भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से देश के हर पेट्रोल पंप के लिए केवल E20 पेट्रोल बेचना अनिवार्य कर दिया है। E20 का मतलब है ऐसा पेट्रोल, जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल मिला हो और जिसकी न्यूनतम ऑक्टेन रेटिंग 95 हो। बिना एथेनॉल वाला शुद्ध पेट्रोल बाजार से लगभग गायब हो चुका है। केवल कुछ प्रीमियम ब्रांड, जैसे इंडियन ऑयल का XP100, अब भी उपलब्ध हैं। यह 100-ऑक्टेन सुपर-प्रीमियम पेट्रोल है जिसकी कीमत ₹150 प्रति लीटर से ज्यादा है।
इस अचानक और पूरी तरह किए गए बदलाव से कार और दोपहिया वाहन मालिकों में काफी नाराजगी और चिंता है। कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता घटाना और एथेनॉल उत्पादन के जरिए किसानों की मदद करना अच्छे उद्देश्य हैं। लेकिन जिस तरीके से यह नीति लागू की जा रही है यानी लोगों से विकल्प छीनकर एक ही तरह का पेट्रोल सबके लिए अनिवार्य कर दिया गया है, उससे आम नागरिकों के सामने कई समस्याएँ खड़ी हो रही हैं। खासकर उन लोगों के लिए जो हर कुछ साल में अपना वाहन बदलने की स्थिति में नहीं हैं।
पुराने वाहन ज्यादा एथेनॉल वाले पेट्रोल के लिए नहीं बने
यह याद रखना जरूरी है कि भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का विचार बिल्कुल नया नहीं है। पिछली UPA सरकार ने E10 कार्यक्रम शुरू किया था, जिसमें पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था। लेकिन उस समय इसे आज की तरह अनिवार्य नहीं किया गया था। देशभर के पेट्रोल पंपों पर बिना मिलावट वाला शुद्ध पेट्रोल भी मिलता रहा। इस कारण पुराने वाहनों के मालिक 100 प्रतिशत पेट्रोल खरीद सकते थे, अगर उनका वाहन 10 प्रतिशत एथेनॉल वाले पेट्रोल पर भी ठीक से नहीं चल रहा था।
भारत में 2011 के बाद बिके अधिकतर वाहन E10 के अनुकूल हैं। इसलिए ऐसे वाहन E10 पेट्रोल पर बिना किसी बड़ी दिक्कत के चलते रहे। लेकिन अब जब E20 ही हर जगह उपलब्ध एकमात्र पेट्रोल बन गया है और शुद्ध पेट्रोल हटा दिया गया है, तो वही पुराने वाहन और यहाँ तक कि 2022 या 2023 की शुरुआत तक बने कई वाहन भी मुश्किल में आ गए हैं। इसकी वजह यह है कि E20 के अनुकूल अधिकतर वाहन अप्रैल 2023 से ही बाजार में आने शुरू हुए, जब BS6 Phase 2 उत्सर्जन नियम लागू किए गए। इसका मतलब है कि 2011 के बाद और अप्रैल 2023 से पहले बने ज्यादातर वाहन E10 के अनुकूल थे लेकिन उन्हें 20 प्रतिशत एथेनॉल मिले पेट्रोल पर चलाने के लिए नहीं बनाया गया था।
नुकसान और माइलेज को लेकर चिंता
चिंता यह है कि एथेनॉल (भले ही कम मात्रा में हो) उन वाहनों को धीरे-धीरे नुकसान पहुँचा सकता है जिन्हें इसे झेलने के हिसाब से बनाया ही नहीं गया था। एथेनॉल हवा से नमी को आसानी से सोख लेता है। यह नमी पुराने वाहनों के मेटल फ्यूल टैंक, फ्यूल लाइन, इंजेक्टर और दूसरे हिस्सों में जंग और खराबी पैदा कर सकती है। यह रबर की पाइप, प्लास्टिक पार्ट्स, सील और गैसकेट पर भी असर डालता है। जिन वाहनों में कार्बोरेटर है या पुराने फ्यूल सिस्टम हैं, जो एथेनॉल के हिसाब से कैलिब्रेट नहीं किए गए हैं, उनमें एयर-फ्यूल मिक्सचर ज्यादा लीन हो सकता है। इससे पावर कम हो सकती है, इंजन झटके दे सकता है, स्टार्ट होने में दिक्कत आ सकती है और फिल्टर चोक हो सकते हैं।
सरकार ने कुछ अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा है कि E20 पुराने वाहनों को नुकसान नहीं पहुँचाता लेकिन उसने कुछ नुकसान की बात स्वीकार भी की है।
माइलेज भी घटता है, क्योंकि एथेनॉल में शुद्ध पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा कम होती है। पुराने वाहनों में यह कमी कई बार 3 से 6 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा हो सकती है। अप्रैल 2023 के बाद बने नए वाहन E20 के हिसाब से डिजाइन किए गए हैं लेकिन भारतीय सड़कों पर अभी भी बड़ी संख्या में पुराने कार, बाइक और थ्री-व्हीलर चल रहे हैं, जिन्हें ज्यादातर E10 या उससे कम मिश्रण तक के लिए ही प्रमाणित किया गया था। ऐसे वाहनों पर जबरन E20 थोपना गलत है और इससे कई वाहन मालिकों के लिए मरम्मत का खर्च बढ़ेगा और पार्ट्स जल्दी बदलवाने पड़ेंगे।
मिले हुए पेट्रोल पर कोई छूट नहीं
