Home Blog Page 589

डोनाल्ड ट्रंप को बनाया सबका ‘किंग’, राम मंदिर के लिए उठाई आवाज: मिलिए भारतवंशी काश पटेल से, बन सकते हैं अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के चीफ

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद एक कश्यप पटेल उर्फ काश पटेल नाम की चर्चा बहुत तेज है। कहा जा रहा है कि अमेरिका में ट्रंप के इस कार्यकाल में खुफिया एजेंसी सीआईए का चीफ काश पटेल को बनाया जाए या फिर ट्रंप की कैबिनेट में उन्हें कोई अन्य ऊँचा पद मिलेगा। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रंप ने उन्हें इस पद पर नियुक्त करने का विचार पहले ही बना लिया था चर्चाएँ बस उनके राष्ट्रपति चुने जाने के बाद शुरू हुई है।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप के करीबी के तौर पर पहचाने जाने वाले काश पटेल भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हैं, जिनका जन्म 1980 में न्यूयॉर्क में हुआ, लेकिन उनकी जड़े गुजरात के वडोदरा से हैं। उन्होंने अमेरिका में कानून की पढ़ाई की है और विभिन्न सरकारी पदों पर काम किया है और बाद में उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाईं।

उन्होंने ट्रंप के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में आतंकवाद विरोधी सलाहकार के रूप में कार्य किया और कार्यवाहक रक्षा सचिव के चीफ ऑफ स्टाफ का पद भी संभाला। इसके अलावा उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व किया जैसे ISIS और अलकायदा आदि।

बताया जाता है कि 2016 में ट्रंप की सत्ता आने के बाद रूसी हस्तक्षेप को लेकर बनी एक समिति में शामिल किया गया। इस पर काम करने के दौरान ट्रंप का उनपर विश्वास बढ़ा और वो सफलता की सीढ़ी चढ़ते गए। अमेरिका के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए काश ने कभी अपने धर्म का मखौल नहीं बनाया। उन्होंने समय-समय पर हिंदुओं के लिए आवाज उठाई।

इसके अलावा जब राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई तब भी वह खुलकर राम मंदिर के समर्थन में आए थे। उन्होंने विदेशी मीडिया को लताड़ लगाते हुए कहा था कि मीडिया ने अयोध्या के 50 सालों की बात की जबकि हिंदू मंदिर का इतिहास 5000 साल पुराना है और मीडिया वो बताने से बची ताकि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा सके।

काश पटेल, ट्रंप के प्रति निष्ठा कई बार जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने ट्रम्प को बच्चों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए एक किताब द प्लॉट अगेंस्ट द किंग लिखी है। इसके अलावा उन्होंने “गवर्नमेंट गैंगस्टर्स: द डीप स्टेट, द ट्रुथ, एंड द बैटल फॉर अवर डेमोक्रेसी” नाम की एक किताब लिखी है। इसमें उन्होंने बताया है कि सरकार में किस कदर भ्रष्टाचार फैला हुआ है।

जिस हिंदू महिला को गुलामुद्दीन ने बीवी संग मिल काटकर गाड़ दिया, 8 दिन बाद भी उसके शव का न तो पोस्टमार्टम-न अंतिम संस्कार: जानिए अनीता जाट हत्याकांड की हर एक डिटेल

राजस्थान के जोधपुर में ब्यूटीशियन अनीता चौधरी उर्फ अनीता जाट की हत्या के 8 दिन बाद भी परिवार एक करोड़ रुपए मुआवजा, सरकारी नौकरी और सीबीआई जाँच की माँग को लेकर धरने पर बैठे हैं। शव का अभी तक ना ही पोस्टमार्टम हो पाया है और ना ही अंतिम संस्कार। प्रशासन ने इसके लिए परिवार को नोटिस भी दिया था। हालाँकि, परिवार के नहीं मानने पर अब उन पर कार्रवाई हो सकती है।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक अनीता चौधरी के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए पुलिस ने दो दिन पहले परिवार को नोटिस दिया था। इसके बाद बुधवार (6 नवंबर 2024) को प्रशासन और अनीता के परिजनों के बीच बातचीत भी हुई, उनकी माँगों को लेकर कोई सहमति नहीं बनी। अब प्रशासन ‘राजस्थान मृतक शरीर सम्मान विधेयक-2023’ के तहत परिवार पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

शव का पोस्टमार्टम नहीं हुआ, मृतक के परिवार पर हो सकती है कार्रवाई

इस कानून को मृतक के शरीर की गरिमा बनाए रखने और विरोध-प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए लाया गया था। इस कानून के तहत शव के साथ विरोध-प्रदर्शन करने पर 6 महीने से 5 साल तक जेल या जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही प्रशासन शव को अपने कब्जे में ले सकता है। इस कानून के अगर कोई परिजन मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार नहीं करता तो उसे एक साल तक की जेल या जुर्माना हो सकता है।

वहीं, बुधवार को सर्व समाज ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर अपनी माँगें रखीं। उसमें माँगें नहीं मानने पर जोधपुर बंद की चेतावनी दी गई है। वहीं, बुधवार की रात को पुलिस ने शांतिभंग की धारा में मृतक अनीता के पति और अनीता की सहेली सुमन उर्फ सुनीता को गिरफ्तार कर लिया है। कुछ दिन पहले दोनों के बीच बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था। ऑडियो वायरल करने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

हत्याकांड में कई गिरफ्तार

इस मामले में सरदारपुरा पुलिस ने कृष्णलीला नगर निवासी सुमन उर्फ सुनीता सेन, बागर चौक निवासी मोहम्मद यासीन अली, राबडिया निवासी जैफू खान, निवार घरों का मोहल्ला निवासी मोहम्मद शरीफ उर्फ मुन्ना, कलीमुद्दीन उर्फ कालिम, मोहम्मद हमीमुद्दीन, मकबुल अहमद, मोईनुददीन, मोहम्मद अज्जरम, युनुस को गिरफ्तारी किया है। इससे पहले मंगलवार को पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया था।

