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चिदंबरम को न्यायलय से फिर मिली राहत; 11 जनवरी तक गिरफ्तारी से छूट

अदालत ने एयरटेल-मैक्सिस डील में आरोपित कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को राहत देते हुए 11 जनवरी तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। वैसे ये पहली बार नहीं है जब 3500 करोड़ रुपये के इस घोटाले के मामले में आरोपित पिता-पुत्र की की जमानत की तारीख को अदालत द्वारा बढ़ा दी गई हो। इस से पहले भी अदालत कई बार उन्हें रहत दे चुकी है। बता दें कि इस से पहले 27 नवंबर को यूपीए कार्यकाल में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम पर मुकदमा चलाने का रास्ता साफ़ हो गया था। इसके लिए केंद्र सरकार की अनुमति की जरूरत थी जो अब मिल गई है।

कई बार मिल चुकी है अदालत से राहत

इस से पहले प्रवर्तन निदेशालय औए सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत से कहा था कि पी. चिदंबरम जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इस साल 30 मई को गिरफ्तारी से राहत के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल करने के बाद से उन्हें कई मौकों पर कोर्ट से राहत मिल चुकी है। इसी साल अगस्त महीने में सीबीआई के स्पेशल जज ओपी सैनी ने उन्हें अक्टूबर तक गिरफ्तारी से राहत प्रदान की थी। उस से पहले शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायलय के चिदंबरम पिता-पुत्र को जमानत देने सम्बन्धी फैसले में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया था। बता दें कि उस समय कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने उनकी तरफ से अदालत में जिरह की थी।

मालूम हो कि इसी मामले में फरवरी में कार्ति चिदंबरम को गिरफ्तार भी किया गया था जिसके बाद मार्च में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। कार्ति 2014 में कांग्रेस के टिकेट पर तमिलनाडु के शिवगंगा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं जिसमे उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद दिल्ली उच्च न्यायलय ने चिदंबरम और उनके बेटे को इस साल अक्टूबर को 25 अक्टूबर को फिर से गिरफ्तारी से राहत प्रदान कर उनकी जमानत की अवधि बढ़ा दी थी। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय ने उनके जमानत का विरोध किया था। इसके बाद पिछले ही महीने दिल्ली कि एक अदालत ने फिर से उन्हें रहत देते हुए गिरफ्तारी से बचाया था। उस समय चिदंबरम की तरफ से कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी वकील के रूप में पेश हुए थे। बता दें कि अभिषेक मनु सिंघवी कांग्रेस के राज्ययासभा सांसद हैं। कुल मिलाकर देखें तो सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के कड़े विरोध के बावजूद अदालत द्वारा पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को कई बार गिरफ्तारी से छूट प्रदान किया जा चुका है।

क्या है आरोप?

पी. चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने वित्त मंत्री रहते हुए गलत तरीके से विदेशी निवेश को मंजूरी दी। उन्हें 600 करोड़ रुपये तक के निवेश की मंजूरी देने का अधिकार था, लेकिन यह सौदा करीब 3500 करोड़ रुपये निवेश का था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपने अलग आरोप पत्र में कहा है कि कार्ति चिदंबरम के पास से मिले उपकरणों में से कई ई-मेल मिली हैं, जिनमें इस सौदे का जिक्र है। इसी मामले में पूर्व टेलिकॉम मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन भी आरोपित हैं।

सज्जन कुमार और क्रिश्चियन मिशेल को लेकर मोदी का कॉन्ग्रेस पर हमला; गिनाईं अपनी सरकार की उपलब्धियाँ

अंग्रेजी समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी द्वारा मुंबई में आयोजित “रिपब्लिक समिट- सर्जिंग इंडिया” में लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के साढ़े चार सालों के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाई और इस अवधि में हुए बदलावों की चर्चा की। बता दें कि 18 और 19 दिसम्बर को दो दिन चलने वाले इस समिट में और भी कई वशिष्ट लोगों द्वारा संबोधन किया जायेगा।

अर्थव्यवस्था पर बोले पीएम

इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था हो, भारत की प्रतिभा हो, भारत की सामाजिक व्यवस्था हो, भारत के सांस्कृतिक मूल्य हों या फिर भारत की सामरिक ताकत, हर स्तर पर भारत की चमक और बढ़ रही है। उन्होंने यूपीए के दस सालों के कार्यकाल से अपने कार्यकाल की तुलना करते हुए उपस्थित लोगों से पूछा कि क्या चार साल पहले किसी ने सोचा था कि भारत इतनी जल्दी पांच ट्रिलियन डॉलर वाले अर्थव्यवस्थाओं के क्लब में शामिल होने की तरफ अपना कदम बढ़ा देगा। इसी विषय पर बोलते हुए उन्होंने आगे कहा;

“क्या चार साल पहले किसी ने सोचा था कि ‘इज ऑफ डूइंग बिज़नस’ (कारोबार करने के लिए उचित माहौल) की रैंकिंग में 142 से 77 पर आ जाएगा, भारत टॉप 50 में आने की ओर बढ़ चलेगा? क्या चार साल पहले किसी ने सोचा था कि भारत में एसी ट्रेन में चलने वाले लोगों से ज्यादा लोग हवाई सफर करने लगेंगे? क्या चार साल पहले किसी ने सोचा था कि रिक्शा चलाने वाला भी, सब्जी वाला भी और चायवाला भी भीम एप्प का इस्तेमाल करने लगेगा, अपनी जेब में रूपे डेबिट कार्ड रखकर अपना आत्मविश्वास बढ़ाएगा? क्या चार पहले किसी ने सोचा था कि भारत का एविएशन सेक्टर इतना तेज आगे बढ़ेगा कि कंपनियों को एक हजार नए हवाई जहाज का ऑर्डर देना पड़ेगा?”

