गंगा नदी में माँस की हड्डियाँ फेंकने से हिंदुओं की भावनाएँ होंगी आहत: इलाहाबाद HC ने माना, वाराणसी में इफ्तार पार्टी करने वालों में से 5 मुस्लिमों को दी जमानत

पिछले दिनों वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी कर माँस खाने और उसके बची हुई हड्डियाँ नदी में फेंकने का मामला काफी चर्चा में रहा था। अब इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि गंगा नदी में माँस के टुकड़े फेंकने से हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हो सकती हैं।

यह मामला मार्च 2026 का है, जब रमजान के दौरान कुछ मुस्लिम लोगों ने वाराणसी में गंगा नदी पर नाव में इफ्तार पार्टी की थी। इन लोगों ने चिकन बिरयानी खाई थी और बची हुई हड्डियाँ गंगा नदी में फेंक दी थी। इस मामले का वीडियो भी सामने आया था, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने 14 में से 5 मुस्लिम आरोपितों की जमानत मंजूर कर दी है। जमानत मंजूर करते हुए जस्टिस ने यह टिप्पणी की। उन्होनें जमानत देते हुए कहा कि इन लोगों को अपनी गलती का खेद और इनकी परिवार वालों को भी समाज में फैली नफरत को लेकर खेद है।

अदालत ने कहा कि वीडियो में होने से इन पाँच लोगों ने मना नहीं किया और खेद जाहिर करने से पता चलता है कि ये लोग वास्तव में जमानता के हकदार हैं, इसीलिए इन लोगों का आपराधिक इतिहास न होने के चलते इन्हें जमानत दे दी गई।