पिछली रात से लगातार बारिश हो रही है। मुंबई के कई इलाकों में पानी भर गया है। इसके चलते पिछले तीन घंटों से बिजली भी नहीं है। मैंने जो मोमबत्तियाँ जलाई थीं, अब उनकी लौ मद्धम होने लगी है। टेबल पर गुज़रे दिन के टाइम्स ऑफ इंडिया का खेल-पृष्ठ फड़फड़ा रहा है, जिसमें एमबाप्पे की तारीफों के पुल बाँधे गए हैं। खिड़की के बाहर बरसात का शोर है। रह-रहकर बिजली की गड़गड़ाहट सुनाई देती है। मैं किचन में जाकर चाय बनाने लगता हूँ। अदरक की महक पूरे किचन में फैल चुकी है।
अचानक मेरा ध्यान टेबल पर पड़े अखबार की उस खबर पर जाता है, जिसमें लिखा था कि भारी बारिश के चलते नवी मुंबई में कॉलेज जाने वाली दो छात्राओं की मौत हो गई थी, क्योंकि सड़क पर भरे पानी में करंट दौड़ रहा था। किसी ने सच ही कहा है कि बारिश सबके लिए खुशियाँ लेकर नहीं आती। वह सभी के लिए एक-सी नहीं होती। और यहाँ बात सिर्फ बारिश तक ही सीमित नहीं है।
फुटबॉल विश्व कप का कारवाँ जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे वह हमें कई बेहतरीन मुकाबलों की सौगात देता जा रहा है। खूबसूरत किस्सों और कहानियों का सिलसिला लगातार जारी है। गुज़री रात हमने सेनेगल को टूर्नामेंट से बाहर होने से पहले शानदार फुटबॉल खेलते देखा।
किसे मालूम था कि मैदान के बाहर भी सेनेगल की टीम कई मुश्किलों से जूझ रही थी। कोच पापे थियाव का नया अनुबंध महीनों तक अधर में लटका रहा। खिलाड़ियों के बोनस और भुगतान को लेकर भी विवाद चलता रहा। कैंप की व्यवस्थाओं और भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी असंतोष की खबरें सामने आती रहीं। मगर मजाल है कि मैदान पर उनके प्रदर्शन में कहीं कोई कमी दिखाई दी हो। जब भी वे मैदान पर उतरे, अपने देश के लिए अंतिम क्षण तक जान लगा दी। मैदान पर वे सचमुच शेर की तरह लड़े। वे राउंड ऑफ 16 में जगह तो नहीं बना सके, लेकिन अपने जज़्बे के लिए उन्हें दुनिया भर के खेलप्रेमियों का सम्मान और स्नेह मिला। यही कहानियाँ इस खेल को इतना खूबसूरत बना देती हैं।
बीती रात साढ़े बारह बजे लॉस एंजेलिस स्टेडियम में स्पेन को इस टूर्नामेंट के अपने पहले नॉकआउट मुकाबले में ऑस्ट्रिया से भिड़ना था। स्पेनिश कोच लुई डे ला फुएन्ते ने पिछले मैच की विजयी प्लेइंग इलेवन में सिर्फ एक बदलाव करते हुए अपनी टीम को मैदान में उतारा। पिछले मुकाबले में राइट बैक की भूमिका में मार्कोस लोरेन्ते थे, लेकिन इस बार उनकी जगह पेड्रो पोर्रो को मौका मिला। बाकी टीम पिछले मैच जैसी ही थी।
मैच के शुरुआती पलों से ही स्पेनिश टीम ग्रुप स्टेज के मुकाबले कहीं अधिक आत्मविश्वास से भरी दिखाई दी। छोटे-छोटे जादुई पासों के साथ वह लगातार विपक्षी गोलपोस्ट की ओर बढ़ती रही। दाहिने फ्लैंक पर अपने शानदार ड्रिबल्स से लामीन यमाल ऑस्ट्रियाई खिलाड़ियों की नाक में दम किए हुए थे। वहीं बाएँ छोर से एलेक्स बाएना भी लगातार गोल के अवसर तैयार कर रहे थे। नतीजा यह हुआ कि मैच के छत्तीसवें मिनट में सेंट्रल फॉरवर्ड मिकेल ओयारजाबाल ने गोल दागकर स्पेन को बढ़त दिला दी।
