अमेरिका और ईरान के बीच जंग लगातार 13वीं रात भी जारी रही। इसी बीच खबर आई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर बड़े हमले की योजना फिलहाल टाल दी है।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, शुक्रवार (24 जुलाई 2026) की रात को ट्रंप की अपने सलाहकारों और प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक हुई। इसमें बैठक में बताया गया कि पेंटागन के पास मौजूद पैट्रियट मिसाइल और वायु रक्षा गोला बारूद का भंडार पहले से ही कम हो चुका है।
ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल डैन केन ने चेतावनी दी कि बड़े स्तर पर सैन्य कार्ऱवाई संभव तो है, पर इससे सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलें खतरनाक स्तर तक घट सकती हैं। अप्रैल के अंत तक ही 1200 से ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें इस्तेमाल हो चुकी थीं, जिनमें हर एक की कीमत करीब 40 लाख डॉलर है।
अमेरिका को यह भी चिंता है कि लड़ाई और बढ़ने से खाड़ी देशों के सहयोगी नाराज हो सकते हैं, वैश्विक तेल और अर्थव्यवस्था संकट गहरा सकता है और शरणार्थी समस्या भी बढ़ सकती है। जॉर्डन में एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी रक्षा प्रणाली को भेदकर घुस गई थी, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे। इसके बाद से चिंता और बढ़ गई।
दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में एक और कार्गो जहाज MT लविन पर गोलीबारी की। यह जहाज ईरानी पोर्ट की नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था। सेंट्रल कमांड के अनुसार अब तक 12 जहाजों को रोका जा चुका है।
ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरामिनिया ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका फिर से हवाई हमले करता है तो जंग और बढ़ सगकती है। रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रवक्ता हुसैन मोहेबी ने कहा कि जो भी देश अमेरिका की मदद करेगा, चाहे ब्रिटेन हो या खाड़ी देश, वह भी वैध निशाना माना जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने हॉर्मुज में नया रास्ता खोलकर दोनों देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन किया है। हालाँकि ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज को लेकर बातचीत में कुछ प्रगति भी हुई है।

