Home Blog Page 601

‘मोबाइल नंबर माँग रहा हूँ, तुझे समझ में नहीं आ रहा’: अमजद ने साथियों सहित हिंदू लड़कियों को दुकान में खींचा, गर्दन पर चाकू रख धमकाया; बचाने गए दलित की भी पिटाई

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्कूल की नाबालिग हिन्दू छात्राओं से छेड़खानी करने का मामला सामने आया है। इन लड़कियों को बबलू कुरैशी की दुकान में घसीट कर ले जाया गया। विरोध करने पर उनकी पिटाई की गई और गर्दन पर चाकू रख दिया गया। बच्चियों को बचाने गए एक दलित युवक पर भी हमला किया गया। यह घटना शनिवार (26 अक्टूबर 2024) की है।

इस घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू समाज के लोग विरोध में उतर आए और थाने के पास इकट्ठा होकर विरोध में प्रदर्शन किया। इस मामले में पुलिस ने सोमवार (28 अक्टूबर) को अमजद नाम के एक मुस्लिम युवक को गिरफ्तार किया है। अन्य आरोपित फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। इनकी तलाश में पुलिस जगह-जगह दबिश दे रही है।

यह घटना सहारनपुर के थाना क्षेत्र नकुड़ की है। यहाँ 26 अक्टूबर को एक नाबालिग पीड़िता के पिता ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि शनिवार शाम लगभग 5:35 बजे उसकी 16 वर्षीया बेटी अपनी 4 नाबालिग सहेलियों के साथ कोचिंग से ट्यूशन पढ़कर लौट रही थी। रास्ते में बबलू कुरैशी की सेटरिंग की दुकान है, जहाँ 5 लोग बैठे थे। इनमें बबलू कुरैशी का बेटा और अमजद भी था।

पीड़िता के पिता ने आगे बताया कि इन लोगों ने पाँच में से 2 लड़कियों को हाथ और बाल पकड़ कर दुकान के अंदर खींच लिया। इस दौरान आरोपितों ने दोनों लड़कियों पिटाई भी की और कहा, “तुझे इतने दिन से बोल रहा हूँ कि अपना मोबाइल नंबर दे, तेरी समझ में नहीं आ रही है।” इस दौरान पाँचों में से एक ने शिकायतकर्ता की बेटी की गर्दन पर चाकू रख दिया।

आरोपितों ने नाबालिग छात्राओं को गंदे-गंदे इशारे किए और कहा, “आज तुम्हें कोई नहीं बचा पाएगा।” इससे डरकर दोनों छात्राएँ शोर मचाने लगीं। इन छात्राओं की गुहार सुनकर बाहर खड़ी उनकी तीन सहेलियों ने राहगीरों से मदद करने की अपील की। तभी उधर से राजकुमार वाल्मीकि नाम का एक युवक गुजर रहा था। उसने लड़कियों की गुहार सुनकर उन्हें बचाने के लिए कान के अंदर घुस गया।

राजकुमार ने आरोपितों से दोनों बच्चियों को छोड़ने के लिए कहा। इस पर आरोपितों ने राजकुमार को जातिसूचक शब्द बोले और कहा, “$ले भं#, यहाँ से भाग जा नहीं तो तुझे भी जान से मार देंगे।” इनमें से 2 आरोपितों ने राजकुमार को लोहे की रॉड और डंडे से पीटना शुरू कर दिया। हंगामा सुनकर गाँव के कुछ लोग आ गए और उन्होंने दुकान में जाकर देखा तो आरोपित लड़कियों और राजकुमार को पीट रहे थे।

भीड़ को आता देखकर पाँचों आरोपित वहाँ से फरार हो गए। भागते हुए आरोपित अपनी एक हीरो होंडा पैशन बाइक भी घटनास्थल पर छोड़ गए। इस दौरान हमलावरों को बचाने के लिए कुछ मुस्लिम महिलाओं ने अपनी छतों से जमा हो रहे हिंदुओं पर पथराव कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और किसी तरह हालात को सँभाला।