ऑस्ट्रिया ने बराबरी करने की पूरी कोशिश की, लेकिन स्पेन की रक्षापंक्ति में मौजूद उन्नीस वर्षीय पाऊ कुबार्सी और अनुभवी आयमेरिक लापोर्त के सामने उनकी एक न चली। सच तो यह था कि ऑस्ट्रिया इस मैच में कभी पूरी तरह संभल ही नहीं पाया। स्पेन ने लगभग पैंसठ प्रतिशत समय गेंद अपने कब्जे में रखी और विपक्षी गोलपोस्ट पर कुल बाईस शॉट लगाए। आगे चलकर पेड्रो पोर्रो और ओयारजाबाल ने एक-एक और गोल दागते हुए स्पेन को 3-0 की शानदार जीत दिला दी। पूरे मुकाबले में ऑस्ट्रिया एक भी शॉट लक्ष्य पर नहीं लगा सका, जो स्पेन के रक्षात्मक प्रदर्शन की मजबूती को दिखाता है।
इस जीत के साथ स्पेन राउंड ऑफ 16 में पहुँच गया। साथ ही, 2010 विश्व कप जीतने के बाद पहली बार स्पेन ने FIFA विश्व कप के नॉकआउट चरण का कोई मुकाबला अपने नाम किया।
अगले मैच में टोरंटो के मैदान पर पुर्तगाल का सामना क्रोएशिया से होना था। दुनिया भर से हजारों दर्शक अपने सबसे चहेते खिलाड़ी को खेलते देखने पहुँचे थे। मैच से पहले क्रिस्टियानो रोनाल्डो की बहन ने यह संकेत दिया था कि संभव है विश्व कप के बाद रोनाल्डो इस खूबसूरत खेल को हमेशा के लिए अलविदा कह दें। यह सुनते ही समर्थकों का उत्साह और भी बढ़ गया।
कोच रॉबर्टो मार्टिनेज़ अपनी टीम को 4-2-3-1 की फॉर्मेशन के साथ आक्रामक सोच लेकर मैदान में उतारते हैं। अटैकिंग लाइन में क्रिस्टियानो रोनाल्डो का साथ राफेल लिआओ और पेड्रो नेटो दे रहे थे। वहीं मिडफ़ील्ड में ब्रुनो फर्नानदेज़ के साथ विटिन्हा और होआओ नेवेश मौजूद थे।
ईवान पेरिसिच, लुका मॉद्रिच और मातेओ कोवाचिच जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के नेतृत्व में क्रोएशिया भी इस मुकाबले को हल्के में लेने के मूड में नहीं था। रेफरी की सीटी बजते ही टोरंटो स्टेडियम में हजारों दर्शकों के शोर के बीच यह हाई-वोल्टेज मुकाबला शुरू हो गया। यह मैच शायद क्रिस्टियानो रोनाल्डो या उनके पुराने साथी लुका मॉद्रिच में से किसी एक का राष्ट्रीय जर्सी में आखिरी विश्व कप मुकाबला भी हो सकता था।
मैच के तीसरे मिनट में ही आंते बुदीमीर का नीचा शॉट गोलकीपर रोक लेते हैं। इसके जवाब में पुर्तगाल की ओर से ब्रुनो फर्नानदेज़ तुरंत जवाबी हमला करते हैं, लेकिन उनका प्रयास भी सफल नहीं हो पाता। खेल आगे बढ़ता है। राफेल लिआओ एक सटीक पास बॉक्स के भीतर ब्रुनो फर्नानदेज़ की ओर बढ़ाते हैं, मगर क्रोएशियाई रक्षापंक्ति फिर शानदार बचाव करती है। दोनों टीमें लगातार आक्रमण करती रहीं, लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। इसी के साथ पहले हाफ का खेल समाप्त हुआ और स्कोर 0-0 से बराबरी पर रहा।
दूसरे हाफ का खेल शुरू होता है। मातेओ कोवाचिच पुर्तगाल के गोलपोस्ट की दिशा में एक सटीक निशाना साधते हैं, लेकिन गोलकीपर शानदार बचाव करते हुए उसे रोक लेते हैं। मगर मैच के तिरेपनवें मिनट में ईवान पेरिसिच, जोसिप स्टानिसिक के शानदार पास को गोल में तब्दील कर देते हैं। इसके साथ ही क्रोएशिया मुकाबले में 1-0 की बढ़त हासिल कर लेता है। मैदान में मौजूद लगभग 44 हजार दर्शकों में बड़ी संख्या पुर्तगाली समर्थकों की थी। उन सभी को मानो एक बड़ा झटका लग चुका था।
