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गुरुद्वारा रकाब गंज में PM मोदी: गुरु तेग बहादुर को दी श्रद्धांजलि, जिन्हें औरंगजेब ने मरवा दिया था

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज रविवार (20 दिसंबर 2020) की सुबह राजधानी दिल्ली स्थित गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने गुरु तेग बहादुर को उनके सर्वोच्च बलिदानों के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा पहले से फिक्स नहीं था। 

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी सुबह के वक्त ही गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब आए थे। यहाँ उन्होंने गुरु तेग बहादुर के बलिदानों को याद किया। दिल्ली की सीमाओं पर लगातार 25वें दिन जारी ‘किसान’ आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का गुरुद्वारा रकाब गंज दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि ‘किसान’ आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के किसानों की अहम भूमिका है। दौरे की कोई सूचना नहीं होने के चलते प्रधानमंत्री मोदी के पहुँचने पर न तो कोई पुलिस व्यवस्था थी और न ही रास्तों पर किसी तरह के अवरोधक लगाए गए थे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट में लिखा, “आज सुबह मैंने ऐतिहासिक गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में प्रार्थना की। जहाँ गुरु तेग बहादुर जी के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया था। मैं बेहद धन्य महसूस कर रहा हूँ, दुनिया के लाखों लोगों की तरह श्री गुरु तेग बहादुर के आशीर्वाद से प्रेरित महसूस कर रहा हूँ।”

इसके पहले भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरु तेग बहादुर के ‘शहीद दिवस’ के मौके पर ट्वीट करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी थी। ट्वीट में उनका कहना था कि श्री गुरु तेग बहादुर का जीवन साहस और करुणा का प्रतीक है, महान श्री गुरु तेग बहादुर के शहीद दिवस पर मैं उन्हें नमन करता हूँ और एक समावेशी समाज के लिए उनके द्वारा दिए गए दृष्टिकोण को याद करता हूँ।” 

सिखों के नौवें गुरु गुरु तेग बहादुर ने धर्म के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था। उनका जन्म 1621 में हुआ था और 1675 में वह बलिदान (औरंगजेब के आदेश पर उनकी हत्या की गई थी) हुए थे। 17वीं शताब्दी के दौरान उन्होंने सिख धर्म की रक्षा के अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया था। वह सिखों के दसवें गुरु ‘गुरु गोविंद सिंह’ के पिता भी थे। गुरु तेग बहादुर ने धर्म से जुड़े मुद्दों पर विमर्श के लिए हमेशा वेदों और उपनिषदों का हवाला देते थे। गुरु तेग बहादुर इन समस्त शास्त्र-पुराणों में पारंगत थे और साथ ही मानवता को परम धर्म मानते थे। 

उन्होंने मुग़ल साम्राज्य के अत्याचारों के विरुद्ध लंबी लड़ाई लड़ी और धर्म की रक्षा के लिए प्राणों का बलिदान कर दिया इसलिए उन्हें ‘हिन्द दी चादर’ भी कहा जाता है। राजधानी दिल्ली स्थित गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब गुरु तेग बहादुर के सर्वोच्च बलिदान के प्रतीक स्थल हैं। गुरु तेग बहादुर की याद में उनके शहीद स्थल पर जो गुरुद्वारा बनाया गया है, उसे गुरुद्वारा शीश गंज साहिब नाम से जाना जाता है। इसके अलावा गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में गुरु तेग बहादुर का अंतिम संस्कार किया गया था।    

लालच देकर करा रहे थे दलित परिवारों का ईसाई धर्मांतरण: 3 महिलाएँ सहित 4 गिरफ्तार, दक्षिण कोरिया की महिला मुख्य सरगना

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में ईसाई धर्मांतरण के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सूरजपुर थाना क्षेत्र में 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है, जो हिन्दू परिवारों को प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण कराते थे। गिरफ्तार आरोपितों में एक दक्षिण कोरिया की महिला भी शामिल है। उसे इस गिरोह का सरगना बताया जा रहा है। उन सभी से पूछताछ जारी है। आसपास के शहरों की पुलिस से भी संपर्क किया जा रहा है।

गौतम बुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि सूरजपुर पुलिस ने लोभ व लालच देकर धर्मांतरण कराने वाले 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 3 महिलाएँ हैं। पुलिस ने बताया कि इन्हें शनिवार (दिसंबर 19, 2020) को गिरफ्तार किया गया। ये सभी शातिर किस्म के अपराधी हैं और लालच देकर धर्म परिवर्तन कराते हैं। उन सबके खिलाफ धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 के तहत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने चारों अभियुक्तों की डिटेल्स भी सार्वजनिक की है:

