उत्तर प्रदेश के संभल में बुधवार (3 जून 2026) को एक बड़ा इतिहास पलटने जा रहा है। साल 1978 के सांप्रदायिक दंगे में अपना सब कुछ गंवाकर दिल्ली पलायन कर चुके पीड़ित रस्तोगी परिवार को योगी सरकार दोबारा संभल में बसाने जा रही है। प्रशासन इस परिवार को अवैध कब्रिस्तान के कब्जे से मुक्त कराई गई 100 वर्ग मीटर सरकारी जमीन का पट्टा सौंपेगा।
दंगे में हुई थी रामशरण की बेरहमी से हत्या
यह दर्दनाक कहानी 29 मार्च 1978 की है, जब संभल में भयंकर सांप्रदायिक दंगा भड़का था। दंगाइयों की भीड़ ने पुलिस चौकी से महज 50 मीटर दूर स्थित दुकान से रामशरण दास रस्तोगी को उठा लिया था। दंगाइयों ने उनकी टुकड़े-टुकड़े करके नृशंस हत्या कर दी।
इसके बाद उनकी दुकान लूटकर आग लगा दी गई। इतना ही नहीं, उनके शव को तराजू-बांट से बाँधकर पास के एक कुएं में फेंक दिया गया था। तीन दिन बाद जब शव मिला, तो उस पर चाकू और कुल्हाड़ी के गहरे घाव थे। इस खौफनाक मंजर से डरकर पूरा परिवार संभल छोड़कर दिल्ली में बस गया था।
अवैध कब्रिस्तान पर चला बुलडोजर
पीड़ित परिवार के पोते कपिल रस्तोगी ने पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर न्याय की गुहार लगाई थी। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप संभल प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की। शेर खा सराय (आलम सराय देहात) इलाके में तीन बीघा सरकारी जमीन पर ‘टीले वाली मस्जिद‘ के नाम पर अवैध रूप से कब्रिस्तान बना लिया गया था।
तहसीलदार न्यायालय के आदेश पर पुलिस प्रशासन ने अगस्त 2025 में बुलडोजर चलाकर इस जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया था। अब इसी जमीन का 100 वर्ग मीटर (लगभग 100 गज) का हिस्सा पीड़ित परिवार को दिया जा रहा है।
कल भव्य कार्यक्रम में मिलेगा पट्टा
बुधवार (3 जून) को मुरादाबाद कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह, डीएम अंकित खंडेलवाल, एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी हरेंद्र सिंह ‘रिंकू’ पीड़ित परिवार को इस जमीन के पट्टे का प्रमाण पत्र सौंपेंगे। इससे पहले विधि-विधान से भूमि पूजन और हवन किया जाएगा। कार्यक्रम की तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं। नगर पालिका की टीमें सफाई कार्य में जुटी हैं।
स्मारक और चौराहे के नाम की माँग
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से एक और भावुक अपील की है। पोते कपिल रस्तोगी ने माँग की है कि जिस कुएँ में उनके दादा का शव फेंका गया था, वहाँ उनकी एक प्रतिमा लगाई जाए और उसे स्मारक का रूप दिया जाए। इसके साथ ही उन्होंने उस चौराहे का नाम भी ‘स्व रामशरण दास चौराहा’ रखने की माँग सरकार के सामने उठाई है।

