भोपाल में UCC की अफवाह से निकाह के लिए मची होड़: 7 गुना से अधिक बढ़े रोज आने वाले आवेदन, ‘Cousin Marriage’ बंद होने का मुस्लिमों को सताया डर

यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर भ्रम और अफवाहों के कारण मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में निकाह के आवेदनों में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली है। कई मुस्लिम परिवार काजी के दफ्तरों में पहुँचने लगे हैं। उन्हें डर है कि राज्य में UCC लागू होने के बाद कुछ रिश्तेदारों, जिनमें कजिन भी शामिल हैं, के बीच निकाह पर रोक लग सकती है।

अधिकारियों के मुताबिक, पहले रोजाना करीब 30-40 निकाह के आवेदन आते थे लेकिन अब इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। कुछ रिपोर्टों में रोजाना 200 से ज्यादा आवेदन आने की बात कही गई है जबकि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. संवर पटेल ने यह संख्या करीब 300 बताई है।

परिवारों ने निकाह की तारीख जल्दी की

अधूरी जानकारी से पैदा हुए डर के कारण कई परिवारों ने अपनी निकाह की योजनाओं में बदलाव कर दिया है। कुछ शादियाँ महीनों पहले तय हो चुकी थीं, जबकि कुछ की तारीख छह महीने बाद की थी या उनकी योजना पहले से बनाई गई थी।

डॉ. संवर पटेल ने बताया कि परिवार अब तय तारीख का इंतजार करने के बजाय तुरंत निकाह कराने के लिए काजी के दफ्तरों का रुख कर रहे हैं। पटेल ने कहा, “यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू होने की आशंकाओं के कारण भोपाल में रोजाना मिलने वाले निकाह के आवेदनों की संख्या 30-40 से बढ़कर करीब 300 हो गई है।”

उनके मुताबिक, मुस्लिम समुदाय के कुछ परिवारों में कुछ रिश्तेदारों, जिनमें कजिन भी शामिल हैं, के बीच निकाह की परंपरा रही है। मध्य प्रदेश में UCC पास होने के बाद यह अफवाह फैल गई कि कानून लागू होने पर ऐसी शादियों पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी। इससे उन परिवारों में डर फैल गया, जिनके यहां ऐसी शादियां पहले से तय थीं।

काजी के दफ्तरों में अचानक बढ़े निकाह के आवेदन

भोपाल के नायब शहर काजी मुफ्ती अली कादर ने भी बताया कि अफवाह फैलने के बाद निकाह के आवेदनों में बढ़ोतरी शुरू हुई। उन्होंने कहा, “एक मैसेज फैला कि खून के रिश्तों में निकाह की अनुमति नहीं होगी। हालाँकि, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और शहर काजी ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी गलत है।”

कादर के मुताबिक, पहले काजी के दफ्तरों में रोजाना करीब 30-40 निकाह के आवेदन आते थे। अफवाह फैलने के बाद यह संख्या बढ़कर करीब 200-250 रोजाना हो गई। उन्होंने बताया कि कई परिवारों ने आने वाली शादियों के लिए पहले ही बड़ी तैयारियाँ कर रखी थीं। ऐसे में वे किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहते थे।

निकाह के खर्च और तैयारियों को लेकर भी चिंता

कई परिवारों के लिए चिंता सिर्फ निकाह को लेकर नहीं थी। कुछ लोगों ने पहले ही मैरिज हॉल बुक कर लिए थे, कैटरर तय कर दिए थे और दूसरी तैयारियाँ भी कर ली थीं। उन्हें डर था कि अगर UCC लागू होने के बाद ऐसी शादियों पर रोक लग गई तो उनकी निकाह की योजना प्रभावित हो सकती है और पहले खर्च किया गया पैसा भी बर्बाद हो सकता है।

मुफ्ती अली कादर ने बताया कि कुछ परिवारों को यह चिंता भी थी कि अगर बाद में कानून में बदलाव किया गया या उसे वापस ले लिया गया, तब भी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। इसी अनिश्चितता के कारण कई लोगों ने तय समय से पहले निकाह के लिए आवेदन कर दिया।

वक्फ बोर्ड ने समझाया UCC की धारा 4(4) का प्रावधान

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने अब ऐसी शादियों से जुड़े प्रावधान को समझाकर लोगों का भ्रम दूर करने की कोशिश की है। बोर्ड के मुताबिक, UCC की धारा 4(4) में उन शादियों के लिए अपवाद रखा गया है, जो धार्मिक रीति-रिवाज, प्रथा या परंपरा के तहत होती हैं। बोर्ड का कहना है कि अगर दूल्हा और दुल्हन दोनों मुस्लिम हैं और उनकी स्थापित परंपरा या प्रथा किसी खास रिश्ते के भीतर निकाह की अनुमति देती है, तो वह प्रथा जारी रह सकती है।

डॉ. पटेल ने यह भी कहा कि हिंदी भाषा वाले शुरुआती संस्करण में शब्दों को लेकर एक समस्या थी। उनके मुताबिक, शुरुआत में इसे इस तरह लिखा गया था, जिससे यह संकेत मिलता था कि संबंधित प्रथा ऐसी निकाह की अनुमति नहीं देती। बाद में इसे ठीक किया गया और इसमें यह स्पष्ट किया गया कि लागू होने वाली प्रथा या परंपरा ऐसी निकाह की अनुमति देती है।

उन्होंने कहा कि इस प्रावधान को अलग से पढ़कर यह नहीं समझना चाहिए कि मुस्लिमों में कजिन मैरिज पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर भरोसा न करने को कहा

वक्फ बोर्ड और काजी के दफ्तर अब परिवारों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि मुस्लिमों में कजिन मैरिज पर पूरी तरह रोक लगने की अफवाह गलत है।

अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि मैसेज, अफवाहों या अधूरी जानकारी के आधार पर कोई बड़ा फैसला न लें। उन्होंने परिवारों से कानून के वास्तविक प्रावधानों को देखने और निकाह की योजनाओं में बदलाव करने से पहले धारा 4(4) में दिए गए अपवाद को समझने की अपील की है।

भोपाल में निकाह के आवेदनों में अचानक आई तेजी यह दिखाती है कि किसी बड़े कानूनी बदलाव को लेकर फैली अफवाहें कितनी तेजी से लोगों के निजी और पारिवारिक फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं। वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और काजी के मुताबिक, इस मामले में पैदा हुई घबराहट मुख्य रूप से डर और भ्रम के कारण थी, न कि ऐसे निकाह के नियमों में किसी तत्काल बदलाव के कारण।