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एक का गैंगरेप, दूसरी पर धर्मांतरण का दबाव: आदिवासी नाबालिगों की आवाज उठाने पर 14 ABVP कार्यकर्ता पहुँचे जेल

छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP/अभाविप) के सदस्य इन दिनों दो आदिवासी नाबालिग लड़कियों को न्याय दिलाने के लिए लगातार पुलिस प्रशासन के ख़िलाफ़ आवाज उठा रहे हैं। इस चक्कर में छात्र संगठन के कम से कम 14 सदस्यों की गिरफ्तारी भी हुई है। वहीं दर्जन भर को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि एबीवीपी के प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक घेराव करते हुए बैरिकेडिंग तोड़ी थी, इसलिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई।

पूरा मामला राज्य के कवर्धा जिले का है। छत्तीसगढ़ के एबीवीपी प्रदेश मंत्री शुभम जैसवाल ऑपइंडिया को जानकारी देते बताते हैं कि संगठन का प्रदर्शन 2 मामलों को लेकर था। पहला जिसमें एक 14 साल की आदिवासी लड़की के साथ गैंगरेप हुआ और दूसरा 13 साल की आदिवासी लड़की, जिसे बिना उसकी इच्छा के आंध्र प्रदेश चर्च भेज दिया गया।

14 साल की आदिवासी लड़की का गैंगरेप

शुभम पहले मामले का जिक्र करते हुए कहते हैं कि पिछले दिनों 22 नवंबर 2020 को 14 साल की एक आदिवासी बच्ची का गैंगरेप हुआ था। उस लड़की ने देर रात खून से लथपथ हालत में थाने पहुँचकर एफआईआर करवाई थी, मगर उस शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय ये कह दिया गया कि वह अपने ब्वॉयफ्रेंड के साथ घूमने गई थी।

प्रदेश मंत्री के मुताबिक अस्पताल में इलाज के बाद जब बच्ची को होश आया तो उसने दुष्कर्म करने वाले सभी लोगों को बाहर आजाद घूमते हुए देखा, तब वह दोबारा थाने गई और शिकायत करवाई। मगर, तब तक क्षेत्र के एसपी की ओर से कहा जा चुका था कि ये सब लड़की की साजिश है। वह कहते हैं कि एक 14 साल की आदिवासी लड़की के ऊपर उल्टा इल्जाम लगाने वाले पुलिस अधिकारी और केस की जाँच करने वाले अधिकारी के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए।

13 साल की आदिवासी लड़की को चर्च भेजा, बनाया धर्मांतरण का दबाव

अपने प्रदर्शन से जुड़े अन्य मामलों का जिक्र करते हुए जैसवाल जानकारी देते हैं कि एबीवीपी 13 साल की आदिवासी लड़की के लिए भी न्याय की माँग कर रहा है, जिसे पिछले दिनों बहला-फुसला कर उसके माँ-बाप से दूर लाया गया और यकीन दिलाया गया कि उसे शहर के नामी होली क्रॉस स्कूल में पढ़ाएँगे। लेकिन यहाँ से उसे आँध्र प्रदेश के एक चर्च में भेज दिया गया और वहाँ उस पर दबाव बना कि लड़की ईसाई धर्म अपना ले।

नारी के सम्मान में ABVP मैदान में

एबीवीपी का कहना है कि उनकी माँग केवल दो आदिवासी लड़कियों को न्याय दिलाने की थी। उन लोगों ने पुलिस का रवैया ढीला देख कर ही कलेक्टर कार्यालय के बाहर घेराव किया था, जिसके चलते उनकी कई माँग सुनी भी गई, लेकिन कुछ ही दिन में कॉन्ग्रेस नेता मोहम्मद अकबर समेत कई स्थानीय नेताओं का प्रेशर बनना शुरू हुआ और कार्यकर्ताओं के ऊपर गैर जमानती धाराएँ लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया।

एबीवीपी कार्यकर्ता

संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं को रिहा कराने के लिए जमानत के लिए दरख्वास्त डाली है लेकिन अभी तक उस पर सुनवाई नहीं हुई है। बता दें कि ऑपइंडिया को इन केसों से संबंधित एफआईआर नहीं मिली है, मगर एबीवीपी के प्रदेश मंत्री से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पहले मामले में लड़की का बलात्कार करने वालों में रिजवान खान नाम के लड़के को छोड़ कर बाकी सभी आरोपित नाबालिग हैं, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। शुभम का आरोप है कि पुलिस की ओर से लड़की की मेडिकल रिपोर्ट और एफआईआर भी पीड़िता के घर वालों को नहीं दी गई है। 

आदिवासी लड़कियों के लिए इंसाफ माँगते एबीवीपी कार्यकर्ता

भाजपा सांसद संतोष पांडे ने भी इस गिरफ्तारी का विरोध किया है। उन्होंने कहा,

“शनिवार को पुलिस एबीवीपी कार्यकर्ताओं को सीधे कार्यालय से उठाकर कोतवाली थाना ले आई। इसके बाद रात को ही उनका मेडिकल कराया व रातों रात जेल भेज दिया। यानि चेहरा देखकर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की है। इसी प्रकार अगर पुलिस दुष्कर्म पीड़िता का मेडिकल उसी दिन 22 नवंबर को रात को करा देती तो आरोपित जल्द पकड़े जाते। लेकिन पुलिस ने पूरे मामले में संदेह पैदा किया। पहले तो एक आरोपित को गिरफ्तार किया, फिर बाद में चार आरोपितों को पकड़ा, जबकि भाजपा द्वारा लगातार इस पूरे मामले में न्यायायिक जाँच की माँग की गई थी, लेकिन ध्यान नहीं दिया।”

