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जयन्ती मिश्रा

सोनिया गाँधी सिर्फ माँ नहीं, सीता माँ हैं: रातों रात पैदा हुए राहुल के लाखों भाई-बहन, त्रेतायुग से है कनेक्शन

माँ सीता के प्रति हनुमान जी का प्रेम जितना असीम था, उतना ही कॉन्ग्रेसियों का सोनिया गाँधी के लिए है। शास्त्रों में इसे हालाँकि चमचागिरी...

घरेलू हिंसा में इजाफे का लॉकडाउन से नहीं नाता, असल वजह सिर्फ विश्वव्यापी पितृसत्ता

घरेलू हिंसा का लॉकडाउन से संबंध नहीं। यह पितृसत्ता में जकड़े समाज का नतीजा है जो फिर अपना चेहरा दिखाने लगा है।

राणा अयूब जैसों को चाहिए प्रोपगेंडा चलाने के लिए माल पानी, वरना जो मोदी सरकार कहेगी वो उसके उलट मायने खुद गढ़ लेंगी

देश के खिलाफ़ राणा अयूब की नफरत का स्तर इतना बढ़ चुका है कि वे देश के पीएम को इस्लामिक देशों के दबाव में देखना चाहती हैं।

पालघर साधु लिंचिंग: हिंदुओं को ‘आतंकी’ कहने वाले अनुराग और लिबरल गैंग अब पढ़ा रहे इंसानियत का पाठ

इस बार मरने वालों में भगवा वेशधारी साधू हैं। हिंदुओं को 'आतंकी' कहने वाले पालघर साधु लिंचिंग पर चुप नहीं बल्कि इंसानियत जैसे शब्दों के साथ...

मुरादाबाद के हमलावरों पर चुप्पी साधने वाली RJ सायमा ‘इंसानियत’ के नाम पर रंगोली के खिलाफ माँग रहीं FIR

आरजे सायमा चाहती हैं प्रेम-शांति-इंसानियत के नाम पर लोग जमातियों के ख़िलाफ़ अपनी प्रतिक्रिया देना बंद कर दें और उनकी हरकतों को मात्र नादानी मानें।

संविधान में राम-कृष्ण को उकेरने वाला वो नायक जिसकी धरोहर ‘सेकुलर’ जमात ने गुपचुप गायब कर दी

क्या आपने नंदलाल बोस का नाम सुना है? संविधान में हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर आज क्यों नहीं दिखती?

पुलिस को जल्लाद बता विनोद दुआ ने कहा- लॉकडाउन काफी नहीं, लोग फूटकर सड़कों पर आ जाएँ

खुद को देश के नागरिकों का हितैषी स्थापित करते हुए दुआ ने देश की जनका को वीडियोज में न केवल जमकर भड़काया है। बल्कि अपने कुतर्कों से उन्हें गुमराह करने की कोशिश की है। वीडियोज की शुरुआत से लेकर अंत तक में विनोद दुआ एक भी बार देश के नागरिकों को कोरोना से बचे रहने की बात कहते नजर नहीं आते। बल्कि सरकार के ख़िलाफ़ बोलते, उनके फैसलों की निंदा करते और लोगों को उकसाते नजर आते हैं।

सिसली में शवों से भरे 12 जहाजों से लेकर वुहान के कोरोना तक: हमेशा गतिशील धनाढ्य वर्ग के कारण फैले ऐसे विषाणु

पैनडेमिक के पीछे कभी भी गरीब, पिछड़े और आम जीवन व्यतीत करने वालों का हाथ नहीं रहा। इसके पीछे प्राय: धनी, सुदृढ़, प्रवासी, धनाकांक्षी, गतिशील लोग होते थे और आज भी स्थिति वही है। फिर चाहे देश में पहला कोरोना केस बना वुहान से लौटा केरल का छात्र हो या लंदन से लौटी कनिका कपूर। सब एक समृद्ध समाज का हिस्सा हैं। जिनके लिए आज यहाँ कल वहाँ एक आम बात है।