पीड़ित पिता ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। ऑपइंडिया के पास शिकायत की कॉपी मौजूद है। इन छात्राओं की उम्र 15 से 16 साल के बीच बताई जा रही है। इस घटना के विरोध में आसपास के तमाम हिंदू समुदाय के लोग थाने पर जमा हो गए। उन्होंने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। इसके बाद पुलिस ने केस दर्ज कर आरोपितों की तलाश शुरू कर दी।

पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ SC/ST एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत भी मुकदमा दर्ज किया है। लगातार दबिश दे रही पुलिस टीम को आखिरकार मंगलवार (28 अक्टूबर) को सफलता मिली और अमजद को गिरफ्तार कर लिया। मामले में तमाम सबूतों के माध्यम से अन्य आरोपितों को चिन्हित कर उन्हें पकड़ने की कोशिश की जा रही है।

न होगी गिरफ्तारी, न मिलेगी कोई सजा: बांग्लादेश में जिन इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं पर किए तमाम अत्याचार, उन्हें युनूस सरकार ने दिया ‘कानूनी कवच’

बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के बाद की स्थिति अब और भी खतरनाक होती जा रही है। शेख हसीना के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद हिंदुओं, बौद्धों, अहमदियों को बांग्लादेश में धार्मिक और मजहबी पहचान के लिए इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा निशाना बनाया गया, लेकिन अब मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने उन कथित छात्रों (इस्लामिक कट्टरपंथियों) को कानूनी संरक्षण देने का फैसला किया है, जिन्होंने पूरे बांग्लादेश में उथल-पुथल मचाई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली नई सरकार ने 15 जुलाई से 8 अगस्त के बीच हुए प्रदर्शनों में शामिल ‘प्रदर्शनकारियों’ को किसी भी सजा से मुक्त रखने का आदेश जारी किया है। यूनुस सरकार के इस कदम से विवाद भी पैदा हो रहा है, क्योंकि कई लोग इसे उस समय की हिंसा के लिए जिम्मेदारी से बचने का तरीका मानते हैं। इस नियम की व्याख्या को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि इससे यह आशंका है कि यह गंभीर अपराधों में शामिल लोगों को भी सुरक्षा दे सकता है, क्योंकि इस दौरान बहुत सारे मजलूमों को भी निशाना बनाया गया।

बता दें कि ‘छात्र-नेतृत्व वाले’ आंदोलन में सैकड़ों लोग मारे गए, लेकिन जो लोग इस हिंसा से प्रभावित हुए हैं, उन्हें डर है कि नए अधिकारियों द्वारा किया गया ‘न्याय का वादा’ अब उन्हें न्याय नहीं देगा।

बांग्लादेश के गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयान में कहा गया, “एक नए गैर-भेदभावपूर्ण बांग्लादेश की यात्रा शुरू हो गई है। जो छात्र और नागरिक इस उथल-पुथल में शामिल थे, उन्हें 15 जुलाई से 8 अगस्त के बीच उनके कार्यों के लिए दंड, गिरफ्तारी या परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।” महत्वपूर्ण यह है कि बांग्लादेश में हिंदू, मुस्लिम अहमदिया सूफी समुदाय, बौद्ध और ईसाई जैसे अल्पसंख्यक समुदायों पर भयानक हमले हुए हैं।

बता दें कि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पद से इस्तीफा देकर देश छोड़ दिया, जब उनके खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे। उनके जाने के बाद, बांग्लादेशी सेना ने सत्ता संभाली और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी। इस बीच, बांग्लादेश के हिंदू इस्लामिस्टों द्वारा देशभर में निशाना बनाए जाने लगे। ऑपइंडिया ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ घृणा की अनगिनत रिपोर्टें प्रकाशित की हैं, जिन्हें यहाँ पढ़ सकते हैं।

मूल रिपोर्ट विस्तार से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

पहले नाबालिग बेटी से किया 2 बार रेप, फिर भतीजी को भी जंगल में बनाया हवस का शिकार: छत्तीसगढ़ पुलिस ने पेरोल पर छूटे ‘रेपिस्ट’ को दबोचा, मिल चुकी है उम्रकैद की सजा

