अयोध्या राम मंदिर की दान राशि को लेकर विवाद के बाद अब मध्य प्रदेश के बड़े मंदिरों की दान व्यवस्था पर भी सवाल उठने शुरू हो गए है। महाकाल और ओंकारेश्वर मंदिर में दान के हिसाब को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कहीं पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है, तो कहीं पारदर्शिता की माँग तेज हो गई है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, उज्जैन के महाकाल मंदिर में नकद दान की गिनती तीन स्तर की सुरक्षा के बीच होती है। बैंक कर्मचारियों की मौजूदगी में दान पेटियाँ खोली जाती हैं। पूरे परिसर में CCTV निगरानी रहती है। मंदिर में 95 दान पेटियाँ, आधिकारिक वेबसाइट और 24 QR कोड के जरिए दान लिया जाता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मंदिर की आय 145 करोड़ रुपए से अधिक रही।
इसके बावजूद सोना-चाँदी और दूसरे कीमती दान का सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा कारणों से यह जानकारी साझा नहीं की जाती। हालाँकि, लोगों का कहना है कि दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
ओंकारेश्वर में सिर्फ दान पेटी का आँकड़ा सामने आया
महाकाल मंदिर प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत होती है। दान में मिली ज्वेलरी को तौलकर स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। इसे तीन अधिकारियों की मौजूदगी में ही खोला जाता है। इसके बाद भी सवाल बने हुए हैं। उज्जैन के महापौर मुकेश टटवाल ने कहा कि तीन साल पहले सोना-चाँदी का भौतिक सत्यापन कराने की बात हुई थी, लेकिन अब तक नहीं हो सका।
दान का वजन और उसकी कीमत भी सार्वजनिक नहीं की जाती। लेकिन ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने पहली बार दान पेटियों से मिली राशि सार्वजनिक की है। ट्रस्ट के मुताबिक, एक सप्ताह में दान पेटियों से 24.41 लाख रुपए मिले। यहाँ हर मंगलवार और शुक्रवार को दान की गिनती होती है।
हालाँकि, ऑनलाइन दान, शीघ्र दर्शन, प्रसादालय और लड्डू बिक्री से होने वाली आय का ब्योरा अब भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय से पूरी पारदर्शिता की माँग की जा रही है। पहले भी दान गिनती को लेकर सवाल उठ चुके हैं।
देवास में आय और खर्च दोनों का रिकॉर्ड
देवास की माता टेकरी में दान व्यवस्था अलग नजर आती है। यहाँ दान पेटियाँ अधिकारियों की मौजूदगी में खोली जाती हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है। मंदिर परिसर में लगातार निगरानी रहती है। पिछले साल मंदिर को करीब 1.25 करोड़ रुपए का दान मिला। वहीं करीब 1.45 करोड़ रुपए खर्च हुए। मंदिर समिति के अनुसार, अतिरिक्त खर्च की भरपाई इस साल की आय से की जा रही है।