  • सीमा, पिता का नाम – सेवालाल, निवासी – चरपतला, थाना मेझा जनपद प्रयागराज, वर्तमान पता – किराएदार कुंडे सिंह मास्टर का मकान, मलकपुर, थाना सूरजपुर
  • अनमोल, साक्षिण कोरिया, वर्तमान पता – 602 जेपी ग्रीन, थाना बीटा 2, ग्रेटर नोएडा
  • संध्या, पिता – देवी शंकर, निवासी – साझी, थाना क़ुराव, जनपद प्रयागराज, वर्तमान पता – किराएदार कुंडे सिंह मास्टर का मकान, मलकपुर, थाना सूरजपुर
  • उमेश कुमार, पिता – मेवालाल, निवासी – चरपतला, थाना मेझा जनपद प्रयागराज, वर्तमान पता – किराएदार कुंडे सिंह मास्टर का मकान, मलकपुर, थाना सूरजपुर

NBT की खबर के अनुसार, जो लोग धर्म परिवर्तन के लिए तैयार होते थे, उन्हें तुरंत मोटा पैकेज दिया जाता था। बच्चों की पढ़ाई के लिए किताबों से लेकर स्टेशनरी के समानों तक उपलब्ध कराया जाता था। दलित बस्ती के लोगों को खास कर के निशाना बनाया जाता था और गरीबों के बच्चों की मदद के नाम पर धर्मांतरण का खेल चलता था। दादरी और जारचा क्षेत्रों में पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।

इन सभी को दुर्गा गोल चक्कर से गिरफ्तार किया गया। ये सभी ईसाई धर्म अपनाने के लिए लोगों को लालच दिया करते थे। पुलिस को इनकी शिकायत मिली थी, जिसके बाद दबिश दी गई। जब ये लोग दो अलग-अलग परिवारों का धर्मांतरण करा रहे थे, तभी उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों में सीमा, अनमोल और अनध्या महिलाएँ हैं। अभी तक की पूछताछ में इन्होंने कोई बड़ी जानकारी नहीं दी है।

इसी वर्ष अगस्त में उत्तर प्रदेश के ही एटा में एक शख्स को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दिल्ली का 30 वर्षीय मनदीप कुमार एटा में रह रहा था, जहाँ वह लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था। आरोपित मनदीप कुमार भी अपनी पत्नी मार्गेट एंथोनी के साथ एटा में किराए के मकान पर रह रहा था। ग्रेटर नोएडा से गिरफ्तार आरोपित भी इसी तरह किराए में रह रहे थे।

कोतवाली के भीतर जिस पुलिस वाले ने 3 लोगों का किया था मर्डर, योगी सरकार ने उस DSP को किया बर्खास्त

पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) भगवान सिंह को तिहरे हत्याकांड के पुराने मामले में दोषी पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह निर्णय उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने लिया है। लगभग 16 साल पहले कोंच कोतवाली में 3 लोगों की गोली मार कर हत्या के मामले में न्यायालय ने 8 नवंबर 2019 को तत्कालीन उपनिरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) भगवान सिंह समेत अन्य आरोपित पुलिसकर्मियों को आजीवन कारावास और 50 हज़ार रुपए जुर्माने का दंड सुनाया था। 

इस मामले में कुछ समय बाद भगवान सिंह को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी। हाल ही में भगवान सिंह निरीक्षक (इंस्पेक्टर) से पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) पद पर पदोन्नत हुए थे और उन्हें कानपुर कर्नलगंज में तैनात किया गया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने कुछ समय पहले ही भगवान सिंह को निलंबित किया था।   

लगभग 16 साल पहले 2004 के फरवरी महीने में दो पक्षों में विवाद हुआ था, जिसकी पैरवी करने के लिए सपा नेता महेंद्र निरंजन कोतवाली पहुँचे थे। इसके बाद कोंच कोतवाली में तैनात कोतवाल देवदत्त सिंह राठौर (दिवगंत) की सपा नेता सुरेंद्र निरंजन से बहस हुई थी। विवाद बढ़ने पर देवदत्त सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों ने कोतवाली परिसर में सुरेंद्र निरंजन, उनके भाई रोडवेज यूनियन के नेता महेंद्र निरंजन और मित्र दयाशंकर झा की सर्विस रिवॉल्वर से गोली मार कर हत्या कर दी थी। 