जानकारी के मुताबिक इस पूरे केस में एबीवीपी के कई कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज हुआ है। इन लोगों के खिलाफ खिलाफ आईपीसी की धारा 186, 188, 353, 147, 427 और 3 लोक संपत्ति के नुकसान के तहत मामला दर्ज हुआ है। है।

पुलिस का पक्ष

ABVP कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन उनकी माँग और संबंधित कार्रवाई को लेकर जब ऑपइंडिया ने पुलिस का पक्ष जानने के लिए अधिकारियों को संपर्क किया तो हमें बताया गया कि पुलिस ने केवल 14 एबीवीपी सदस्यों को गिरफ्तार करके जेल भेजा है।

पुलिस का कहना है कि एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने घेराव के दौरान बैरीकेडिंग तोड़कर कार्यालय में एंट्री की थी, इसलिए उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई हुई। वह बताते हैं कि गैंगरेप मामले में 4 आरोपितों को जेल भेज दिया गया है और दूसरे केस में भी गिरफ्तारी की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में एबीवीपी सदस्यों की गिरफ्तारी के मद्देनजर धरना प्रदर्शन ने तूल पकड़ा हुआ है। रविवार को एक धरने में 500 से अधिक कार्यकर्ता शामिल हुए थे। इसमें कार्यकर्ताओं को छोड़ने व दुष्कर्म के मामले में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने, विवेचना में लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था।।

Facebook Fuel for India: ₹1.32 से बढ़ कर ₹3.68 लाख होगी प्रति व्यक्ति आय, जकरबर्ग से बोले मुकेश अंबानी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ‘फ्यूल फॉर इंडिया 2020’ इंवेंट की मेजबानी कर रहा है। इसमें फेसबुक चीफ मार्क जकरबर्ग और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत में अवसरों को लेकर चर्चा की। इन दोनों उद्योगपतियों ने भारत की आर्थिक वृद्धि को तेज करने में डिजिटलाइजेशन और छोटे कारोबारियों की भूमिका पर बात की।

दुनिया की टॉप थ्री अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा भारत

फेसबुक फ्यूल फॉर इंडिया 2020 इंवेंट में मुकेश अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को चलाने के अपने प्रमुख पॉलिसी, रचनात्मकता सहानुभूति, बिजनेस रिश्ते पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत कोरोना महामारी में भी बेहतर कर रहा है। भारत दुनिया की टॉप थ्री अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि देश एक प्रमुख डिजिटल समाज बन जाएगा, जिसे युवा चलाएँगे। अंबानी ने कहा कि हमारी प्रति व्यक्ति आय 1,800-2,000 अमरीकी डॉलर से बढ़कर 5,000 अमरीकी डॉलर हो जाएगी।

मार्क जकरबर्ग ने की भारत की तारीफ

इस दौरान मार्क जकरबर्ग ने कहा, “हमने पिछले महीने भारत में व्हाट्सएप पे (WhatsApp Pay) लॉन्च किया। यूपीआई सिस्टम और 140 बैंकों के सहयोग से यह संभव हो पाया। भारत इस तरह की पहल करने वाला दुनिया का पहला देश है।”

वहीं अंबानी ने कहा कि महामारी की भयावहता ने भारत में हम सभी को चौंका दिया। लेकिन मुझे लगता है कि भारत के डीएनए में यह बात ही नहीं है कि वह संकट की वजह से आगे बढ़ने से रुक जाए है। इस संकट ने नई वृद्धि के लिए एक अवसर दिया है। भारतीयों ने बहुत ही लचीलापन और संकल्प के साथ COVID-19 संकट का सामना किया। 

मार्क जकरबर्ग से ये बोले मुकेश अंबानी

मुकेश अंबानी ने मार्क जकरबर्ग से कहा कि Jio डिजिटल कनेक्टिविटी लेकर आई है। WhatsApp Pay के साथ WhatsApp चैट का इंक्लूजन होता है, तो इससे डिजिटल कनेक्निविटी बढ़ी है। रिलायंस रिटेल और JioMart भारत में हर किसी को ग्लोबल सर्विस में भाग लेने का मौका दे रहा है। अंबानी ने जकरबर्ग से कहा कि टेक्नोलॉजी अपनाने से भारत को संपत्ति बनाने में हेल्प मिलेगी।

अंबानी ने इस दौरान जकरबर्ग से भारत और रिलायंस जियो में निवेश का कारण भी पूछा। इस पर जकरबर्ग ने कहा कि भारत आर्थिक संभावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए फेसबुक ने भारी निवेश किया है। जकरबर्ग ने इस दौरान कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की भूमिका की अपनी पहचान है। डिजिटलाइजेशन से व्यक्तियों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी, जिससे भविष्य समृद्ध होगा।

दो दिन तक चलेगा कार्यक्रम

दो दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत आज (दिसंबर 15, 2020) से हुई है। फेसबुक की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर शेरिल सैंडबर्ग, इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी, WhatsApp के प्रमुख विल कैथकार्ट भी इस कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इस इवेंट का दूसरा सेशन बुधवार (दिसंबर 16, 2020) यानी कल सुबह 10 बजे से शुरू होगा।