बता दें कि इस हत्याकांड का मुख्य आरोपित गुलामुद्दीन अब तक फरार है। उसे पुलिस खोज नहीं पाई है। हालाँकि, पुलिस ने वारदात की साथी उसकी बीवी आबिदा को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में 20 से अधिक लोगों से पूछताछ भी की है। पुलिस ने प्रॉपर्टी डीलर तैयब अंसारी के बंगले पर भी दो दिन छापेमारी की थी। हालाँकि, हत्या की वजह की तह तक अभी भी वह नहीं पहुँच पाई है।

30 साल पहले तक ऑटो चलाता था तैयब, अब बड़ा प्रॉपर्टी डीलर

अनीता के पति मनमोहन चौधरी और अनीता की ब्यूटी पार्लर में काम करने वाली सुनीता उर्फ सुमन सेन के बीच बातचीत का एक ऑडियो कुछ दिन पहले वायरल हुआ था। इसमें सुनीता अंसारी का नाम ले रही थी। अंसारी को केस में नामजद तैयब अंसारी माना जा रहा है। इसमें सुनीता अपनी जान को खतरा बताती है और कई लोगों के नाम भी लेती है।

शव मिलने से पहले की इस बातचीत में सुनीता ने मनमोहन से कहा था कि तैयब अंसारी सुनीता चौधरी को मार सकता है। सुनीता ने मनमोहन से कहा था, “तैयब दीदी (अनीता) को निपटा दिया होगा। अब मैं अंसारी को फोन करूँगी तो चार दिन के अंदर वह मुझे भी मरवा देगा।” मृतक अनीता के पति ने ऑडियो की पुष्टि की है। अब इस मामले में कई मोड़ आ गए हैं।

अनीता के पति मनमोहन और उसकी सहेली सुनीता की कॉल रिकार्डिंग बाहर आने के बाद पुलिस की रडार पर कई लोग आ चुके हैं। इनमें लोगों में कई डॉक्टर, ब्यूटी पार्लर संचालक, पाली के प्रॉपर्टी डीलर, बदमाश एवं अपराधी, व्यवसायी, अधिकारी और नेता भी शामिल हैं। तैयब अंसारी के घर छापेमारी के दौरान पुलिस ने यहाँ से मोबाइल, लैपटॉप, कम्प्यूटर सहित कई दस्तावेज बरामद किए हैं।

तैयब अंसारी 30 साल पहले तक पाली में ऑटो चलाता था। अब वह प्रॉपर्टी का कारोबार करता है। पाली में कुछ विवादित जमीनें भी ले रखी हैं। मारवाड़ के इलाकों में विवादित प्रॉपर्टी को लेकर तैयब अंसारी का नाम कई बार सामने आ चुका है। जोधपुर में सोजती गेट इलाके में एक होटल और जैसलमेर बाइपास पर उसका एक फार्म हाउस सह मैरिज गार्डन है। पाली और जोधपुर रोड पर भी एक फार्म हाउस है।

तैयब अंसारी से भी अनीता की थी बातचीत

पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, 50 वर्षीय मृतक अनीता और 42 के मुख्य आरोपित गुलामुद्दीन फारूकी तथा 55 वर्षीय प्रॉपर्टी डीलर तैयब अंसारी के बीच बातचीत होती थी। फोन की सीडीआर से पुलिस के हाथ कई सुराग लगे हैं। आशंका कि अनीता की मौत के पीछे प्रॉपर्टी का विवाद भी हो सकता है। इसे सत्यापित करने के लिए पुलिस अनीता के नाम की प्रॉपर्टी की जानकारी जुटा रही है।

सूत्रों के अनुसार, अनीता औऱ तैयब अंसारी के बीच प्रॉपर्टी को लेकर रिश्ते थे। आशंका है कि अंसारी ने अनीता के नाम पर काफी प्रॉपर्टी खरीद रखी है। इसमें से कुछ प्रॉपर्टी तैयब अंसारी ने बेच दी। इसके बाद अनीता उससे नाराज थी। अनीता की हत्या से 15 दिन पहले से ही अंसारी और अनीता के बीच अनबन हुई थी। इसके बाद अनीता और अंसारी ने सोशल मीडिया पर एक-दूसरे को ब्लॉक कर दिया था।

पुलिस ने गुलामुद्दीन के घर की गहन तलाशी ली थी, लेकिन वहाँ खून का एक भी धब्बा नहीं मिला। पुलिस को शक है कि अनीता की हत्या किसी दूसरे जगह पर की गई है। हत्या से पहले उसे प्रताड़ित भी किया होगा। अनीता के शव को 6 टुकड़ों में काटा गया था। ऐसे में हत्याकांड वाली जगह पर खून के धब्बे नहीं मिलना पुलिस को आशंका पैदा करता है। गुलामुद्दीन की गिरफ्तार बीवी आबिदा भी कह चुकी है कि हत्या करने में कई लोग शामिल हैं।

मंदिर पर हमले के बाद जस्टिन ट्रूडो की नई चिरकुटई: खालिस्तानियों से सुरक्षा का भरोसा नहीं दे रहा कनाडा, भारतीय दूतावास को रद्द करने पड़े कई कार्यक्रम

कनाडा की जस्टिन ट्रूडो सरकार खालिस्तानियों के पैरों में लोटते हुए और भी नीचता पर उतर आई है। कनाडा ने भारत के अस्थायी काउंसिलर कैम्प कार्यक्रमों को सुरक्षा देने से मना कर दिया है। यह जानकारी भारत के टोरंटो स्थित वाणिज्य दूतावास ने दी है। यह कैम्प कनाडा में रहने वाले भारतीयों को जीवन प्रमाण पत्र समेत बाकी सुविधाएँ देने के लिए लगाए जाते रहे हैं।

टोरंटो स्थित भारत के वाणिज्य दूतावास ने एक्स (पहले ट्विटर) पर जानकारी देते हुए लिखा, “सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कम्युनिटी कैम्प आयोजकों को थोड़ी भी सुरक्षा प्रदान करने में अपनी असमर्थता जताने के बाद वाणिज्य दूतावास ने पहले से निर्धारित वाणिज्य दूतावास कैम्प को रद्द करने का निर्णय लिया है।”

भारतीय दूतावासों के काम को इससे पहले भी रोका गया है। खालिस्तानी कट्टरपंथी लगातार ऐसे कैम्पों के बाहर हंगामा करते आए हैं और कनाडा की पुलिस उनको सुरक्षा देने के बजाय खालिस्तानियों को ही प्रश्रय दे रही है। इसी कारण से आगामी कार्यक्रम रोकने पड़े हैं।

