उत्तर प्रदेश के लखनऊ के मलिहाबाद के कांसमंडी किले (कसमंडी कलां) को लेकर चल रहा आंदोलन तेज हो गया है। लाखन आर्मी ने इस मुद्दे को संसद में उठाने की माँग को लेकर पासी समाज से जुड़े समाजवादी पार्टी के सांसदों से समर्थन जुटाने का अभियान शुरू किया, लेकिन सहयोग नहीं मिला, इस पर संगठन ने नाराजगी जाहिर की है।
सोमवार (1 जून 2026) को लाखन आर्मी चीफ सूरज पासी के नेतृत्व में लाखन आर्मी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मोहनलालगंज सांसद आरके चौधरी, अयोध्या सांसद अवधेश पासी और कौशांबी सांसद पुष्पेंद्र सरोज से मिलने पहुँचे। संगठन का उद्देश्य कांसमंडी विवाद को संसद में उठाने के लिए जनप्रतिनिधियों का समर्थन जुटाना था।
लखनऊ, यूपी: मलिहाबाद के पासी किले को लेकर विवाद को लेकर लाखन आर्मी के पदाधिकारी सपा सांसद आर.के. चौधरी को ज्ञापन देने पहुंचे। ज्ञापन सौंपने के दौरान लाखन आर्मी के पदाधिकारियों और सांसद के बीच बहस भी हुई। pic.twitter.com/kCCNA6tZdH
— IANS Hindi (@IANSKhabar) June 1, 2026
हालाँकि लाखन आर्मी का आरोप है कि सांसद न तो कार्यालय में मिले और न आवास पर, जबकि जिनसे बातचीत हुई वहाँ भी संगठन को स्पष्ट समर्थन नहीं मिला। इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई। अवधेश पासी से मुलाकात न होने पर कार्यकर्ताओं ने अपना ज्ञापन जला दिया और विरोध दर्ज कराया।
कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे सांसद को दोबारा संसद नहीं भेजा जाएगा। वहीं मीडिया से बातचीत में सांसद अवधेश पासी ने कहा था कि उन्हें इस मुद्दे की जानकारी ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP जानबूझकर इस विवाद को हवा दे रही है। अवधेश पासी ने कहा कि पासी समाज के भीतर फूट डालने की कोशिश की जा रही है।
दूसरी तरफ मोहनलालगंज सांसद आरके चौधरी से मुलाकात के बाद सूरज पासी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान महाराजा कंस पासी का नाम तक नहीं लिया गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समाज के प्रतिनिधि ही अपने पूर्वजों और समाज के मुद्दों पर खुलकर नहीं बोलेंगे तो समाज को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
हमारी लड़ाई सम्मान की, रुकने वाले नहीं: सूरज पासी
सूरज पासी ने कहा कि लाखन आर्मी का आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि अपने इतिहास, पहचान और सम्मान के लिए है। उन्होंने कहा कि संगठन हर उस जनप्रतिनिधि के पास जाएगा, जिसे पासी समाज ने समर्थन देकर आगे बढ़ाया है और उनसे समाज के मुद्दों पर जवाब माँगा जाएगा।
उन्होंने कहा, “हम रुकने और झुकने वाले नहीं हैं। यदि हमने कहीं से चोट खाई है तो दूसरी जगह जाएँगे। वहाँ लड़ाई लड़ेंगे। हम आम जनव्यापी आंदोलन बनाने का काम करेंगे। अगर संवैधानिक पद पर बैठने वाले लोग हमारी आवाज नहीं सुनेंगे तो हमारी आवाज पूरा सनातन बनेगा, पासी समाज बनेगा। वह इसे यदि सदन में नहीं उठाते तो धीरे धीरे हम इसे कोर्ट में लेकर जाएँगे।”
लखनऊ, यूपी: लाखन आर्मी चीफ सूरज पासी ने कहा, "मैं ज्ञापन देने आया था। सांसद पासी राजा का नाम नहीं ले पा रहे तो वह हमारी आवाज़ क्या ही बनेंगे.." pic.twitter.com/Cr5mJrCzGN
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सूरज पासी ने आगे कहा, “मैं ज्ञापन देने आया था। सांसद पासी राजा का नाम नहीं ले पा रहे तो वह हमारी आवाज क्या ही बनेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि समर्थन मिले या न मिले, लाखन आर्मी महाराजा कंस पासी के सम्मान और कांसमंडी मुद्दे को लेकर अपना आंदोलन जारी रखेगी।
संगठन का मानना है कि यह केवल एक स्थान का विवाद नहीं, बल्कि समाज की ऐतिहासिक पहचान और स्वाभिमान से जुड़ा विषय है। इसी कारण लाखन आर्मी इसे जनआंदोलन का रूप देने की तैयारी में जुटी हुई है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की जड़ें मलिहाबाद के कांसमंडी क्षेत्र में स्थित एक विशाल, प्राचीन और ऊँचे टीलेनुमा परिसर से जुड़ी हैं। लाखन आर्मी, पासी समाज और विभिन्न हिंदू संगठनों का दृढ़ दावा है कि वर्तमान समय में जिस परिसर को मुस्लिम पक्ष द्वारा मस्जिद, मजार या पारंपरिक कब्रिस्तान बताया जा रहा है, वह वास्तव में 11वीं शताब्दी के महान चक्रवर्ती राजपासी शासक राजा कंस का ऐतिहासिक अजेय किला है।
पासी समाज का आरोप है कि इस किले के मूल ऐतिहासिक स्वरूप को ‘जमीन जिहाद’ के माध्यम से नष्ट किया गया है, इसके भीतर स्थित प्राचीन महादेव (शिव) मंदिर को दबाया गया है और परिसर के भीतर से बाहर नई कब्रें तथा उर्दू के शिलापट लगाकर इस पूरी विरासत का इस्लामीकरण करने का प्रयास किया जा रहा है।

