राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर RSS ने जताया दुख, कहा- पुलिस-SIT की जाँच पर पूरा विश्वास: कर्नाटक में संघ ने की 3 दिवसीय बैठक

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे को लेकर हुई गड़बड़ी पर दुख व्यक्त किया है। संगठन ने मामले की जाँच कर रही SIT और पुलिस की जाँच पर भी विश्वास जताया है। यह बयान RSS ने रविवार (12 जुलाई 2026) को कर्नाटक के बेलगावी में आयोजित तीन दिवसीय भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक के दौरान दिया है।

बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में RSS ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर चल रही SIT और पुलिस की कार्रवाई निर्णायक मोड़ तक पहुँचेगी, ऐसा विश्वास है। संघ ने यह भी अपेक्षा जताई कि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए, ताकि राम मंदिर के प्रति करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास पर किसी तरह का आघात न पहुँचे।

बेलगावी में 10 से 12 जुलाई तक चली इस वार्षिक बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले समेत देशभर से कुल 226 कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में मार्च 2026 के बाद संघ के विभिन्न स्तरों पर हुए प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। RSS के अनुसार, इस वर्ष देशभर में 83 संघ शिक्षा वर्ग और 12 कार्यकर्ता विकास वर्ग आयोजित किए गए, जिनमें कुल 18,842 स्वयंसेवकों ने प्रशिक्षण लिया। इन प्रशिक्षणों में शाखा संचलन, संघ कार्यपद्धति, ग्राम विकास, कुटुंब प्रबोधन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय शामिल रहे।

बैठक में शाखाओं के विस्तार और आगामी कार्ययोजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सितंबर महीने में अधिक से अधिक नई शाखाएँ शुरू करने की योजना पर विचार किया गया। इसके अलावा संघ के शताब्दी वर्ष के तहत अब तक आयोजित कार्यक्रमों की समीक्षा की गई और आगे होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार की गई। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि शताब्दी वर्ष के दौरान संपर्क में आए लोगों को सामाजिक कार्यों और ‘पंच परिवर्तन’ अभियान से कैसे जोड़ा जाए। साथ ही सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के वर्ष 2026-27 के प्रवास कार्यक्रम पर भी विचार किया गया।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बैठक में देश के मौजूदा हालात से जुड़े कई विषयों पर भी चर्चा हुई। इनमें आगामी जनगणना, जनसांख्यिकीय असंतुलन से जुड़ी चुनौतियाँ, युवाओं में बढ़ते नशे के दुष्प्रभाव और नशा मुक्ति के लिए प्राथमिकता के साथ अभियान चलाने की जरूरत शामिल रही। इसके अलावा संत शिरोमणि रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी विचार-विमर्श किया गया।