इस गोल के दस मिनट के भीतर ही क्रोएशिया दो बार फिर हमला करता है, लेकिन वह अपनी बढ़त को दोगुना नहीं कर पाता। दबाव में दिख रही पुर्तगाली टीम के कोच रॉबर्टो मार्टिनेज़ तुरंत दो बदलाव करते हैं। विटिन्हा, ब्रुनो फर्नानदेज़ और पेड्रो नेटो की जगह क्रमशः बरनार्डो सिल्वा, नेल्सन सेमेडो और फ्रांसिस्को कोन्सेकाओ को मैदान में भेजा जाता है। लेकिन इन बदलावों के साथ एक और बड़ा फैसला देखने को मिलता है। डिफेंडर होआओ कैंसेलो की जगह स्ट्राइकर गोंकालो रामोस को उतारा जाता है। मकसद बिल्कुल साफ था; अब पुर्तगाल पूरी ताकत के साथ लगातार आक्रमण करने वाला था।
इन सब्स्टीट्यूशन्स के बाद पुर्तगाल नई ऊर्जा से भर उठता है। तुरंत ही वह एक गोल भी दाग देता है, लेकिन VAR उसे अमान्य कर देता है। खेल आगे बढ़ता है। पुर्तगाल को एक कॉर्नर मिलता है, जिसे लेने नूनो मेंडेस आगे आते हैं। इसी दौरान क्रोएशियाई बॉक्स में एक फाउल हो जाता है। क्रोएशिया के खिलाड़ियों के विरोध के बावजूद VAR की समीक्षा के बाद पुर्तगाल को पेनाल्टी मिल जाती है।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो, जो अब तक FIFA विश्व कप के किसी भी नॉकआउट मुकाबले में गोल नहीं कर सके थे, गेंद के पीछे खड़े होते हैं। गोलकीपर तैयार थे। रेफरी सीटी बजाते हैं। रोनाल्डो गेंद को गोलकीपर की दाईं ओर भेजते हुए पेनाल्टी को गोल में बदल देते हैं। स्कोर 1-1 से बराबर हो जाता है। यह टूर्नामेंट में उनका तीसरा गोल था।
खेल फिर आगे बढ़ता है। मातेओ कोवाचिच एक बार फिर पुर्तगाल के गोलपोस्ट की दिशा में शानदार शॉट लगाते हैं, लेकिन गोलकीपर फिर बेहतरीन बचाव करते हैं। आज कोवाचिच शानदार लय में दिखाई दे रहे थे। कुछ ही देर बाद क्रोएशिया को कॉर्नर मिलता है। लुका मॉद्रिच गेंद के पास खड़े होते हैं। उनकी किक पर मातानोविच ऊँची छलांग लगाकर हेडर लगाते हैं, लेकिन गेंद क्रॉसबार के ऊपर से निकल जाती है। अगले ही पल मातानोविच फिर गेंद को कोवाचिच की ओर बढ़ाते हैं। वह एक और दमदार शॉट लगाते हैं, मगर पुर्तगाल का गोलकीपर फिर शानदार सेव कर लेता है।
अस्सी मिनट का खेल पूरा हो चुका था। कोच रॉबर्टो मार्टिनेज़ क्रिस्टियानो रोनाल्डो को बाहर बुलाकर उनकी जगह रुबेन नेवेश को मैदान में उतारते हैं। दोनों ही टीमें लगातार विपक्षी गोलपोस्ट पर हमले करती रहती हैं, लेकिन स्कोर अब भी 1-1 से बराबरी पर था। निर्धारित नब्बे मिनट पूरे होने के बाद रेफरी दस मिनट का स्टॉपेज टाइम देते हैं।
90+2 मिनट पर क्रोएशियाई कोच एक मिडफील्डर को बाहर बुलाकर डिफेंडर योश्को ग्वार्डियोल को मैदान में भेजते हैं। इस बदलाव का उद्देश्य साफ था—स्टॉपेज टाइम में अपनी रक्षापंक्ति को और मजबूत करना। लेकिन जैसे ही ग्वार्डियोल मैदान पर आते हैं, पुर्तगाल के स्थानापन्न खिलाड़ी गोंकालो रामोस गोल दाग देते हैं। 90+4 मिनट में राफेल लिआओ बाईं ओर से शानदार क्रॉस डालते हैं, जिसे गोंकालो रामोस बेहतरीन हेडर के साथ गोल में बदल देते हैं। टूर्नामेंट में अपने पहले गोल के साथ वह स्टॉपेज टाइम में पुर्तगाल को 2-1 की बढ़त दिला देते हैं।
क्या सेनेगल के बाद अब क्रोएशिया भी शानदार खेल दिखाने के बावजूद अंतिम क्षणों में टूर्नामेंट से बाहर होने जा रहा था?
