गुजरात के पाटन जिले में आने वाले हारीज नगरपालिका क्षेत्र से चौंकाने वाला मामला सामने आया, जहाँ बिना किसी आधिकारिक प्रस्ताव के राशन कार्ड के डिजिटल डेटाबेस में हिंदू बहुल इलाके का नाम बदल दिया गया। यहाँ ‘झापटपरा’ का नाम ऑनलाइन सरकारी प्रणालियों में बदलकर ‘इस्लामपुरा’ कर दिया गया था।
गंभीर फर्जीवाड़े पर ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित होने और हिंदू संगठनों के भारी विरोध के बाद अब जिला प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। पाटन के जिला कलेक्टर प्रशांत जिलोवा और सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (SDM) डी.के. मजेतर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए हारीज के मामलतदार को तुरंत जाँच करने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।
हारीज के प्रभारी मामलतदार वीरेंद्र वामदेव ने प्रशासनिक कार्रवाई की पुष्टि करते हुए आधिकारिक बयान दिया है। उन्होंने कहा, “स्थानीय नागरिकों और विभिन्न संगठनों से मिली प्रस्तुति और शिकायतों के बाद हमने ऑनलाइन डेटा की गहन चिकासन (सत्यापन) प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी है। अगले दो दिनों में सभी संबंधित सरकारी अभिलेखों और डिजिटलाइज्ड राशन कार्डों से ‘इस्लामपुरा’ नाम को पूरी तरह से हटा दिया जाएगा और उसके स्थान पर क्षेत्र का पारंपरिक नाम झापटपरा फिर से दर्ज करने की सुधारात्मक कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।”
यह पूरा विवाद तब सामने आया जब हारीज सिनेमा रोड पर स्थित झापटपरा क्षेत्र के करीब 48 परिवारों के डिजिटल राशन कार्डों में उनके पते में यह बड़ा बदलाव देखा गया। इसके बाद विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल और स्थानीय निवासियों ने सरकारी व्यवस्था में हुई इस बड़ी हेराफेरी के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।
हालाँकि जिला प्रशासन और आधिकारिक सूत्रों ने इस गंभीर लापरवाही पर पर्दा डालने का प्रयास करते हुए इसे महज एक ‘तकनीकी और डेटा एंट्री की मानवीय भूल’ करार दिया है। अधिकारियों का तर्क है कि वर्ष 2011 में जब पुराने राशन कार्डों को नए बारकोडेड राशन कार्डों में बदलने के लिए डिजिटलाइजेशन का काम चल रहा था, तब कुछ आवेदकों ने फॉर्म में पते के तौर पर स्थानीय मस्जिद के आसपास के इलाके का नाम ‘इस्लामपुरा’ लिख दिया था, जिसे कंप्यूटर ऑपरेटरों ने अनजाने में पूरे क्षेत्र के नाम के रूप में अपलोड कर दिया।
बहरहाल प्रशासन भले ही इसे 15 साल पुरानी एक क्लर्क की सामान्य गलती मान रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही इशारा करती है। स्थानीय लोगों और विश्लेषकों का मानना है कि कंप्यूटर या सॉफ्टवेयर खुद से किसी हिंदू आबादी वाले क्षेत्र का नाम नहीं बदल सकता। तकनीकी त्रुटि में स्पेलिंग की गलती हो सकती है, लेकिन पूरा नाम बदल जाना किसी सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करता है।
फिलहाल प्रशासन ने रिकॉर्ड में सुधार के आदेश तो दे दिए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस बात की माँग उठ रही है कि इस हेराफेरी के पीछे जिम्मेदार तत्कालीन ऑपरेटरों और अधिकारियों की संलिप्तता की उच्च स्तरीय जाँच होनी चाहिए।