कोतवाली के भीतर 3 लोगों की हत्या की गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दी थी, पूरे कोंच में कर्फ्यू लगा दिया गया था। कानपुर के अलावा पूरे प्रदेश में पुलिस महकमे का जम कर विरोध हुआ था। फिर कोतवाल देवदत्त सिंह, उनके पुत्र अनिल राठौर, उपनिरीक्षक भगवान सिंह उपनिरीक्षक लालमणि गौतम समेत कुल 8 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया था। हालाँकि देवदत्त सिंह की जेल में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी, मामले के अन्य आरोपित पुलिसकर्मी भी जेल गए थे। 

मुक़दमे के ट्रायल के दौरान आरोपित पुलिसकर्मी जमानत पर रिहा होकर नौकरी करने लगे थे। लगभग 15 साल के दौरान भगवान सिंह को दो बार पदोन्नति भी मिली, पहले इंस्पेक्टर और फिर डीएसपी। एडीजे अमित पाल ने इस मामले में बीते वर्ष फैसला सुनाया था, जिसके तहत सभी आरोपितों को आजीवन कारावास और आर्थिक जुर्माने की सज़ा सुनाई गई थी। 

बाद में भगवान सिंह को इस मामले में उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई थी। घटना के संबंध में अपने पिता दयाशंकर झा को खो चुके ऋषि झा का कहना है कि सरकार ने भगवान सिंह को बर्खास्त करके सही कदम उठाया है। मामले के आरोपित अन्य पुलिसकर्मियों ने जमानत के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अर्जी दी है, वह इसके विरोध में वहाँ भी पैरवी करेंगे।    

‘मेरे शौहर मोहसिन अख्तर को पाकिस्तानी और आतंकी कहा जाता है’: उर्मिला मातोंडकर का छलका ‘दर्द’

हाल ही में कॉन्ग्रेस छोड़ कर शिवसेना में शामिल हुईं उर्मिला मातोंडकर का इंस्टाग्राम अकाउंट हैक कर लिया गया था। बाद में पुलिस के प्रयासों के बाद ये वापस आ गया। उर्मिला मातोंडकर ने इन घटनाओं पर बात करते हुए दावा किया कि उनके शौहर मोहसिन अख्तर को अक्सर ट्रोल किया जाता है। बरखा दत्त से बात करते हुए 46 वर्षीय बॉलीवुड अभिनेत्री ने कहा कि उनके शौहर को आतंकी और पाकिस्तानी तक कहा गया।

प्रोपेगंडा पत्रकार बरखा दत्त से ‘मोजो स्टोरी’ पर बात करते हुए उर्मिला मातोंडकर ने कहा कि हर चीज की एक लिमिट होनी चाहिए और हमें पता होना चाहिए कि हम किस हद तक आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके विकिपीडिया पेज के साथ छेड़छाड़ कर के उनके पिता का नाम शिविंदर सिंह और माँ का नाम रुखसाना अहमद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि ये दोनों नामों वाले व्यक्ति भारत में कहीं न कहीं रह रहे होंगे, लेकिन ये कौन हैं, उन्हें नहीं पता।

उन्होंने कहा, “सबसे बड़ी बात तो ये है कि मेरे शौहर केवल मुस्लिम नहीं हैं, वो कश्मीरी मुस्लिम हैं। हम दोनों समान रूप से निष्ठावान होकर अपने-अपने धर्मों का पालन करते हैं। इससे ट्रॉल्स को लगातार मुझे, मोहसिन अख्तर और उनके परिवार को निशाना बनाने का बड़ा मौका मिल गया। ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।” शिवसेना ने उर्मिला मातोंडकर का नाम विधान परिषद के लिए भेजा है, ऐसे में वो जल्द ही MLC भी बन सकती हैं।

पार्टी का कहना है कि उसे मराठा, अंग्रेजी और हिंदी – तीनों भाषाओं में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के लिए कोई बड़ा चेहरा चाहिए था और उर्मिला उनमें से एक हैं। उर्मिला मातोंडकर ने दावा किया कि उनकी चमड़ी मोटी तो नहीं है लेकिन इतनी ज्यादा सुंदर है कि उनके रास्ते में आने वाली इस तरह की चीजों से गंदी नहीं हो सकती। उन्होंने संवेदनशीलता को महिलाओं का मजबूत पक्ष करार देते हुए कहा कि उनके पास इसके साथ-साथ दया और सहानुभूति का भाव भी है।

उन्होंने कहा कि एक महिला और अभिनेत्री होने के कारण लोग समझते हैं कि वो मूर्ख और नासमझ हैं, जबकि अधिकतर नेता ही नासमझ हैं। इस पर बरखा दत्त ने उन्हें टोकते हुए कहा कि कई पत्रकार भी ऐसे ही हैं। उर्मिला ने कहा कि इन ट्रोल्स के पालन-पोषण और संस्कृति के साथ क्या है या क्या नहीं, ये तो नहीं पता, लेकिन वो काफी ख़ुशी से अपने पति के साथ रह रही हैं। उन्होंने कहा कि वो बदलाव के लिए इस क्षेत्र में आई हैं।