पूरी पुर्तगाली टीम अब अपने बॉक्स के आसपास सिमटकर रक्षण करने लगती है। 90+14 मिनट में क्रोएशिया एक गोल दाग देता है। पुर्तगाली डगआउट में सन्नाटा छा जाता है। लाल जर्सी पहने उनके समर्थक भी हैरान रह जाते हैं। इस मुकाबले में हर कुछ मिनट बाद नया मोड़ आ रहा था। क्या अब मैच एक्स्ट्रा टाइम में जाएगा?
लेकिन तभी VAR हस्तक्षेप करता है और रेफरी गोल का फैसला पलट देते हैं। क्रोएशियाई खिलाड़ी इस फैसले का विरोध करते हैं, लेकिन रेफरी का निर्णय अंतिम होता है। खेल फिर शुरू होता है। 90+19 मिनट पर हर पल नया मोड़ लेता यह हाई-वोल्टेज मुकाबला आखिरकार समाप्त हो जाता है।
यह एक शानदार मैच था। विवादित फैसलों से भरे इस रोमांचक मुकाबले को किसी तरह पुर्तगाल जीतकर अगले दौर में अपनी जगह बना लेता है। अब राउंड ऑफ 16 में उसका सामना अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी स्पेन से होगा। यह ऐसा मुकाबला होगा जिसे फुटबॉल प्रेमी शायद ही मिस करना चाहेंगे।
उधर, क्रोएशिया का सफर यहीं समाप्त हो जाता है। इस दर्दनाक हार के साथ शायद लुका मॉद्रिच और क्रोएशिया की राष्ट्रीय टीम का साथ भी हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
फिर दिन के अगले मुकाबले की बिसात वैंकूवर में सजती है, जहाँ स्विट्जरलैंड का सामना अल्जीरिया से था। स्विट्जरलैंड के स्ट्राइकर ब्रील एम्बोलो ने मैच के दसवें मिनट में ही गोल दागकर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी। लगभग तीस से चालीस मीटर तक जोहान मनजाम्बी अकेले गेंद लेकर आगे बढ़ते हैं। मौका मिलते ही वह गेंद गोलपोस्ट की दिशा में बढ़ाते हैं, जिसे वहाँ मौजूद एम्बोलो शानदार अंदाज़ में गोल में बदल देते हैं।
दूसरे हाफ की शुरुआत होते ही स्विस विंगर दान न्दोए दाईं ओर से शानदार किक लगाते हैं। अल्जीरिया के गोलकीपर के पास उसका कोई जवाब नहीं था। स्विट्जरलैंड दूसरे हाफ की शुरुआत में ही अपना दूसरा गोल कर चुका था। स्कोर 2-0 हो जाता है। आखिर तक यही स्कोर बना रहता है और स्विट्जरलैंड राउंड ऑफ 16 में अपनी जगह पक्की कर लेता है, जहाँ अगले सप्ताह उसका सामना कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से वैंकूवर में ही होगा।
आज खेले गए मुकाबलों में पुर्तगाल और क्रोएशिया का मैच सबसे रोमांचक रहा। कभी क्रोएशिया हावी दिखाई दिया तो कभी पुर्तगाल। यह मुकाबला आखिरी सीटी तक दर्शकों को अपनी सीटों से बाँधे रखने में सफल रहा।
अब आज रात डलास स्टेडियम में मिस्र का सामना ऑस्ट्रेलिया से होगा। दोनों ही टीमें यह मुकाबला जीतकर टूर्नामेंट में अपनी उम्मीदें ज़िंदा रखना चाहेंगी। ऑस्ट्रेलिया अपने ड्रीम रन को बरकरार रखते हुए आज एक और बड़ा शिकार करने की कोशिश करेगी।
फिर कल, भारतीय समयानुसार रात साढ़े तीन बजे, मियामी के मैदान पर 2022 विश्व विजेता अर्जेंटीना और काबो वर्दे के बीच मुकाबले का किक-ऑफ होगा। छोटे से द्वीपीय देश काबो वर्दे के खिलाड़ियों ने विराट हौसले के साथ खेलते हुए यहाँ तक का सफर तय किया है। वे एक और बड़ा उलटफेर करने के इरादे से मैदान में उतरेंगे।
