NEET, JEE जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएँ केवल एक परीक्षा नहीं होतीं, बल्कि लाखों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों के सपनों, संघर्षों और वर्षों की मेहनत का परिणाम होती हैं। ये दोनों परीक्षाएँ भारत में मेडिकल और इंजीनियरिंग में एडमिशन तय करती हैं।
मध्यमवर्गीय परिवार में परीक्षा सिर्फ छात्र नहीं दे रहा होता, पूरा परिवार देता है। ऐसे में जब दुबई के छात्र रेनेल अनिल ने परीक्षा व्यवस्था में खामियों और छात्रों से जुड़े मुद्दों की ओर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA का ध्यान खींचा और बताया कि क्या-क्या परीक्षा प्रणाली में दिक्कतें हैं, तो उनकी बातों को गंभीरता से लिया गया। इतना ही नहीं एनटीए के साथ साथ आईआईटी संस्थानों ने भी उनके सहयोग के लिए आभार जताया।
क्या किया 12वीं में पढ़ने वाले अनिल ने
दुबई में रहने वाले 12वीं क्लास के CBSE स्टूडेंट अनिल ने JEE एडवांस्ड और NEET के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जाँच की। दोनों पोर्टल्स में गंभीर कमियाँ मिलने के बाद उसने अपनी जानकारी भारत की नेशनल साइबरसिक्योरिटी रिस्पॉन्स टीम यानी CERT-In को दी और फिर जो कुछ भी पता चला था, उसे X पर शेयर किया।
1/2
— Rylen Anil (@DarthKermi72747) June 5, 2026
I have noticed claims saying all JEE candidate data was leaked. While there was a vulnerability, I have not seen evidence supporting claims of a large-scale leak.
The issue was promptly reported and swiftly fixed by IIT officials.
गल्फ न्यूज के मुताबिक उसने बताया, “दोनों प्लेटफॉर्म्स में घुसने में मुझे लगभग तीन से चार घंटे लगे। ऐसा करने के बाद, मैंने CERT-In को कमियों के बारे में बताया और फिर X (ट्विटर) पर इसके बारे में पोस्ट किया। इसी तरह लोगों को इसके बारे में पता चला।”
अनिल ने कहा कि उसने माता-पिता को भी कोई बात नहीं बताई थी। उन्हें भी हैकर की हेडलाइन से पता चला। उसके मुताबिक, पिता का बैकग्राउंड टेक का है, इसलिए उन्हें सब समझ आ गया और उन्हें काफी गर्व हुआ।
अनिल को क्या पता चला?
अनिल ने दो अलग-अलग तरह की कमियाँ पाई। JEE एडवांस्ड 2026 के मामले में समस्या पब्लिकली एक्सेस किए जा सकने वाले क्लाउड स्टोरेज के गलत कॉन्फ़िगरेशन की थी। बिना किसी ऑथेंटिकेशन के, बड़ी संख्या में उम्मीदवारों का डेटा ओपन था। इसमें 179600 रिजल्ट रिकॉर्ड और 187300 एडमिट-कार्ड PDF शामिल थे, जिनमें उम्मीदवारों के नाम, जन्म तिथि और मोबाइल नंबर मौजूद थे।
अनिल ने बताया, ” उन्होंने सभी रिजल्ट और एडमिट कार्ड एक ही सर्वर पर स्टोर किए थे, और उस सर्वर के सेटअप में ही गड़बड़ी थी। उसी गड़बड़ी का फायदा उठाकर वह सारा डेटा एक्सेस और हासिल कर पाया।”
NEET सिस्टम में एक अलग की समस्या थी। इसके सुपर-एडमिन पोर्टल पर बहुत कमजोर क्रेडेंशियल (लॉगिन जानकारी) का इस्तेमाल किया गया था। अनिल के मुताबिक, इन कमियों का फायदा उठाकर वह न सिर्फ छात्रों की गोपनीय जानकारी देख सकता था, बल्कि उनके माता-पिता के बारे में जानकारी ले सकता था।
अनिल ने अपनी खोज की जानकारी देते समय काफी सावधानी बरती। उन्होंने सार्वजनिक पोस्ट में निजी जानकारी और तस्वीरों को हटा दिया और बताया कि JEE के किसी भी उम्मीदवार का पूरा डेटा लीक नहीं हुआ था। उन्होंने केवल पुष्टि करने के मकसद से कुछ फाइलें डाउनलोड कीं और बाद में उन्हें डिलीट कर दिया।
JEE Advanced 2026 candidate/result infrastructure (https://t.co/6mBpjkxH01) had a public cloud storage misconfiguration exposing bulk candidate data without auth.