ये है कार्यक्रम का मकसद

फेसबुक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर अजित मोहन ने इस इवेंट को लेकर कहा, ”हम भारत में फेसबुक की वास्तविक कहानी शेयर करना चाहते हैं, जिससे लोगों को यह समझने में आसानी होगी कि हमारे प्लेटफॉर्म के यूजर्स और संस्थाओं के जरिए हम क्या करने की कोशिश कर रहे हैं।”

19 दिसंबर को अमित शाह की मौजूदगी में BJP में शामिल होंगे शुभेंदु अधिकारी! 86 सीटों पर बदलेगा गणित

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे, ऐसा पार्टी नेताओं ने दावा किया है। मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि इस सप्ताह वो अपने राजनीतिक भविष्य की अटकलों पर विराम लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा में शामिल होंगे। 35 विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव रखने वाले शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री पद से पहले ही इस्तीफा दे रखा है।

पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह इसी सप्ताह के अंत में कोलकाता जाने वाले हैं। उधर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने निर्णय लिया है कि अब वो शुभेंदु अधिकारी का और मान-मनव्वल नहीं करेगी, भले ही वो पार्टी छोड़ कर कहीं और चले जाएँ। भाजपा में शामिल होने से पहले शुभेंदु अधिकारी दिल्ली भी जाने वाले हैं। ‘News 18’ की खबर के अनुसार, उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा भी प्रदान किए जाने की चर्चा चल रही है।

पिछले कई महीनों से शुभेंदु अधिकारी बिना TMC के झंडे के ही रैलियों को सम्बोधित कर रहे हैं और उनके समर्थक बांग्ला में ‘बड़े भाई का अनुयायी’ लिखे बैनर्स लेकर घूम रहे है। वो ममता बनर्जी सरकार में परिवहन एवं सिंचाई मंत्री हुआ करते थे। ईस्ट मिदनापुर के जिस नंदीग्राम आंदोलन की वजह से ममता बनर्जी ने 34 सालों की वामपंथी सत्ता को उखाड़ फेंका था, उसकी पूरी व्यवस्था शुभेंदु अधिकारी ने ही की थी।

TMC ने उन्हें मनाने के लिए सांसद सौगात रॉय को लगाया था, लेकिन जिस तरह से उनसे बातचीत का व्हाट्सप्प चैट सार्वजनिक कर के मीडिया को दे दिया गया, उससे शुभेंदु खासे नाराज हुए। 2019 लोकसभा चुनाव में जिन 13 सीटों पर तृणमूल की हार हुई, उनमें से 9 उनके प्रभाव वाली थी। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि उनके भाजपा में आने से 86 विधानसभा सीटों पर गणित बदलने की सम्भावना है। वो 19 दिसंबर को भाजपा में शामिल होंगे, ऐसा कहा जा रहा है।

‘News 18’ से बातचीत करते हुए भाजपा उपाध्यक्ष मुकुल रॉय ने कहा, ‘शुभेंदु अधिकारी पर फैसला हो गया है। 2 या 4 दिन में पार्टी में शामिल होंगे। सारी बातें लगभग हो चुकी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कितना भी दौरा कर लें, लेकिन वह और टीएमसी जीतेगी नहीं। सीएम कितना भी प्रचार करें, नतीजा जीरो ही रहने वाला है। ये छूटने की कोशिश है, दौरा नहीं है। TMC सुप्रीमो ममता मंगलवार (दिसंबर 15, 2020) को जलपाईगुड़ी के दौरे पर हैं।

इससे पहले अपनी राजनीतिक सेवा के बारे बताते हुए शुभेंदु ने कहा था कि वे अपनी क्षमता के मुताबिक ताउम्र आम लोगों की सेवा करते रहेंगे। बता दें शुभेंदु अधिकारी ने परिवहन मंत्री पद से इस्तीफा दिया है, लेकिन उन्होंने अभी तक टीएमसी के एमएलए व प्राथमिक सदस्यता पद से इस्तीफा नहीं दिया है। इसके बाद बागी टीएमसी नेता के रवैये को देखते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी की तरफ से हल्दिया में जुलूस निकाला गया था।

सिंघु बॉर्डर पर RAF तैनात, प्रकाश जावड़ेकर ने कहा- हर मुद्दे पर बातचीत को तैयार सरकार, कानून खत्म करना विकल्प नहीं

नए कृषि कानूनों के विरोध में सिंघु और टिकरी सीमाओं पर किसानों का आंदोलन लगातार 20वें दिन भी जारी है। दोनों पक्षों- कृषि यूनियनों और सरकार, के एक समझौते तक पहुँचने के अभी तक कोई संकेत नहीं हैं। दिल्ली-हरियाणा सिंघु सीमा पर किसानों के आंदोलन को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।

किसान अपनी माँगों पर अड़े हैं और किसान संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे कृषि कानूनों को रद्द करने से कम पर आंदोलन वापस नहीं लेंगे। इसे देखते हुए उन्होंने सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को भूख हड़ताल भी की। यही नहीं, आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी उनके समर्थन में उपवास किया।

सोमवार को 40 कृषि संघ के नेताओं ने सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक ‘सरकार को जगाने के लिए’ भूख हड़ताल की, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि केंद्र चाहता है कि कृषि कानूनों पर चरणबद्ध तरीके से चर्चा हो।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र पहले भी कह चुका है कि कृषि कानूनों पर सरकार आंदोलन कर रहे किसानों से बातचीत के लिए तैयार है। अगर किसानों की तरफ से बातचीत का प्रस्ताव आता है, तो सरकार निश्चित तौर पर उनसे बात करेगी। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि कृषि कानूनों पर किसान हमारे प्रस्ताव पर अपनी राय दें तो हम निश्चित रूप से आगे की बातचीत शुरू करेंगे।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रदर्शन कर रहे किसानों को संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सिर्फ संवाद से ही मसलों का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि कानूनों से जुड़े किसानों के हर मुद्दे पर बात करने को तैयार है, पर पूरा कानून खत्म कर देना विकल्प नहीं हो सकता है।

