सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने अपने उस पुराने फैसले को बरकरार रखा है जिसमें कहा गया था कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसका अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा खत्म हो जाता है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि उन्होंने पुनर्विचार याचिका और पुराने फैसले की गहराई से जाँच की है। बेंच ने स्पष्ट किया कि उन्हें रिकॉर्ड में कोई भी स्पष्ट गलती नजर नहीं आई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस अर्जी को भी ठुकरा दिया जिसमें मौखिक रूप से सुनवाई की माँग की गई थी।
इसके साथ ही मार्च 2026 का वह फैसला पूरी तरह लागू रहेगा, जिसमें यह साफ किया गया था कि ईसाई या अन्य धर्म अपनाने वाले व्यक्ति का SC दर्जा तुरंत प्रभाव से समाप्त हो जाता है।
मामला कैसे शुरू हुआ
यह पूरा मामला आंध्र प्रदेश का है। यहाँ एक व्यक्ति का जन्म अनुसूचित जाति में हुआ था, लेकिन बाद में उसने ईसाई धर्म अपना लिया और पादरी के रूप में काम करने लगा। इस व्यक्ति ने एक FIR दर्ज कराई थी।
इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का हवाला दिया गया था। उसका आरोप था कि उसे उसकी जाति का नाम लेकर अपमानित किया गया और धमकियाँ दी गईं।
हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी FIR
इस मामले के आरोपितों ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने FIR को रद्द करते हुए यह फैसला सुनाया था कि चूंकि शिकायतकर्ता ने ईसाई धर्म अपना लिया है, इसलिए वह कानून के तहत अनुसूचित जाति का दर्जा का दावा नहीं कर सकता है।
इस फैसले से असंतुष्ट होकर शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जहाँ मार्च महीने में कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया था।
SC का दर्जा दोबारा पाने की शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति दोबारा हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म अपना लेता है, तो वह SC का दर्जा वापस पा सकता है। हालाँकि, इसके लिए उसे तीन कड़े नियमों का पालन करना होगा। पहली शर्त यह है कि उस व्यक्ति को साबित करना होगा कि वह मूल रूप से SC जाति में पैदा हुआ था।
दूसरी शर्त यह है कि व्यक्ति को हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में अपनी सच्ची घर वापसी और पहले अपनाए गए धर्म को पूरी तरह छोड़ने का पुख्ता सबूत देना होगा। तीसरी और आखिरी शर्त यह है कि उसे यह साबित करना होगा कि उसके मूल जाति समुदाय के लोगों ने उसे दोबारा स्वीकार कर लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि अगर इनमें से एक भी शर्त पूरी नहीं होती है, तो SC दर्जे का दावा अमान्य माना जाएगा।