— Rylen Anil (@DarthKermi72747) June 2, 2026
This exposed ~179.6k result records and ~187.3k admit-card PDFs, including candidate names, DOBs and mobile numbers. pic.twitter.com/NUk4HGwqQP
CBSE की खामी को भी उजागर किया
अनिल ने न सिर्फ NEET और JEE को कमियों की जानकारी दी, बल्कि सीबीएसई का ऑनमार्क मूल्यांकन पॉर्टल की कमियों की ओर भी ध्यान दिलाया। निसर्गा नाम के एक दूसरे एथिकल हैकर के साथ काम करते हुए, उन्होंने सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और ऑनमार्क मूल्यांकन पोर्टल में खामी की पहचान की।
ये खामी बोर्ड परीक्षा के प्रश्न पत्रों को जाँचने से जुड़ा है। उन्होंने पाया कि कॉपी चेक करने वाले जाँचकर्ताओं के ईमेल, यूजर्स नाम, पासवर्ड, फोन नंबर, संस्थान विवरण और विषय आवंटन सभी अंदर घुसते ही मिल गए। अपने एक्सेस की वजह से वे इवैल्यूएटर अकाउंट्स तक पहुँच पाए, जहाँ स्कैन की गई आंसर स्क्रिप्ट और लाइव मार्किंग इंटरफेस उपलब्ध थे। उन्होंने इसकी जानकारी तुरंत CERT-In को दी। इसके बाद पोर्टल को ठीक करके ऑफलाइन कर दिया गया।
IITs, NTA ने तुरंत लिया संज्ञान
पोर्टल में कमियाँ उजागर होने के बाद अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, जिसकी अनिल ने तारीफ की। उनका कहना है कि IITs और NTA के आईटी स्टाफ ने अनिल से संपर्क करके उन्हें धन्यवाद दिया, और तकनीकी जानकारी माँगी। उन्होंने खामियों को दुरुस्त करने के लिए कदम उठाए। IIT रुड़की ने X पर सार्वजनिक रूप से इस खामी को स्वीकार किया।
अनिल ने कहा, “अब तक प्रतिक्रिया तारीफ़ करने वाली रही है। वे अब समस्याओं को हल करने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे लगता है कि यह महत्वपूर्ण है कि वे बात सुनने के लिए तैयार हैं और समस्याओं को तेजी से हल भी कर रहे हैं।”
इसके बाद कई IITs (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी) ने X पर आधिकारिक बयान जारी किए, जिनमें कहा गया कि उन्होंने उन उम्मीदवारों की मदद के लिए आपातकालीन तकनीकी सुधार किए जो अपने एडमिट कार्ड तक नहीं पहुँच पा रहे थे। इन सुधारों के कारण क्लाउड स्टोरेज सिस्टम में थोड़ी देर के लिए मामूली मिसकॉन्फिगरेशन हो गया था।
इसकी जानकारी भी अनिल ने ही दी। उन्होंने गलत कॉन्फिगरेशन की पहचान की और बताया कि वे संबंधित डेटाबेस को एक्सेस कर सकते हैं। इस समस्या को तुरंत ठीक कर दिया गया और डेटा तक एक्सेस को सीमित कर दिया गया।
Claims of a data breach and privacy violation affecting lakhs of JEE (Advanced) aspirants are misleading and factually incorrect.