क्रिश्चियन मिशेल और सज्जन कुमार को लेकर कांग्रेस पर निशाना

वहीं प्रधानमंत्री ने क्रिश्चियन मिशेल के प्रत्यर्पण की भी चर्चा की और 1984 सिख दंगों के मामले में सज्जन कुमार को मिली सजा को लेकर भी कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। राजग सरकार के चार सालों और उस से पहले के समय की तुलना करते हुए उन्होंने आगे कहा;

“क्या चार साल पहले किसी ने सोचा था कि भारत में नेशनल वॉटरवेज एक सच्चाई बन जाएंगे, कोलकाता से एक जहाज गंगा नदी पर चलेगा और बनारस तक सामान लेकर आएगा? क्या चार साल पहले किसी ने सोचा था कि भारत एक बार में सौ सैटेलाइट छोड़ने का रिकॉर्ड बनाएगा, गगनयान के लक्ष्य पर काम करेगा? क्या चार साल पहले किसी ने सोचा था कि स्टार्ट अप की दुनिया से लेकर खेल की दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी? चार साल पहले ये भी किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन हेलीकॉप्टर घोटाले का इतना बड़ा राजदार, क्रिश्चियन मिशेल भारत में होगा, सारी कड़ियां जोड़ रहा होगा? चार साल पहले ये भी किसी ने नहीं सोचा था कि 1984 के सिख नरसंहार के दोषी कांग्रेस नेताओं को सज़ा मिलने लगेगी, लोगों को इंसाफ मिलने लगेगा।”

राफेल पर अदालत द्वारा क्लीन चिट को बनाया मुद्दा

उन्होंने कहा कि हमारे यहां एक साइकोलॉजी रही है कि जब सरकार के खिलाफ आरोप लगाते हुए कोई अदालत में जाता है, तो माना जाता है कि सरकार गलत होगी और आरोप लगाने वाला सही। घोटाले हों, भ्रष्टाचार के आरोप हों, यही एक मानसिकता रही है।

राफेल पर अदालत द्वारा सरकार को क्लीन चिट दिए जाने की चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि ये पहली बार हुआ है जब कुछ लोग सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए देश की सबसे बड़ी अदालत गए और अदालत ने उन्हें दो टूक जवाब मिला कि जो काम हुआ है, वो पूरी पारदर्शिता से हुआ है, ईमानदारी से हुआ है।

2014 से लेकर अब तक हुए बदलावों की चर्चा

वहीं प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों के रूप में अपनी सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के आंकड़ों का भी जिक्र किया और कहा कि आज भारत में दोगुनी रफ्तार से हाईवे बन रहे हैं, दोगुनी रफ्तार से रेल लाइनों का दोहरीकरण हो रहा है, बिजलीकरण हो रहा है, 100 से ज्यादा नए एयरपोर्ट और हेलीपोर्ट पर काम हो रहा है, 30-30, 40-40 साल से अटकी हुई योजनाओं को पूरा किया जा रहा है। उन्होंने आंकड़े गिनाते हुए कहा;

“आज देश के सामने 2014 से पहले की एक तस्वीर है जब स्वच्छता का दायरा 40 प्रतिशत से भी कम था। अब 2018 के अंत में वही दायरा बढ़कर 97 प्रतिशत पहुंच चुका है। तब देश के 50 प्रतिशत लोगों के पास बैंक खाते नहीं थे। अब 2018 के अंत में, देश के हर परिवार बैकिंग सिस्टम से जुड़ चुका है। तब टैक्स देने वालों की संख्या 3 करोड़ 80 लाख थी। अब इस साल ये संख्या बढ़कर लगभग 7 करोड़ हो चुकी है। तब मोबाइल बनाने वाली सिर्फ 2 कंपनियां थीं। आज उन्हीं मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग कंपनियों की संख्या बढ़कर 120 के पार हो गई है।”

उन्होंने नवीं मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की फाइल बीस साल तक अटकाए रखने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि उनकी सरकार ने इस प्रोजेक्ट के सामने आ रहे सारे रोड़े दूर किए और अब नवी मुंबई एयरपोर्ट पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने जीएसटी को लेकर भी अपनी सरकार की पीठ थपथपाई और कहा कि उनकी सरकार जीएसटी को और भी सरल और सुगम बनाये जाने को लेकर प्रतिबद्ध है।

छः साल पाकिस्तान में सलाखों के पीछे गुजारने के बाद वतन वापसी के लिए तैयार भारतीय नागरिक हामिद अंसारी

आज से छः साल पहले पकिस्तान में अवैध तरीके से घुसे भारतीय नागरिक हामिद निहाल अंसारी को मिली तीन साल की सजा 16 दिसम्बर को पूरी हो गई जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ हो गया है। पकिस्तान के पेशावर उच्च न्यायलय ने उनकी भारत यात्रा से जुड़े दस्तावेजों के जल्द से जल्द मुहैया कराने का आदेश दिया था ताकि उन्हें भारत वापस अपने वतन भारत भेजा जा सके। मुंबई के रहने वाले 33 वर्षीय हामिद अंसारी पेशावर सेंट्रल जेल में बंद थे। उनपर फर्जी पहचान पत्र रखने का दोषी मान कर दिसम्बर 2015 में सैन्य अदालत द्वारा तीन साल की सजा सुनाई गई थी।

हलाँकि ये एक दुर्लभ वाकया है जब पकिस्तान किसी भारतीय नागरिक को उसकी सजा पूरी होने के तुरंत बाद रिहा कर रहा है लेकिन भारतीय अधिकारीयों ने ये भी कहा है कि उन्होंने 96 बार हामिद अंसारी को काउंसलर एक्सेस देने की कोशिश की लेकिन पकिस्तान ने हर बार उनकी मांग को ठुकरा दिया। बता दें कि पकिस्तान अब भी अंसारी को भारतीय जासूस ही मानता है।

भारतीय विदेश मंत्रालय की टिपण्णी

भारतीय विदेश मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार आधिकारिक प्रवक्ता ने इस मामले में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा;

“हमने पाकिस्तान से आज एक नोट प्राप्त किया है जिसमे कहा गया है कि वो भारतीय नागरिक हामिद अनारी को रिहा कर रहे हैं। ये काफी राहत की बात है, खासकर उनके परिवार के सदयों कि लिए, कि पकिस्तान के जेल में उनकी छः साल की सजा पूरी हो रही है।”

इके साथ ही विदेश मंत्रालय ने पकिस्तान को वहां कैद अन्य भारतीय नागरिकों की याद दिलाते हुए कहा;

