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‘बिना गंदी नीयत नाबालिग के सिर और पीठ पर हाथ फेरना अपराध नहीं’: बॉम्बे HC ने सज़ा पाए युवक को बरी किया, 11 साल पुराना मामला

इस दौरान युवक ने पीड़िता से कहा कहा कि वो अब बड़ी हो गई है। युवक की इस हरकत से लड़की डर गई और शोर मचाने लगी।

नाबालिग बच्चों के यौन शोषण मामले बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। उच्च न्यायालय की नागपुर बेंच ने कहा है कि बिना किसी गलत नीयत के नाबालिग बच्ची के सिर और पीठ पर हाथ फेरना गुनाह नहीं है। अदालत ने अपने इसी फैसले के साथ 11 साल पहले 2012 के एक मामले में सजा पाए अभियुक्त को दोषमुक्त कर दिया। इस मामले की सुनवाई 10 फरवरी, 2023 को हुई थी। आरोपित को निचली अदालत ने लज्जा भंग का दोषी माना था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला 15 मार्च 2012 का था। तब वर्धा का रहने वाला 18 साल का युवक एक घर पर कुछ कागजात देने गया था। उस समय घर पर सिर्फ 12 साल की नाबालिग बच्ची थी। बच्ची को कागजात सौंपते हुए युवक ने उसके सिर और पीठ पर हाथ फेरा। इस दौरान युवक ने पीड़िता से कहा कहा कि वो अब बड़ी हो गई है। युवक की इस हरकत से लड़की डर गई और शोर मचाने लगी। शोर सुन कर आसपास के लोग जमा हो गए। उन्होंने युवक को पकड़ लिया। बाद में लड़की के घर वालों को फोन कर के बुलाया गया।

लड़की के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने युवक के खिलाफ IPC की धारा 451 और 354 के तहत केस दर्ज किया था। इस मामले में आरोपित पक्ष ने अपने बचाव में कहा कि पीड़िता के परिजनों ने उस से कुछ पैसे उधार लिए थे और जब उसे लौटाने के लिए कहा गया तो फर्जी आरोप जड़ दिए गए। जाँच में आरोपित और पीड़िता की माँ के बीच पैसों के लेन-देन की बात भी सही साबित हुई थी। घटना के दिन भी युवक इसी मामले में कुछ कागजात लेकर पीड़िता के घर गया था।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता ने कहीं भी आरोपित द्वारा खुद को गलत तरीके से छूने की बात नहीं की। लड़की के बयान में केवल सिर्फ और पीठ पर हाथ फेरना था। कोर्ट ने माना कि ऐसा करना लड़की को पसंद नहीं आया। कोर्ट ने माना कि युवक पीड़िता को एक बच्ची की ही तरह देख रहा था। हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा युवक को दोषी ठहराए जाने के फैसले को सही नहीं माना और सज़ा को रद्द कर दिया। मामले में फैसला जस्टिस भारती डांगरे ने सुनाया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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