‘UP में दलितों पर यादवों और मुस्लिमों ने किया सबसे ज्यादा अत्याचार’: रिपोर्ट्स में दावा, BJP नेता बोले- यही है सपा का PDA फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश में SC/ST एक्ट से जुड़े मामलों को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए पिछले चार महीनों के SC/ST एक्ट के आँकड़ों में देखा गया कि सबसे अधिक यादव समुदाय के खिलाफ 2,160 केस दर्ज हैं। इन्हीं आँकड़ों में एक्ट के तहत दूसरे नंबर पर मुस्लिमों के खिलाफ 1,983 मामलें दलित उत्पीड़न को लेकर दर्ज हैं।

इसके बाद ब्राह्मण और क्षत्रिय समाज के लोगों के नाम भी सामने आए हैं। इन आँकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद प्रदेश की राजनीति में बहस तेज हो गई है और समाजवादी पार्टी के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रभात खबर इस मुद्दे पर पहले ही संक्षेप में रिपोर्ट लिख चुका है।

चार महीने में 4,741 मामले और 14,672 आरोपित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में एससी/एसटी एक्ट के तहत कुल 4,741 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों की विवेचना और जाँच के बाद कुल 14,672 लोगों को आरोपित बनाया गया है। यह आँकड़े राज्य के सभी जिलों और जोनों से मिली रिपोर्ट के आधार पर तैयार किए गए हैं।

कुल 14,672 आरोपितों में सबसे अधिक 2,160 यादव समाज से हैं और 1,983 मुस्लिम समुदाय से हैं। इसके बाद 1,601 ब्राह्मण समाज और 1,698 क्षत्रिय समाज के लोग भी इन मामलों में आरोपित बने हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक यह सभी नाम FIR और जाँच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज किए गए हैं।

जोनवार रिपोर्ट: वाराणसी, लखनऊ और गोरखपुर में प्रमुख आँकड़े

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जोनवार स्थिति में वाराणसी जोन सबसे आगे रहा, जहाँ 650 यादव और 428 मुस्लिम आरोपित दर्ज किए गए। लखनऊ जोन में 410 यादव और 428 मुस्लिम आरोपित पाए गए। गोरखपुर जोन में 297 यादव और 344 मुस्लिम आरोपित दर्ज हैं। पश्चिमी यूपी के मेरठ जोन में 319 मुस्लिम आरोपित शामिल हैं।

वहीं लखनऊ कमिश्नरेट में 77 यादव और 82 मुस्लिम, जबकि प्रयागराज कमिश्नरेट में 91 यादव समाज के लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं।

PDA नैरेटिव पर सवाल, अखिलेश पर विपक्ष का निशाना

इन आँकड़ों के सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने समाजवादी पार्टी के PDA नैरेटिव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जमीनी आँकड़े इस राजनीतिक दावे से मेल नहीं खाते। भाजपा नेता आलोक अवस्थी ने तीखा हमला करते हुए कहा कि PDA का मतलब ‘पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक’ नहीं, बल्कि ‘पिछड़ा और अल्पसंख्यक द्वारा दलितों का उत्पीड़न’ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल से ही दलितों को दबाने की राजनीति होती रही है। अवस्थी ने दावा किया कि मौजूदा आँकड़े इस बात का सबूत हैं कि दलित समाज सबसे ज्यादा पीड़ित है और भाजपा सरकार दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उनका आरोप है कि समाजवादी पार्टी और उसके नेता अखिलेश यादव जिस सामाजिक गठजोड़ की राजनीति करते हैं, यह डेटा उस नैरेटिव पर सवाल खड़े करता है।

उधर भाजपा के आरोपों पर समाजवादी पार्टी के नेता दीपक रंजन ने कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और अपराध को जाति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।