“हम चाहेंगे कि पकिस्तान अपने जेल में कैद ऐसे अन्य भारतीय नागरिकों और मछुआरों की दुर्गति का अंत करने के लिए भी कार्यवाही करे जिनकी नागरिकता की पुष्टि हो गई है और जिनकी सजा भी पूरी हो गई है। हम पकिस्तान में कैद ऐसे भारतीय जो मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, उनके लिए एक मेडिकल टीम भेजना चाह रहे हैं ताकि उनके जन्मस्थान की पुष्टि की जा सके और उनके प्रत्यर्पण की कोशिश की जा सके और इस मामले में भी हम पकिस्तान के जवाब का इन्तजार कर रहे हैं।”

विदित हो कि भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पकिस्तान के जेलों में कुल 482 भारतीय मछुआरे और 49 अन्य भारतीय नागरिक बंद हैं जिन्हें भारत द्वारा काउंसलर एक्सेस की सुविधा दिए जाने की इजाजत देने से पकिस्तान बार-बार मना करता रहा है।

लड़की से मिलने के लिए गये थे पकिस्तान

हामिद अंसारी ने मैनेजमेंट साइंस की पढाई की है और उनके परिवार के अनुसार उन्होंने लापता होने के कुछ साल पहले ही मुंबई के एक कॉलेज में लेक्चरर की नौकरी भी ज्वाइन की थी। बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार उनके परिवार के हवाले से कहा गया है कि फ़ेसबुक की बातचीत से ये पता चला कि वो पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के कोहाट की किसी लड़की से बात करते हैं और उसे से मिलने के लिए वहां जाना चाहते थे। कहा जा रहा है कि उसी लड़की से मिलने के लिए ये पकिस्तान में दाखिल हुए थे।

कश्मीर पर पकिस्तान की पैंतरेबाज़ी और दोहरे रवैये का नया चेहरा हैं प्रधानमंत्री इमरान खान

पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक बार फिर कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों का बचाव करते हुए भारतीय सेना के खिलाफ जहर उगला है। गौरतलब है कि हाल ही में कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में तीन आतंकियों को मार गिराया है। इस मुठभेड़ में सात पत्थरबाज़ भी ज़ख़्मी हो गए जिन्हें बाद में अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया। मारे गए आतंकियों में सेना की नौकरी छोड़कर आतंकी बना जहूर ठोकर भी शामिल था। इस घटना पर ट्वीट करते हुए इमरान खान ने कहा:

“मै भारत के कब्जे वाले कश्मीर में भारतीय सुरक्षाबलों द्वारा कश्मीरी नागरिकों के मारे जाने की कड़ी निंदा करते हूँ। हिंसा और हत्याएं नहीं बल्कि केवल संवाद द्वारा ही इस संघर्ष का हल निकाला जा सकता है। हम भारतीय कब्जे वाले कश्मीर में भारत द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के विषय को उठाएंगे और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् से मांग करेंगे कि वह कश्मीर को लेकर अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करे।”

सबसे पहले ये जान लेना जरूरी है कि ऐसा उन्होंने कश्मीरी आतंकियों और पत्थरबाजों का बचाव करते हुए कहा है। मुठभेड़ में मारा गया जहूर अहमद एक कुख्यात आतंकी था जिसकी कई दिनों से पुलिस तालाश कर रही थी। इस साल कश्मीर में 230 से भी ज्यादा आतंकी मारे गये हैं, ऐसे में पकिस्तान की बौखलाहट का कारण समझा जा सकता है।

यहाँ सबसे पहले पाक पीएम इमरान खान के सुरक्षा परिषद के कश्मीर रिजोल्यूशन को लेकर कही गई बात की पड़ताल करते हैं। उपर्युक्त ट्वीट से आफ है कि इमरान खान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से ये अपेक्षा रखते हैं कि वह कश्मीर को लेकर अपनी प्रतिबद्धता पूरी करे। लेकिन यहाँ पर वो ये भूल जाते है कि अप्रैल 1948 में सुरक्षा परिषद् द्वारा कश्मीर समस्या को लेकर स्वीकृत किये गए प्रस्ताव 47 में क्या कहा गया था। इस प्रस्ताव में कश्मीर समस्या के समाधान की प्रक्रिया को तीन प्रमुख चरणों में बांटा गया है। इसके पहले चरण में ये साफ़-साफ़ कहा गया है कि सबसे पहले पाकिस्तान कश्मीर में अपनी किसी भी प्रकार की उपस्थिति को ख़तम करे। ऐसे में इमरान खान का ये बयान विरोधाभास भरा प्रतीत होता है क्योंकि जिस सुरक्षा परिसद को वो कश्मीर को लेकर अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने को कह रहे हैं, असल में उसी सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अमल करने में वो नाकाम रहे हैं।

इस प्रस्ताव में सुझाई गई प्रक्रिया का दूसरा चरण है भारत द्वारा धीरे-धीरे कश्मीर में तैनात अपने सेना के जवानों की संख्या में कमी लाना। लेकिन ये तभी संभव है जब पकिस्तान पहले चरण पर पूरी तरह अमल करे और सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकियों की संख्या में कमी आये। बता दें कि पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बड़े भाग पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है जिसे वहां “आज़ाद कश्मीर” बुलाया जाता है।

अब इतिहास की बात करते हैं क्योंकि पकिस्तान आज जिस सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को अमल में लाने की बात बार-बार कर रहा है, असल में उसने इस प्रस्ताव को 1948 में अस्वीकार कर दिया था। ये इस बात को दिखाता है कि पकिस्तान अपने ही स्टैंड पर कायम रहने में विफल रहा है और कश्मीर पर समय के हिसाब से पैंतरा बदलने में उसने महारत हासिल कर ली है। ये उस देश की अविश्वसनीयता को दिखाता है जो कभी अपने द्वारा ही पूरी तरह अस्वीकार कर दिए गए प्रस्ताव की आज रट लगाये हुए है। और ये भी जानने वाली बात है कि भारत ने उस समय इस प्रस्ताव को स्वीकार किया था क्योंकि वह भारत ही था जिसने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र तक पहुँचाया था, इस आशा में कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुझाये गए समाधान पर काम किया जाए जिस से घाटी में अमन-चैन बहाल हो। लेकिन पकिस्तान की पैंतरेबाजी के कारण ये निर्णय भारत को ही भारी पड़ गया।

सुरक्षा परिषद से कश्मीर को लेकर उसकी प्रतिबद्धता याद दिलाने वाले इमरान खान से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि क्या वह सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 47 पर अमल करने को तैयार हैं? क्या वो कश्मीर से सभी पाकिस्तानी नागरिकों को हटाने तो तैयार है? और अगर आज वो जिस सुरक्षा परिषद की दुहाई दे रहे हैं, उसके प्रस्ताव को उनके देश ने 1948  में अस्वीकार क्यों कर दिया था? अगर पकिस्तान का कश्मीर को लेकर आज का स्टैंड सही है तो क्या इमरान खान यह मानने को तैयार हैं कि उनके पूर्ववर्तियों  ने पकिस्तान को लेकर सही नीति नहीं अपनाई?

