उत्तराखंड के चमोली के कर्णप्रयाग में 16 जून 2026 को हुई हिंसक झड़प के बाद नाराज पंजाब के कुछ निहंग रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू घोलतीर स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब पहुँच गए और तलवार लहराते हुए प्रदर्शन किया। निहंगों ने गुरुद्वारे पर कब्जा कर लिया, सेवादारों के साथ मारपीट की और लोगों को बंधक भी बनाया।
स्थिति बिगड़ने पर इंटरनेट सेवाएँ बंद करनी पड़ीं और पुलिस, PAC व ITBP की भारी तैनाती की गई। रविवार (21 जून 2026) की सुबह डीएम विशाल मिश्रा मौके पर पहुँचे, लेकिन निहंगों ने उनसे बातचीत नहीं की।
कर्णप्रयाग में बाइक की टक्कर से शुरू हुआ विवाद, चारधाम यात्रा तक हुई प्रभावित
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग मुख्य बाजार से हुई थी। हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे 5-6 बाइक सवार निहंगों के जत्थे की एक बाइक सड़क किनारे खड़ी कार से टकरा गई। इसके बाद बाइक सवारों और कार मालिक के बीच बहस शुरू हुई, जो कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गई।
स्थानीय लोगों का आरोप था कि विवाद के दौरान कुछ निहंगों ने तलवार और अपने पारंपरिक शस्त्रों (भाला और पत्थर) का इस्तेमाल किया, जिससे कई लोग घायल हुए। घायलों में एक स्थानीय होटल कारोबारी की हालत गंभीर बताई गई और उसे एयरलिफ्ट कर एम्स ऋषिकेश भेजा गया।
घटना के विरोध में व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग पाँच घंटे तक जाम लगाया। इससे गौचर से नंदप्रयाग तक करीब 25 किलोमीटर लंबा वाहन जाम लगा और चारधाम यात्रा पर भी असर पड़ा। बाद में प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुँचकर जाम खुलवाया।
पुलिस ने मामले में चार आरोपितों को गिरफ्तार किया, जिनमें से तीन को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेजा गया, जबकि एक का इलाज पुलिस निगरानी में जारी रहा।
कर्णप्रयाग की कार्रवाई से नाराज निहंगों ने गुरुद्वारे में किया विरोध, छत पर चढ़कर लहराई तलवारें
कर्णप्रयाग की घटना के बाद कुछ निहंग पिछले कई दिनों से रुद्रप्रयाग के नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में ठहरे हुए थे। उनकी नाराजगी इस बात को लेकर बताई गई कि स्थानीय लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन ने मामले में खुलकर आपत्ति क्यों नहीं जताई।
शुक्रवार (19 जून 2026) की शाम हालात अचानक बिगड़ गए। आरोप है कि 7-8 निहंग गुरुद्वारे में सक्रिय हो गए और वहाँ मौजूद सेवादारों तथा एक बाबा के साथ मारपीट की। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों में अफरा-तफरी फैल गई। दो लोगों को कुछ समय के लिए रोका गया, जिनमें एक को बाद में छोड़ दिया गया जबकि एक सेवादार को अपने कब्जे में ही रखा।
स्थिति और तनावपूर्ण तब हो गई जब कुछ निहंग अपने तलवार और भालों के साथ गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए। उन्होंने तलवारें और अन्य हथियार लहराए, कुछ सूचना पट्ट हटाए और नीचे पत्थर भी फेंके, जिससे आसपास के बाजार और स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।
प्रशासन ने इंटरनेट बंद किया, ITBP तैनात: धारा 163 लागू कर सख्त चेतावनी
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियाँ मौके पर पहुँच गईं। हालात को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल, PAC और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) को तैनात किया गया। कुछ समय के लिए सेना से भी सहायता माँगी गई, जिसके बाद ITBP ने मोर्चा संभाला और पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लिया गया।
गढ़वाल रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों और जिला प्रशासन ने निहंगों से बातचीत कर हालात सामान्य करने की कोशिश की। हालांकि शुरुआत में बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में सुरक्षा एजेंसियों ने स्थिति को नियंत्रण में लिया, लेकिन इलाके में तनाव बना रहा और निहंग गुरुद्वारे परिसर में डटे रहे।
घटनाक्रम के बाद प्रशासन ने चमोली और रुद्रप्रयाग के संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी, जो 27 जून तक प्रभावी रहेगी। आदेश के अनुसार पाँच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी। आवश्यक सेवाओं, विवाह और अंतिम संस्कार जैसे मामलों में प्रशासनिक अनुमति के बाद छूट दी जाएगी।