इन तकनीकी समस्याओं के बावजूद सरकार का यह फैसला भी सवाल खड़े करता है कि एथेनॉल मिले पेट्रोल पर कोई छूट या कीमत में कमी नहीं दी जा रही है। एथेनॉल भारत में ही बनता है और आयातित कच्चे तेल की तुलना में सस्ता होता है। इसलिए पेट्रोल में इसे मिलाने से तेल कंपनियों की कुल लागत कम होनी चाहिए। इसके बावजूद पेट्रोल पंप पर कीमत इस तरह कम नहीं हुई कि उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत मिले। दूसरी तरफ माइलेज कम होने के कारण अब लोगों को वही दूरी तय करने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
आम आदमी दोहरा बोझ उठा रहा है। एक तरफ उसके वाहन को नुकसान होने की आशंका है और दूसरी तरफ प्रति किलोमीटर चलने की वास्तविक लागत बढ़ रही है। इसके बदले उसे कोई मुआवजा या राहत नहीं मिल रही। ऐसा लगता है कि फायदा कहीं और जा रहा है, जबकि कीमत आम नागरिक चुका रहा है।
केंद्र सरकार ने मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी माफ करने का फैसला किया है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसमें E20 पेट्रोल शामिल नहीं है जिसे फिलहाल हर व्यक्ति खरीदने के लिए मजबूर है। यह छूट E22, E25, E27 और E30 फ्यूल ब्लेंड्स पर लागू होती है जिनमें क्रमशः 22 प्रतिशत, 25 प्रतिशत, 27 प्रतिशत और 30 प्रतिशत एथेनॉल मिला होता है। ये मिश्रण अभी बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। ये फिलहाल पाइपलाइन में हैं और जल्द लाए जाएँगे।
उपभोक्ताओं को विकल्प मिलना चाहिए
इसका सही समाधान सरल है और कई देशों में पहले से काम कर रहा है। सरकार को बाजार में अलग-अलग एथेनॉल मिश्रण एक साथ उपलब्ध कराने चाहिए जैसे E10, E20, E30 और नए फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए इससे भी ऊँचे ग्रेड। इन्हें पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग डिस्पेंसर या विकल्पों के रूप में बेचा जाना चाहिए और इनके दामों में भी अंतर होना चाहिए। जैसे आज लोग अपने वाहन और बजट के हिसाब से रेगुलर और प्रीमियम पेट्रोल चुनते हैं, वैसे ही वाहन मालिकों को यह आजादी होनी चाहिए कि वे अपनी कार या बाइक के लिए उपयुक्त ब्लेंड चुन सकें।
पुराने वाहनों को E10 या उस कम एथेनॉल मिश्रण पर चलते रहने की सुविधा मिलनी चाहिए, जो उनके लिए सुरक्षित हो। नए वाहन चाहें तो ज्यादा एथेनॉल वाले मिश्रण का इस्तेमाल कर सकते हैं, अगर उससे बेहतर प्रदर्शन मिलता हो या किफायती हो तो।
कई देशों में लोगों को अपने वाहन के लिए सही ईंधन चुनने की आजादी है। एक ही पेट्रोल पंप पर अलग-अलग कीमतों पर अलग-अलग मिश्रण उपलब्ध होते हैं, ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहाँ आज रेगुलर पेट्रोल, प्रीमियम पेट्रोल और हाई-ऑक्टेन पेट्रोल मिलते हैं। अमेरिका में सामान्य पेट्रोल ज्यादातर E10 होता है लेकिन फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 भी बड़े पैमाने पर उपलब्ध है। ब्राजील में पेट्रोल पंपों पर आमतौर पर लगभग 27 प्रतिशत एथेनॉल मिला सामान्य गैसोलीन और लगभग शुद्ध एथेनॉल यानी E100, दोनों उपलब्ध होते हैं।
सरकार ने E22, E25, E27 और E30 के मानक पहले ही अधिसूचित कर दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पेट्रोल पंपों पर एक साथ पेट्रोल के कई मिश्रण उपलब्ध कराए जाएँगे और वाहन मालिक अपने वाहन के लिए सबसे बेहतर विकल्प चुन सकेंगे। लेकिन पुराने वाहनों के लिए E10 जैसे कम एथेनॉल मिश्रण का कोई प्रस्ताव नहीं है। ज्यादा एथेनॉल वाले ये मिश्रण कम एथेनॉल वाले विकल्पों के साथ विकल्प के रूप में आने चाहिए, न कि उन्हें पूरी तरह हटाकर उनकी जगह लेने चाहिए। इससे उन करोड़ों लोगों की सुरक्षा होगी जो अब भी पुराने लेकिन पूरी तरह चलने योग्य वाहन चला रहे हैं।
जब शुद्ध पेट्रोल अब लगभग नहीं मिल रहा और पुराने वाहनों के लिए कोई सुरक्षित विकल्प नहीं बचा है, ऐसे में सभी लोगों पर एक ही तरह का E20 पेट्रोल थोपना सही नहीं है। यह न तो आम लोगों के साथ न्याय है और न ही व्यावहारिक फैसला।
सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द पेट्रोल के अलग-अलग विकल्प उपलब्ध कराए। जैसे E10, E20 और दूसरे मिश्रण जिससे लोग अपने वाहन और अपनी जेब के हिसाब से सही ईंधन चुन सकें। दुनिया के कई विकसित देशों में यही व्यवस्था है। लंबे समय में भारत के वाहन मालिकों के लिए भी यही बेहतर होगा। आम आदमी को इतनी राहत और विकल्प मिलना चाहिए।
(यह खबर मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है जिसे इस लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं)