इससे पहले कनाडा में स्थित भारतीय हाई कमीशन ने भी 3 नवम्बर, 2024 को उसके कामकाज में डाली गई बाधा के बारे बताया था। हाई कमीशन ने बताया था कि टोरंटो में हिन्दू सभा मंदिर में आयोजित किए गए एक ऐसे ही कैम्प में हिंसक खालिस्तानियों ने हंगामा किया और हमला किया।

भारतीय हाई कमीशन ने बताया था कि वह हर साला इस तरह के कैम्प आयोजित करता है और इस बार उसने ऐसी ही योजनाई थी। हाई कमीशन ने बताया कि इसके कनाडा की पुलिस से सुरक्षा भी माँग ली गई थी एल्किन फिर भी टोरंटो में यह हंगामा हुआ। हाई कमीशन ने बताया था कि इससे पहले 2-3 नवंबर को वैंकूवर और सरे में आयोजित कैम्प में भी हंगामा किया गया था।

हाई कमीशन ने बताया था कि वह इन कैम्प जीवन प्रमाण पत्र देता है और इससे हजारों लोग लाभान्वित होते हैं। हाई कमीशन ने बताया था कि उसने हंगामे के दिन भी 1000 अधिक जीवन प्रमाण पत्र जारी किए। उसने कहा है कि आगे वह सुरक्षा ना होने के चलते ऐसी सुविधाएँ नहीं दे पाएगा जिससे भारतीय और कनाडाई, दोनों ही जगह के नागरिकों को असुविधा होगी।

गौरतलब है हिन्दू सभा मंदिर के बाहर प्रदर्शन कर रहे खालिस्तानियों ने बाद में हिन्दुओं पर हमला भी कर दिया था। उन्होंने मंदिर में आए हुए श्रद्धालुओं पर लाठी डंडे से वार किया था। इस हमले के बाद पुलिस ने खालितानियों पर कार्रवाई करने के बजाय हिन्दुओं को ही मारना पीटना चालू कर दिया था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस हमले की निंदा की थी। कनाडा इससे पहले भी भारतीय राजनयिकों को लेकर लापरवाह रवैया अपनाता रहा है। आए दिन कनाडा में स्थित भारतीय हाई कमीशन और दूतावास के बाहर खालिस्तानी प्रदर्शन करते हैं और कई बार हिंसक भी हो जाते हैं, उनके खिलाफ भी कनाडाई प्रशासन कार्रवाई नहीं करता है।

कनाडा का यह रवैया प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की खीझ को दिखाते हैं। उनके द्वारा भारत पर लगाए निज्जर की हत्या समेत बाकी आरोप धराशायी हो चुके हैं और वह स्वयं कह चुके हैं कि उनके पास इस संबंध में कोई सबूत नहीं है। इसके बाद वह अब भारती राजनयिकों और दूतावासों को निशाना बना रहे हैं।

वक्फ ट्रिब्यूनल होने का मतलब कोर्ट की कोई औकात होना नहीं: केरल हाई कोर्ट ने कर दिया क्लियर, कहा- सिविल कोर्ट को आदेश लागू कराने का अधिकार; जानिए क्या है मामला

केरल हाई कोर्ट ने वक्फ को लेकर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। हाई कोर्ट ने कहा कि वक्फ न्यायाधिकरण होने के बावजूद सिविल कोर्ट को पुराने वक्फ विवादों से संबंधित अपने आदेशों को लागू करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि न्यायाधिकरण की स्थापना से पहले शुरू किए गए वक्फ विवादों से संबंधित आदेशों को निष्पादित करने के सिविल न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर रोक नहीं लगता है।

हाई कोर्ट ने कहा कि वक्फ अधिनियम में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है कि वक्फ न्यायाधिकरण वक्फ विवादों से संबंधित डिक्री को निष्पादित करने वाला एकमात्र मंच है। वक्फ अधिनियम के तहत ट्रिब्यूनल के गठन के बाद भी सिविल कोर्ट के पास वक्फ न्यायाधिकरण द्वारा पारित डिक्री को निष्पादित करने का अधिकार क्षेत्र बना हुआ है।

न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि वक्फ न्यायाधिकरण के गठन के बाद भी सिविल न्यायालय द्वारा वक्फ विवाद से संबंधित पारित डिक्री को निष्पादित करने पर कोई रोक नहीं है।” इसमें प्रिवी काउंसिल द्वारा 1872 में की गई टिप्पणी का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था, “भारत में एक वादी की मुश्किलें तब शुरू होती हैं, जब वह डिक्री प्राप्त कर लेता है।”

उच्च न्यायालय ने कहा कि वर्तमान मामला उस भावना का स्पष्ट उदाहरण है, क्योंकि इसमें डिक्री वर्ष 2000 में जारी की गई थी, जो 1996 में दायर एक मुकदमे में थी। यह डिक्री अभी भी निष्पादन की प्रतीक्षा कर रहा है। यहाँ तक कि इसके निष्पादन के लिए उचित मंच का प्रश्न भी अनसुलझा रह गया था। इस मामले में याचिकाकर्ता ने एक मस्जिद पर कानूनी मान्यता और नियंत्रण की माँग की थी।

याचिकाकर्ता ने बताया कि उसके पूर्वजों ने केरल राज्य वक्फ बोर्ड में पंजीकृत कुट्टिलांजी मुस्लिम मस्जिद बनवाई था। आरोप है कि प्रतिवादियों ने मस्जिद के प्रशासन के लिए गैर-कानूनी तरीके से एक समिति बनाई और मस्जिद पर नियंत्रण की कोशिश की। इस तरह, याचिकाकर्ताओं ने 1996 में मस्जिद की घोषणा, स्थायी निषेधाज्ञा और कब्जे की वसूली के लिए मुकदमा दायर किया।