इसके अलावे पकिस्तान समय-समय पर कश्मीर में जनमत-संग्रह कराने की भी मांग करता रहा है लेकिन भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर इस बारे में विस्तृत विवरण दिया गया है जो पकिस्तान की दुहरी नीति को पूरी तरह से बेनकाब करता है। इसमें ये बताया गया है कि असल में वो भारत ही था जिसने कश्मीर को लेकर सबसे पहले जनमत-संग्रह कराने की बात की थी। भारत ने 1947, 48 और 1951 में कई बार अपने इस स्टैंड को साफ़ किया था। लेकिन पकिस्तान बार-बार जनमत-संग्रह की बात पर मुकरता रहा। रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि इस बात के कई सबूत हैं कि पकिस्तान ने वो हर-संभव कोशिश की जिस से कश्मीर में जनमत-संग्रह टल सके।

अब उसी पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान घाटी में जनमत-संग्रह कराने की मांग करते हैं। ये फिर से पकिस्तान की पैंतरेबाजी को बेनकाब करता है। इमरान खान को यह साफ़ करना चाहिए कि कश्मीर को लेकर हर मामले में उनके देश का स्टैंड बदलता क्यों रहता है। और ऐसे में कोई भी अमन और शांति चाहने वाला देश उनपर भरोसा क्यों करे?

वैसे ये पहली बार नहीं है जब इमरान खान ने इस तरह की गलतबयानी की हो। इस से पहले वह भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर व्यक्तिगत टिपण्णी करते हुए उन्हें”छोटा आदमी” तक बता चुके हैं।

इसके लगभग एक महीने बाद उन्होंने फिर से भारतीय सेना के खिलाफ जहर उगलते हुए जनमत-संग्रह और सुरक्षा परिषद प्रस्ताव का राग अलापा था और मारे गए आतंकवादियों को “निर्दोष कश्मीरी नागरिक” बताया था।

बता दें कि पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को तालिबान से सहानुभूति रखने और तालिबानी आतंकियों की बार-बार पैरवी करने के कारण “तालिबान खान” भी कहा जाता रहा है। कश्मीरी आतंकियों के साथ साथ वह अमेरिका के ड्रोन हमले में मारे जाने वाले तालिबानी आतंकियों के बचाव में भी अक्सर बयान देते रहे हैं।

1984 सिख दंगों के मामले में कॉन्ग्रेस नेता सज्जन कुमार दोषी करार, उम्रकैद की सजा

दिल्ली उच्च न्यायलय ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटते हुए कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 1984 सिख दंगों के मामले में दोषी करार दिया है। ज्ञात को कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद सिखों के खिलाफ दंगे भड़क गए थे, जिसमें सज्जन कुमार और जगदीश टाईटलर सहित कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं के नाम आये थे। ऐसे में उस घटना के 34 साल बाद आया ये फैसला काफी अहम माना जा रहा है। नानावती आयोग की सिफारिश के बाद सीबीआई ने 2005 में इस मामले फिर से जांच शुरू की थी। सज्जन कुमार पर लगे दंगे भड़काने की साजिश रचने और भीड़ को उकसाने के आरोप को अदालत ने सही पाया। इस निर्णय के बाद अब उन्हें 31 दिसम्बर तक आत्मसमर्पण करना होगा।

बता दें कि न्यायादिश एस मुरलीधर और विनोद गोयल की पीठ ने सीबीआई, दंगा पीड़ितों और आरोपियों की दलीलों को सुनने के बाद 29 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। उच्च अदालत ने 2013 में ट्रायल कोर्ट द्वारा सज्जन कुमार को आरोपों से बरी किये जाने के फैसले को पलटते हुए उन्हें ह्त्या का अपराध, समूहों के बीच विद्वेष फैलाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का दोषी पाया।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार उनके अलावा चार अन्य भी दोषी पाए गये और उनके खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाये गए उम्रकैद के फैसले को उच्च अदालत ने बरकरार रखा। रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा सक्रिय रूप से आरोपियों को बचाने की कोशिश की गई। दोषियों में कांग्रेस से पार्षद रहे बलवान खोखर और कांग्रेस के पूर्व विधायक महेंदर यादव भी शामिल हैं।

पिछले महीने पटियाला हाउस कोर्ट में मामले में गवाह चाम कौर ने सज्जन को पहचान लिया था। चाम कौर का कहना था कि घटनास्थल पर मौजूद सज्जन ने कहा था कि हमारी मां (इंदिरा गांधी) का कत्ल सिखों ने किया है, इसलिए इन्हें नहीं छोड़ना है। बाद में उसी भीड़ ने उकसावे में आकर मेरे बेटे और पिता का कत्ल कर दिया। चम कौर ने अदालत को बताया था कि सुल्तानपुरी क्षेत्र में जब एक नवंबर 1984 को जब वह बकरी को तलाश रहीं थीं, तब सज्जन भीड़ से कह रहे थे कि हमारी मां मार दी, सरदारों को मार दो। कौर के मुताबिक, भीड़ ने उनके बेटे कपूर सिंह, पिता सरदार जी सिंह को भी काफी मारा और छत से नीचे फेंक दिया था।

