एंटी पेपर लीक बिल पर संसद में 28 जुलाई 2026 को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस हुई। नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पर कॉन्ग्रेस सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा की टिप्पणी के बाद हंगामा हो गया। प्रह्लाद जोशी, निशिकांत दूबे और किरेन रिजिजू ने प्रियंका गाँधी से सबूत देने या माफी माँगने की माँग की। रिजिजू ने कहा कि शिक्षा मंत्री के चरित्र हनन का प्रयास किया गया।
#WATCH कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, "प्रियंका जी को अपने बयानों को प्रमाणित करना चाहिए था। फैलाई जा रही गलत सूचना के संबंध में कार्रवाई की जानी चाहिए। क्या कोई कुछ भी कह सकता है और इससे बच सकता है?…… https://t.co/pLOzQAQKMi pic.twitter.com/vwXfItRa02
— ANI_HindiNews (@AHindinews) July 28, 2026
कॉन्ग्रेस सांसद वेणुगोपाल ने निशिकांत दूबे पर सवाल उठाए और कहा कि आपने जवाहरलाल नेहरु और इंदिरा गाँधी पर जो टिप्पणियाँ की हैं, उन्हें रिकॉर्ड से क्यों नहीं हटाया गया। इस पर निशिकांत दुबे ने कहा कि उन्होंने ऑथेंटिकेट किया था। दरअसल प्रियंका गाँधी ने शिक्षा मंत्री पर बिल्किस बानो केस के आरोपितों के रिहाई को लेकर प्रह्लाद जोशी के कथित बयान का जिक्र किया था।
इससे पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने एंटी पेपर लीक बिल को लेकर कहा कि इसका मकसद परीक्षाओं को लीकमुक्त बनाना है। परीक्षा प्रणाली और उसकी पारदर्शिता राष्ट्रहित के लिए जरूरी है। सदन में केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कॉन्ग्रेस को घेरा और 2009 के रेलवे भर्ती परीक्षा के पेपर लीक से लेकर 2012 तक के एम्स प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक की बात की।
उन्होंने कहा कि 2010 में कमेटी ने सुझाव दिए थे जिसे यूपीए सरकार ने नहीं माना। हमने एनटीए का गठन किया और 2024 में लाए गए बिल को मजबूती देने के लिए नया संशोधन बिल लेकर आए। उन्होंने कहा कि सरकार स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने जा रही है ताकि जल्दी न्याय मिल सके। इसके लिए समयसीमा तय कर दी है। दो महीने के भीतर जाँच पूरी की जाएगी और उसके बाद जो भी ट्रायल कोर्ट होगा, उसमें तीन महीने का ज्यादा से ज्यादा समय लगेगा यानी 5 महीने से फैसला आ जाएगा।
इसके बाद अगर कोई अपील करना चाहे तो 30 दिन का वक्त मिलेगा। इसकी सुनवाई हाईकोर्ट डबल बेंच में हो पाएगी। चर्चा के दौरान विपक्ष ने जमकर हमले किए। कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने एनटीए के चेयरमैन पर आरोप लगाया और कहा कि लगातार लीक के बावजूद उन्हें क्यों नहीं बदला गया।
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने एंटी पेपर लीक बिल को पीएम मोदी की संवेदनशीलता का प्रमाण बताया। उन्होने कहा कि पीएम ने पेपर लीक को घोर पाप कहा था, ये सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि सरकार की नीयत बताती है। यही वजह है कि संसद में यह बिल लाया गया है। ये बिल ज्यूडिशियरी की उलझन को भी सुलझाता है।
उन्होंने 2014 से पहले के यूपीए सरकार से लेकर राजस्थान और पश्चिम बंगाल तक के पेपर लीक और नियुक्तियों में धाँधली की बात की। हाल में पंजाब में फार्मेसी अधिकारी नियुक्ति परीक्षा में हाईटेक ब्लूटूथ के इस्तेमाल का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने विपक्ष से पूछा कि अगर यह सिद्धांत की लड़ाई है, तो सरकार देखकर सिद्धांत कैसे बदल जाता है। उन्होंने कॉन्ग्रेस की ओर मुखातिब होकर पूछा कि पंजाब के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा अब तक क्यों नहीं माँगा।
बहस में भाग लेते हुए एसपी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा करा कर प्रधानमंत्री को बचा लिया। उन्होंने कहा कि युवाओं ने उन्हें झुका दिया। बहस के दौरान अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले का भी जिक्र किया। केन्द्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस दौरान इमरजेंसी को याद करते हुए कहा कि आंदोलन को कुचलने के लिए इमरजेंसी लगा देना अच्छा है या आंदोलन के बाद सुधार के लिए बिल लाना अच्छा है।
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने नीट परीक्षा का विरोध करते हुए कहा कि एक साथ 22 लाख परीक्षार्थियों को शामिल करना और उनमें से 20 लाख बच्चें असफल होने को ट्रॉमा फेस करना सही नहीं है। उन्होंने एनडीए सरकार में हुई पेपर लीक की घटनाओं को गिनाया।
बहस के दौरान सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि यह युवाओं के गुस्से का आंदोलन नहीं बल्कि इसे बदलाव की शुरुआत मानते हैं। उन्होंने कहा कि कोई परीक्षा हमारी जिंदगी तय नहीं करती इसलिए कोई भी कदम उठाने से पहले अपनी जिंदगी, परिवार और देश के बारे में सोचना चाहिए। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस कहती है कि वह युवाओं के साथ है लेकिन 36 दिन में एक बार भी जंतर-मंतर पर क्यों नहीं गए?