हालांकि अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने मैच से पहले साफ कहा है कि काबो वर्दे को हल्के में लेने की भूल नहीं की जा सकती। स्पेन और उरुग्वे जैसी टीमों को रोक चुकी यह टीम किसी भी बड़े देश के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
इस मुकाबले में लियोनेल मेस्सी के सामने होंगे वोज़िन्हा। यह सचमुच देखने लायक टक्कर होगी। एक ओर होंगे मेस्सी, जो मैदान के किसी भी कोने से गोल करने की क्षमता रखते हैं। दूसरी ओर होंगे वोज़िन्हा, जिनके सामने गोल करने में बड़ी-बड़ी टीमों के पसीने छूट चुके हैं।
मेस्सी इस समय शानदार फॉर्म में हैं। वह इस विश्व कप में छह गोल के साथ गोल्डन बूट की दौड़ में किलियन एमबाप्पे के बराबर चल रहे हैं।
इसके बाद कल सुबह सात बजे घाना का सामना कोलंबिया से होगा। अपने ग्रुप में, जिसमें पुर्तगाल भी शामिल था, शीर्ष स्थान पर रहने वाली कोलंबिया इस मुकाबले में निश्चित रूप से फेवरेट होगी। लेकिन नॉकआउट मुकाबलों में कुछ भी हो सकता है।
घाना की कोशिश होगी कि वह बेहद मजबूत रक्षापंक्ति के सहारे पूरे 120 मिनट तक ‘लॉस कैफेटेरोस’ को गोल करने से रोके रखे। अगर वह ऐसा करने में सफल रहता है, तो शानदार फॉर्म में चल रही कोलंबिया भी बड़े उलटफेर का शिकार हो सकती है। वहीं कोलंबिया को बेहद सतर्क रहना होगा और ‘ब्लैक स्टार्स’ को बिल्कुल भी कमतर आँकने की भूल नहीं करनी चाहिए।
हर विश्व कप में तरह-तरह की भविष्यवाणियाँ भी चर्चा का विषय बनती रही हैं। वर्ष 2010 के विश्व कप में ‘पॉल बाबा’ नाम के ऑक्टोपस ने दुनिया भर में सुर्खियाँ बटोरी थीं। कभी कोई तोता, तो कभी कोई सफेद बिल्ली ऐसी भविष्यवाणियों के कारण चर्चा में आ जाती है।
इस बार घाना के पारंपरिक आध्यात्मिक गुरु नाना क्वाकू बोनसाम सुर्खियों में हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने अपनी राष्ट्रीय टीम के खिलाफ होने वाले मुकाबले से पहले इंग्लैंड के स्टार स्ट्राइकर हैरी केन पर आध्यात्मिक बंधन लगा दिया था, जिसके कारण हैरी केन उस मैच में गोल नहीं कर सके। लेकिन बंधन हटने के बाद अगले ही मुकाबले में केन ने गोल दागकर अपनी टीम को अगले दौर में पहुँचा दिया।
अब नाना क्वाकू बोनसाम ने एक और बड़ी भविष्यवाणी कर दी है। उनका दावा है कि अर्जेंटीना काबो वर्दे के खिलाफ होने वाला मुकाबला हार जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा है कि लियोनेल मेस्सी अब इस विश्व कप में आगे कोई गोल नहीं कर पाएँगे।
इसके बाद दुनिया भर में अर्जेंटीना के समर्थकों के बीच इस भविष्यवाणी को लेकर खूब चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इन भविष्यवाणियों में कितना सच है और कितना अंधविश्वास, इसका फैसला तो मैदान पर होने वाला खेल ही करेगा। खैर, उस मुकाबले में क्या होगा, यह तो वक्त ही बताएगा।
आगे की खबरों के लिए हमारे साथ बने रहिए। यूँ ही हमारे चहेते खेल के बेहतरीन किस्से आपके सामने आते रहेंगे।