जब मुकदमा शुरू हुआ था, तब केरल में वक्फ ट्रिब्यूनल का गठन नहीं हुआ था। मुकदमा लंबित रहने के दौरान इसे स्थापित किया गया। ट्रिब्यूनल के गठन के बाद प्रतिवादियों ने वक्फ अधिनियम 1995 की धारा 85 का हवाला देते हुए सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को चुनौती दी। उन्होंने तर्क दिया कि उक्त प्रावधान न्यायाधिकरण के गठन के बाद सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को समाप्त कर देता है।

वक्फ अधिनियम की धारा 85 सिविल न्यायालयों, राजस्व न्यायालयों और अन्य अधिकारियों को वक्फ संपत्ति, विवादों, प्रश्नों और अन्य मुद्दों से संबंधित मामलों पर कानूनी कार्रवाई करने से रोकती है। उस अधिनियम में कहा गया है कि इन मुद्दों को वक्फ ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित किया जाना चाहिए।

सिविल कोर्ट ने साल 2000 में याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें मस्जिद पर नियंत्रण दे दिया। साल 2016 में अपील अंतिम होने पर डिक्री को बरकरार रखा गया। जब याचिकाकर्ताओं ने सिविल कोर्ट (निष्पादन न्यायालय) में इस डिक्री को निष्पादित करने की माँग की तो अदालत ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) की धारा 37(B) का हवाला दिया।

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उचित अदालत के समक्ष निष्पादन याचिका दायर करने का आदेश दिया, जिसमें कहा गया कि केवल वक्फ न्यायाधिकरण ही डिक्री को निष्पादित कर सकता है। इस आदेश से दुखी होकर याचिकाकर्ताओं ने केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। आखिरकार हाई कोर्ट ने सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को बरकरार रखा।

हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि निष्पादन न्यायालय ने सीपीसी की धारा 37(बी) की गलत व्याख्या की है, क्योंकि उसने उसकी धारा 38 और आदेश XXI नियम 10 की अनदेखी की है। इसमें स्पष्ट रूप से किसी डिक्री को या तो उसे जारी करने वाली अदालत द्वारा या किसी भी अदालत द्वारा निष्पादित करने की अनुमति देता है, जिसे इसे निष्पादन के लिए स्थानांतरित किया गया है।

न्यायालय ने आगे कहा कि अधिनियम की धारा 7(5) यह सुनिश्चित करती है कि ट्रिब्यूनल के गठन से पहले सिविल अदालतों में शुरू किए गए पहले से मौजूद मामले वक्फ ट्रिब्यूनल के चालू होने के बाद भी सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में रहेंगे। अंत में न्यायालय ने निष्पादन न्यायालय को तीन महीने के भीतर डिक्री को लागू करने का निर्देश दिया।

अकबरुद्दीन ओवैसी ने फिर उगला ’15 मिनट’ वाला जहर, महाराष्ट्र की रैली में भीड़ बजाती रही ताली: समर्थन में जोर-शोर से नारेबाजी

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी की वीडियो फिर से विवादों में है। इसमें उन्होंने अपने 15 मिनट वाले विवादित बयान को दोहराया है और भीड़ उनका उत्साह बढ़ाती दिख रही है।

अकबरुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान औरंगाबाद में अपना ’15 मिनट वाला’ विवादास्पद भाषण दिया। अपनी टिप्पणी में उन्होंने कहा, “अरे भाई 15 मिनट बाकी है, सब्र करिए, न वो मेरा पीछा छोड़ रही है न मैं उसका पीछा छोड़ रहा हूँ। चल रही है मगर क्या गूंज है।” इसके बाद भीड़ उनका भाषण सुन जोर-जोर से चिल्लाती, तालियाँ बजाती और 15 मिनट-15 मिनट के नारे लगाती दिखी जैसे उन्हें संदर्भ समझ आ गया हो।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद एक बार फिर ओवैसी की कट्टरपंथी मानसिकता पर सवाल उठ गया है। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर एमपी-एमएलए कोर्ट ने इसे क्यों बरी किया था। कहा जा रहा है कि अकबरुद्दीन जैसे लोगों का इलाज सिर्फ सजा है

बता दें कि अकबरुद्दीन ओवैसी ने साल 2012 में 15 मिनट वाला भड़काऊ बयान दिया था, तब उन्होंने कहा था कि देश से 15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो तो पता चलेगा कौन ज्यादा ताकतवर है।

2012 का विवादित बयान

अपने बयान में अकबरुद्दीन ने कहा था, “ऐसे कई मोदी आए और चले गए। आज लोग कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात जीत लिया है और एक दिन वह देश के प्रधानमंत्री बनेंगे, हम भी देखेंगे कि ऐसा कैसे होता है। लोग मुसलमान को डरा रहे हैं। मोदी है, मोदी है, काहे का मोदी। एक बार हैदराबाद आ जाओ बता देंगे। तसलीमा नसरीन आई, कहाँ है किसी को नहीं मालूम। हम 25 करोड़ हैं, तुम 100 करोड़ है न… ठीक है तुम तो हमसे इतने ज्यादा हो… 15 मिनट पुलिस को हटा लो हम बता देंगे कि किसमें कितना दम है। एक हजार क्या? एक लाख क्या एक करोड़ नामर्द मिलकर भी कोशिश कर लें तो भी एक को पैदा नहीं कर सकते। और ये लोग हमसे मुकाबला नहीं कर सकते। जब मुसलमान भारी पड़ा तो यह नामर्दों की फौज आ जाती है।”

पूरे शरीर में सूजन, देखने-सुनने-बोलने में दिक्कत… साध्वी प्रज्ञा ने फोटो शेयर कर याद किया ‘कॉन्ग्रेस का टॉर्चर’, पोर्न दिखा बेल्ट से होती थी पिटाई: कहा- जिंदा रही तो कोर्ट अवश्य जाऊँगी

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा ने कॉन्ग्रेस पर उनका जीवन बर्बाद करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया साइट पर अपनी एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है कि ATS के जरिए कॉन्ग्रेस के टॉर्चर के कारण उनके ब्रेन में सूजन आ गई है, आँखों से देखने और कानों से सुनने में कठिनाई जैसी समस्याएँ हो गईं। तस्वीर में वह बेहद बीमार दिख रही हैं। उनका चेहरा सूजा हुआ है।

