यह मामला मार्च 2018 में 21 वर्षीय बीकॉम छात्र आयुष नौटियाल के अपहरण और हत्या से जुड़ा है। आयुष का लगभग डिकंपोज हो चुका शव दिल्ली के द्वारका सेक्टर-13 स्थित एक नाले में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि आयुष की हत्या किसी हथौड़े जैसी वस्तु से की गई थी। आरोपित और पीड़ित एक-दूसरे को जानते थे। दोनों को आयुष के लापता होने से एक दिन पहले घटना स्थल के पास स्थित एक मैकडॉनल्ड्स आउटलेट में साथ घूमते हुए भी देखा गया था।
अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों, तथ्यों और दलीलों की जाँच के बाद अदालत ने कहा कि अभियोजन ने इश्तियाक अली के खिलाफ लगाए गए तीनों आरोप साबित कर दिए हैं। अदालत ने माना कि अली ने आयुष का अपहरण किया था और उसके पिता से 50 लाख रुपए की फिरौती माँगी थी। इतना ही नहीं, आयुष की हत्या करने के बाद भी आरोपित उसके पिता को यह विश्वास दिलाता रहा कि उनका बेटा जिंदा है और फिरौती की रकम मिलने पर उसे छोड़ दिया जाएगा।
अदालत ने अपने फैसले में कहा, “घटनास्थल से लिए गए खून के नमूनों में मृतक का DNA मिला है। मृतक के लैपटॉप के जले हुए अवशेष आरोपित की निशानदेही पर बरामद किए गए। आरोपित के कपड़े भी उसकी निशानदेही पर बरामद हुए, जिनमें मृतक के DNA से मेल खाने वाला DNA पाया गया। यह तथ्य आरोपित के खिलाफ IPC की धारा 302 के तहत हत्या के आरोप को साबित करने के लिए पर्याप्त है।”
अदालत ने आगे कहा, “मृतक की ऑल्टो कार (नंबर DL-2CAL-2553) से लिए गए खून के नमूनों में भी मृतक का DNA पाया गया। इसी कार का इस्तेमाल शव को ठिकाने लगाने के लिए किया गया था और यह भी आरोपित की निशानदेही पर बरामद की गई।”
ऑपइंडिया के पास मौजूद कोर्ट के 30 मई 2026 के फैसले के मुताबिक, “अभियोजन पक्ष ने साबित कर दिया है कि आरोपित ने वही अपराध किए हैं, जिनके लिए उस पर आरोप तय किए गए थे, यानी IPC की धारा 364A, 302 और 201।”
बचाव पक्ष ने अभियोजन के मामले का विरोध करते हुए पुलिस जाँच में खामियों का आरोप लगाया। हालाँकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन द्वारा पेश किए गए सबूत आरोपी के दोष को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं।
अदालत ने कहा, “जाँच अधिकारियों के बेहतरीन प्रयासों के बाद कभी-कभी जाँच में कुछ छोटी-मोटी खामियाँ रह सकती हैं। लेकिन केवल जाँच में कुछ कमियों के आधार पर किसी आरोपित को कानून से बचने नहीं दिया जा सकता। यह स्थापित कानून है कि हर त्रुटिपूर्ण जाँच या सबूतों में कमी अपने आप में अभियोजन के पूरे मामले को खत्म नहीं कर देती यदि बाकी सबूत इन मजबूत हों। यदि जाँच में मामूली कमियाँ हों तब भी आरोपित को बरी करने का आधार नहीं बन सकतीं, जब उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हों।”
क्या है पूरा मामला
दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज में पढ़ने वाला आयुष नौटियाल 22 मार्च 2018 को अपने घर से निकला था लेकिन फिर कभी वापस नहीं लौटा। उसने अपने परिवार को बताया था कि वह कॉलेज के एक फेस्ट में शामिल होने जा रहा है और देर से घर लौटेगा। घर से निकलते समय वह अपने साथ एक बैग लेकर गया था जिसमें उसका लैपटॉप था।
