बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में भगवान राम की निर्माणाधीन प्रतिमा को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों की ओर से विरोध और उसे तोड़ने की धमकियाँ दिए जाने के कुछ दिनों बाद हिंदू मंदिर समिति को प्रतिमा का निर्माण कार्य रोकना पड़ा।
एक बयान में मंदिर समिति के एक सदस्य ने मीडिया को बताया, “हम आपके हित में, राष्ट्र और समाज के हित में भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य रोक रहे हैं। सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए हम यह कार्य रोक रहे हैं। भविष्य में, यदि हमें आवश्यकता महसूस हुई, तो हम आपको बुलाएँगे, सभी हितधारकों के सुझाव लेंगे और कार्य पुनः आरंभ करेंगे।”
इससे पहले ऑपइंडिया ने रिपोर्ट की थी कि कैसे सोशल मीडिया पर मुस्लिम समूहों की टिप्पणियों की भरमार थी, जिनमें भगवान राम को हिंदुत्व का प्रतीक बताया गया था और हिंसा भड़काई गई थी।
‘इंसाफ कायमकारी छात्र श्रमिक जनता’ संगठन से जुड़े एक इस्लामी कट्टरपंथी ने कहा था, “अगर पलाशबाड़ी उपजिला में हिंदुत्व के भगवान राम की प्रतिमा का निर्माण बिना किसी बाधा के जारी रहता है, तो इसका मतलब होगा कि देश में कोई सम्मानित इस्लामी विद्वान नहीं बचा है। ऐसे में बांग्लादेश के मुसलमान हिंदुत्ववादियों के हाथों नरसंहार के योग्य हैं।”

उसने आगे धमकी देते हुए कहा था, “पलाशबाड़ी में राम की प्रतिमा बनाई जा रही है। इसे बुलडोजर से नष्ट कर दो। सरकार को इस प्रतिमा को गिरा देना चाहिए। यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो आम लोग (मुसलमान) इसे तोड़ देंगे। सरकार की मदद करना मुसलमानों का कर्तव्य है। बांग्लादेश में मंदिर को ध्वस्त किया जाना चाहिए।”
भारत पर कब्जा करने की धमकी दे चुके इस कट्टरपंथी मौलाना ने कहा, “बांग्लादेश से भारत के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। भारत पर कब्जा कर लिया जाएगा। मोदी और उनके राम राज्य को कुचल दिया जाएगा। यदि बांग्लादेश, पाकिस्तान और भारत के मुसलमान एक साथ हमला करें, तो भारत एक घंटे भी नहीं टिक पाएगा।”
इससे पहले इस मौलाना ने कहा था, “इंशाअल्लाह भारत पर हमला होगा। हम पाकिस्तान को बुलाएँगे। भारत पर कब्जा करने में हमें 3 घंटे भी नहीं लगेंगे। भारत के 26 प्रांतों को कुचल दिया जाएगा, इंशाअल्लाह। और भारत के मुस्लिम ही काफी हैं।”