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “आज महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, बिहार, केरल और हरियाणा से आए 10 किसान संगठनों ने ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी के तहत दिल्ली पहुँचकर सरकार को कृषि कानूनों पर अपना समर्थन पत्र सौंपा है। किसान संगठनों के नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार किसानों के हित में ये तीनों कृषि कानून लेकर आई है इसलिए वो इसका स्वागत और समर्थन करते हैं।”

वहीं, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि किसानों को समझना चाहिए कि सरकार उनके साथ है, किसी भी प्रकार का अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने किसानों को प्रस्ताव दिया कि वे सरकार के साथ आएँ और कानूनों पर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ है और अगर किसान कृषि कानूनों के संबंध में कोई सुझाव देना चाहते हैं, तो सरकार इसे स्वीकार करने के लिए तैयार है।

सिंध में हिंदू घरों पर मुस्लिम भीड़ ने किया हमला, वीडियो में पीड़ितों ने कही व्यथा

पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि पाकिस्तान के सिंध में भील समुदाय के हिंदुओं के घरों पर इस्लामवादियों ने हमला किया और लूटपाट भी की।

बता दें कि पाकिस्तान में भील समुदाय एकदम हाशिए पर है और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है। ऑस्टिन ने बताया कि मोहम्मद असलम ने पड़ोस के कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर उस क्षेत्र में रहने वाले गरीब हिंदुओं पर अत्याचार किया और उन्हें अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर किया।

ये सताए हुए हिंदू अब अपने घर लौटने से डर रहे हैं। उन्होंने अब इस संबंध में सत्र न्यायाधीश और पाकिस्तान के एसएसपी पुलिस बाडिन को सुरक्षा के लिए अनुरोध किया है। राहत ऑस्टिन द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पीड़ित हिंदुओं को देखा जा सकता है, जो अपने साथ लगातार हो रहे अत्याचारों के खिलाफ नारे लगा रहे हैं।

ये दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ पाकिस्तान में बहुत ही आम हैं। अक्टूबर में, इस्लामवादियों ने हिंदुओं पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने के लिए उनके घरों को जला दिया था। राहत ऑस्टिन ने दावा किया था कि इस्लामवादी इस तरह का अत्याचार करके इस कोशिश में जुटे हुए हैं कि हिंदू लोग धर्म परिवर्तन करके इस्लाम अपना ले या फिर उनके लिए स्लेव बनकर काम करें।

गौरतलब है कि रविवार (सितंबर 20, 2020) को पाकिस्तान के सिंध प्रांत में 171 हिंदुओं को इस्लाम में धर्मांतरित करवाया गया। राहत ऑस्टिन ने सोमवार (सितंबर 21, 2020) को टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि हिंदू पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का धर्म परिवर्तन पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मदरसा अहसान-उल-तालीम (Ahsan-ul-Taleem), कराची के संगर में आयोजित एक सामूहिक धर्मान्तरण समारोह में किया गया था। उन्होंने दावा किया कि इस्लामिक आइडियोलॉजी काउंसिल के पूर्व सदस्य नूर अहमद तशर ने उन्हें इस्लाम कबूल करवाया।

इससे पहले जून में, सिंध प्रांत के बाडिन जिले में सौ से अधिक हिंदुओं को इस्लाम में धर्मांतरित किया गया था। कथित तौर पर, एक स्थानीय मंदिर में रखी हिंदू देवताओं की सभी मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया और परिसर को एक मस्जिद में बदल दिया गया। 17 मई को सिंध प्रांत में हिंदुओं ने दावा किया था कि तबलीगी जमात के लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उनके घरों में तोड़फोड़ की और इस्लाम कबूल नहीं करने पर एक हिंदू लड़के का अपहरण भी कर लिया।

वहीं 15 अगस्त को 204 अल्पसंख्यक हिंदुओं का पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन करवाया गया। धर्म परिवर्तन करने वाले अधिकांश हिंदू भील समाज के थे। इनमें से कुछ अभी हाल में धार्मिक वीजा से हिंदुस्तान से लौटे थे। बताया गया था कि 194 हिंदू सादिकाबाद में रहने वाले हैं जबकि 10 (एक ही परिवार के) रहिमयारखान के निवासी हैं। इस धर्मपरिवर्तन की सूचना जोधपुर में रहने वाले लोक संगठन के प्रेमचंद भील ने दी थी। वह लगातार हिंदुओं के संपर्क में हैं और उनके साथ ज्यादतियों को साझा करते रहते हैं।

‘मोदी मर जा तू’ गाने वाली महिलाओं के बाद ‘किसानों के बच्चों’ का इस्तेमाल: किसान ‘आंदोलन’ बना शाहीन बाग

वर्तमान में नए कृषि कानून के ख़िलाफ़ चल रहे किसानों के आंदोलन और पिछले साल शाहीन बाग में CAA/NRC के ख़िलाफ़ हुए आंदोलन में धीरे-धीरे कई समानताएँ नजर आना शुरू हो गई हैं।वामपंथियों और कट्टरपंथियों के समर्थन के बाद इस प्रदर्शन में शाहीन बाग की तरह अब बच्चों को आंदोलन का चेहरा बनाया जा रहा है। 

