अन्याय का प्रतिकार, धर्म की रक्षा, निर्बल का संरक्षण: भगवान कृष्ण के आदर्शों पर चल रही UP सरकार, जन्माष्टमी पर CM योगी की ‘पाती’

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की जनता के नाम एक चिट्ठी लिखी। इस चिट्ठी में उन्होंने भगवान कृष्ण को सिर्फ पूजा-पाठ की मूर्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा के रूप में पेश किया। यह बात गौर करने लायक है कि उन्होंने कृष्ण के जीवन को धर्म तक सीमित रखने से साफ इनकार किया और इसे समाज, संस्कृति और शासन तीनों से जोड़ दिया।

बात शुरू होती है मथुरा की उस कैद से, जहाँ भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। सीएम योगी ने अपने संदेश में इस पल को बड़े प्रतीकात्मक अंदाज़ में पेश किया कि जब चारों तरफ झूठ और अन्याय का अँधेरा था, ठीक उसी वक्त सच्चाई की एक किरण फूट पड़ी। उनके मुताबिक कृष्ण की बचपन की शरारतें, जिन्हें हम आमतौर पर सिर्फ मनोरंजन के लिए सुनते-सुनाते हैं, दरअसल उनमें कहीं गहरे संदेश छुपे हुए हैं।

सीएम योगी ने कहा- श्रीकृष्ण का गोवर्धन पर्वत उठाना जिंदगी बचाने का संदेश

माखन चुराने की बात हो या गोपियों के साथ उनका सहज लगाव, इन कहानियों के पीछे सीएम योगी को सादगी और अपनापन नजर आता है। नाग को काबू में करने वाली कथा में उन्हें बुराई पर अच्छाई की जीत का सबक दिखता है। लेकिन जिस लीला पर उन्होंने सबसे ज़्यादा ज़ोर दिया, वो है गोवर्धन पर्वत उठाने की घटना।

सीएम योगी का कहना है कि यह सिर्फ एक चमत्कार भर नहीं था, बल्कि प्रकृति, पशुओं और खेती-किसानी पर टिकी जिंदगी को बचाने का एक संदेश था और गोवर्धन पूजा को उन्होंने महज रस्म न मानते हुए सामूहिक ताकत और मिलजुल कर काम करने की मिसाल बताया। सीएम योगी ने कहा कि ये एक ऐसा संदेश है, जो आज पर्यावरण को लेकर बढ़ती चिंताओं के दौर में और भी बड़ा उदाहरण है।

कृष्ण किसी विशेष जाति के नहीं, वे सभी के साथ खड़े रहे

चिट्ठी में सीएम योगी ने कृष्ण को किसी खास तबके या वर्ग से जोड़ने से इनकार किया। उनके शब्दों में कृष्ण किसी एक जाति या वर्ग के भगवान नहीं रहे, वे हर तबके के साथ खड़े नजर आते हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने सुदामा और द्वारकाधीश की दोस्ती का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक राजा और एक साधारण ब्राह्मण के बीच की वो दोस्ती, जो पद या दौलत से नहीं बल्कि दिल के रिश्ते से बनी थी। योगी ने इसे आज के समाज के लिए एक सबक की तरह पेश किया, जहाँ बराबरी और अपनापन सबसे ज्यादा जरूरी चीज है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश को सरकार की नीतियों से भी जोड़ा। उनका कहना था कि योगेश्वर कृष्ण का जीवन बताता है कि शासन का असली मकसद समाज के सबसे कमजोर और आखिरी पायदान पर खड़े इंसान तक पहुँचना है। इसी सोच का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सरकार गरीबी हटाने, नौजवानों को रोजगार देने, किसानों की मदद करने और बेटियों को बेटों जितना ही मौका देने की दिशा में काम कर रही है।

‘गीता का ज्ञान हर दौर में रास्ते को आसान बनाता है’

सीएम योगी ने कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता के जरिए कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का जो रास्ता दिखाया, वो किसी एक जमाने की बात नहीं — हर दौर में, हर मुश्किल में, वो रास्ता उतना ही काम का बना रहता है।

आखिर में उन्होंने उत्तर प्रदेश की उस विरासत की बात की, जो सीधे भगवान कृष्ण की कहानियों से जुड़ी है जैसे मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगाँव। उनके मुताबिक ये जगहें सिर्फ मंदिर या तीर्थ नहीं हैं, बल्कि सनातन परंपरा की धड़कन हैं, जो आज भी उतनी ही जिंदा हैं, जितनी सदियों पहले थी।

अपनी बात खत्म करते हुए सीएम योगी ने प्रदेश के लोगों से अपील की कि इस जन्माष्टमी पर सिर्फ उत्सव मनाने भर से काम न चले बल्कि अपनी विरासत को संभालने, समाज में भाईचारा बनाए रखने और एक बेहतर, गौरवशाली उत्तर प्रदेश बनाने का संकल्प भी लिया जाए। उनके मुताबिक भगवान कृष्ण के सच, धर्म, कर्म और लोकहित के संदेश को अगर लोग अपनी असल ज़िंदगी में उतार लें, तो यही इस त्योहार का सच्चा मतलब होगा।