2019 में आम चुनावों के वक्त उर्मिला कॉन्ग्रेस में शामिल हुई थीं और उन्होंने लोकसभा चुनाव भी लड़ा था। लेकिन वह जीत नहीं पाईं थी। चुनाव के 5 महीने बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस की अंदरूनी राजनीति से तंग आकर दिया इस्तीफ़ा दे दिया था। इस्तीफा देते वक़्त उन्होंने एक बयान में कहा था, “मेरी राजनीतिक और सामाजिक संवेदनशीलता का एक बड़े लक्ष्य पर काम करने के बजाय मुंबई कॉन्ग्रेस में कुछ लोग आपसी लड़ाई के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।”

TMC के गुंडों ने BJP कार्यकर्ताओं को गाड़ी से निकाल-निकाल कर लाठी-डंडों से पीटा: अमित शाह की रैली से लौट रहे थे

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने (शनिवार दिसंबर 19, 2020) को एक विशाल जनसभा को सम्बोधित किया, जिसमें शुभेंदु अधिकारी सहित पश्चिम बंगाल की 3 राजनीतिक पार्टियों के 11 विधायकों ने भाजपा का दामन थामा। लेकिन, इस दौरान भी भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले बंद नहीं हुए। रैली से लौटते समय भाजपा के कई कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला कर दिया गया।

इस हमले में भाजपा के 15 कार्यकर्ता घायल हुए हैं, जिनमें से 6 का इलाज अभी भी अस्पताल में चल रहा है। इन्हें काफी चोटें आई हैं। साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं की गाड़ियों को भी खासा नुकसान पहुँचाया गया है। हमेशा की तरह इस हमले के पीछे भी पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC का हाथ बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि दक्षिण बंगाल में अपना गढ़ हाथ से फिसलने से पार्टी नेता बौखलाए हुए हैं।

भाजपा ने कहा है कि TMC के गुंडों ने ही कार्यकर्ताओं पर हमला किया है। ये सभी शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने से आक्रोशित हैं। इस हमले के दौरान अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी भी की गई। तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगा है कि वो अमित शाह की रैली में कड़ी सुरक्षा के कारण व्यवधान नहीं डाल पाए तो उन्होंने रैली से लौट रहे साधारण कार्यकर्ताओं को ही अपना निशाना बना लिया।

केशपुर में हुई इस घटना में भाजपा कार्यकर्ताओं को गाड़ी से निकाल-निकाल कर लाठी-डंडों से पीटा गया। सांसद नितीश प्रमाणिक ने इस घटना के बारे में कहा, “फौलाद के बने हैं भाजपा कार्यकर्ता।जितना जुल्म बंगाल की सरकार हम पर करेगी, हम उतने ही मजबूत होंगे। फिर से राज्य सरकार द्वारा आश्रित गुंडों ने अमित शाह जी के रैली से लौट रहे भाजपा कार्यकर्ताओं की गाड़ियों पर तोड़फोड़ किया। मैं कड़े शब्दों से इसकी निंदा करता हूँ।”

भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला (वीडियो साभार: Republic)

उधर शुभेंदु अधिकारी ने एक पत्र के जरिए जमीनी कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है, जहाँ 2021 में यहाँ की जनता को एक ऐसा निर्णय लेना है – जो सब कुछ हमेशा के लिए बदल देगा। उन्होंने कहा कि न तो ये राज्य और न ही TMC किसी की जागीर है। उन्होंने लिखा कि कई लोगों ने कई दिनों तक न जाने कितनी मेहनत की है, जिसके बाद तृणमूल को सत्ता मिली।

ममता सरकार से इस्तीफा देने वालों में शुभेन्दु अधिकारी, बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र के टीएमसी विधायक शीलभद्र दत्ता, उत्तरी काठी से विधायक बनाश्री मैती, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव टीएमसी नेता कबीरुल इस्लाम, टीएमसी के नेता और दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम (SBSTC) के अध्यक्ष (Rtd) कर्नल दिप्तांगशु चौधरी और अभिजीत आचार्य जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं। बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का मानना है कि अगले साल जनवरी तक टीएमसी के 60 से 65 विधायक उनके साथ आ सकते हैं।

बेटे का Porn कलेक्शन फेंक दिया माँ-बाप ने, कोर्ट ने कहा – 55 लाख रुपए का जुर्माना दो