— IIT Bombay (@iitbombay) June 5, 2026
The information circulating on social media is misleading and does not accurately reflect what happened. There is an attempt to spread misinformation… pic.twitter.com/BVtJlSyZ2i
अनिल अकेले ऐसे हैकर नहीं हैं। वह भारत में युवा एथिकल हैकर्स के एक छोटे लेकिन बढ़ते हुए नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो देश के एजुकेशन टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बारीक नजर रखे हुए हैं। अनिल का कहना है कि गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और मेटा जैसी बड़ी कंपनियाँ कमियों का पहले से पता लगाने के लिए एथिकल हैकर्स को काम पर रखती हैं, उसी तरह भारत सरकार को चाहिए कि गलत हैकर्स के वहाँ तक पहुँचने से पहले बड़े प्लेटफॉर्म्स की कमियों को दूर करने के लिए वे एथिकल हैकर्स की मदद लें, ताकि सभी परीक्षाएँ निष्पक्ष और त्रुटिहीन हो सके।
इसमें कोई बदमाश हैकर सेंध लगा कर नुकसान न पहुँचा सके। पेपर लीक जैसी घटनाएँ न हो और रिएक्जाम का दंश छात्रों को न सहना पड़े।
NEET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के विवाद के बाद NTA ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द की। इसके प्रश्न पत्र बनाने वाले कथित शिक्षकों से पूछताछ हो रही है। कई शहरों के तार इससे जुड़े हैं। ऐसा भी कहा जा रहा है कि 2025 में भी पेपर लीक हुए थे, इसकी जाँच भी की जा रही है। 2024 में पेपर लीक को लेकर काफी हँगामा हुआ था यानी यह एक बार की बात नहीं है। इससे परीक्षा की विश्वसनीयता खतरे में है। अब पोर्टल की ये कमी सामने आई है। एनटीए को ऐसी डिजिटल कमियों से भी जल्द से जल्द निपटना होगा।
अभी तक एनटीए ने क्या-क्या कदम उठाए हैं
NEET UG 2026 के रिएक्जाम को लेकर NTA ने इस बार परीक्षा की सुरक्षा, पारदर्शिता और छात्र-छात्राओं की सुविधाओं को लेकर कई बड़े कदम उठाए हैं। इनमें से अधिकांश कदम पेपर लीक विवाद और छात्रों की शिकायतों के बाद लागू किए गए हैं। 21 जून को होने वाली NEET UG 2026 की परीक्षा अवधि बढ़ाकर 195 मिनट (3 घंटे 15 मिनट) कर दी है। इससे छात्रों को प्रश्न हल करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।
क्वेश्चन पेपर को दोबारा डिजाइन किया गया है ताकि पढ़ने और उत्तर देने में आसानी हो। साथ ही रफ वर्क के लिए अधिक जगह भी दी गई है। फर्जी अभ्यर्थियों और डुप्लीकेट आवेदन रोकने के लिए आवेदन प्रक्रिया में Aadhaar e-KYC और Live Photo Capture अनिवार्य किया गया है। परीक्षा केंद्रों पर कई स्तर की सुरक्षा लागू की है, जिसमें बायोमेट्रिक सत्यापन, कड़ी जाँच, CCTV निगरानी और दूसरे सुरक्षा प्रोटोकॉल शामिल हैं। CCTV फुटेज को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाएगा।
देशभर में परीक्षा कर्मियों और केंद्र कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। सोशल मीडिया पर निगरानी रखी जा रही है। Telegram पर पेपर लीक की खबरों को देखते हुए इसपर अस्थायी प्रतिबंध 22 जून 2026 तक लगाया गया है। इसके अलावा Telegram के मैसेज-एडिटिंग फीचर को 30 जून 2026 तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। NTA का कहना है कि पहले इस फीचर का इस्तेमाल कथित पेपर लीक के फर्जी सबूत बनाने और छात्रों को गुमराह करने के लिए किया गया था।