प्रधानमंत्री मोदी की तरह कमलनाथ को भी मिले ‘संदेह का लाभ’: शशि थरूर

कांग्रेस पार्टी द्वारा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में नामित किये गए कमल नाथ का बचाव करते हुए शशि थरूर ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह उन्हें भी “संदेह का लाभ” मिलना चाहिए। बता दें कि कमल नाथ पर 1984 सिख दंगों में शामिल होने का आरोप लगा था। तिरुअनंतपुरम सांसद थरूर ने उनकी तुलना प्रधानमंत्री से करते हुए कहा कि जैसे नरेन्द्र मोदी को 2002 दंगों में उनकी भूमिका को लेकर “संदेह का लाभ” मिला है वैसे ही कमल नाथ को भी मिलना चाहिए। थरूर ने आल इंडिया प्रोफेसनल कांग्रेस के सदस्यों से बातचीत करते हुए यह बयान दिया।

दरअसल उनसे जब ये सवाल पुछा गया कि क्या कमल नाथ को मध्य प्रदेश के भावी मुख्यमंत्री के रूप में नामित कर कांग्रेस अपने ही नैतिक मूल्यों का उल्लंघन कर रही है तब उन्होंने इसके जवाब में ये बयान दिया। उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान कमलनाथ ऐसी स्थिति में नहीं थे कि उनके पास किसी तरह के अधिकार थे और न ही वह दिल्ली के मुख्यमंत्री थे। वह दंगों के दौरान इतने पावरफुल व्यक्ति नहीं थे, जो इतने बड़े स्तर पर दंगे फैला सकें, वैसे भी “किसी भी अदालत को उनके खिलाफ दोषी ठहराने के लिए कोई सबूत नहीं मिला है। असंतुलित और अप्रत्याशित आरोपों के आधार पर फैसला करना गलत है।”

कमल नाथ पर क्या है आरोप?

ज्ञात हो कि कमल नाथ के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाये जाने की घोषणा से पहले ही दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा ने ट्वीट कर ये दावा किया था कि यह वही व्यक्ति है जिसने रकाबगंज गुरुद्वारा (गुरु तेगबहादुर जी का श्मशान घाट) जलाया था। उनके अनुसार इस फैसले से एक बार फिर कांग्रेस का सिख विरोधी चेहरे का पर्दाफाश हुआ है। यही नहीं, उन्होंने कांग्रेस के इस फैसले के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन की घोषणा भी कर दी है।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा था कि 1 नवम्बर 1984 के दिन दिल्ली के रकाबगंज गुरुद्वारा पर 4000 लोगों ने हमला किया और दो सिख (पिता और बेटे) को जिंदा जला दिया गया। मौके पर मौजूद सूरी नाम के प्रत्यक्षदर्शी पत्रकार ने जांच आयोग को बताया कि दंगाइयों की इस भीड़ का नेतृत्व कमलनाथ कर रहे थे।

2016 में हुए पंजाब चुनावों के दौरान कांग्रेस ने कमल नाथ को राज्य में पार्टी मामलों का प्रभारी बना कर भेजा था लेकिन सभी दलों के कड़े विरोध के बाद उन्हें इस पद से इस्तीफा देना पड़ा था। उस समय आम आदमी पार्टी के नेता और वकील एचएस फुल्का ने नानावती आयोग के निष्कर्षों और अखबारों की खबरों का उल्लेख करते हुए कहा था:

“सिखों के खिलाफ 1984 की हिंसा में कमलनाथ का नाम बार-बार आया है। वे उन्हें क्लीनचिट कैसे दे सकते हैं?’ खबरों से साफ पता चलता है कि कमलनाथ गुरुद्वारा रकाबगंज के बाहर जमा उपद्रवियों में मौजूद थे। वह वहां क्या कर रहे थे? यदि वह गुरुद्वारे की रक्षा करने पहुंचे थे तो उन्होंने वहां पीड़ित सिखों की मदद क्यों नहीं की जब उन्हें जिंदा जलाया जा रहा था और उनमें से तीन डॉक्टरी मदद के लिए गुहार लगा रहे थे?”

क्या मोदी को सच में मिला संदेह का लाभ?

ऐसे में कमल नाथ की तुलना नरेन्द्र मोदी के किये जाने पर ये अवाल उठना लाजिमी है कि क्या नरेन्द्र मोदी को सच में 2002 दंगों के मामले में संदेह का लाभ मिला था? इसकी पड़ताल के लिए थोड़ा पीछे जाना जरूरी है। अप्रैल 2012 में शीर्ष अदालत द्वारा गठित की गई एक एसआईटी ने तब गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र मोदी को गुजरात दंगे से जुड़े मामले में क्लीन चिट देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ कोई भी साक्ष्य साबित नहीं होते। 2010 में एसआईटी द्वारा नरेन्द्र मोदी से लगभग नौ घंटों तक पूछताछ की गई थी।

छिन्दवाड़ा से नौ बार सांसद रहे कमल नाथ 17 दिसम्बर को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की मौजूदगी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।

सोनिया गाँधी के तमिलनाडु दौरे का कड़ा विरोध, लोगों ने ट्रेंड किया ‘गो बैक सोनिया’

चेन्नई स्थित द्रमुक मुख्यालय में पार्टी के पूर्व प्रमुख और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करूणानिधि की प्रतिमा स्थापित की गई है जिसका अनावरण आज एक भव्य समारोह में किया जाना है। बता दें कि द्रविड़ राजनीती के दिग्गज नेता और तमिलनाडु की राजनीति में सात दशकों तक प्रासंगिक रहे करूणानिधि का निधन इसी साल अगस्त में हुआ था। वो पांच बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। माना जा रहा है कि इस समारोह के मंच से विपक्षी एकता दिखाने की पूरी कोशिश की जाएगी। ख़बरों की माने तो डीएमके प्रमुख और दिवंगत करूणानिधि के पुत्र एमके स्टालिन ने राज्य में अन्नाद्रमुक और केंद्र में भाजपा के खिलाफ एकता दर्शाने के लिए विपक्ष के कई बड़े नेताओं को आमंत्रण भेजा है। ऐसे में उम्मीद है कि 2019 में राजग के खिलाफ सम्भावित महागठबंधन के नेता इस समारोह के माध्यम से शक्ति-प्रदर्शन का कोई मौक़ा नहीं छोड़ेंगे।