एनडीटीवी द्वारा शेयर की गई वीडियो में हम देख सकते हैं कि मोहाली से आए लोग अपने बच्चों को साथ लेकर आए हैं, जो वीडियो में कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि वह किसान परिवार से हैं और चूँकि इस आंदोलन को पूरी दुनिया का समर्थन मिलने लगा है, तो वो भी यहाँ शामिल होने आए हैं।

इसके अलावा बच्चों के अभिभावक भी कह रहे हैं कि वो नहीं चाहते कि उनके बच्चे इस प्रदर्शन से दूर रहें। वीडियो में एक चौथी कक्षा का बच्चा बैनर लिए बोलता नजर आ रहा है, जिसे देख मन में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या उस मासूम को इस बात की जानकारी भी है कि प्रदर्शन किस चीज को लेकर है या कड़ाके की ठंड में जिस प्रदर्शन का वो हिस्सा बनने के लिए आया है उसका नेतृत्व करने वाले लोग समाधान की माँग नहीं कर रहे बल्कि एक जिद्द लिए दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं, बिलकुल उसी तरह जैसे पिछले साल शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी बैठे थे।

याद दिला दें कि इसी प्रकार बच्चों का इस्तेमाल पिछले साल सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन में हुआ था। लोगों ने अपने बच्चों को प्रदर्शन पर लाकर बिठा दिया था और बच्चों से नारे लगवाए गए थे “जो हिटलर की चाल चलेगा, वो हिटलर की मौत मरेगा, जामिया तेरे खून से इंकलाब आएगा, जेएनयू तेरे खून से इंकलाब आएगा.. हम लड़कर लेंगे आजादी।”

इससे पहले भी शाहीन बाग के प्रदर्शन से मिलती जुलती कई तस्वीरें किसान आंदोलन से सामने आई थीं। जैसे इस प्रोटेस्ट के शुरू होते ही हमने सबसे पहले शाहीन बाग की दादी बिलकिस और भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर रावण को मौके पर पहुँचते देखा था।

फिर, सिंघू बॉर्डर से बिरयानी के वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने पिछले साल के प्रोटेस्ट को याद किया था। वीडियो में देखा गया था कि आंदोलन कर रहे ‘किसानों’ के बीच बिरयानी बाँटी जा रही है। 

प्रोटेस्ट के 15वें दिन वहाँ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई थी जिसने साबित कर दिया था कि पूरे आंदोलन को किसानों ने हाईजैक कर लिया है। तस्वीर में नजर आया था कि किसान महिलाएँ हाथ में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे कट्टरपंथियों और अर्बन नक्सलियों की रिहाई माँग रही थी। पोस्टर के सभी चेहरे वही थे जो सीएए/एनआरसी के ख़िलाफ़ आवाज उठा रहे थे। लोगों ने ये देख कर पूछा था कि क्या ये लोग भी अब किसान बन गए हैं।

8 तारीख को किसानों के भारत बंद ने भी शाहीन बाग की याद दिलाई थी। उस समय भी चक्का जाम जैसी नीतियाँ अपनाई गई थीं। अब बच्चों का नजर आना भी इसी बात का प्रमाण हैं कि ये दोनों प्रदर्शन एक ही मॉडल पर हैं। फर्क बस ये है कि आंदोलन का नाम एंटी-सीएए से एंटी कृषि बिलों में बदल गया है और बुजुर्ग दादी की जगह पर किसान आ गए हैं।

जिस अखबार ने लादेन को लिखा था ‘शहीद’, उसी का पत्रकार पहुँचा था हाथरस, योगी सरकार ने कोर्ट में पेश किया सबूत

उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड के दौरान हिरासत में लिए केरल के स्वघोषित पत्रकार सिद्दीक कप्पन (Siddique Kappan) की रिहाई को लेकर यूपी सरकार लगातार विरोध कर रही है। हाल में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके कप्पन की बेल याचिका नामंजूर करवाने के लिए हैरान करने वाले कई प्रमाण पेश किए।

केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट (KUWJ) के पत्रकार सिद्दीक कप्पन पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के साथ जुड़े होने का आरोप है। 5 अक्टूबर को उसकी गिरफ्तारी हाथरस जाते समय की गई थी। KUWJ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर इस गिरफ्तारी को अवैध बताया था और कप्पन की जमानत माँगी थी। लेकिन, यूपी सरकार ने कप्पन की रिहाई पर विरोध दर्ज कराते हुए सोमवार (14 दिसंबर 2020) को कहा कि कप्पन कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया और पीएफआई से जुड़ा है।

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना बस यही है कि यदि आरोपित की जमानत याचिका को मंजूरी दी गई तो इससे जाँच बाधित होगी और आरोपित दोबारा उन्हीं गतिविधियों में शामिल होगा, साथ ही जाँच एजेंसियों के लिए अनुपलब्ध हो जाएगा।

इतना ही नहीं सरकार ने अपने हलफनामे में कप्पन के पत्रकार होने की बात का भी विरोध किया। साथ ही KUWJ की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए। KUWJ पर कप्पन की वास्तविक पहचान छिपाने का आरोप भी लगाया गया और कहा गया कि कप्पन ने जिस अखबार में काम करने का दावा किया है, वो न्यूजपेपर “थेजस (Thejas)” दिसंबर 2018 में ही बंद हो चुका है।

