‘गंभीर अपराध है’: वाराणसी कोर्ट ने गंगा नदी में मांस खाने वाले 14 मुस्लिमों को नहीं दी जमानत

वाराणसी में गंगा नदी के बीचोबीच नाव में इफ्तार पार्टी के नाम पर मांस खाने वाले 14 मुस्लिमों की जमानत याचिका खारिज कर दी गई है। वाराणसी कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर अपराध है, इसीलिए गैर-जमानती है।

वहीं अभियोजक पक्ष ने कोर्ट में कहा कि आरोपितों की ओर से लगातार जान से मारने की धमकियाँ दी जा रही है। इस मामले में भी नई FIR दर्ज की गई है।

कोर्ट में सुनवाई

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, वाराणसी कोर्ट में सोमवार (23 मार्च 2026) को आरोपितों की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान अभियुक्तों के वकील ने दलील दी कि वे कानून का पालन करने वाले लोग हैं औऱ उन्हें व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते झूठा फँसाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास से कोई मांसाहारी भोजन बरामद नहीं किया गया है और वायरल वीडियो में भी मांस नहीं दिखाई दे रहा है।

दलील का विरोध करते हुए सहायक अभियोजक दीपक कुमार ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और इनमें 10 साल तक की कैद की सजा हो सकती है। उन्होंने तर्क दिया कि चूँकि जाँच अभी जारी है, इसलिए इस स्तर पर अभियुक्तों की दलील को सही नहीं ठहराया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपितों के सहयोगियों की ओर से शिकायतकर्ता को जान से मारने की धमकी दी जा रही है, जिस पर नई FIR की गई है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में वाराणसी में गंगा नदी से एक वीडियो सामने आई थी, जिसमें रमजान के दौरान कुछ मुस्लिम लोग नाव पर सवार होकर इफ्तार पार्टी के नाम पर मांस खा रहे थे। मामले में बीजेपी युवा मोर्चा प्रयागराज के अध्यक्ष रजत जायसवाल ने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने मामले पर संज्ञान लेते हुए 14 मुस्लिमों को गिरफ्तार किया।

गिरफ्तार किए गए लोगों में आजादी अली, आमिर कैकी, दानिश सैफी, मोहम्मद अहमद, नेहाल अफरीदी, महफूज आलम, मोहम्मद अनस, मोहम्मद अव्वल, मोहम्मद तहसीम, मोहम्मद अहमद उर्फ राजा, मोहम्मद नूर इस्माइल, मोहम्मद तौसीफ अहमद, मोहम्मद फैजान और मोहम्मद समीर शामिल हैं।

पुलिस ने इन सभी पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की। FIR में कहा गया कि इन लोगों ने गंगा नदी में नाव पर चिकन बिरयानी खाई और बची हुई हड्डियों को गंगा नदीं में फेंक दिया। इस मामले के बाद खूब विवाद हुआ था।