भारत सरकार रक्षा उत्पादन नीति में एक बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार पहली बार निजी भारतीय कंपनियों को मिसाइलों के विकास और निर्माण की अनुमति देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब तक मिसाइल निर्माण का काम मुख्य रूप से सरकारी रक्षा संस्थानों तक ही सीमित था।
सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत में विकसित स्वदेशी अस्त्र (Astra) मिसाइल को खरीदने में इंडोनेशिया जैसे देशों ने रुचि दिखाई है और भारत रक्षा निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ उत्पादन क्षमता का भी विस्तार करना चाहता है। इसे देश के रक्षा क्षेत्र में अब तक के सबसे बड़े सुधारों में से एक माना जा रहा है।
🚨Centre set to open missile sector to private Indian firms to meet surging domestic and international demand:
— Indian Infra Report (@Indianinfoguide) July 12, 2026
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अस्त्र मार्क-2 मिसाइल के निर्माण में निजी कंपनियों की होगी एंट्री
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्रालय जल्द ही अस्त्र मार्क-2 (Astra Mark-2) बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल के निर्माण के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव (RFP) आमंत्रित कर सकता है। इस प्रक्रिया में ICOMM, अडानी ग्रुप, भारत फोर्ज, टाटा ग्रुप और महिंद्रा ग्रुप जैसी बड़ी भारतीय कंपनियों के शामिल होने की संभावना है।
यह फैसला इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि भारतीय सशस्त्र बलों और मित्र देशों की ओर से इस मिसाइल की माँग लगातार बढ़ रही है, जबकि सरकारी कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) अकेले मौजूदा माँग को पूरा करने में सक्षम नहीं है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित अस्त्र मार्क-2 की मारक क्षमता लगभग 180 से 200 किलोमीटर है। इसे चीन की लंबी दूरी की PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइल का मुकाबला करने के लिए विकसित किया गया है, जिसे पिछले वर्ष ऑपरेशन सिंदूर से पहले पाकिस्तान को मिलने की खबरें सामने आई थीं।
इस मिसाइल को तेजस मार्क-1A, मिग-29, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल मरीन लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत किया जाएगा।
निजी क्षेत्र के लिए खोली जा सकती है प्रलय मिसाइल
सरकार का अगला कदम प्रलय (Pralay) सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल के विकास और निर्माण में भी निजी कंपनियों को शामिल करना हो सकता है। लगभग 500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह मिसाइल ध्वनि की गति से करीब छह गुना अधिक रफ्तार से उड़ान भर सकती है।
प्रलय भारत की इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्सेज का हिस्सा है। इस बल में लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल, अगली पीढ़ी की ब्रह्मोस मिसाइल और 300 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने में सक्षम एक्सटेंडेड रेंज पिनाका रॉकेट सिस्टम भी शामिल हैं। इन हथियार प्रणालियों के जरिए भारत अपनी लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद तेज हुई तैयारी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार ने आधुनिक युद्ध में लंबी दूरी से हमला करने वाले स्टैंड-ऑफ हथियारों की बढ़ती अहमियत को देखते हुए मिसाइल और रॉकेट क्षमता को तेजी से मजबूत करने का फैसला किया है। सरकार का उद्देश्य केवल आक्रामक हथियारों का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी रक्षा प्रणालियों को भी मजबूत करना है जो दुश्मन की मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर सकें।
हाल के वर्षों में हुए संघर्षों, विशेषकर ईरान-अमेरिका टकराव, ने भी यह दिखाया है कि मिसाइल हमले महत्वपूर्ण सैन्य और नागरिक ढाँचे को कितना नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसी कारण भारत अपनी वायु रक्षा क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दे रहा है।
मजबूत हो रहा भारत का एयर डिफेंस नेटवर्क
मिसाइल निर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ भारत अपने एयर डिफेंस नेटवर्क का भी लगातार विस्तार कर रहा है। भारत और इजरायल मिलकर नौसेना के युद्धपोतों के लिए लंबी दूरी की सरफेस-टू-एयर मिसाइल प्रणाली विकसित कर रहे हैं।
इसके अलावा देश कम लागत वाले ड्रोन से लेकर लंबी दूरी की रॉकेट और बैलिस्टिक मिसाइलों तक के खतरे से निपटने के लिए लेयर्ड एंटी-मिसाइल और एंटी-ड्रोन डिफेंस नेटवर्क तैयार कर रहा है। भारत को नवंबर में रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांचवीं यूनिट मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा सरकार देश की वायु सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए पाँच अतिरिक्त एस-400 सिस्टम खरीदने की योजना पर भी काम कर रही है। इससे भारत की हवाई सुरक्षा और मिसाइल रोधी क्षमता में और अधिक मजबूती आने की संभावना है।