डैविंड वेर्किंग (Davind Werking) अमेरिका के इंडियाना में रहते हैं। इसके पहले वो अपने माता-पिता के साथ थोड़े दिनों के लिए मिशिगन में रहे थे, अपने तलाक के बाद। लेकिन अब उन्होंने अपने माँ-बाप पर ही केस कर दिया और कोर्ट में जीत भी गए। कारण – उनके पास पोर्न का ‘बेशकीमती’ कलेक्शन था, जिन्हें उनके माता-पिता ने फेंक दिया।

12 पेटियों में 1605 DVD, CD और पुराने VCR/VHS टेप्स के अलावा 2 पेटी सेक्स टॉय भी डैविंड वेर्किंग के पास थे। इन सारे ‘बेशकीमती’ कलेक्शन को वो अपने माँ-बाप के घर ले गए थे। यह बात बाप-बेटे के बीच हुए मेल संवाद से पता चली है।

तलाक के कुछ दिनों बाद तक डैविंड वेर्किंग अपने माँ-बाप के यहाँ रेंटर के तौर पर रह रहे थे। कुछ महीने वहाँ रहने के बाद वो इंडियाना चले गए। लेकिन अपना कुछ सामान माँ-पिता के घर में ही छोड़ गए थे। फिर कुछ दिनों के बाद उन्होंने मेल कर अपने पिता से इन सामानों को अपने पास भेजने को कहा।

बेटे के सामानों को भेजने के दौरान पॉल वेर्किंग और बर्थ वेर्किंग (डैविंड वेर्किंग के पिता-माता) ने देखा कि वो सारे पॉर्न कलेक्शन हैं। उन्होंने उसे नष्ट कर दिया। और बेटे को एक मेल भी भेजा कि इन सारी गंदी चीजों को नष्ट कर रहे हैं ताकि मेरे बेटे की मानसिक हालत सही रहे।

माँ-बाप ने जिन सामानों को बेटे की भलाई के लिए नष्ट की, उसके एवज में बेटे ने उनके खिलाफ कोर्ट में केस कर दिया। 18 लाख 50 हजार रुपए (25000 डॉलर) के अपने पोर्न कलेक्शन को नष्ट करने के मामले को बेटा डैविंड वेर्किंग कोर्ट में ले गया। आश्चर्य यह कि कोर्ट ने भी माँ-बाप के खिलाफ जजमेंट सुनाया है।

डैविंड वेर्किंग के फेवर में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने उनके माँ-बाप को 55 लाख रुपए (75000 डॉलर) चुकाने का आदेश दिया है। अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘बेशकीमती’ पोर्न में एक भी आइटम चाइल्ड पोर्न से संबंधित नहीं था। इसलिए एक आदमी को खुद के पैसे से खरीदे गए पोर्न को देखने से वंचित करना या उसे नष्ट कर देना गैर-कानूनी है।

बेटे के पोर्न कलेक्शन को नष्ट करने के पीछे पॉल वेर्किंग और बर्थ वेर्किंग ने जो तर्क दिया था, वो था – “हमारा बेटा एक रेंटर के तौर पर हमारे यहाँ रहने आया था, न कि बेटे के तौर पर। और हमने उसे इन पोर्न कलेक्शन को घर नहीं लाने को कहा था, फिर भी वो ले आया था।” इस पर कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक के तौर पर भी किसी की निजी संपति को नष्ट करने का हक किसी दूसरे को नहीं है।

36 में से 33 सीट पर भाजपा तो वहीं कॉन्ग्रेस 1 पर सिमटी: असम में TAC चुनाव में BJP ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत

यूपीपीएल के साथ गठबंधन में असम में बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) में कार्यकारी समिति के गठन के ठीक एक हफ्ते बाद भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में एक और स्वायत्त परिषद में बड़ी जीत हासिल की है। पार्टी ने तिवा स्वायत्त परिषद (टीएसी) चुनाव में 36 में से 33 सीटों पर जीत दर्ज किया है।

बता दें परिषद के चुनाव कड़ी सुरक्षा और कोविड -19 के दिशानिर्देशों को पालन करते हुए 17 दिसंबर को संपन्न हुआ था। असम के तिवा स्वायत्त परिषद में मोरीगाँव (19 सीटें), नगाँव (10 सीटें), होजई (1 सीट) और कामरूप (मेट्रो) (6 सीटें) जिले शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, कुल 36 सीटों में से 35 सीटों पर चुनाव आयोजित किए गए थे। वहीं जगरोड की 1 सीट भाजपा ने पहले ही निर्विरोध जीती थी। एक तरफ जहाँ बीजेपी ने 33 सीटें जीतीं, वहीं उसके सहयोगी एजीपी ने 2 सीटें जीती हैं। जबकि कॉन्ग्रेस को इस चुनाव में भी करारी हार के सामना करना पड़ा। कुल 35 सीटों में कॉन्ग्रेस ने बस 1 सीट जीती।