थेजस के पूर्व संपादकों को लेकर हलफनामे में कहा गया कि वह भी पीएफआई के सदस्य थे और कप्पन अखबार में पत्रकार के तौर पर नहीं बल्कि कॉन्ट्रिब्यूटर के लिहाज से काम करता था। सरकार की ओर से प्रमाण पेश करने के लिए अखबार के मुख्य पेज की कॉपी का भी यूज किया गया। ये पृष्ठ 30 नवंबर 2011 को प्रकाशित अखबार का मुख्य पेज है। इस पृष्ठ से ज्ञात होता है कि थेजस अखबार के विचार कितने कट्टरपंथी थे कि वो ओसामा बिन लादेन जैसे खूँखार आतंकी को “शहीद” लिखने तक से नहीं चूके।

राज्य की ओर से पेश किए गए हलफनामे में कप्पन को मास्टरमाइंड कहकर पेश किया गया है और कई दंगों में उसकी भूमिका भी बताई गई है। यूपी सरकार की जाँच में कहा गया है कप्पन के तार कई पीएफआई सदस्यों, जो सिमी नाम के आतंकी संगठन से संबंद्ध रखते हैं, उनसे पाए गए हैं। इसके अतिरिक्त दस्तावेजों से भी कई खुलासे हुए हैं।

एफिडेविट में कहा गया है कि कप्पन और तीनों अन्य आरोपितों के ख़िलाफ़ पैसों की संदिग्ध लेन-देन पर भी जाँच चल रही है। इन चारों को दिल्ली दंगों के आरोपितों में से एक मोहम्मद दानिश के निर्देश पर भेजे जाने का उल्लेख हलफनामे में पढ़ने को मिलता है। कथित पत्रकार पर जानकारी देते हुए राज्य ने आरोप लगाया कि कप्पन ने पूछताछ में अपने दिल्ली वाले घर की जानकारी छिपाई और सोशल मीडिया अकॉउंट की सूचना भी साझा नहीं की।

अब KUWJ ने इस एफिडेविट पर जवाब देने के लिए कोर्ट से समय माँगा है, जिसकी वजह से पूरे केस की सुनवाई जनवरी के तीसरे माह में होगी। बता दें कि अपने फोन के जरिए और सोशल मीडिया के माध्यम से कप्पन लगातार पीएफआई सदस्यों के संपर्क में था। इनमें कुछ का संबंध प्रतिबंधित संगठन सिमी से भी था।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के स्टूडेंट विंग कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के नेता रऊफ शरीफ को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को तिरुवनंतपुरम से गिरफ्तार किया था। रऊफ शरीफ देश छोड़कर भागने की फिराक में था, मगर ED ने समय रहते कार्रवाई की और उसे धर दबोचा

ईडी की रिपोर्ट में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश के हाथरस कांड को लेकर हुए विवाद के बाद रऊफ शरीफ ने पीएफआई के सदस्यों और स्व-घोषित पत्रकार सिद्दीक कप्पन को वहाँ जाने के लिए फंड दिया था। जिसके बाद यूपी पुलिस ने सिद्दीक कप्पन को अतीकुर्र रहमान और मसूद अहमद समेत चार पीएफआई कार्यकर्ताओ को मथुरा से गिरफ्तार किया था। 

हिरोइन के इंटीमेट सीन के कारण पति से झगड़ा और आत्महत्या? वीजे चित्रा सुसाइड मामले में हेमनाथ गिरफ्तार

तमिल की मशहूर टेलीविजन एक्ट्रेस वीजे चित्रा के आत्महत्या मामले में पुलिस ने उनके पति हेमनाथ को गिरफ्तार कर लिया है। हेमनाथ पर चित्रा की माँ ने गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई है।

उन्होंने दावा किया कि हेमनाथ चित्रा को प्रताड़ित करते थे, जिसके कारण ये सब हुआ। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद हेमनाथ को सुसाइड के लिए उकसाने के आरोप में अरेस्ट किया है। चित्रा की माँ का कहना है कि उनकी बेटी खुद फँदे से नहीं लटक सकती, इसलिए इस मामले में निष्पक्ष जाँच हो।

बता दें कि चित्रा की मौत के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि आत्महत्या के पीछे आर्थिक परेशानी वजह हो सकती है। लेकिन अब हेमनाथ के ख़िलाफ़ मामला दर्ज होने के बाद इस केस में नया एंगल आया है।

चित्रा को परेशान करने के आरोप में हेमनाथ के ख़िलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पहले पूनमल्ली कोर्ट में पेश किया था और फिर उन्हें पोन्नेरी जेल में भेज दिया गया। पुलिस के पास उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत इकट्ठा हो गए हैं।

कहा जा रहा है कि हेमनाथ एक टीवी सीरियल में चित्रा के इंटीमेट सीन दिए जाने से खफा थे और जिस दिन चित्रा ने आत्महत्या की, उस दिन भी हेमनाथ ने उनके साथ गलत बर्ताव किया था। घटना के बाद से पुलिस कई दिनों तक चित्रा के दोस्तों और उनके पति से पूछताछ करती रही और इस पूछताछ के बाद ही गिरफ्तारी की गई।

उल्लेखनीय है कि 9 दिसंबर को चित्रा ने चेन्नई के बाहरी इलाके में स्थित एक होटल में फाँसी लगाई थी। वह होटल में रात के करीब ढाई बजे पहुँची थी। इसके बाद वह अपने कमरे में फ्रेश होने गईं और खुद को अंदर से बंद कर लिया। जब चित्रा ने काफी देर तक दरवाजा नहीं खोला तो उनके पति ने होटल स्टाफ की मदद ली और दूसरी चाभी से गेट खोला गया। अंदर चित्रा छत से लटकी हुईं थीं।

