दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने शनिवार (4 जुलाई) को उमर खालिद और शरजील इमाम को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने साल 2020 के हिंदू विरोधी दंगों की बड़ी साजिश से जुड़े मामले में दोनों की जमानत याचिकाएँ खारिज कर दी हैं।
एडिशनल सेशंस जज समीर बाजपेयी ने UAPA के तहत दर्ज इस मामले में दोनों आरोपितों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान उमर खालिद के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल लंबे समय से हिरासत में है।
उनके खिलाफ हिंसा का कोई सीधा सबूत नहीं है। दूसरी तरफ शरजील इमाम के वकील ने दलील दी कि वह करीब 6 साल से जेल में हैं। इस मामले के मुकदमे की सुनवाई में अभी तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई कि जब दूसरे आरोपितों को राहत मिल चुकी है, तो उन्हें भी जमानत मिलनी चाहिए।
सरकारी वकील ने दोनों की जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, गवाहों के बयान दर्ज होने या तय समय सीमा पूरी होने से पहले इन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
पुलिस ने कहा कि दिल्ली दंगे की साजिश के आरोप बेहद गंभीर हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने जजमेंट सुनाते हुए दोनों की याचिकाओं को खारिज कर दिया।