इस मौके पर असम के कैबिनेट मंत्री और NEDA के संयोजक हेमंत बिस्वा ने ट्वीट करते हुए कहा कि तिवा स्वायत्त परिषद के चुनावों में भाजपा को मिली भारी जीत यह बताती है कि असम के लोगों ने पीएम नरेंद्र मोदी पर अपना भरोसा जताया है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि भाजपा ने 34 सीटें जीती, क्योंकि अंतिम परिणाम उस समय तक सामने नहीं आए थे।

वहीं यह ध्यान रखना दिलचस्प है कि चुनावों से पहले भाजपा ने दावा किया था कि वह इस चुनाव में 25-30 सीटें जीतेंगी। जबकि पार्टी को उससे अधिक सीटें प्राप्त हुई है।

गौरतलब है कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी असम के लोगों को भारी जनादेश के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “तिवा स्वायत्त परिषद चुनावों में बीजेपी को मिले इस जनादेश के लिए असम को धन्यवाद। असम एक उज्जवल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है और लोग पीएम नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन पर अपना विश्वास बनाए हुए हैं। सर्बानंद सोनोवाल, हिमंत बिस्वा सरमा और असम भाजपा की टीम को बधाई।”

बोडोलैंड टेरीटोरियल कॉउन्सिल की ही तरह तिवा स्वायत्त परिषद का गठन संविधान की छठी अनुसूची के तहत नहीं किया गया है। बीटीसी के अलावा, डिमा हसाओ स्वायत्त जिला परिषद और कार्बी आंगलोंग स्वायत्त जिला परिषद छठी अनुसूची में शामिल हैं। इन तीनों के अलावा, राज्य कानून के तहत गठित राज्य में छह स्वायत्त परिषद हैं। ये सभी राज्य में रहने वाले विशिष्ट जनजातियों से संबंधित हैं।

उल्लेखनीय है कि तिवा परिषद के अलावा, राज्य कानून के तहत अन्य परिषदों में राभा हासोंग स्वायत्त परिषद, मिसिंग स्वायत्त परिषद, देवरी स्वायत्त परिषद, थेंगाल कचहरी स्वायत्त परिषद और सोनोवाल कचौड़ी स्वायत्त परिषद हैं। असम विधानसभा ने हाल ही में तीन और परिषदों के निर्माण को मंजूरी दी है, जोकि मोरन स्वायत्त परिषद, मटक स्वायत्त परिषद और कामतापुर स्वायत्त परिषद हैं।

अमित शाह की मौजूदगी में TMC, वामपंथी और कॉन्ग्रेस के 10 विधायकों ने थामा BJP का दामन: यहाँ है पूरी लिस्ट

पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) राजनीतिक उथल-पुथल की स्थिति में है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ही ममता सरकार के कई दिग्गज विधायकों ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है। आज (दिसंबर 19, 2020) मिदनापुर में भाजपा नेता अमित शाह की मौजदूगी में टीएमसी, वामपंथी और कॉन्ग्रेस के कई विधायकों ने बीजेपी का दामन थामा।

कई दिनों से चल रहे अटकलों के बाद आखिरकार ममता सरकार में मंत्री रहे शुभेन्दु अधिकारी भी मिदनापुर की रैली में अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल हो गए। टीएमसी, कॉन्ग्रेस और वाम दलों के कई विधायक और पार्टी नेता भी इस दौरान बीजेपी का दामन थाम लिया।

पश्चिम बंगाल में भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख नेता हैं:

