पाकिस्तान के खैबर पखतूनख्वा प्रांत में शांति मार्च के दौरान पुलिस स्टेशन के सामने रविवार (2 अगस्त 2026 ) को एक बड़ा धमाका हुआ है। इसमें करीब 14 लोगों की मौत हो गई जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। माना जा रहा है कि ये आत्मघाती हमला था, जिससे पुलिस स्टेशन को टारगेट किया गया था।
विस्फोट की वजह से मरने वालों में 5 पुलिसकर्मी शामिल हैं। इस धमाके के पीछे टीटीपी यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान का हाथ माना जा रहा है।
शांति रैली का आयोजन स्थानीय आदिवासी परिषद ‘स्वात अमन जिरगा’ ने किया था। इसमें शामिल लोग शांति की माँग को लेकर नारे लगा रहे थे और तख्तियाँ लिए हुए थे। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुलिस के कारण पिछले कुछ महीनों में सुरक्षा हालात बिगड़े हैं।
स्वात जिला पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध हमलावर ने पुलिस स्टेशन में घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिस स्टेशन के मुख्य गेट पर सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोक दिया। इसके बाद उसने मुख्य गेट पर ही विस्फोट कर दिया जिससे 5 पुलिसकर्मी मारे गए। अगर वह पुलिस स्टेशन में घुस जाता, तो और ज्यादा नुकसान हो सकता था। पाकिस्तान की पुलिस फिलहाल मामले की जाँच कर रही है। खैबर पख्तूनख्वा के सीएम मुहम्मद सुहैल अफरीदी ने धमाके की निंदा की है। यह वह इलाका है जहाँ पाकिस्तान की सरकार पहले से ही टीटीपी के धमाकों से दहली हुई है।
पाकिस्तान ने ही दी थी प्रश्रय
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP पाकिस्तान में 13-14 कबालियों ने मिलकर 2007 में गठन किया था। इनमें कई सक्रिय जिहादी गुट शामिल हैं। आमतौर पर इसे पाकिस्तानी तालिबान कहा जाता है। इसका उद्देश्य पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करना और पाकिस्तानी राज्य और सेना के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष करना है। यह संगठन विचारधारा में अफगान तालिबान से मिलता-जुलता है, लेकिन दोनों अलग संगठन हैं।
हालाँकि पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार TTP को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराती है, जिसे अफगानिस्तान नकारता रहा है।
दरअसल 1990 के दशक में पाकिस्तान ने अफगानी तालिबान और कई जिहादी संगठनों का समर्थन किया। लेकिन 2001 के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘वॉर ऑन टेरर’ में शामिल होकर अपने ही कबायली इलाकों में सैन्य अभियान शुरू कर किए, तो कई लड़ाके पाकिस्तान के खिलाफ हो गए।
इन्हीं गुटों ने 2007 में मिलकर TTP की स्थापना की। संगठन का आरोप था कि पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ देकर उनके साथ गद्दारी की है। TTP पाकिस्तान की सेना, पुलिस को अपना दुश्मन मानता है और पाकिस्तान के सरकारी संस्थानों और राजनीतिक नेताओं को निशाना बनाता रहा है।
पाकिस्तान की ‘नाक में दम’ कर रखा है TTP ने
TTP पाकिस्तान के लिए केवल एक दहशतगर्दी संगठन नहीं, बल्कि एक आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। इसका सबसे मजबूत नेटवर्क पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और पूर्व FATA क्षेत्र में है।
पाकिस्तान का दावा है कि TTP के कई कमांडर अफगानिस्तान से सीमा पार आकर हमले करते हैं और फिर सीमा पार कर अफगानिस्तान चले जाते हैं। नवंबर 2022 में सीजफायर खत्म होने के बाद TTP ने हमलों की रफ्तार काफी बढ़ा दी।
TTP ने पिछले महीने जुलाई 2026 में टैंक जिले में सुरक्षा चौकी पर आत्मघाती हमला किया था। इस हमले में 15 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई। पाकिस्तानी सेना ने जवाबी कार्रवाई में 12 हमलावरों को मार गिराने का दावा किया।
इससे पहले फरवरी 2026 में बाजौर चेकपोस्ट हमला पर हमला किया था। यह इलाका भी अफगानिस्तान से सटा हुआ है। अफगान सीमा से लगे बाजौर जिले में विस्फोटकों से भरे वाहन से सैन्य चौकी को निशाना बनाया था। इस हमले में 11 सुरक्षा कर्मी और एक बच्ची की मौत हुई थी। टीटीपी ने हमले की जिम्मेदारी भी ली थी।
दो साल पहले मार्च 2024 में टीटीफी के फिदायीन हमले में 12 पाकिस्तानी फौजियों की मौत हो गई थी। यह हमला उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में सैन्य चौकी पर हुआ था। उस वक्त भी सैन्य चौकी में घुसने की कोशिश की गई। इसमें 12 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे।
पाकिस्तान ने इसका आरोप TTP पर लगाया था और कहा था कि हमलावर अफगानिस्तान से आए थे। इस घटना के बाद पाकिस्तान ने अफगान सीमा के पार भी जवाबी कार्रवाई की थी। उसने अफगानिस्तान में एयरस्टाइक की थी और कई शहरों को निशाना बनाया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान की सेना पाकिस्तानी सीमा के अंदर घुस गई थी और पाकिस्तानी सैनिकों को अपना सैन्य मोर्चा छोड़कर भागना पड़ा था।
लगातार बढ़ते हमलों के बाद पाकिस्तान ने बड़े पैमाने पर इन लड़ाकों के खिलाफ अभियान चलाए हैं। सेना का कहना है कि वह हजारों इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन कर चुकी है और TTP के ठिकानों को निशाना बना रही है। दूसरी ओर पाकिस्तान बार-बार अफगान तालिबान सरकार पर TTP को पनाह देने का आरोप लगाता है, जबकि काबुल इन आरोपों से इनकार करता है।
टीटीपी आज पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा घरेलू सुरक्षा खतरा मानी जाती है। जिस जिहादी ढाँचे को कभी पाकिस्तान ने अपनी क्षेत्रीय रणनीति के लिए तहत हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था, उसमें से निकला यह संगठन अब उसकी सेना, पुलिस और सरकारी संस्थानों पर लगातार हमले कर रहा है। पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा नहीं कर पा रहा और आरोप अफगानिस्तान के सिर मढ़ रहा है।