साध्वी प्रज्ञा ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने पोस्ट में लिखा, “कॉन्ग्रेस का टॉर्चर सिर्फ ATS कस्टडी तक ही नहीं, मेरे जीवन भर के लिए मृत्युदायी कष्ट का कारण हो गए हैं। ब्रेन में सूजन, आँखों से कम दिखना, कानों से कम सुनाई देना, बोलने में असंतुलन, स्टेरॉयड और न्यूरो की दवाओं से पूरे शरीर में सूजन। एक हॉस्पिटल में उपचार चल रहा है। जिंदा रही तो कोर्ट अवश्य जाऊँगी।”

दरअसल, साध्वी प्रज्ञा साल 2008 में हुए मालेगाँव ब्लास्ट मामले में आरोपित हैं। वे पिछले कुछ महीनों से मेडिकल के आधार पर अदालत में पेश नहीं हुई हैं। इसके बाद मामले की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की कोर्ट ने साध्वी प्रज्ञा को जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट का कहना है कि मामले की फाइनल बहस चल रही है और आरोपित का कोर्ट में जरूरी है। 

साध्वी प्रज्ञा ने साल 2020 में अपने साथ हुए अमानवीय व्यवहार को लेकर रिपब्लिक टीवी को एक साक्षात्कार दिया था। साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह की उपस्थिति में 3-4 पुलिसकर्मियों ने उन्हें बहुत अधिक प्रताड़ित किया था। उन्हें हिरासत में लेकर बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उन्हें वेंटिलेटर पर जाना पड़ा था।

उन्होंने कहा था कि बेल की बात होने पर न्यायाधीशों तक को धमकी दी गई। साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बताया कि हिरासत के दौरान उन्हें पॉर्न वीडियो दिखाया गया और उनसे भद्दे सवाल किए गए। उन्होंने बताया था कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया, फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास हुआ। उनका आरोप है कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।

साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था। उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया था, उनको बिजली के झटके दिए जाते थे। गाली-गलौज आम बात थी। उनको पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो देखने पर मजबूर किया जाता था। उनको लगातार पीटने के लिए 5-6 पुलिस वाले लगाए जाते थे और जब वह थक जाते थे तो दूसरे पुलिसकर्मी उनको पीटने लग जाते थे।

इन सबके बाद जब उन्हें कोर्ट के आदेश पर डॉक्टर के पास ले जाया जाता था तो उन पर दबाव रहता था कि वह यह रिपोर्ट दे कि साध्वी एकदम ठीक हैं। 25 सितम्बर 2023 को NIA कोर्ट के सामने पेश हुईं साध्वी प्रज्ञा ने बताया था उनकी बीमारी की हालत के लिए कॉन्ग्रेस जिम्मेदार है। साध्वी ने बताया कि जब उनको मालेगाँव धमाके के बाद पूछताछ के लिए बुलाया गया था तब वह पूरी तरह स्वस्थ थीं,।

उन्होंने बताया था कि पुलिस की हिरासत में उनकी हालत बिगड़ी। उनको कैंसर और न्यूरो की बीमारी हो गई। शरीर में पस तक पड़ गया। दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर वर्ष 2008 में हुए मालेगाँव धमाकों के सम्बन्ध में NIA के विशेष कोर्ट के समक्ष अपना बयान दर्ज करवा रही थीं। उनके साथ मालेगाँव धमाके में आरोपित बनाए गए अन्य 7 व्यक्तियों का भी बयान दर्ज किया जा रहा था।

साध्वी प्रज्ञा के साथ जिन अन्य लोगों के बयान दर्ज किए गए उनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, सुधाकर द्विवेदी, समीर कुलकर्णी और अजय राहिरकर शामिल हैं। इस दौरान साध्वी से लगभग 60 प्रश्न पूछे गए। मालेगाँव में 29 सितम्बर को हुए इन धमाकों में 9 लोगों की मृत्यु हुई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।

बताया गया था कि यह धमाके एक मोटरसाईकिल में बम लगाकर किए गए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया था। NIA द्वारा वर्ष 2016 में दाखिल अंतिम चार्जशीट में उनका नाम नहीं था और उन्हें जमानत मिल गई थी। उनको इस मामले में दोषी नहीं माना गया था। साध्वी प्रज्ञा बताया था कि कॉन्ग्रेस की ध्रुवीकरण की राजनीति के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया था जिसका नेतृत्व तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम कर रहे थे।

जो आतंकवादी कश्मीरी पंडितों का हत्यारा, उसकी बीवी ने राहुल गाँधी से यूँ ही नहीं माँगी मदद: मनमोहन सरकार में मिला था खूब ‘लाड़’, रवीश कुमार का रहा है ‘साहब’

आतंकी गतिविधियों को जम्मू-कश्मीर में अंजाम तक पहुँचाने के लिए कु्ख्यात ‘जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट’ का आतंकी यासीन मलिक जेल में बेचैन है। उसने जेल के भीतर अमानवीय व्यवहार का इल्जाम लगाकर भूख हड़ताल शुरू की है और बाहर उसकी पाकिस्तानी बीवी मुशाल दर दर भटकर उसके लिए रहम माँग रही है। इसी क्रम में हाल में यासीन की पत्नी ने हाल में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को चिट्ठी लिखी और बताया कि यासीन एक अहिंसक आदमी है और इस भूख हड़ताल से उसकी सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

पत्र में माँगी राहुल गाँधी से मदद

अपने पत्र में मुशाल ने राहुल गाँधी को सम्मान देते हुए अपना दर्द सुनाया। इसमें कहा गया एनआईए ने यासीन के खिलाफ मौत की माँग की है और 2019 से केंद्र सरकार यासीन को अकल्पनीय तरीकों से प्रताड़ित कर रही है।

मुशाल ने शिकायत की मलिक पर 35 साल पुराने मामले में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का मुकदमा चलाया जा रहा है और अब एनआईए उसके खिलाफ दर्ज मनगढ़ंत मामलों में उसके लिए मौत की सजा की माँग कर रहा है।

मुशाल ने राहुल गाँधी से आग्रह किया कि वो संसद में अपने उच्च नैतिक और राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करें और यासीन मलिक के मामले पर एक चर्चा शुरू करें। वो जम्मू कश्मीर में ‘दिखावटी’ नहीं, बल्कि वास्तविक शांति कायम करने का जरिया बन सकता है।