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी और पार्टी की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गाँधी भी आज इस समारोह में हिस्सा लेने चेन्नई पहुँचने वाली है। इस खबर के फैलते ही तमिलनाडु में लोगों ने ट्विटर पर “गो बैक सोनिया” ट्रेंड कराना शुरू कर दिया। वहीं तमिलनाडु युवा भाजपा के अध्यक्ष एसजी सूर्या ने मुख्यधारा की मीडिया पर इस विरोध प्रदर्शन को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा:

“सभी पत्रकार गो-बैक-मोदी वाले ट्रेंड पर पागल हुए जा रहे थे। ये उस समूह का हिस्सा थे जिन्होंने इस ट्रेंड की योजना बनाई, इसे ट्रेंड कराने में मदद किया और अपने न्यूज़ चैनलों पर लगातार इस से जुडी ख़बरें प्रसारित की। अब जब गो-बैक-सोनिया एक राष्ट्रव्यापी ट्रेंड (ट्विटर पर) बन गया है, तब वो ना तो इस बारे में ट्वीट करेंगे और ना ही इसे एक खबर की तरह रिपोर्ट करेंगे।”

बता दें कि “गो बैक सोनिया” आज ट्विटर के पांच चोटी के राष्ट्रीय ट्रेंड्स में शामिल था। सूर्या ने ट्वीट करते हुए ये भी कहा कि जिस इंदिरा गाँधी ने भ्रष्टाचार के आरोप में कभी करूणानिधि की सरकार बर्खास्त कर दी थी, उन्ही इंदिरा की बहू आज करूणानिधि की प्रतिमा के अनावरण करने आ रही है।

सोनिया गाँधी के गढ़ रायबरेली में गरजे पीएम मोदी; कहा रायबरेली बनेगा रेल कोच निर्माण का ग्लोबल हब

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली को 1100 करोड़ रूपये के परियोजनाओं की सौगात दी। अपने पहले रायबरेली दौरे में मोदी ने राफेल पर चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस रक्षा सौदों के लेकर इसलिए भड़की है क्योंकि उसमें ‘क्वात्रोची मामा’ या फिर क्रिश्चेन मिशेल अंकल’ नहीं है। प्रधानमंत्री ने रायबरेली में कोच फ़ैक्टरी में उत्पादित 900वें रेल डिब्बे व हमसफर रेक को हरी झंडी दिखा कर देश को समर्पित करने के बाद अपनी रैली में कहा:

“यहां आने से पहले मैं पास ही में बनी मॉर्डन कोच फैक्ट्री में था। मैंने उस फैक्ट्री में इस वर्ष बने 900वें डिब्बे को हरी झंडी भी दिखाई। पहले की सरकारों की क्या कार्यसंस्कृति रही है, इसकी गवाह रायबरेली की रेल कोच फैक्ट्री भी है। ये फैक्ट्री 2007 में स्वीकृत हुई थी। 2010 में ये फैक्ट्री बनकर तैयार भी हो गई। लेकिन उसके बाद 4 साल तक इस फैक्ट्री में कपूरथला से डिब्बे लेकर उनमें पेंच कसने और पेंट करने का काम हुआ। जो फैक्ट्री नए डिब्बे बनाने के लिए थी, उसे पूरी क्षमता से कभी काम ही नहीं करने दिया गया।”

उन्होंने ये भी दावा किया कि आने वाले समय में रायबरेली रेल कोच निर्माण के मामले में एक ग्लोबल हब बनने वाला है। उन्होंने कहा कि कोच फैक्ट्री की संख्या बढ़ने से यहाँ के युवाओं के लिए भी हर तरह के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रेल कोच फैक्ट्री पर पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए पीएम ने कहा:

“जब पहले की सरकार ने यहां पर रेल कोच फैक्ट्री का निर्माण तय किया था, तो ये तय हुआ था कि 5000 कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। लेकिन स्वीकृति इसके आधे पदों को ही दी गई। इतना ही नहीं, 2014 में हमने ये भी देखा कि यहां की कोच फैक्ट्री में एक भी नई नियुक्ति नहीं हुई थी। अब आज की स्थिति ये है कि लगभग 2 हजार नए कर्मचारियों को हमारी सरकार ने नियुक्त किया है।”

पीएम ने कहा कि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्हें “भारत माता कि जय” से दिक्कत है। उन्होंने जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि आपको भले इस नारे से गर्व होता हो लेकिन कुछ लोगों को इस से शर्मिंदगी महसूस होती है। वहीं कांग्रेस द्वारा राफेल सौदे को विवादों में घसीटने को लेकर भी पीएम ने चुप्पी तोड़ते हुए इसे देश की सुरक्षा से खिलवाड़ बताया। उन्होंने तुलसीदास के रामचरितमानस की चौपाई “झूठई लेना, झूठई देना, झूठई भोजन, झूठ चबेना” का जिक्र कर इसका अर्थ समझाते हुए कहा कि कुछ लोग झूठ ही स्वीकार करते हैं, झूठ ही दूसरो को देते हैं, झूठ का ही भोजन करते हैं और झूठ ही चबाते हैं। उन्होंने कहा:

“ऐसे लोगों के लिए देश का रक्षा मंत्रालय भी झूठा है, देश की रक्षा मंत्री भी झूठी हैं, भारतीय वायुसेना के अफसर भी झूठे हैं।अब तो उन्हें देश की सर्वोच्च अदालत भी झूठी लगने लगी है।”

प्प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपनी सर्कार के दस सालों के कायकाल में भारतीय वायुसेना को मजबूत नहीं होने दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने सेना के हित में अपनी सरकार द्वारा किये जाते हुए कार्य गिनाते हुए कहा:

“केंद्र में हमारी सरकार बनने के बाद 2016 में हमने सेना के लिए 50 हजार बुलेटप्रूफ जैकेट खरीदी। मैं देश को ये भी जानकारी देना चाहता हूं कि इस साल अप्रैल में पूरी 1 लाख 86 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट का ऑर्डर दिया जा चुका है। ये जैकेट भारत की ही एक कंपनी बना रही हैक्षा सौदों के लेकर इसलिए भड़की है क्योंकि उसमें ‘क्वात्रोची मामा’ या फिर क्रिश्चेन मिशेल अंकल’ नहीं है।”