◆बर्दवान पूर्बा सांसद सुनील मंडल, टीएमसी

◆पूर्व मंत्री और तमलुक विधायक शुभेन्दु अधकारी, टीएमसी

◆ उत्तर काठी की विधायक बानसरी मैती, टीएमसी

◆कलना विधायक बिस्वजीत कुंडू, टीएमसी

◆पूर्वी बर्धमान के विधायक सैकत पांजा, टीएमसी

◆बैरकपुर विधायक शीलभद्र दत्ता, टीएमसी

◆गाजोल की विधायक दीपाली विश्वास, टीएमसी

◆नागराकाटा के विधायक शुक्रा मुंडा, टीएमसी

◆तमलुक के विधायक अशोक डिंडा, सीपीआई

◆हल्दिया के विधायक तापसी मंडल, सीपीआईएम

◆पुरुलिया विधायक सुदीप मुखर्जी, कॉन्ग्रेस

◆पूर्व सांसद दशरथ तिर्की, टीएमसी

◆पूर्व मंत्री श्यामपद मुखर्जी, टीएमसी

◆पूर्व विधायक सत्येन रॉय, टीएमसी

इनके अलावा कई पंचायत स्तर के नेता और TMC विधायक शुभेन्दु अधिकारी के फॉलोवर्स भी बीजेपी में शामिल हुए। इनमें कबेरी चट्टोपाध्याय, स्नेहाशीष भौमिक, आकाशदीप सिंह, तन्मय रॉय, रंजन वैद्य, देव महापात्र और सुकुमार दास शामिल हैं। भगवा पार्टी में कॉन्ग्रेस नेता सुदीप कुमार मुखर्जी और सनमय बनर्जी भी शामिल हुए।

बता दें कि गौर बंग विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति गोपाल मिश्रा भी आज भाजपा में शामिल हो गए है। वहीं बड़ी संख्या में टीएमसी और अन्य दलों के राजनेता भी पार्टी से जुड़ गए हैं।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। वहीं सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के गुंडों द्वारा बीजेपी से जुड़े लोगों को निशाना बनाने के कई मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार 3 दिन के भीतर टीएमसी में कई इस्तीफे सामने आए। वहीं बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह का मानना है कि अगले साल जनवरी तक टीएमसी के 60 से 65 विधायक उनके साथ आ सकते हैं।

ममता सरकार को इस्तीफा देने वालों में शुभेन्दु अधिकारी, बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र के टीएमसी विधायक शीलभद्र दत्ता, उत्तरी काठी से विधायक बनाश्री मैती, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव टीएमसी नेता कबीरुल इस्लाम, टीएमसी के नेता और दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम (SBSTC) के अध्यक्ष (Rtd) कर्नल दिप्तांगशु चौधरी और अभिजीत आचार्य जैसे दिग्गज नेता शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि आज (दिसंबर 19, 2020) गृह मंत्री अमित शाह अपने दो दिवसीय पश्चिम बंगाल दौरे पर सुबह कोलकाता पहुँचे। शाह आगामी राज्य विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की स्थिति का जायजा लेंगे। उन्होंने आज मिदनापुर में एक जनसभा को संबोधित किया। साथ ही गृह मंत्री ने रामकृष्ण आश्रम का दौरा किया, क्रांतिकारी खुदीराम बोस को श्रद्धांजलि दी, सिद्धेश्वरी मंदिर का दौरा किया और मिदनापुर में एक किसान के घर दोपहर का भोजन किया।

मुंबई पुलिस जावेद अख्तर की शिकायत पर कंगना के खिलाफ करेगी जाँच, कोर्ट ने दी मंजूरी: जानिए क्या है मामला

अंधेरी मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरआर खान ने आज मुंबई पुलिस को गीतकार जावेद अख्तर द्वारा अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज आपराधिक मानहानि के मामले में जाँच के निर्देश दे दिए हैं। बता दें जावेद अख्तर ने एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उनके खिलाफ कुछ बयान देने के लिए कंगना रनौत के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया था। कोर्ट ने पुलिस को अगले साल 16 जनवरी तक अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

जावेद अख्तर के वकील निरंजन मुंदरगी ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम बेवजह संवेदनशील मामले में घसीटा गया था, जबकि उनका साक्षात्कार दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु को लेकर था। मुंदरगी ने कहा कि कथित तौर पर एक ‘बॉलीवुड सुसाइड गिरोह’ में अख्तर का संदर्भ देते हुए रनौत ने उनका नाम भी घसीटा था।

मामले को लेकर अधिवक्ता मुंदरगी ने अदालत से आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 202 को लागू करने का अनुरोध किया और या तो गवाह को बयान दर्ज करने के लिए अदालत में बुलाने या पुलिस को मामले में जाँच करने के लिए निर्देश देने को कहा था।

गौरतलब है कि इस साल शुरुआत में रिपब्लिक टीवी को दिए एक साक्षात्कार में कंगना रनौत ने बॉलीवुड गीतकार जावेद अख्तर के ‘नास्तिक’ होने के बारे में खुलासा करते हुए कहा था कि जावेद अख्तर जैसे लोग, जो ‘नास्तिक’ होने का दिखावा करते हैं, वास्तव में, इंडस्ट्री के भीतर ऐसे लोगों पर नज़र रखते हैं कि वे इस्लाम के समर्थक हैं या नहीं? कंगना ने कहा कि कि ये लोग इंडस्ट्री में इस्लाम के समर्थकों या उनके हित में रहने वाले लोगों को ‘फ़िल्टर’ करते हैं और उन्हें बढ़ावा देते हैं।