अब आगे बढ़ने से पहले बता देते हैं कि जिस यासीन मलिक को मुशाल शांति का दूत बता रही हैं उस पर असल में इल्जाम क्या-क्या हैं।

यासीन मलिक पर लगे इल्जाम

यासीन मलिक पर केस कोई एक मामले पर नहीं चल रहा है। उसके आतंक से जुड़े होने का इतिहास काफी पुराना है। 1989-1990 के बीच जब इस्लामी कट्टरपंथियों ने घाटी से कश्मीरी पंडितों का नरसंहार शुरू किया तब यासीन मलिक का नाम उन हत्यारों में शामिल था जिन्होंने चुन-चुन कर कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया।

इसके अलावा उसके ऊपर 1990 में वायुसेना के चार जवानों की हत्या का भी आरोप है जिसे उसने मीडिया में खुद स्वीकार किया हुआ है। यासीन पर कश्मीरी पंडित न्यायाधीश न्यायमूर्ति नीलकंठ गंजू की हत्या सहित कई अन्य गंभीर अपराधों में संलिप्तता का भी आरोप लगा हुआ है।

इतना ही नहीं आज उसपर जो मुकदमे चल रहे हैं वो उसके कुकर्मों का परिणाम हैं। उसपर घाटी में आतंक गतिविधियों को अंजाम देने के साथ, आतंकियों के लिए धन जुटाने और देश के खिलाफ य़ुद्ध छेड़ने के भी आरोप हैं।

कॉन्ग्रेस काल में यासीन मलिक को मिला हर जगह लाड़

अब सवाल है कि यदि यासीन इतना कुख्यात रहा है तो फिर उसकी बीवी किस आधार पर जाकर राहुल गाँधी से यासीन का मुद्दा उठाने की बात कर रही है। तो बता दें कि इस बिंदु को समझने के लिए उस दौर में जाना पड़ेगा जब सत्ता कॉन्ग्रेस की थी और प्रधानमंत्री खुद यासीन का स्वागत करते थे।

1990 में घाटी में खून-खराबा करने का दोषी 2006 में अचानक कॉन्ग्रेस का प्यारा बन गया था। खुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यासीन मलिक को नई दिल्ली में पीएम आवास पर बुलाया था और कई मुद्दों पर उससे चर्चा की थी। आज भी यासीन मलिक के साथ पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की मुस्कुराती फोटो, वीडियो आपको वायरल होती मिल जाएगी।

इस मुलाकात का असर ये हुआ था कि यासीन मलिक को प्रमुख मीडिया संस्थानों के बड़े-बड़े कार्यक्रमों में बुद्धिजीवी बनाकर लाया जाने लगा। 2008 के इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में यासीन को यूथ आईकन बनाकर पेश किया गया था। वहीं साल 2013 में एनडीटीवी ने यासीन मलिक को उसका पक्ष तक रखने का मंच दिया था और इस दौरान रवीर कुमार यासीन मलिक को ‘साहब’ और ‘यस सर’, ‘जी सर’ कहते नजर सुनाई पड़े थे।

नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद हुआ इंसाफ

यासीन को आतंकी मानने का सिलसिला तो शुरू ही मोदी सरकार के आने के बाद हुआ और उसकी गिरफ्तारी 2017 में जाकर हुई थी। उस समय राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों के लिए धन जुटाने के मामले में उसे पकड़ा था और फिर उसे टेरर फंडिंग से संबंधित मामलों में आरोपित बनाया गया। इसके बाद, 19 मई 2022 को एक विशेष अदालत ने उसे विभिन्न आरोपों के तहत दोषी ठहराया।

2017 की गिरफ्तारी के बाद यासीन अब तक जेल में है। वरना एक समय 1990 का भी था जब वो खुलेआम वायु सेना के जवानों की बात कबूलता था और जेल से रिहा होता रहता था। केंद्र में बैठी केंद्र सरकार को उस समय ये तक नहीं लगा कि वो किस व्यक्ति को सम्मान दे रहे हैं और मीडिया को ये नहीं समझ आया कि किसे यूथ आइकन बनाया जा रहा है। उस समय यासीन अपने कुकर्मों को खुलेआम स्वीकारता था, पाकिस्तान जाने के किस्से बताता था, खुलेआम हाफिज सईद से मिलता था, भारत से कश्मीर को अलग करने की बात करता था और फिर तत्कालीन भारत सरकार ही उसे लाड़ देती थी।

यही वजह है कि आज यासीन की बीवी मुशाल अपनी गुहार लेकर राहुल गाँधी के पास पहुँची है क्योंकि उन्हें लगता है कि जिन लोगों ने सत्ता में रहते उनके शौहर को मेहमानों की तरह सम्मान दिया वो आज विपक्ष में रहते हुए उनके शौहर के लिए आवाज तो उठा ही सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने PM मोदी को बताया ‘शानदार इंसान’, कहा- सारी दुनिया आपसे करती है प्यार, भारत सच्चा दोस्त: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत पर प्रधानमंत्री ने फोन कर दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (6 नवंबर 2024) को अमेरिका में भारी बहुमत से वापसी करने वाले डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए बधाई दी। पीएम मोदी ने ट्रंप से बातचीत भी की। कहा जा रहा है कि बातचीत के दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें एक शानदार इंसान बताया और कहा कि पूरी दुनिया उनसे प्यार करती है।

सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप ने कहा कि भारत एक शानदार देश है और वह प्रधानमंत्री मोदी और भारत को अपना एवं अमेरिका का सच्चा मित्र मानते हैं। इस दौरान दोनों नेताओं ने विश्व शांति के लिए मिलकर काम करने की बात कही। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी विश्व उन पहले नेताओं में शामिल हैं, जिनसे अपनी जीत के बाद उन्होंने बात की।

इस बातचीत की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया साइट X पर भी दी। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, “मेरे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शानदार बातचीत हुई और उन्हें उनकी शानदार जीत पर बधाई दी। प्रौद्योगिकी, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और कई अन्य क्षेत्रों में भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करने के लिए एक बार फिर मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूँ।”