वहीं किसानों के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट लागू नहीं करने का आरोप लगाया और कहा कि राजग सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य पर काम करते हुए स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट लागू की। साथ ही उन्होंने कर्नाटक सरकार पर निशाना साधते हुए काहा कि कांग्रेस ने 20 दिन में किसानों की कर्जमाफी का वादा किया था लेकिन छः महीने बीत जाने के बाद भी इस पर अमल नही किया गया।

प्रधानमंत्री ने रायबरेली में अपनी सरकार द्वारा किये गए कार्यों के आंकड़े को गिनाते हुए कहा कि अकेले रायबरेली में दो लाख गैस कनेक्शन दिए गए, आठ लाख बैंक खाते खोले गए और पचपन हजार घरों में मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया गया। जनसभा को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के रेल मंत्री पियूष गोयल ने भी सम्बोधित किया।

बता दें कि रायबरेली कांग्रेस का सनातन गढ़ माना जाता है जहां से सोनिया गाँधी लगातार चौथी बार सांसद चुनी गई है। दिवंगत पूर्व प्रधामंत्री इंदिरा गाँधी भी इस क्षेत्र का दो बार प्रतिनिधित्व कर चुकी है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस दौरे को काफी अहम माना जा रहा है।

विजय दिवस विशेष: भारत-पाक युद्ध जिसने दुनिया का नक्शा बदल दिया

ये उस विजय गाथा की दास्तान है जिसकी शुरुआत 3 दिसम्बर 1971 को हुई थी और जिसका अंत 16 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तान की करारी हार के साथ हुआ। उस दिन के बाद से हर साल हम इस दिन को विजय दिवस के रूप में मनाते आ रहे हैं। ये सिर्फ भारत की ही विजय नहीं थी बल्कि पकिस्तानी हुकूमत और सेना द्वारा पूर्वी पकिस्तान के लोगों पर किये जा रहे क्रूर अत्याचार का अंत भी था। इस युद्ध के बाद पूर्वी पकिस्तान आजाद हुआ जिसे आज हम बंगलादेश के नाम से जानते हैं। कुल 93000 पाकिस्तानी सैनिकों के भारतीय सेना के समक्ष बिना शर्त समर्थन के साथ ख़तम हुए इस युद्ध ने दुनिया का नक्शा बदल दिया था। ये भारतीय सेना के पराक्रम, भारत सरकार की इक्षाशक्ति और पूर्वी पकिस्तान के लोगों के साहस की कहानी है। आइये जानते हैं कि 1971 में भारत और पकिस्तान के बीच हुए इस युद्ध के बारे में।

सबसे पहले बात करते हैं मृत्युंजय देवव्रत की 2014 में आई फिल्म “चिल्ड्रेन ऑफ़ वार” के एक दृश्य से जिसमे एक वीरान और अन्धकार भरी जगह पर एक ट्रक आकर रूकती है। उस ट्रक से सैकड़ों अधमरी सी महिलाओं को उतारा जाता है जिन्हें एक दूसरे से बाँध कर रखा गया है। ये एक दिल दहला देने वाला चित्रण था। लेकिन इसके आगे जो होता है वो पाकिस्तानी सेना का एक ऐसा चेहरा बेनकाब करता है जिस से ज्यादा वीभत्स और नृशंस शायद ही कुछ हो। उन महिलाओं को अलग-अलग उम्र के समूह में बाँट कर ये सुनिश्चित कर लिया जाता है कि उनमे से कौन सी महिलाएं बच्चों को जन्म देने के लायक है। जो इस काम में अयोग्य लगे उनकी तत्काल गोली मार कर हत्या कर दी जाती है और बाँकियों पाकिस्तानी सेना के कमांडर के हुक्म से बलात्कार किया जाता है। उनकी सोंच ये होती है कि इस घिनौने कृत्य द्वारा पूर्वी पकिस्तान में ऐसे बच्चे पैदा किये जाये जो आगे जाकर पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के वफादार बने।

ये कोई कोरी कल्पना पर आधारित दृश्य नहीं था। ये कोई फिक्शन नहीं था। इस दृश्य द्वारा 1971 में पाकिस्तानी सेना द्वारा पूर्वी पकिस्तान के लोगों पर किये जा रहे नृशंस अत्याचार की बस एक झलक भर पेश की गई थी। ये एक ऐसी सच्चाई का चित्रण था जिसे कोई सपने में सोंच कर भी डर जाये। काहा जाता है कि इस युद्ध में पाकिस्तानी सेना द्वारा लगभग चार लाख से भी ज्यादा औरतों का बलात्कार किया गया था। इस अत्याचार ने पूर्वी पकिस्तान में मुक्ति वाहिनी को जन्म दिया जिससे आजादी के लिए संघर्ष का एक नया दौर शुरू हुआ। भारत की इन घटनाओं पर कड़ी नजर थी और पूर्वी पाकितान के स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं द्वारा भारत से मदद की अपील करने के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ से इस मामले में भारतीय हस्तक्षेप को लेकर राय मांगा। स्वराज्य में सैयद अता हुसैन के एक लेख के अनुसार तब सेना प्रमुख मानेकशॉ ने श्रीमती गाँधी को सितम्बर तक इन्तजार करने का सुझाव दिया क्योंकि तब तक हिमालय से निकलनेवाली नदियों में पानी के भरी बहाव की वजह से पकिस्तानी सेना भारतीय क्षेत्रों में आक्रमण करने में अक्षम होगी और तब तक बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी द्वारा छेड़े गये संघर्ष की वजह से वहां की सरकार और सेना- दोनों ही कमजोर हो चुकी होगी। आखिरकार 1971 के दिसंबर महीने में ऑपरेशन चंगेज खान के जरिए भारत के 11 एयरबेसों पर हमला कर दिया जिसके बाद 3 दिसंबर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की शुरुआत हुई।