इसके बाद दिए ‘रिपब्लिक टीवी’ को दिए एक और इंटरव्यू में कंगना रनौत ने बताया था कि जावेद अख्तर ने उन्हें अपने घर बुला कर कहा था, “तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि वह तुम्हें जेल में बंद कर देंगे। उन्होंने (ऋतिक रोशन) तुम्हारे खिलाफ़ सारे सबूत इकट्ठा कर लिए हैं। वह समझ चुके हैं कि केस पूरी तरह उनके हाथों में है। तुम्हें आत्महत्या करनी पड़ेगी क्योंकि तेरा मुँह काला हो जाएगा तो तू जाएगी कहाँ?” अब जावेद अख्तर ने इस बयान को लेकर कंगना के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है।

इन्हीं इंटरव्यू को लेकर अख्तर ने रनौत के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 और 500 के तहत मानहानि का मुकदमा दायर किया था। उन्होंने कहा था कि रानौत के साक्षात्कार को रिपब्लिक टीवी चैनल और YouTube पर लाखों लोगों ने देखा था। उन्होंने कहा कि साक्षात्कार टाइम्स नाउ और एबीपी न्यूज सहित कई मीडिया चैनलों द्वारा भी कवर किया गया था।

जज को धमकी देने वाले फहीम पाकिस्तानी के पीछे पड़ी यूपी पुलिस, कहा था- ‘किस खिड़की से गोली मारनी, सब तैयारी कर ली है’

उत्तर प्रदेश के बरेली में भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट के स्पेशल जज को पत्र लिखकर गोली मारने की धमकी देने का मामला सामने आया है। पत्र में आरोपित चुन्नीलाल को जमानत नहीं देने पर जज और उनके फैमली को जान से मारने की धमकी दी गई है। बता दें चुन्नीलाल भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद है। जज ने हाईकोर्ट के महानिबंधक को पूरी मामले की जानकारी दी है।

महानिबंधक के आदेश पर न्यायाधीश मोहम्मद अहमद खान ने उत्तर प्रदेश पुलिस को सूचित किया। जज की शिकायत के आधार पर यूपी पुलिस ने कथित तौर पर धमकी देने वाले फहीम पाकिस्तानी के खिलाफ आईपीसी की धारा 506 के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही पत्र भेजने वाले की तलाश में जुट गई है।

खबरों के मुताबिक, फहीम पाकिस्तानी ने पत्र में न्यायाधीश से कहा कि अगर उन्हें अपने परिवार को जिंदा रखना है तो चुन्नीलाल की जमानत मंजूर कर दे। आरोपित ने लिखा कि वह चुन्नीलाल का जिगरी दोस्त है और वह उसके लिए कुछ भी कर सकता है। उसने बताया कि वह चुन्नीलाल के कहने पर एक बार विधवा पेंशन कार्यालय में काम करने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर की हत्या भी कर चुका है।

न्यायाधीश को धमकी देते हुए उसने आगे लिखा कि उसने उनके घर के सारे ठिकानों का पता लगा लिया है। किस खिड़की से गोली मारनी है, सब तैयारी कर ली गई है। अगर उसकी माँग पूरी नहीं की गई तो परिवार समेत उसका खात्मा कर दिया जाएगा। इसके अलावा उसने अंत में लिखा कि काम कर दिया तो बढ़िया दावत नहीं तो नेस्तनाबूद कर देंगे।

वहीं जज ने कहा कि इस पत्र के मिलते ही वह और उनका परिवार डर में जी रहा एवं मानसिक रूप से परेशान है। उन्होंने एसएसपी से उनके और उनके परिवार की सुरक्षा के लिए सशस्त्र सुरक्षाकर्मी उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। इस बीच कोतवाली थाने की एक टीम मुरादाबाद के साथ अन्य ठिकानों पर फहीम पाकिस्तानी को दबिश देने के लिए रवाना हो चुकी है।

इसी तरह के कर्नाटक के एक मजिस्ट्रेट को सैंडलवुड ड्रग मामले में आरोपित अभिनेत्री रागिनी द्विवेदी और संजना गलरानी की रिहाई की माँग करते हुए बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई थी। इसके अलावा धमकी भरे संदेश में डीजे हल्ली और केजी हल्ली के बेंगलुरु दंगों में शामिल गिरफ्तार किए गए लोगों को भी छोड़ने की माँग की गई थी। पत्र ने न्यायाधीश से आरोपित और जेसीपी संदीप पाटिल को जाँच से दूर रखने के लिए भी कहा गया था।