लगातार 11वें दिन यूएस ने ड्रोन स्टोरेज- हैंगर को किए तबाह, राष्ट्रपति ट्रंप ने परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की दी धमकी: जवाब में ईरान ने बहरीन-जॉर्डन के अमेरिकी ठिकानों पर दागे बम

अमेरिका ने ईरान पर लगातार 11वीं रात भयंकर बमबारी की है। उसने विमान हैंगर और ड्रोन समेत दूसरे हथियार के ठिकानों को निशाना बनाया। इससे पहले यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने हमले तेज करने की चेतावनी दी थी। उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका जल्द ही पिकैक्स माउंटेन के पास के क्षेत्र को भारी हमला करेगा।

दरअसल यह ईरान का भूमिगत परमाणु संवर्धन वाला क्षेत्र है। यहाँ भारी किलेबंदी की गई है। इस बीच अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा है कि ईरान में अमेरिकी युद्ध पर अब तक 37.5 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं, जो अनुमान से लगभग 8 अरब डॉलर अधिक है।

ताजा हमला ईरान के एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताओं और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया है। इसका मकसद ईरान सैन्य क्षमता को कमजोर करना है।

एक अमेरिकी अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि ईरान युद्ध में घायल अमेरिकी कर्मियों की संख्या बढ़कर 500 से अधिक हो गई है। जबकि अब तक 18 सैनिक मारे जा चुके हैं। ईरानी हमले में मारे गए अंतिम सैनिक की पहचान भी हो गई है।
ईरान पर हमलों की वजह से हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। केप्लर के आँकड़ों के अनुसार, मंगलवार (21 जुलाई 2026) को तीन मालवाहक जहाज जलडमरूमध्य से गुजरे, जबकि सोमवार (20 जुलाई 2026) को चार जहाज गुजरे थे। इसकी वजह से ब्रेंट क्रूड 1.2% बढ़कर 92.09 डॉलर प्रति बैरल हो चुका है। यह 11 जून के बाद से अब तक का सबसे ज्यादा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फिलीपींस में आसियान की बैठक में दावा किया कि युद्ध के दौरान ईरान की अर्थव्यवस्था और सेना दोनों बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर उन्होंने कहा कि युद्ध से पता चलता है कि पिछले 20 साल से ईरान अपना पैसा सिर्फ आतंकी ग्रुप की मदद और मिसाइल-ड्रोन सिस्टम को विकसित करने पर करता रहा है।

US के विदेश मंत्री का कहना है कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट में टोल को कंट्रोल करने और उगाही करने की कोशिश में लगा हुआ है। यह दुनिया की इकॉनमी और नेविगेशन की आजादी के लिए खतरनाक है। रुबियो ने कहा कि अगर हम ईरान की बात मान कर उसे हॉर्मुज स्ट्रेट से टोल वसूलने की आजादी दे देते हैं तो दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी इसका असर पड़ेगा। आसियान में कई नेताओं ने ईरान पर US-इज़राइल युद्ध और स्ट्रेट के बंद होने से होने वाले ग्लोबल एनर्जी संकट पर गंभीर चिंता जताई।

लेबनान से अमेरिका की सीधी उड़ान शुरू होगी

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वह अमेरिकी एयरलाइंस लेबनान के लिए सीधी उड़ान शुरू करेगा। वे इसके लिए अमेरिकी एयरलाइंस को अनुमति देने जा रहे हैं। ये उड़ान 1985 से बंद है, जब लेबनानी इस्लामी आतंकवादियों ने कई अमेरिकियों को ले जा रही टीडब्ल्यूए फ्लाइट का अपहरण कर लिया था। इसके बाद अमेरिका ने इसके बाद लेबनान की सीधी उड़ान को निलंबित कर दिया था।

ईरान ने बहरीन, जॉर्डन समेत कई देशों पर हमला किया

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन समेत कई पड़ोसी देशों के अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन की सेना ने बुधवार 22 जुलाई 2026 की सुबह चार ईरानी मिसाइलों को रोकने का दावा किया। हालाँकि दो अन्य मिसाइलों के खुले में गिरने की बात भी कही है।

इससे पहले कुवैत ने कहा कि ईरान ने उसके खारे पानी को मीठा बनाने वाले ठिकानों पर हमला किया है, जिससे पेयजल की आपूर्ति पर असर पड़ा है। इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप के परमाणु स्थलों पर हमले के ऐलान पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे भारी तनाव पैदा करने वाला कदम बताया है।

यमन में हूतियों ने नाकेबंदी की

यमन में ईरान समर्थक हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर नौसैनिक नाकाबंदी कर रखी है। इस संगठन का लाल सागर के कुछ क्षेत्रों पर नियंत्रण है। इनलोगों ने सऊदी अरब के बंदरगाहों से आने वाले ऑयल टेंकरों को निशाना बनाने का ऐलान कर दिया है। यही वजह है कि एक चीनी टैंकर और एक भारतीय टैंकर को अपना रास्ता बदलना पड़ा। माना जा रहा है कि हॉर्मुज स्ट्रेट के बाद लाल सागर में युद्ध का नया मोर्चा खुल सकता है। दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य के अवरुद्ध होने के कारण सऊदी अरब से आने वाला लाखों बैरल तेल इस मार्ग से ही जा रहा है।