बुधवार को शानदार जीत के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि वे सबसे पहले युद्धों को रोकने का काम करेंगे। बता दें कि भारत भी विश्व को युद्ध के बजाय कूटनीतिक मार्ग से रास्ता निकालने की वकालत करते रहा है। भारत रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए भी कई बार बातचीत की अपील कर चुका है। वहीं, ट्रंप भी कह चुके हैं कि वे इस युद्ध को रोकने में सहयोग करेंगे।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बेहद मधुर संबंध हैं। वे एक-दूसरे को मित्र मानते हैं। इसका प्रमाण साल 2019 में अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदी!’ और साल 2020 में भारत में आयोजित ‘नमस्ते ट्रंप’ में भी दिखा था। इन दोनों आयोजनों में जनता के बीच बेहद जोश देखने को मिला था। इन दोनों नेताओं के बीच बेहतरीन केमेस्ट्री भी देखने को मिलती है।

रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड जे ट्रम्प चुनाव में 295 इलेक्टोरल वोट से शानदार जीत के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति बन गए हैं। उन्होंने डेमोक्रेट कमला हैरिस को बुरी तरह हराया। कमला हैरिस आवश्यक 270 में से 226 वोट जीतने में सफल रहीं। ट्रम्प ने लगभग 50.9% वोट (72,560,841) मिले। वहीं, कमला को 47.6% (67,878,826) वोट मिले।

डेमोक्रेट्स के लिए एक बड़ी उथल-पुथल में डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 कॉन्ग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट के साथ 28+ राज्यों में जीत हासिल की। वहीं, कमला हैरिस ने 18 राज्यों के अलावा डीसी और नेब्रास्का में 1 डिस्ट्रिक्ट जीता। अमेरिकी सीनेट में अब 52 सीटों के साथ रिपब्लिकन बहुमत में है। प्रतिनिधि सभा के अंतिम परिणाम अभी आने बाकी हैं, जिसमें कई दिन लग सकते हैं। वर्तमान में यह एक करीबी मुकाबला है।

ट्रंप ने इतिहास रच दिया। वे राष्ट्रपति बनने के बाद एक चुनाव हारे और फिर अगला चुनाव जीता। इस तरह वे अमेरिका के 132 वर्षों के इतिहास में इस तरह राष्ट्रपति बनने वाले पहले राष्ट्रपति बन गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने साल 2016 में पूर्व विदेश मंत्री एवं पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन को हराया था। साल 2020 में ट्रंप जो बाइडेन से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने फिर शानदार वापसी की है।

परिवार संग घूमने पुडुचेरी आई नाबालिग लड़की, पहले ऑटो ड्राइवर ख्वाजा मोईनुद्दीन ने रेप किया, फिर 4 लोगों का ग्रुप उठाकर ले गया चेन्नई और बनाया हवस का शिकार

पुडुचेरी में एक नाबालिग लड़की से गैंगरेप का मामला सामने आया है। 16 वर्षीया पीड़िता अपने परिवार के साथ मुंबई से घूमने आई थी। इस मामले में पुलिस ने ऑटो ड्राइवर ख्वाजा मोईनुद्दीन सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपित की तलाश जारी है।

रिपोर्टों के अनुसार लड़की से पहले ऑटो ड्राइवर ख्वाजा मोईनुद्दीन ने रेप किया। फिर उसे बेसुध हालत में छोड़कर भाग गया। यहाँ से चार पर्यटकों का एक समूह उसे उठाकर चेन्नई ले गया और हवस का शिकार बनाया। उसके बाद ये लोग उसे दोबारा पुडुचेरी में छोड़ गए। पीड़िता 1 नवंबर 2024 को समुद्र तट पर अचेत हालत में पुलिस को मिली थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना पुडुचेरी के ग्रैंड बाजार थाना क्षेत्र की है। 16 वर्षीया पीड़िता परिवार के साथ घूमने आई थी। 30 अक्टूबर की किसी बात पर उसका परिजनों से झगड़ा हो गया। गुस्से में वह रात के करीब 9 बजे कमरे से निकल गई। रास्ते में उसे एक ऑटो मिला जिसे 34 साल का ख्वाजा मोईनुद्दीन चला रहा था।

ख्वाजा मोईनुद्दीन ने उसे पुडुचेरी घुमाने का झाँसा दिया। रास्ते में पीड़िता के पीने के सामान में नशीला पदार्थ मिला दिया। उसके बाद उसे कोट्टाकुप्पम स्थित अपने घर ले गया। यहाँ बलात्कार करने के बाद वह पीड़िता को एक सड़क पर छोड़ कर भाग निकला।

सड़क किनारे बेसुध पड़ी पीड़िता को 4 पर्यटकों के एक ग्रुप ने देखा। ये सभी चेन्नई के निवासी थी जो नशे में धुत थे।ये लोग पीड़िता को अपने साथ करीब 160 किलोमीटर दूर चेन्नई ले गए। यहाँ इन सभी ने पीड़िता से रेप किया। बाद में ये लड़की को फिर से पुडुचेरी लेकर आए समुद्र तट पर छोड़कर भाग निकले। इधर परिजन लगातार लड़की की तलाश में जुटे थे। उन्होंने 31 अक्टूबर को पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी।

1 नवंबर को पुलिस की गश्त कर रही एक टीम की नजर समुद्र तट के किनारे बेसुध पड़ी पीड़िता पर गई। फ़ौरन ही पुलिस बल ने पीड़िता को अस्पताल पहुँचाया। इलाज के दौरान पीड़िता से रेप की पुष्टि हुई। चाइल्ड वेलफेयर बोर्ड की एक टीम ने अस्पताल पहुँच कर पीड़िता की काउंसिलिंग की। लड़की के बयानों के आधार पर पॉक्सो एक्ट सहित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अन्य धाराओं में FIR दर्ज हुई।

पुलिस टीम ने केस दर्ज कर जाँच शुरू की। अब तक ऑटो ड्राइवर ख्वाजा मोईनुद्दीन सहित 4 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं। इसमें चेन्नई ले जाकर रेप करने वाले 3 पर्यटक भी शामिल हैं। एक अन्य पर्यटक फ़िलहाल फरार चल रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।

अमेरिका का नागरिक है ऑरी: राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को दिया वोट, बाँहों में बाँहें डाली रहती हैं बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हिरोइनें

