देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने नीट (NEET) पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका को लिस्ट करने से इनकार करने वाली खबरों का खंडन किया है। CJI ने मीडिया रिपोर्ट्स को गलत और गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस संबंध में कोई औपचारिक रिट याचिका दायर ही नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि अदालत में केवल एक पत्र (रिप्रेजेंटेशन) का मौखिक रूप से उल्लेख किया गया था, जिसे याचिका नहीं माना जा सकता।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार (22 जुलाई 2026) को नरेंद्र मिश्रा नाम के वकील ने जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर हुई कथित पुलिस बर्बरता के मामले में जल्द सुनवाई की माँग की। वकील ने कहा था कि उनके पास पुलिस कार्रवाई के वीडियो सबूत हैं और छात्रों की पिटाई की गई है। इस पर CJI ने मेंशनिंग के दौरान वीडियो फुटेज देखने से इनकार करते हुए कहा था, “हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है। हमारा समय बर्बाद न करें।”
इसके बाद मीडिया में ऐसी खबरें आईं कि शीर्ष अदालत ने याचिका लिस्ट करने से मना कर दिया है। शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को मेंशनिंग के दौरान CJI सूर्यकांत ने इस पर नाराजगी जताते हुए स्थिति साफ की। उन्होंने कहा, “सुबह 10 बजे तक एक भी पन्ना दायर नहीं किया गया था। यह सिर्फ़ एक रिप्रेजेंटेशन था… जिसे मिश्रा या किसी और ने भेजा था। मैं उस रिप्रेजेंटेशन को रिट याचिका कैसे मान सकता हूँ? और लोग बिना सोचे-समझे इसकी रिपोर्ट करने लगते हैं।”
मुख्य न्यायाधीश ने सवाल उठाया कि किसी पत्र या प्रतिनिधित्व को औपचारिक याचिका कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से झूठा बयान फैलाया जा रहा है कि याचिका दायर की गई थी और उन्होंने उसकी सुनवाई से इनकार कर दिया।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को नीट परीक्षा लीक मामले को लेकर प्रदर्शनकारी छात्र और संगठन केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग कर रहे थे। उसी दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अदालत में मौखिक उल्लेख किया गया था, जिस पर CJI ने गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग करने वालों को सख्त ताकीद की है।

