लगभग 50,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय परंपरा का समावेश किया गया है।

इस केंद्र का उद्देश्य देश की 10 प्रतिशत आबादी तक संस्कृत पहुँचाना और 12 भाषाओं के माध्यम से पत्राचार द्वारा शिक्षण को बढ़ावा देना है। यहाँ वास्तु, शिल्प, वनस्पति विज्ञान और धर्मशास्त्र जैसे विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा।

देश-विदेश से पहुंचे विद्वान

समारोह में देशभर से आए विद्वानों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, सांसद अनुराग ठाकुर समेत कई प्रमुख राजनेता भी मौजूद रहे। इसके अलावा RSS के पदाधिकारी, संस्कृत जगत के विद्वान और देश-विदेश से आए संस्कृत प्रेमी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।