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अनुपम कुमार सिंह

भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

’83’ में Pak फ़ौज ‘अच्छी’, ‘बजरंगी भाईजान’ में वहाँ के मौलवी ‘बहुत अच्छे’: कट्टर इस्लामी टीम के पुराने बल्लेबाज हैं कबीर खान, नोटिस किया?

'83' ही नहीं, 'बजरंगी भाईजान' और 'न्यूयॉर्क' जैसी फिल्मों के जरिए भी पाकिस्तान के लिए बल्लेबाजी कर चुके है निर्देशक कबीर खान। आपने नोटिस किया?

चारधाम का फैसला और कंधे पर PM मोदी का हाथ: उत्तराखंड में ‘बहुत Upyogi’ साबित हो रहे CM धामी, BJP की बम्पर वापसी...

उत्तराखंड में ABVP और BJYM में सक्रिय रहे पुष्कर सिंह धामी ने जनता के मूड को भाँपते हुए फैसले लिए और पार्टी ने भी उनके चेहरे पर मुहर लगा दी है।

‘स्वस्तिक’ का नाजी जर्मनी से कोई नाता नहीं, हिटलर का निशान ईसाइयत वाला: AKTK ने डॉक्यूमेंट्री में पश्चिम के नैरेटिव को ध्वस्त किया

YouTube चैनल 'आज की तजा खबर (AKTK)' ने 50 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री के जरिए 'स्वस्तिक' चिह्न को लेकर चले आ रहे प्रोपेगंडा की पोल खोली है।

मुगलों को बताया शरणार्थी, औरंगजेब की आलोचना से दिक्कत: फ़िल्में न मिलने की खुन्नस मोदी सरकार पर निकाल रहे नसीरुद्दीन शाह?

भारतीय राजाओं, भारतीय सनातन धर्म और भारतीय इतिहास को लेकर नसीरुद्दीन शाह हिन्दुओं में हीन भावना भरना चाहते हैं। मुगलों का गुणगान क्यों? औरंगजेब की आलोचना से दिक्कत क्यों?

‘पश्चिमी आक्रांता चाहते थे वैदिक युग को नीचा दिखाना’: आर्य-द्रविड़ थ्योरी को सबूतों से नकारता IIT खड़गपुर का कैलेंडर, चिढ़े वामपंथी

यूरोपीय आक्रांताओं ने ये दिखाना चाहा कि संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान पश्चिम से चल कर ही पूर्व आया है, इसीलिए उन्होंने आर्य-द्रविड़ की थ्योरी गढ़ी।

‘हम मृत्यु से नहीं डरते, कभी नहीं छोड़ेंगे अपना धर्म’: साहिबजादों के साथ वजीर खान की क्रूरता, चल बसी थीं माता गुजरी देवी भी

सरहिंद, लाहौर और जम्मू के सूबेदारों एवं दो दर्जन पहाड़ी राजाओं के साथ गठबंधन कर के औरंगजेब ने गुरु गोविंद सिंह को पकड़ने के लिए बड़ी फ़ौज भेजी।

वो राजा जो पानीपत के तीसरे युद्ध में बदल सकता था भारत की तकदीर… जिसे मारने के लिए इस्लामी आक्रांताओं ने लिया छल का...

वो भरतपुर के महाराजा सूरजमल जाट ही थे, जिनके कारण बृजभूमि में फिर से हरी फसलें लहलहाईं और बलूचों-अफगानों को नंगे पाँव भारत से भागना पड़ा।

कश्मीर में गजनी हो या गोवा में पुर्तगाली… गुलाम नबी जी, ‘तलवार की नोक’ पर ही होता है धर्मांतरण, तभी सूटकेस में मिलती हैं...

गुलाम नबी आज़ाद बता दें कि धर्मांतरण अगर प्यार-पुचकार से होता है तो गुरु तेग बहादुर को क्यों बलिदान देना पड़ा था? मामला उनके ही राज्य का है।