इस सब कवायद के बीच अहमदाबाद में बिहार के एक 19 साल के युवक को गिरफ्तार किया गया है। उस पर NEET पोर्टल पर लगभग 150 NEET उम्मीदवारों के अकाउंट्स को गैर-कानूनी तरीके से एक्सेस करके, उन्हें मिलने वाला रिफंड का पैसा अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करने का आरोप है। उसने बताया है कि NEET-UG उम्मीदवारों के अकाउंट्स का अनधिकृत एक्सेस पाने के लिए सिक्योरिटी की कमियों और कमजोर पासवर्ड्स का फायदा उठाया।
अब सरकार और परीक्षा करवाने वाली NTA और IITs को इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। JEE की परीक्षाओं में नकल भी एक बड़ी समस्या माना जा रही है। JEE Advance 2026 के रिजल्ट में छात्रों के दोनों पाली के नंबरों में बड़े अंतर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मध्यम वर्ग की उम्मीदें और NEET-JEE का दबाव
ये परीक्षाएँ सिर्फ एक बच्चे के सपनों को उड़ान नहीं देता, बल्कि पूरा परिवार गर्व से सीना ऊँचा कर घूमता है। यही वजह है कि परीक्षा में अच्छा परफॉर्म नहीं करने पर कई छात्र-छात्राएँ डिप्रेशन में भी चले जाते हैं। ऐसी स्थिति भी समाज के लिए ठीक नहीं है। इसलिए छात्रों को विश्वास होना चाहिए कि उनके साथ ‘न्याय’ होगा। ऐसे न्याय के लिए तकनीकी खामियों को ठीक करना बेहद जरूरी है। सार्थक सुझाव और तथ्य आधारित संवाद व्यवस्था में सुधार ला सकते हैं। छात्रों को केवल परीक्षार्थी के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के महत्वपूर्ण अंग के रूप में देखा जाना चाहिए।
भारत में NEET-JEE की तैयारी करने वाले अधिकांश छात्र मध्यम वर्गीय या निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं। लाखों परिवार अपने बच्चों के डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए बचत करते हैं। उससे कोचिंग, स्टडी मटेरियल्स, हॉस्टल, आने-जाने का खर्चा समेत दूसरे खर्चों की तैयारी वर्षों से करते हैं। माता-पिता अपनी निजी जरूरतों की बातें नहीं करते, उन्हें तो बस बच्चों के सपने को उड़ान देनी होती है, वे अपने अहम खर्चों में भी कटौती करने से नहीं हिचकते।
ऐसी परिस्थितियों में छात्रों को बेहतर परीक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और सुरक्षित परीक्षा केंद्र, समय पर जानकारी और मानसिक रूप से अनुकूल माहौल मिलना उनका अधिकार है। यदि परीक्षा प्रणाली में कोई कमी या अव्यवस्था होती है, तो उसका सबसे बड़ा बोझ उन्हीं छात्रों और परिवारों पर पड़ता है जिन्होंने वर्षों तक काफी मेहनत की है।
NEET जैसी परीक्षाओं की विश्वसनीयता केवल प्रश्नपत्र की गोपनीयता से तय नहीं होता, बल्कि छात्रों के अनुभव से तय होते हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया में की पारदर्शिता, सुरक्षित और सुविधाजनक परीक्षा केंद्र, शिकायतों का तुरंत समाधान करने की व्यवस्था जरूरी है।
अनिल जैसे छात्रों की कोशिश यह याद दिलाती है कि शिक्षा व्यवस्था तब बेहतर बनती है, जब छात्रों की आवाज को सम्मान दिया जाता है। आखिरकार जिन युवाओं के कंधों पर देश का भविष्य टिका हुआ है, उन्हें निष्पक्ष, पारदर्शी और छात्र-केंद्रित परीक्षा प्रणाली मिलनी ही चाहिए। NTA और IITs ने जिस तरह से अनिल की बातों को गंभीरता से लिया और सकारात्मक जवाब दिया, इससे पता चलता है कि ये संस्थाएँ अपने काम को लेकर बेहद संजीदा हैं और अपनी कमियों को सुनने के लिए भी तैयार हैं।


