परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित परीक्षा घोटालों पर सख्ती बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार सोमवार (27 जुलाई 2026) को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (24 जुलाई 2026) को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस संशोधन मसौदे को मंजूरी दी गई थी। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह लोकसभा में इस विधेयक को पेश करने की अनुमति माँगेंगे।
यह संशोधन विशेष रूप से NEET-UG 2026 परीक्षा में सामने आई व्यापक अनियमितताओं के बाद कानून को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। नए प्रावधानों के जरिए जाँच और न्यायिक प्रक्रिया के लिए समय-सीमा तय की जाएगी, विशेष अदालतें बनाई जाएँगी और दोषियों के लिए सजा एवं आर्थिक दंड को पहले से कहीं अधिक कठोर किया जाएगा।
Union Minister Dr Jitendra Singh to introduce The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 in the Lok Sabha on Monday, July 27
— ANI (@ANI) July 25, 2026
According to the legislative business agenda, he will introduce a Bill to amend the Public Examinations (Prevention of… pic.twitter.com/PL7dECRpSA
सजा और जुर्माने में बड़ा इजाफा, संगठित अपराध पर होगी और कड़ी कार्रवाई
विधेयक संख्या 139, 2026 के अनुसार, अधिनियम की धारा 10 के तहत अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए न्यूनतम सजा 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी जाएगी, जबकि अधिकतम सजा 10 वर्ष तक हो सकेगी। इसके साथ ही दोषियों पर अधिकतम 50 लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
परीक्षा आयोजित करने वाली सेवा प्रदाता एजेंसियों के लिए अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए कर दिया गया है। साथ ही सार्वजनिक परीक्षाएँ आयोजित करने से प्रतिबंधित किए जाने की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी जाएगी।
यदि किसी सेवा प्रदाता संस्था के निदेशक या जिम्मेदार अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें भी कम से कम 5 वर्ष की कैद होगी, जो पहले 3 वर्ष थी, और उन पर 5 करोड़ रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं धारा 11 के तहत संगठित अपराध के मामलों में न्यूनतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष कर दी जाएगी।
जबकि न्यूनतम जुर्माना 1 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपए कर दिया जाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ने पर इस अधिनियम के तहत मामलों की जाँच के लिए विशेष स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार भी रहेगा।
Centre to introduce ‘THE PUBLIC EXAMINATIONS (PREVENTION OF UNFAIR MEANS) AMENDMENT BILL, 2026’ in Parliament on Monday.
— Marya Shakil (@maryashakil) July 25, 2026
Proposed Bill states:
• Minimum punishment for paper leak and unfair means in exams enhanced from three years to five years with maximum sentence of 10… pic.twitter.com/hDDISsLwSO
दो महीने में जाँच और तीन महीने में ट्रायल पूरा करना होगा, बनेंगी विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें
संशोधन विधेयक के अनुसार, इस कानून के तहत दर्ज सभी मामलों की जाँच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। चाहे जाँच अधिकृत पुलिस अधिकारी करे, केंद्रीय जाँच एजेंसी करे या विशेष टास्क फोर्स, समय-सीमा सूचना दर्ज होने, संदर्भ मिलने या अधिसूचना जारी होने की तिथि से लागू होगी।
राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश, संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य जज से परामर्श कर विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट नामित कर सकेंगे। ये अदालतें इस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 या अन्य संबंधित कानूनों के अपराधों की भी संयुक्त सुनवाई करेंगी।
अदालतों में सुनवाई प्रतिदिन होगी और जब तक उपस्थित सभी गवाहों की गवाही पूरी नहीं हो जाती, तब तक बिना उचित लिखित कारण के स्थगन नहीं दिया जाएगा।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमे को तीन महीने के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। संशोधन कानून लागू होने के समय लंबित सभी मामलों को भी इन विशेष अदालतों में स्थानांतरित किया जाएगा और उन्हें भी अदालत में पहुँचने के तीन महीने के भीतर निपटाना होगा।
हाई कोर्ट में अपील, विशेष लोक अभियोजक और NTA में बड़े सुधारों की शुरुआत
हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को प्रत्येक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के लिए एक या अधिक विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor) नियुक्त करने होंगे। इन अदालतों के फैसलों, सजा या आदेश (अंतरिम आदेशों को छोड़कर) के खिलाफ संबंधित उच्च न्यायालय में दो न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष अपील की जा सकेगी।
ऐसी अपीलों का निस्तारण भी जहाँ तक संभव हो, दाखिल होने के तीन महीने के भीतर किया जाएगा। जमानत मंजूर या खारिज करने के आदेशों के खिलाफ भी हाई कोर्ट में अपील का प्रावधान रहेगा। सामान्यतः अपील 30 दिनों के भीतर दाखिल करनी होगी, हालाँकि अधिकतम 90 दिनों तक की अनुमति दी जा सकेगी।
प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बहाल करने के लिए केंद्र सरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में भी व्यापक सुधार कर रही है। अब तक 47 अधिकारियों की सेवाएँ समाप्त की जा चुकी हैं और कुछ के खिलाफ कानूनी एवं आपराधिक कार्रवाई की तैयारी है।
अगले एक महीने में पूरी होने वाली इस पुनर्गठन प्रक्रिया के तहत एजेंसी की आउटसोर्सिंग व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी, नए वरिष्ठ प्रबंधन और विषय विशेषज्ञों की नियुक्ति होगी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक और परीक्षा केंद्रों की निगरानी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और पेपर लीक-रोधी व्यवस्था विकसित की जा सके।