पहले भी हिंदू लड़की से शादी, फिर ज्योति को भी फाँसा: बेटियों को इस्लामी परवरिश, न्याय के लिए भटक रही पीड़िता

अब जब देश में कई राज्यों की सरकारें ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ कानून बना रही हैं, तो जाहिर सी बात है कि ऐसी घटनाओं के कम होने की उम्मीद है। इसी बीच उत्तराखंड से एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ एक पढ़ी-लिखी महिला, जिसे कानून, संविधान और आईपीसी-सीआरपीसी का पूरा ज्ञान है, वो भी इस ‘लव जिहाद’ का शिकार हो गईं। अधिवक्ता ज्योति बिश्नोई की शादी 2009 में अब्बास सिद्दीकी से हुई थी।

‘पहाड़ टीवी’ के पत्रकार अमित गोदियाल ने पीड़िता से बात कर के जाना कि उनके साथ क्या हुआ था। ज्योति ने बताया कि अब्बास ने शादी के समय उन्हें विश्वास दिलाया था कि वो जैसे चाहें, वैसे रह सकती हैं। इसके बाद वो ज्योति को लेकर पठानकोट चला गया। ज्योति को इस्लामी धर्मांतरण भी नहीं करना पड़ा। ज्योति ने बताया कि शादी के कुछ समय बाद अब्बास उन पर जामज पढ़ने और इस्लाम के हिसाब से खाने-पीने का दबाव बनाने लगा।

शादी के 1 वर्ष बाद दोनों की बेटी हुई। ज्योति ने बताया कि उसी दौरान उन्हें पता लगा कि अब्बास ने एक और शादी (वो भी हिंदू नाम की लड़की से ही) की हुई है, जो उसने उनसे छिपाया। इसके बाद ज्योति उसे छोड़ कर मायके आ गई। पीछे से अब्बास के परिवार वाले भी पहुँचे। ज्योति ने बताया कि उन्होंने अब्बास को छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन उसके परिवार वालों ने किसी तरह मान-मनव्वल कर के उन्हें साथ रहने के लिए मना लिया।

बाद में दूसरी बेटी भी हुई। ज्योति ने बताया कि अब्बास और उसके परिवार वालों ने फिर से लड़ाई-झगड़े शुरू कर दिए। उनकी बेटियों पर इस्लाम के हिसाब से रहन-सहन के लिए पाबंदियाँ लगाई जाने लगीं। जब ज्योति ने कहा कि उनकी बेटियाँ पूजा भी करेंगी, तो हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरें फेंक दी गईं। ज्योति बताती हैं कि दो बेटियाँ होने के बाद उन्हें इसीलिए प्रताड़ित किया जाने लगा कि बेटा क्यों नहीं हुआ?

ज्योति बिश्नोई ने बताया कि वो अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि अब्बास सिद्दीकी ने उनका हाथ तक तोड़ किया। कभी वो उन्हें लेकर वैष्णो देवी भी गया था, लेकिन अब बच्चियों को भी उसने अपने वश में कर रखा है। ज्योति ने कहा कि अगस्त 2020 में उन्हें घर से निकाल दिया गया। उन्होंने बताया कि अब्बास सिद्दीकी जेल में है और उसका पहले से ही आपराधिक इतिहास रहा है।

ज्योति बिश्नोई का पूछना है कि उनकी बच्चियाँ अपने अब्बा से मिलने जेल जा सकती हैं, आखिर क्या कारण है कि वो अपनी माँ से मिलने नहीं आती? उन्होंने कहा कि प्रशासन भी उन्हें ये साबित करने को कहता है कि वो उन बच्चियों की माँ हैं। उन्होंने कहा कि अब्बास उनकी बच्चियों को धमकाता है कि अगर वो उनसे मिलीं तो वो जहर खा लेगा। ज्योति ने कहा कि जब कानून को जानने वाली लड़की के साथ ऐसा हो सकता है, तो सोचिए कि उसका कैसा ब्रेनवॉश हुआ होगा! ज्योति ने बताया:

“मेरी बेटी के पैरों में समस्या थी और उसका इलाज चल रहा था। मेरी मज़बूरी थी कि मैं इसके लिए अब्बास सिद्दीकी पर निर्भर थी, नहीं तो मेरी बेटी अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाती। आप 10 वर्ष पहले की ज्योति और अब मुझे देखेंगे तो अंतर साफ़ नजर आएगा। अब्बास ने अब मुझे निशाँ नाम दे दिया है। मुझे प्रशासन ने भरोसा दिया कि मुझे अपनी बच्चियों से मिलवाया जाएगा। बच्चों को CWC के पास भेजा गया, जहाँ उनकी काउंसिलिंग हुई। लेकिन, बच्चों को मुझे नहीं सौंपा गया। जब अब्बा जेल में है और बच्चों के दोनों चाचा नशेड़ी हैं, ऐसे में उन्हें कौन संभालेगा? अब्बास अब तीसरी शादी भी करने जा रहा है। उसके पीछे बहुत सारे लोग हैं, मेरे साथ कोई नहीं है।”

ज्योति बिश्नोई की मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि उनकी बच्चियों को गलत परवरिश देकर उनके दिमाग में गलत बातें भरी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्चियों को बताया जाता है कि देखो, तुम्हारी माँ कितने लोगों को लेकर आ रही है। उनका चरित्र-हनन भी किया जाता है। ‘हिन्दू जागरण मंच’ के उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश आनंद इस मामले में पीड़िता की मदद करने में लगे हुए हैं।

