मुस्लिम वोट के लिए कॉन्ग्रेसी तुष्टिकरण: इमरान मसूद UP के कार्यकारी अध्यक्ष, कहा था – ‘औरंगजेब अखंड भारत बनाने वाला… मुस्लिम एक हों तो सब मेरे पैर पकड़ेंगे’

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस ने सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सूबे की राजनीति में हलचल मच गई। इस फैसले पर सबसे पहले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने तंज कसा, फिर भाजपा ने भी कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों को घेर लिया। दोनों दलों का कहना है कि इस नियुक्ति से कॉन्ग्रेस-सपा गठबंधन की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

रालोद प्रवक्ता रोहित अग्रवाल ने कहा कि सीटों के बँटवारे को लेकर कॉन्ग्रेस और सपा के बीच खींचतान अब चरम पर पहुँच चुकी है। उनके मुताबिक कॉन्ग्रेस अपने आत्मसम्मान से समझौता करने के मूड में नहीं है और 150 से कम सीटों पर राजी नहीं होगी।

रोहित अग्रवाल ने इमरान मसूद के पुराने बयानों का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि वह आखिर किसके इशारे पर बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मसूद के बयानों के पीछे की मंशा समझनी होगी, क्योंकि अब उन्हें इनाम के तौर पर बड़ी जिम्मेदारी दे दी गई है।

रालोद बोली- सपा के अंदर सब ठीक नहीं

रालोद प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि समाजवादी पार्टी के अंदर भी सब कुछ ठीक नहीं है। उनका कहना था कि जो कार्यकर्ता सालों से टिकट की आस लगाए बैठे हैं, वे खुद पूछ रहे हैं कि कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन की जरूरत ही क्या है। अग्रवाल के अनुसार सपा के कई कार्यकर्ता मानते हैं कि यूपी में कॉन्ग्रेस की कोई खास जमीन नहीं बची है, ऐसे में उसे सीटें देना घाटे का सौदा है।

गठबंधन की हालत पर चुटकी लेते हुए उन्होंने इसे ऐसी रस्सी बताया, जो दोनों तरफ से खिंच रही है। अग्रवाल ने सवाल किया कि अब टूटने की बारी किसकी है, सपा के भीतर का असंतोष पहले फूटेगा या गठबंधन में पहले दरार पड़ेगी। उन्होंने सपा की स्थिति को ‘एक तरफ कुआँ, दूसरी तरफ खाई’ बताया। एक तरफ कॉन्ग्रेस की भारी माँग है और दूसरी तरफ अपने ही कार्यकर्ताओं की नाराजगी।

2027 के चुनाव का जिक्र करते हुए अग्रवाल ने आरोप लगाया कि दोनों दलों के बीच असल लड़ाई सत्ता की है। उनका कहना है कि जनता यह सब देख रही है और समझ चुकी है कि इनके एजेंडे में जनसेवा प्राथमिकता पर नहीं है।

भाजपा का हमला- तुष्टिकरण में कॉन्ग्रेस ने सपा को भी पीछे छोड़ा

इस मुद्दे पर भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने भी कॉन्ग्रेस और सपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वोट बैंक के लिए तुष्टिकरण की जो होड़ चल रही है, उसमें कॉन्ग्रेस अब सपा से एक कदम आगे निकल गई है। उनके मुताबिक इमरान मसूद को भले ही ‘कार्यकारी’ अध्यक्ष बनाया गया हो, पर पार्टी ने उन्हें तवज्जो देकर बड़ा पद थमा दिया है।

त्रिपाठी का दावा है कि मसूद लगातार कॉन्ग्रेस नेतृत्व के इशारे पर समाजवादी पार्टी को उकसाने और चुनौती देने का काम कर रहे थे। जो निर्देश कॉन्ग्रेस की तरफ से मिले, उन्हें मसूद ने ‘सफलतापूर्वक’ निभाया और अब उसी का इनाम उन्हें मिला है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अब सपा के लिए मसूद के साथ बैठकर गठबंधन की बात करना और मुश्किल हो जाएगा और चुनाव से पहले उसे कॉन्ग्रेस को कुछ ज्यादा सीटें देनी ही पड़ेंगी।

विवादित रहे हैं इमरान मसूद

इमरान मसूद का नाम विवादित बयानों से पुराना जुड़ा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में जब वह सहारनपुर से कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार थे, तब एक सार्वजनिक रैली में उन्होंने कहा था कि वह नरेंद्र मोदी के ‘टुकड़े-टुकड़े’ कर देंगे। यह बयान उस समय खूब सुर्खियों में रहा था। बाद में 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए जब कॉन्ग्रेस ने अपनी समिति बनाई, तो उसमें भी मसूद को जगह दी गई थी।

एक अन्य वायरल वीडियो में मसूद मुस्लिम समुदाय को एकजुट होने की नसीहत देते सुनाई देते हैं। वीडियो में वह कहते हैं कि अगर सभी मुसलमान एक हो जाएँ तो सब उनके पैर पकड़ेंगे। ऐसा नहीं है इसलिए उन्हें दूसरों के पैर छूने पड़ रहे हैं। उसी बयान में उन्होंने यह भी कहा कि लोगों ने उनका ‘कुत्ता बनवा दिया’।

हाल के समय में मुगल बादशाह औरंगजेब को लेकर दिया गया उनका बयान भी चर्चा में रहा है। कॉन्ग्रेस सांसद मसूद ने औरंगजेब की तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि औरंगजेब आतताई नहीं बल्कि अखंड भारत बनाने वाला बादशाह था, जिसने 49 साल राज किया और कैलाश मानसरोवर से लेकर बर्मा तक देश को जोड़ा।