उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही महीने बाकी बचे हैं। ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चुनाव प्रचार के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। सीएम योगी ने महज 2 महीने के भीतर राज्य की 100 से ज्यादा विधानसभा सीटों तक अपनी पहुँच बना ली है।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी 18 मंडलों का तूफानी दौरा किया है। इन दौरों में उन्होंने कई विकास कार्यों की समीक्षा की, जनता को नई सौगातें दीं और बड़ी जनसभाओं के जरिए सीधे आम लोगों से जुड़े हैं।
महज 45 दिनों में पूर्व से पश्चिम और बुंदेलखंड तक का तूफानी दौरा
सीएम योगी की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज 45 दिनों के अंदर पूरे यूपी को कवर कर लिया। उन्होंने पूर्व से लेकर पश्चिम और बुंदेलखंड तक के सभी प्रमुख क्षेत्रों का धुआँधार दौरा किया है।
उनके इन दौरों में बिजनौर, गाजियाबाद, आगरा, झांसी, मैनपुरी, वाराणसी और उनका गृह जिला गोरखपुर जैसे सभी महत्वपूर्ण इलाके शामिल रहे हैं। हर जगह उन्होंने स्थानीय जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया है।
योगी आदित्यनाथ की यह सक्रियता सिर्फ चुनावी रैलियों या सभाओं तक ही सीमित नहीं है। वे पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ-साथ विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से भी लगातार मुलाकात कर रहे हैं।
इसके अलावा, वे कानून-व्यवस्था की कड़ी समीक्षा करते हैं और अपना रोजाना का सरकारी कामकाज भी पूरी मुस्तैदी से संभालते हैं। वे नियमित रूप से ‘जनता दर्शन’ के जरिए आम लोगों की समस्याएँ सुनते हैं, जिससे सरकार, संगठन और जनता के बीच मजबूत तालमेल बना हुआ है।
चुनावी रैलियों में ‘100 और एक’ का बड़ा फर्क
मैदान में रैलियों और जनसंपर्क के आँकड़ों के लिहाज से देखें तो सीएम योगी और अखिलेश यादव में ‘100 और एक’ का स्पष्ट फर्क साफ नजर आता है। योगी आदित्यनाथ लगातार जनता के बीच बने हुए हैं।
लगातार दो कार्यकाल पूरे होने के बाद भी सीएम योगी की जमीनी सक्रियता और लोकप्रियता पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा है। इसके उलट, उनकी जनता के बीच मौजूदगी और मजबूत होती जा रही है।
विपक्ष का हाल बेहाल: मार्च 2026 के बाद से अखिलेश यादव की कोई बड़ी रैली नहीं
दूसरी तरफ अगर मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी की बात करें, तो उनकी सक्रियता जमीन पर बहुत कम नजर आ रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी आखिरी सार्वजनिक रैली मार्च 2026 में दादरी में की थी।
इस रैली को साल 2027 के चुनाव प्रचार का आधिकारिक आगाज माना गया था। लेकिन इसके बाद करीब चार महीने बीत जाने के बाद भी उनकी कोई बड़ी पब्लिक रैली नहीं हुई है। अब उनका पूरा फोकस केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया और नेताओं के निजी कार्यक्रमों तक ही सीमित रह गया है।
बसपा का सुस्त पड़ा अभियान
बहुजन समाज पार्टी की बात करें तो चुनावी सरगर्मी तेज होने के बावजूद बसपा जमीन पर सबसे सुस्त नजर आ रही है। भाजपा की तुलना में बसपा का चुनावी अभियान बहुत पीछे चल रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती की उत्तर प्रदेश में आखिरी बड़ी रैली 9 अक्टूबर 2025 को लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल पर हुई थी। इसके बाद से उनकी तरफ से चुनावी मैदान में कोई बड़ी जनसभा नहीं हुई है, और उनके ज्यादातर राजनीतिक संदेश केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए ही सामने आ रहे हैं।