ऑरी अक्सर सोशल मीडिया में चर्चा में रहता है। वह बॉलीवुड हिरोइनों के साथ पार्टी करते दिखता है। लोग जानना चाहते हैं कि वह कौन है। अब उसके एक इंस्टाग्राम पोस्ट से पता चला है कि वह अमेरिका का नागरिक है। इस बार उसने राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को वोट भी दिया है।

उसने इन्स्टाग्राम पर कुछ फोटो डाल कर ट्रंप को जीत की बधाई भी दी है। इन्स्टाग्राम पर अमेरिकी चुनाव के पोस्टल बैलट को दिखाया है। इन फोटो में उसने पोस्टल बैलट के लिफ़ाफ़े और जिस बैलट पर उसने ट्रम्प को वोट दिया है, वह भी दिखाया है। उसने एक और फोटो डाली है, जिसमें वह कमला हैरिस के समर्थन से इनकार कर रहा है। उसने ट्रंप को संबोधित बधाई सन्देश में लिखा, “हमने कर दिखाया डोनाल्ड, हमने कर दिखाया। 2024 के राष्ट्रपति चुनावों में वोट डालने पर मुझे गर्व है।”

यह वोट ऑरी ने भारत में स्थित अमेरिकी राजदूतावास के माध्यम से डाला है। अमेरिकी नागरिक विदेशों से भी पोस्टल बैलट के माध्यम से वोट डाल सकते हैं।

कौन है ऑरी?

ऑरी की भूमि पेडनेकर, करीना कपूर, जाह्नवी कपूर, न्यासा देवगन, नीता अम्बानी और दीपिका पादुकोण जैसी हस्तियों के साथ तस्वीरें हैं। ऑरी ने लिंक्डइन पर लिख रखा है कि वो रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के अध्यक्ष के दफ्तर में स्पेशल प्रोजेक्ट मैनेजर है।

उसने फाइन आर्ट्स एन्ड कम्युनिकेशन डिजाइन में स्नातक कर रखा है। उसने ये कोर्स न्यूयॉर्क स्थित पार्सन्स स्कूल ऑफ डिजाइन से पूरा किया था। एक इंटरव्यू के दौरान उसने बताया था कि वो खुद पर काम करता है, जिम जाता है, सेल-रिफ्लेक्शन करता है, योग करता है, मसाज के लिए जाता है और वो काम कर रहा है, खुद पर काम कर रहा है।

वो खुद को गायक, गीतकार और फैशन डिजाइनर भी बताता है। साथ ही ऑरी ने खुद को क्रिएटिव डायरेक्टर, स्टाइलिस्ट, एग्जीक्यूटिव अस्सिस्टेंट, शॉपिंग करने वाला, फुटबॉल का खिलाड़ी बताते-बताते कहा कि उसे खुद नहीं पता कि वो क्या-क्या है।

उसने कहा था कि उसे महसूस होता है कि जीवन का अर्थ है आपके पास सपने होना, अपने सपनों को बड़ा करना, उन्हें पंख देना, और मौके का फायदा उठाना। उसने कहा था कि वो ऐसा व्यक्ति है जिसे अगर आप अपने घर की दीवार पर कुछ पेंट करने कहेंगे तो वो पूरा घर पेंट कर देगा।

हाल ही में करण जौहर के शो ‘कॉफी विथ करण’ अभिनेत्रियाँ सारा अली खान और अनन्या पांडेय पहुँची थीं। इस एपिसोड का एक वीडियो क्लिप वायरल हुआ था, जिसमें ऑरी का जिक्र हुआ था। इस शो में एक सवाल के जब के दौरान सारा अली खान ने ऑरी का जिक्र कर दिया, जिसके बाद करण जौहर ने भी पूछ दिया कि ऑरी कौन है?

इस पर सारा अली खान ने कहा कि भला कौन नहीं जानता है कि ऑरी कौन है? अनन्या ने भी हस्तक्षेप करते हुए कहा कि उन्हें एक व्यक्ति को समझाना पड़ा था कि ऑरी कौन है, क्योंकि वो उसे नहीं जानता था। बकौल अनन्या, समझाने के बाद उक्त व्यक्ति ने कहा कि ऑरी को प्यार तो सब करते हैं, लेकिन उसे समझ नहीं पाते।

इस पर करण जौहर ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को सनसनी कहते हैं। अनन्या पांडेय ने हामी भरते हुए कहा कि उन्हें भी सबसे यही बताने को कहा गया है। लेकिन, फिर करण जौहर ने कहा कि ये कोई प्रोफेशन नहीं हुआ, लोगों के पास कोई न कोई काम होता है। आखिर वो करता क्या है? सारा अली खान ने इसका जवाब दिया कि वो एक मजाकिया इंसान है, उसके भीतर काफी ऊर्जा है। अनन्या पांडेय ने भी हामी भरते हुए कहा कि ऑरी मजाकिया इंसान है, कैप्शन के मामले में वो अच्छा है।

सारा अली खान ने बताया था कि ऑरी से वह अपनी तस्वीरों या वीडियो के लिए उससे कैप्शन माँगती रहती हैं। साथ ही उन्होंने बताया था कहा कि वो अच्छे कपड़े भी पहनता है। हालाँकि, इसके बावजूद करण जौहर को इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिला था कि ऑरी करता क्या है। उन्होंने फिर पूछा कि वो क्या करता है। अनन्य पांडेय ने जवाब दिया, “वो बहुत कुछ करता है। वो खुद पर काम करता है।” सारा अली खान फिर प्रतिक्रिया देती हैं, “वो खुद पर भी काम करता है।”

ऑरी का असली नाम ओरहान अवात्रामणि है। स्टार किड्स के साथ उसे बाँहों में बाँहें डाले कई बार देखा गया है। सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा और अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस भी उसके पोस्ट्स पर कमेंट करती हैं। उसे एक बड़े कारोबारी का बेटा भी बताया जाता है। वो अमीरी, टॉम फोर्ड, विजन ऑफ सुपर और प्रादा जैसे ब्रांड्स के साथ भी जुड़ा हुआ है। हॉलीवुड में किम कार्दशियन और काइली जेनर तक के साथ वो दिख चुका है।