जब तुम्हारी किताब में हत्या, लिंचिंग, गुलामों की खरीद-बिक्री, बलात्कार, लूट-पाट सब जायज है, फिर किसी भी विवेकशील व्यक्ति को तुम्हारे मजहब से प्रेम कैसे हो सकता है?
जब बर्बरता तुम्हारी शिक्षा की आधारशिला है, हत्या तुम्हारे लिए एक सम्मानजनक कर्म है, बलात्कार पुण्य और काफिरों के धार्मिक स्थल तोड़ना जन्नत-उल-फिरदौस में कमरे रिजर्व करवाता है, फिर कोई सामान्य बुद्धि-विवेक वाला तुमसे या तुम्हारे मजहब को स्नेहाशिक्त भाव से कैसे देख सकता है?
मुंगेर की माँ की यह तस्वीर भी धीरे-धीरे गायब हो जाएगी। अनुराग की मृत्यु न तो पहली है और न आखिरी। आदर्श नगर का राहुल हो या फिर सुशील, हिंदुओं पर होती बर्बरता अब दिन पर दिन बढ़ती जा रही है।