सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद को देश में चले लंबे गृहयुद्ध के दौरान किए गए अपराधों के मामले में एक सीरियाई अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई है। उनके छोटे भाई माहेर अल-असद और उनके रिश्तेदार आतिफ नजीब को भी इसी मामले में मौत की सजा मिली है। असद परिवार के 50 साल से अधिक लंबे शासन के खत्म होने के बाद उसके सदस्यों के खिलाफ यह पहली बड़ी अदालती कार्रवाई है।
अदालत ने सीरिया में करीब 14 साल चले संघर्ष से जुड़े अपराधों के लिए बशर अल-असद को जिम्मेदार ठहराया। इनमें युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध शामिल हैं। 2011 में विरोध प्रदर्शनों से शुरू हुए इस युद्ध में करीब 5 लाख लोगों की मौत हुई और लाखों सीरियाई लोगों को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
आतिफ नजीब को भी मौत की सजा
आतिफ नजीब, सीरियाई सेना का पूर्व ब्रिगेडियर जनरल और असद का माँ की ओर से रिश्तेदार है। उसे भी मौत की सजा सुनाई गई है। 2011 में नजीब दक्षिणी सीरिया के दारा में राजनीतिक सुरक्षा शाखा का प्रमुख था।
अदालत ने कहा कि दारा में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई में नजीब की बड़ी भूमिका थी। यहीं से असद सरकार के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत हुई थी। अदालत ने उसे 15 साल से कम उम्र के बच्चों की जानबूझकर हत्या और ऐसी यातना देने जैसे अपराधों का दोषी पाया, जिसके कारण लोगों की मौत हुई। अदालत ने इन कृत्यों को मानवता के खिलाफ अपराध माना और सबसे कठोर सजा के तौर पर मौत की सजा सुनाई।
बशर और माहेर अल-असद अदालत में मौजूद नहीं थे जबकि नजीब को सीरिया में गिरफ्तार किया गया था और अदालत में उसकी मौजूदगी में मुकदमा चला। असद सरकार के पतन के बाद मुकदमे का सामना करने वाले पूर्व सरकारी अधिकारियों में नजीब सबसे ऊँचे पदों पर रहे अधिकारियों में से एक है।
रूस भाग गया था असद परिवार
दिसंबर 2024 में इस्लामवादी नेतृत्व वाली सेनाओं के दमिश्क पर कब्जे के बाद बशर अल-असद और माहेर अपने परिवार के सदस्यों के साथ सीरिया से निकलकर मॉस्को चले गए थे। बाद में रूस ने उन्हें शरण दे दी। सीरिया के नए अधिकारियों ने असद सरकार के पूर्व अधिकारियों को न्याय के कटघरे में लाने की कोशिश शुरू की है, इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो देश छोड़कर चले गए हैं।
असद सरकार के पतन के बाद अहमद अल-शरा सीरिया के नए नेता बने। वे अल-कायदा के पूर्व कमांडर रह चुके हैं और अमेरिका ने उन्हें पहले आतंकवादी घोषित किया था। उन्होंने देश में एक अंतरिम सरकार बनाई।
असद परिवार ने 5 दशक से अधिक समय तक सीरिया पर शासन किया। पहले हाफिज अल-असद और बाद में उनके बेटे बशर अल-असद ने देश की सत्ता संभाली। 2011 में अरब स्प्रिंग के दौरान शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की हिंसक कार्रवाई के बाद यह आंदोलन पूर्ण गृहयुद्ध में बदल गया।
सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के अनुसार, इस संघर्ष में 5 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। लाखों अन्य लोग लेबनान, जॉर्डन, तुर्की और यूरोप के कई देशों में शरण लेने के लिए मजबूर हुए।
असद सरकार पर सत्ता में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सांप्रदायिक तनाव का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगे। उस दौर की विरासत आज भी सीरिया को प्रभावित कर रही है। देश में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी हिंसा अब भी एक बड़ी चिंता बनी हुई है जबकि नया नेतृत्व ऐसा राजनीतिक तंत्र बनाने का वादा कर रहा है जिसमें समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व हो।
इससे पहले किन-किन राष्ट्राध्यक्षों को सुनाई या दी गई सजा-ए-मौत
- सद्दाम हुसैन (इराक): इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को 2003 में अमेरिकी आक्रमण के बाद सत्ता से हटा दिया गया था। विशेष इराकी ट्रिब्यूनल ने उन्हें नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया और 30 दिसंबर 2006 को फाँसी दे दी गई।
- निकोलाए चाउशेस्कु (रोमानिया): कम्युनिस्ट रोमानिया के पूर्व राष्ट्रपति चाउशेस्कु को 1989 में जनविद्रोह के बाद सत्ता से हटाया गया। 25 दिसंबर 1989 को विशेष सैन्य ट्रिब्यूनल ने उन्हें नरसंहार का दोषी ठहराया और फायरिंग स्क्वाड ने उन्हें गोली मार दी।
- जुल्फिकार अली भुट्टो (पाकिस्तान): पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भुट्टो को 1977 के सैन्य तख्तापलट के बाद एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश के मामले में दोषी ठहराया गया। 4 अप्रैल 1979 को उन्हें फाँसी दे दी गई।
- हिदेकी तोजो (जापान): द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान के प्रधानमंत्री रहे तोजो को युद्ध अपराधों के लिए इंटरनेशनल मिलिट्री ट्रिब्यूनल ने 1948 में फाँसी की सजा दी।
- अदनान मेंडेरेस (तुर्की): तुर्की के पूर्व प्रधानमंत्री मेंडेरेस को 1960 के सैन्य तख्तापलट के बाद संविधान के उल्लंघन के आरोप में 1961 में फाँसी दे दी गई।
- शेख हसीना (बांग्लादेश): बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को नवंबर 2025 में इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान करीब 1,400 लोगों की हत्या और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई। अगस्त 2024 में सत्ता से हटने के बाद से वह भारत में हैं, इसलिए सजा पर अमल नहीं हो सका।
- चुन डू-ह्वान (दक्षिण कोरिया): दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति चुन डू-ह्वान को 1979 के सैन्य तख्तापलट और 1980 के ग्वांगजू विद्रोह में विद्रोह तथा देशद्रोह के मामले में 1996 में मौत की सजा सुनाई गई। बाद में सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया और अंततः उन्हें पूर्ण माफी मिल गई।
- परवेज मुशर्रफ (पाकिस्तान): पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को 2019 में संविधान निलंबित करने के मामले में विशेष अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुनाई। 2020 में लाहौर हाईकोर्ट ने इस सजा और विशेष अदालत के गठन को ही असंवैधानिक घोषित कर दिया।
- जलाल बायर (तुर्की): तुर्की के पूर्व राष्ट्रपति जलाल बायर को 1960 के तख्तापलट के बाद मौत की सजा सुनाई गई थी। उनकी वृद्धावस्था के कारण सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया और 1966 में उन्हें रिहा कर दिया गया।