शाम करीब 7:45 बजे आयुष नौटियाल के पिता दिनेश चंद्र को उनके बेटे के फोन से एक SMS मिला जिसमें उन्हें वॉट्सऐप चेक करने के लिए कहा गया था। जब उन्होंने वॉट्सऐप खोला तो उन्होंने एक तस्वीर देखी जिसमें उनके बेटे आयुष की आँखों पर पट्टी बँधी हुई थी और उसके हाथ-पैर बँधे हुए थे। तस्वीर के साथ 50 लाख रुपए की फिरौती माँगी गई थी और चेतावनी दी गई थी कि इस बारे में किसी रिश्तेदार या पुलिस को कुछ न बताया जाए।
संदेश मिलने के बाद पीड़ित के पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत के आधार पर पालम विलेज थाने में FIR दर्ज की गई। पुलिस तुरंत हरकत में आई और पीड़ित के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगाया गया। साथ ही उसके फोन नंबर की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) भी निकलवाई गई।
जब पुलिस पीड़ित की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश कर रही थी उसी दौरान 24 मार्च 2018 को उसके पिता को एक और संदेश मिला जिसमें पूछा गया कि क्या उन्होंने फिरौती की रकम का इंतजाम कर लिया है। इस पर पिता ने जवाब दिया कि वह केवल 10 लाख रुपए का इंतजाम कर सकते हैं। इसके बाद सामने वाले व्यक्ति ने 50 लाख रुपए की माँग दोहराई और 26 मार्च 2018 तक की समयसीमा दी। हालाँकि, 24 मार्च 2018 को बातचीत के दौरान पिता ने फिरौती की रकम घटाकर 12 लाख रुपए तक तय करवा ली।
इसके बाद पीड़ित के पिता आरोपित द्वारा तय की गई जगह पर फिरौती की रकम पहुँचाने के लिए गए। शुरुआत में आरोपी ने उन्हें उत्तम नगर स्थित नजफगढ़ नाले के पास पैसे छोड़ने को कहा था। बाद में उसने जगह बदलते हुए दिल्ली के वसंत विहार स्थित मुनिरका में अनुपम रेस्टोरेंट के पास एक कूड़ेदान में रकम रखने को कहा। पुलिस ने दोनों जगहों पर छापेमारी टीम तैनात कर दी लेकिन किसी भी जगह पर पैसे लेने कोई नहीं आया।
28 मार्च 2018 को द्वारका सेक्टर-13 स्थित मेट्रो व्यू अपार्टमेंट्स के पीछे एक नाले पॉलीथिन में लिपटा एक युवक का अत्यधिक सड़ा-गला शव बरामद हुआ। पीड़ित के पिता ने शव की पहचान अपने बेटे आयुष नौटियाल के रूप में की। शव के पास पड़े चश्मे को भी उन्होंने अपने बेटे का बताया।
आसपास के इलाकों के CCTV फुटेज की जाँच में पता चला कि पीड़ित को द्वारका सेक्टर-14 स्थित एक मैकडॉनल्ड्स आउटलेट में एक दाढ़ी वाले व्यक्ति के साथ देखा गया था। पुलिस इसके बाद पीड़ित के जीमेल और फेसबुक अकाउंट्स तक पहुँची और तस्वीरों का विश्लेषण किया। जाँच के बाद पुलिस ने पाया कि मैकडॉनल्ड्स में आयुष के साथ दिख रहा दाढ़ी वाला व्यक्ति दिल्ली के उत्तम नगर निवासी इश्तियाक अली था।
पुलिस पूछताछ के दौरान इश्तियाक अली ने आयुष नौटियाल की हत्या करने और उसका लैपटॉप जलाने की बात कबूल की। उसने बताया कि उसकी मुलाकात आयुष से टिंडर ऐप के जरिए हुई थी। पुलिस ने अली की निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल किया गया हथौड़ा समेत कई अहम सबूत बरामद किए। पुलिस को अली के घर के बाहर खड़ी उसकी ऑल्टो कार भी मिली जिसका इस्तेमाल उसने आयुष के शव को ठिकाने लगाने में किया था। आयुष के अपहरण और हत्या के मामले में अली पर मुकदमा चलाया गया और अदालत ने उसे दोषी करार दिया।
(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)


