Homeविविध विषयअन्य'तिरंगे को ऊँचा देखना मेरा सपना था' : संकेत के बाद अब गुरुराज ने...

‘तिरंगे को ऊँचा देखना मेरा सपना था’ : संकेत के बाद अब गुरुराज ने भारत को दिलाया CWG में पदक, 1 दिन में दूसरी उपलब्धि

गुरुराज ने कहा, "मैं बहुत खुश हूँ। आज का दिन अच्छा था। संकेत ने सिल्वर जीता और मैंने ब्रॉन्ज। ये देश के लिए दूसरा मेडल है। मैं अच्छा कर सकता था। मैं हाल में बीमार हो गया था और रिकवर करके अब सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया।"

इंग्लैंड के बर्मिंघम में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के दूसरे दिन भारत के हिस्से दो पदक आ चुके हैं। ये दोनों पदक वेटलिफ्टिंग में आए हैं। आज (30 जुलाई 2022) सुबह जहाँ भारत के संकेत महादेव सरगर ने 55 किग्रा वेट उठाने में सिल्वर पदक जीता था। वहीं अब गुरुराज पुजारी ने 61 किग्रा के इवेंट में कास्य पद जीता है।

जानकारी के मुताबिक. गुरुराज ने स्नैच में 118 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 151 किग्रा का भार उठाया। उन्होंने 269 किलो का कुल भार उठाकर कास्य को जीता जबकि मलेशिया के अजनिल बिन ने 285 भारत उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वहीं पापुआ न्यू गिनी के मोरिया बारू ने 273 किलोग्राम वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता।

बता दें कि भारत को दूसरा मेडल दिलाने वाले गुरुराज 29 साल के हैं। उनका जन्म 15 अगस्त 1992 को कुंडापुरा में हुआ था। वह कर्नाटक के उडुपी जिले के रहने वाले हैं। साल 2018 में भी उन्होंने गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों में 56 किलो वर्ग में भारत को सिल्वर पदक दिलाया था। अब दूसरी दफा ऐसा मौका है कि देश के नाम उन्होंने मेडल जोड़ा। उनकी इस उपलब्धि के बाद गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी ने भी उन्हें बधाई दी।

उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश हूँ। आज का दिन अच्छा था। संकेत ने सिल्वर जीता और मैंने ब्रॉन्ज। ये देश के लिए दूसरा मेडल है। मैं अच्छा कर सकता था। मैं हाल में बीमार हो गया था और रिकवर करके अब सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास किया। मैं अपना मेडल अपनी पत्नी और समर्थकों को समर्पित करता हूँ।” उन्होंने कहा, “मैं शब्दों में नहीं समझा सकता। तिरंगे को ऊँचा देखना मेरा सपना था।”

गुरुराज से पहले वेटलिफ्टर संकेत महादेव ने 55 किलो की वेट लिफ्टिंग में देश को रजत पदक दिलवाया था। बर्मिंघम में हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में वेटलिफ्टर संकेत ने पहले प्रयास में 113 किग्रा भार उठाया था और दूसरे राउंड में 135 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया था।

संकेत के कोहनी में चोट आने की वजह से वह गोल्ड लाते लाते चूक गए थे और केवल 248 किलोग्राम वजन उठा पाए थे। इस इवेंट में मलेशिया के अनीक कासदान ने 1 किलो ज्यादा उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। वहीं श्रीलंका के दिलांका कुमारा ने 225 किलोग्राम उठाकर कास्य पदक को जीता था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘काफ़िर’ अब समंदर पार नहीं है.. कैसे 11वीं सदी का क्रूसेड बना नए पेंटागन की विचारधारा? डोनाल्ड ट्रंप और अमरीकी कल्चर वॉर

1095 में पोप अर्बन द्वितीय ने यरूशलम के लिए जिस धर्मयुद्ध का ऐलान किया था, आज डोनाल्ड ट्रंप के नए अमेरिका के पीछे वही विचार काम कर रहा है। ट्रंप के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और उनकी किताब 'The War on Warriors' से समझिए कि कैसे 1000 साल पुराना 'Deus Vult' का सिद्धांत आज अमरीकी राजनीति और कल्चर वॉर को चला रहा है।

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।
- विज्ञापन -