आज के दिन पाकिस्तानी सेना के लेफ्टिनेंट जनरल अमीर अब्दुल्ला खान नियाजी ने 93000 पाकिस्तानी सैनिकों के भारतीय सेना के समक्ष एकतरफा और बिना शर्त आत्मसमर्पण वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किया। उस समय बांग्लादेश मुक्ति वाहिनी का नेतृत्व भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा कर रहे थे। नियाजी ने अपने बिल्ले को उतार कर और प्रतीक स्वरूप अपनी रिवॉल्वर लेफ्टिनेंट जनरल अरोड़ा को सौंप कर आत्मसमर्पण की घोषणा की। इस युद्ध में बांग्लादेश मुक्तिवाहिनी के 3843 जवान शहीद हुए जिसमे भारतीय और बंगलादेशी शामिल थे। ढाका का रमना रेस कोर्स जो अब सुहरावर्दी उद्यान के नाम से जाना जाता है, इस ऐतिहासिक घटना का गवाह बना।

तब से आज का दिन हर साल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है और इस युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को श्रधांजलि अर्पित की जाती है। तीनों सेनाओं के अध्यक्ष हर साल इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति पर एकत्रित होते हैं और आधिकारिक रूप से शहीदों को श्रधांजलि दी जाती है।

राफेल पर देश की जनता को गुमराह करने के लिए माफ़ी मांगे राहुल गाँधी: अमित शाह

भारत और फ्रांस के बीच हुए राफेल सौदे पर शीर्ष अदालत ने अपना फैसला देते हुए कहा है कि इस करार में नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ है और इस मामले में अदालत द्वारा किसी भी प्रकार की छानबीन की जरूरत नहीं। इस मामले में मोदी सरकार को क्लीन चिट मिलते ही राजनितिक दलों और नेताओं की बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। आइये सबसे पहले संक्षिप्त में जानते हैं कि राफेल सौदा है क्या और इसपर विवाद क्यों हुआ।

अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पेरिस दौरे के दौरान फ्रांस से 36 राफेल जेट खरीदने की घोषणा की। इस सौदे के पीछे भारतीय वायु सेना की ऑपरेशनल जरूरतों का हवाला दिया गया। इस योजना पर अंतिम निर्णय 2016 में लिया गया जब लगभग 59000 करोड़ रुपये की इस डील के लिए दस्तखत किये गए। इसी साल अनिल अम्बानी की रिलायंस डिफेंस और दसौल्ट ने आधिकारिक रूप से एक दूसरे के साथ संयुक्त परियोजना पर काम करने की घोषणा भी की। इसके बाद आरोपों का दौर शुरू हुआ जब कांग्रेस ने ये दावा किया कि यूपीए सरकार ने 126 फाइटर जेट का डील किया था और वो भी तुलनात्मक रूप से कम लगत में। साथ ही कई बयानों में सरकार पर कम्पनी विशेष को फायदा पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया।

वहीं शीर्ष अदालत ने राफेल में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर दायर की गई याचिकाओं पर आज फैसला देते हुए कहा कि इस सौदे को लेकर और विमान खरीद प्रक्रिया पर उन्हें कोई शक नहीं है और अदालत इस मामले में अब कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहती है। अदालत के इस निर्णय को जहाँ भाजपा द्वारा सरकार को क्लीन चिट के तौर पर देखा गया वहीं संसद में भी इस मामले को लेकर हंगामा हुआ जिसके कारण संसद की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने प्रेस कांफ्रेंस करते हुए कहा:

“राफेल सौदे के संबध में आये सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हम स्वागत करते हैं। आज सत्य की जीत हुई है। देश की आज़ादी के बाद से एक कोरे झूठ के आधार पर देश की जनता को गुमराह करने का इससे बड़ा प्रयास कभी नहीं हुआ और ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह प्रयास देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष के द्वारा किया गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने और अपनी पार्टी के तत्काल फायदे के लिए झूठ का सहारा लेकर चलने की एक नई राजनीति की शुरुआत की और सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने आज सिद्ध कर दिया है कि झूठ के पैर नहीं होते और अंत में जीत सत्य की ही होती है।”

अमित शाह ने राफेल खरीद के सम्बन्ध में देश की जनता को गुमराह करने और सेना के बीच में सन्देश पैदा करने के लिए राहुल गांधी को देश की जनता से मांफी मांगने की भी सलाह दी। उन्होंने आगे कहा:

“कांग्रेस पार्टी एक काल्पनिक जगत बनाकर बैठी हुई है जिसमें सच और न्याय की कोई जगह नहीं है। सवाल भी कांग्रेस पार्टी खड़े करती है, वकील भी वही हैं और न्यायाधीश भी वहीं है। आज कांग्रेस पार्टी देश के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर सवाल खड़ा कर रही है।”

उधर कांग्रेस कि तरफ से बयान देते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दावा किया कि उनकी पार्टी शुरू से ही इस मामले की जाँच जेपीसी से कराने के पक्ष में है और वो आज भी इस मांग पर अड़े हैं। उन्होंने कहा:

“हमने पहले ही कहा था कि सुप्रीम कोर्ट राफेल के भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर सकता क्योंकि नियमों के तहत उसका दायरा सीमित है. इसलिए हमने न्यायालय का रुख नहीं किया था.’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘इस मामले में भ्रष्टाचार की कई परते हैं. इसकी छानबीन सिर्फ जेपीसी जांच से हो सकती है. इसमें तथ्य और साक्ष्य दोनों की छानबीन होनी है।”

साथ ही सुरजेवाला ने ये भी दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी जेपीसी द्वारा जाँच कराने से डर रहे हैं। ज्ञात हो कि जेपीसी का अर्थ होता है ज्‍वाइंट पार्लियामेंटरी कमेटी। यह संसद की वह समिति होती है जिसमें सभी दलों की समान भागीदारी हो। जेपीसी को यह अधिकार है कि वह किसी भी व्‍यक्ति, संस्‍था या किसी भी उस पक्ष को बुला सकती है जिसको ले‍कर जेपीसी का गठन हुआ है।

वहीं राफेल मामले में सरकार के खिलाफ याचिका दायर करने वाले आप के निष्काषित नेता और वकील प्रशांत भूषण ने तो शीर्ष अदालत के निर्णय को ही गलत बताते हुए कहा कि मेरा मानना है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे मामले पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पूरी तरह गलत है। उन्होंने कहा कि सौदे को लेकर शुरू किया अभियान सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भी नहीं रोका जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद हम पुर्नविचार याचिका दायर करने की संभावनाओं पर जल्द ही निर्णय ले सकते हैं।