पूर्व सांसद और उर्दू अखबार नई दुनिया के प्रधान संपादक शाहिद सिद्दीकी अपने एक पॉडकास्ट में RSS से जुड़े स्कूलों को लेकर किए गए दावों के बाद आलोचनाओं के घेरे में हैं। उनके यूट्यूब चैनल I Witness with Shahid पर आए पॉडकास्ट का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
इसमें सिद्दीकी ने दावा किया है कि पूर्वोत्तर राज्यों से बच्चों, खासकर लड़कियों को लाकर अलग-अलग जगहों पर रखा जाता है और उन्हें कथित तौर पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत फैलाने की ट्रेनिंग दी जाती है।
वायरल क्लिप में सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि RSS से जुड़े लोग पूर्वोत्तर से लड़कियों को लाकर उन्हें अलग-अलग स्थानों पर रखते हैं और उनका प्रशिक्षण करते हैं। उन्होंने दावा किया कि इन बच्चों को ईसाइयों और मुसलमानों समेत अल्पसंख्यकों से नफरत करना सिखाया जाता है।
सिद्दीकी ने यह भी दावा किया कि पिछले करीब 10 वर्षों में लगभग 10 लाख बच्चों को इस तरह अपने कब्जे में लिया गया है। हालाँकि इन दावों के समर्थन में उन्होंने पॉडकास्ट में कोई स्पष्ट दस्तावेज या ठोस सबूत पेश नहीं किया।
माता-पिता को भी पूरी जानकारी नहीं देने का आरोप
सिद्दीकी ने अपने दावे में आगे कहा कि बच्चों के माता-पिता से कथित तौर पर कहा जाता है कि उन्हें पढ़ाई और बेहतर नौकरी के अवसरों के लिए बाहर ले जाया जा रहा है। उनका आरोप था कि माता-पिता की सहमति तो ली जाती है, लेकिन उन्हें बच्चों के साथ आगे क्या किया जाएगा, इसकी पूरी तस्वीर नहीं बताई जाती।
उन्होंने दावा किया कि बच्चों को दूसरे स्थानों पर ले जाने के पीछे शिक्षा और रोजगार का उद्देश्य बताया जाता है, जबकि कथित तौर पर इसके अलावा भी उन्हें अलग तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। इन गंभीर आरोपों के बाद RSS विचारक रतन शारदा ने सिद्दीकी के दावों पर सवाल उठाए हैं।
शारदा इससे पहले भी RSS और उससे जुड़ी गतिविधियों को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जाने वाले दावों और गलत सूचनाओं की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने सिद्दीकी के आरोपों के आधार और उनके स्रोत पर सवाल उठाया।
This is disgusting vile propaganda. Images are disturbing & totally misleading. RSS allied organisations run most transperant schools and hostels. They never convert. North East hostels have hundreds of Christian children. No allurements are ever offered. Is this to equate them… https://t.co/5jD1bjyp3X
— Ratan Sharda 🇮🇳 रतन शारदा (@RatanSharda55) August 9, 2026
पहले भी विवादों में रहे हैं शाहिद सिद्दीकी
शाहिद सिद्दीकी का नाम इससे पहले भी कई विवादित बयानों और सोशल मीडिया पोस्टों को लेकर चर्चा में रहा है। वर्ष 2021 में उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें उन्होंने सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के मदरसों को लेकर दावा किया था कि उन्होंने वहाँ कई संस्थानों को आर्थिक मदद दी है।
वीडियो में उन्हें कहते हुए सुना गया था, “सहारनपुर में ऐसा एक भी मदरसा नहीं है, यहाँ तक कि मुजफ्फरनगर में भी ऐसा कोई मदरसा नहीं है, जहाँ मैंने आर्थिक मदद नहीं की हो।” उन्होंने ऐसे संस्थानों को करोड़ों रुपए देने का भी दावा किया था।
कोरोना महामारी के दौरान भी सिद्दीकी चर्चा में आए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी से रेमडेसिविर की मदद माँगी थी। बाद में उन्होंने सार्वजनिक तौर पर बताया कि प्रियंका गाँधी ने उनके लिए दवा की व्यवस्था की थी और वह नहीं चाहती थीं कि सिद्दीकी सार्वजनिक रूप से उनका धन्यवाद करें।
उस समय देश में रेमडेसिविर की भारी कमी थी, जिसके चलते इस मामले पर भी सवाल उठे थे। मई 2020 में सिद्दीकी ने एक वीडियो शेयर करते हुए सरकार पर प्रवासी मजदूरों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने वीडियो के साथ लिखा था, “देखिए, यह माँ अपने बच्चे के साथ मालगाड़ी में सफर कर रही है।” बाद में सामने आया कि वह वीडियो भारत का नहीं, बल्कि बांग्लादेश का था और 2016 का पुराना वीडियो था।
कई बार बदली राजनीतिक राह
सिद्दीकी का राजनीतिक सफर भी लगातार बदलते रुख के लिए जाना जाता है। उन्होंने कॉन्ग्रेस से शुरुआत की और 1997 में पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रमुख बने। इसके बाद 2002 में समाजवादी पार्टी में शामिल हुए और 2008 तक सपा की ओर से राज्यसभा सांसद रहे।
बाद में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का रुख किया, लेकिन मायावती की आलोचना करने के बाद उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। इसके बाद 2010 में वह राष्ट्रीय लोक दल (RLD) में शामिल हुए, लेकिन 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले RLD के कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन करने के फैसले के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी।
इसके बाद वह फिर समाजवादी पार्टी में लौट आए। 2012 में समाजवादी पार्टी ने सिद्दीकी को पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसकी एक बड़ी वजह उनका गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू लेना था। इस इंटरव्यू के बाद सिद्दीकी को लेकर राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया।
बाद में 2019 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया। हालाँकि उन्होंने उस समय साफ किया था कि उन्होंने औपचारिक रूप से AAP की सदस्यता नहीं ली है।