‘पहाड़ टीवी’ के अमित गोदियाल ने उनसे भी बातचीत की, जिसमें उन्होंने बताया कि हिन्दू समाज की बच्ची को धोखा देकर ले जाया गया और फिर सड़क पर छोड़ दिया गया। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने न्याय के लिए 3 दिनों का धरना भी दिया। उन्होंने बताया कि प्रशासन इसे पति-पत्नी का झगड़ा मान कर काउंसिलिंग में लग गया। अंत में अब मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने नेता याकूब सिद्दीकी पर प्रशासन को बरगलाने का आरोप लगाया।

उन्होंने बताया कि अब्बास सिद्दीकी पुलिसकर्मियों से मारपीट के आरोप में जेल में है। उन्होंने कहा कि CWC से जुड़ा एक वकील भी है, जो कॉन्ग्रेस से जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन भी कॉन्ग्रेस के दबाव में है, क्योंकि कॉन्ग्रेस पार्टी चाहती ही नहीं है कि इस मामले में न्याय मिले। उन्होंने कहा कि अगर इसके लिए सुप्रीम कोर्ट तक भी जाना होना तो जाएँगे, लेकिन ज्योति को न्याय दिला कर रहेंगे।

बता दें कि हाल ही में उत्तराखंड के एक आदेश को लेकर बवाल हुआ था, जिसमें बताया गया था कि अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहित दम्पति को प्रोत्साहन स्वरूप 50,000 रुपए प्रदान किए जाते हैं। बाद में न सिर्फ आदेश जारी करने वाले पर कार्रवाई की गई, बल्कि इस पुराने कानून को वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। आक्रोशित लोगों ने पूछा था कि पूछा कि ‘लव जिहाद’ करने वाले को सजा की जगह 50,000 का सरकारी इनाम दिया जा रहा है?

BJP को हराना है तो विपक्ष को एकजुट होना होगा: गोवा जिला पंचायत में भाजपा की जीत पर राजदीप सरदेसाई

बिहार और हैदराबाद में अपना लोहा मनवाने के बाद भाजपा ने गोवा के जिला पंचायत चुनावों में भी जीत की ताल ठोक दी है। गोवा में सत्ताधारी भाजपा ने जिला पंचायत चुनावों में 49 सीटों में से 32 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कॉन्ग्रेस को यहाँ भी सिर्फ 4 सीटें मिलीं और आम आदमी पार्टी व एनसीपी के खाते में 1 सीट आई।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने इस जीत के बाद राज्य की जनता का आभार व्यक्त किया और कहा, “लोगों ने हम पर विश्वास जताया।” वहीं राज्य के भाजपा अध्यक्ष सदानंद तनावड़े ने कई आंदोलनों की चर्चा करते हुए कहा कि जिन एनजीओ और राजनीतिक पार्टियों द्वारा ये प्रोटेस्ट शुरू किए गए, उनका मकसद सरकार को बदनाम करना था। ये नतीजे उन सभी के मुँह पर तमाचा हैं और भाजपा की सराहना का प्रमाण हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि ने भी इस जीत को किसान, मजदूर, व्यापारी, महिलाओं और युवाओं का पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम प्रमोद सावंत के नेतृत्व के प्रति विश्वास बताया।

गोवा के नतीजों पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी खुशी जाहिर की है। नड्डा ने कहा कि गोवा में बीजेपी की जीत किसानों, मजदूरों, महिलाओं और युवाओं का बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार की नीतियों पर भरोसा दिखाती है।

भाजपा की ओर से आधिकारिक तौर पर भी इस जीत के लिए गोवा के लोगों को धन्यवाद दिया गया। संबित पात्रा ने तो नरेंद्र मोदी को गोवावासियों का शुभ चिंतक बताया।

वहीं गोवा में कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गिरिश चोड़ांकर ने कहा कि वो नतीजों पर गहन विश्वलेषण करेंगे। उन्होंने ये बात स्वीकार की कि उनकी पार्टी लोगों को विश्वास दिलाने में असमर्थ रही कि वह बदल रहे हैं। उन्हें (जनता को) पार्टी के (कॉन्ग्रेस) पुराने विधायकों को देख कर लगा कि यदि वह कॉन्ग्रेस को वोट देंगे तो वो भी भाजपा को जाएगा। हम जनता के मन में संदेह मिटाने में असफल हुए।

बता दें कि गोवा के जिला पंचायतों के लिए 12 दिसंबर को बैलट पेपर के जरिए मतदान हुआ था। राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) ने बताया था कि राज्य में 56.82 प्रतिशत (7.92 लाख योग्य मतदाताओं में से 4.50 लाख लोग) का मतदाता दर्ज किया गया था। 

गोवा जिला पंचायत चुनाव 2020 मार्च में भारत में कोरोनो वायरस महामारी की शुरुआत के बाद से राज्य में होने वाला पहला प्रमुख चुनाव था। इसे सभी कोरोना प्रोटोकॉल के बीच मतदान आयोजित किया गया था और SEC ने संक्रमित लोगों को भी अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी थी।

इस चुनाव के नतीजे आने के बाद मीडिया गिरोह के लोग भी इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। राजदीप सरदेसाई ने इसी क्रम में गोवा के नतीजों को आँकड़े के साथ पेश करते हुए बताया है कि जैसे रिजल्ट आए हैं, उस हिसाब से विपक्ष एकजुट होकर ही साल 2022 में भाजपा को हरा सकता है।