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राहुल पाण्डेय

धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

सीने में गोली दागी, ज़िंदा थे तभी लाशों के साथ गाड़ी में ठूँसा, विधवा से बदसलूकी: भजन गा रहे थे कारसेवक महावीर अग्रवाल, परिवार...

लाशों को समेटने के चक्कर में पुलिस वालों ने कई घायल कारसेवकों को भी वाहनों में लाद लिया था और जिन्दा ही सरयू नदी में फेंक दिया था। बकौल अभिषेक, उनके पिता को भी गंभीर अवस्था में घायल हालत में ही कई लाशों के बीच ट्रक में भर लिया गया था।

पूरे शरीर में धँस गए थे गोलियों के छर्रे, बेहोशी में भी कह रहे थे राम-राम: कारसेवक राम बहादुर वर्मा के बेटों ने कहा...

अयोध्या जाते समय राम बहादुर ने अपनी पत्नी से कहा था, "मैं शायद न लौट पाऊँ। बच्चों का ध्यान रखना।" नम आँखों से काली सहाय ने कहा, "मेरे पिता के लिए पत्नी और बच्चों से कहीं अधिक प्रिय प्रभु श्रीराम थे।"

‘माँ मैं जा रहा, शायद अब न लौट पाऊँ’: यही बोल कर निकले अयोध्या, बूढ़े माँ-बाप को नहीं मिली लाश, धर्म प्रचार के लिए...

अयोध्या रामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के दौरान मुलायम पुलिस की गोलियों से बलिदान हुए भगवान सिंह जाट का शव फेंक दिया गया था सरयू नदी में?

रामजन्मभूमि दर्शन करने जा रहे थे राम अचल गुप्ता, रोका तो रामधुन में रम गए, फिर भी मार दी गोली: बलिदानी के परिवार ने...

मुलायम यादव की सरकार में कारसेवक राम अचल गुप्ता को अयोध्या में जन्मभूमि का दर्शन करवाने के बहाने ले जाकर गोलियों से भून दिया गया था।

कारसेवकों संग आए अयोध्या, पुलिस ने पहले मारी गोली फिर जबरन जलवाया शव: रामलला के बलिदानी ‘पोस्टमैन’ को जानते हैं आप?

अयोध्या में सन 1990 के बलिदानी कारसेवक रमेश चंद्र मिश्रा की विधवा को आधी रात में पति का अंतिम संस्कार करने पर मजबूर किया गया था।

मुलायम सरकार में ‘राम भक्ति’ था अपराध? जिन्होंने भोगी सजा उन्होंने दिखाया जेल वाला ‘कागज’, OpIndia को सुनाई पीड़ा

उस समय केसरिया पटका लगाकर कोई बाहर निकल जाता था तो गिरफ्तार हो जाता था। तिलक लगाकर निकलता था तो गिरफ्तार हो जाता था।

खून से भरा अस्पताल, जमीन पर पड़ी लाश… गौने से पहले ही ‘मुल्ला मुलायम’ की गोली का शिकार हुए थे 16 साल के कारसेवक,...

राजेंद्र धरकार की तीनों भतीजियों में सबसे बड़ी 18 साल की है। उन्होंने हमें बताया कि पैसे न होने की वजह से उनकी पढ़ाई भी बंद हो चुकी है। 1990 में जो हुआ, उसके बाद...

दशरथ समाधि और हनुमान मंदिर के पास दरगाह: दावा- मंदिर के गेट पर थूकती थी मुस्लिम भीड़, योगी राज में बदली स्थिति

जुलूस निकाल कर मंदिर के गेट पर घंटों रोका जाता था। यहाँ पुड़िया-गुटका खा कर थूका जाता था। 'किसी के बाप का नहीं है भारत' जैसी भड़काऊ बयानबाजी की जाती थी।