छत्तीसगढ़ के कोरिया में एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी और भतीजी का बलात्कार किया है। आरोपित को इससे पहले रेप के एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा मिल चुकी है। फ़िलहाल वह पेरोल पर आया हुआ था। दुष्कर्म के बाद आरोपित फरार हो गया था जिसे पुलिस ने कोरबा के जंगलों से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना कोरिया जिले के थानाक्षेत्र बैकुंठपुर की है। यहाँ 22 अक्टूबर 2024 को एक 11 वर्षीया नाबालिग लड़की ने अपने ही पिता के खिलाफ पुलिस में तहरीर दी थी। तहरीर में बेटी ने बताया था कि 19 अक्टूबर की रात को घर में ही रेप किया। विरोध करने व किसी को बताने पर आरोपित ने अपनी बेटी को कत्ल करने की धमकी दी थी। 21 अक्टूबर की दोपहर में आरोपित पिता अपनी बेटी को लेकर लकड़ियाँ बीनने के बहाने जंगल गया। यहाँ उसने एक बार फिर से अपनी बेटी को हवस का शिकार बनाया।

पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2), 65(2), 87 और 127 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज कर लिया। अभी पुलिस मामले की जाँच शुरू ही की थी कि एक अन्य 12 वर्षीया नाबालिग लड़की ने बैकुंठपुर थाने में पहुँच कर उसी आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने आरोपित को अपना चाचा बताया। बकौल पीड़िता 21 अक्टूबर की शाम लगभग 5 बजे उसके चाचा ने लकड़ी के बहाने जंगल ले जा कर उस से रेप किया।

आरोपित ने अपनी भतीजी को भी कहीं मुँह खोलने पर मार डालने की धमकी दी थी। अपनी बेटी व भतीजी से रेप के बाद आरोपित फरार हो गया था। पुलिस ने दोनों मामलों में एक ही धाराओं में FIR दर्ज कर के आरोपित की खोजबीन शुरू कर दी। सबसे पहले अरोपित को उसके नाते-रिश्तेदारों के यहाँ तलाशा गया। जब वो नहीं मिला तो सर्विलांस की मदद ली गई। आरोपित ने एक नंबर पर किसी दूसरे व्यक्ति के मोबाइल से कॉल किया था।

पुलिस ने उसी को आधार बना कर खोजबीन की तो वह कोरबा के जंगलों से दबोच लिया गया। आरोपित को जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया गया है। बताते चलें कि अपनी बेटी व भतीजी से रेप का यह आरोपित एक अन्य दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। वह अंबिकापुर जेल में बंद है। फ़िलहाल के लिए उसे पेरोल पर छोड़ा गया था। मामले में पुलिस की जाँच जारी है।

‘आतंकवाद’ पर लिखी किताब, अब हवाई जहाजों को उड़ाने की दे रहा धमकी?: जानें कौन है वो फरार ‘लेखक’ जिसकी तलाश में जुटी पुलिस, PM मोदी से मिलने की करता है माँग

देशभर में लगातार धमकी भरे कॉल्स और ईमेल्स की घटनाएँ सामने आई, जिसमें हवाई जहाजों से लेकर महत्वपूर्ण जगहों को उड़ाने की धमकी दी गई, लेकिन अब तक ये सभी अफवाहें साबित हुई हैं। पुलिस का मानना है कि इन धमकी भरे संदेशों के पीछे महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के गोंदिया जिले के रहने वाले 35 वर्षीय व्यक्ति, जगदीश उइके का हाथ हो सकता है। जगदीश उइके एक लेखक है, जिसने आतंकवाद पर एक किताब भी लिखी है। उसका दावा है कि उसने एक “सीक्रेट टेरर कोड” (25-MBA-5-MTR) को डिकोड किया है, जिसमें पाँच दिनों में 30 धमाकों की धमकी देने के बारे में बताया गया है।

उइके पर आरोप है कि कई सरकारी अधिकारियों को ईमेल भेजे, जिनमें प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय रेलवे मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य एजेंसियों के नाम शामिल हैं। इन ईमेल में उसने धमकी दी है कि यदि उसकी बात नहीं सुनी गई तो गंभीर नतीजे हो सकते हैं। इसके चलते नागपुर पुलिस ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के घर की सुरक्षा बढ़ा दी है, ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचाव किया जा सके।

जगदीश उइके ने प्रधान मंत्री मोदी से मिलने की भी माँग की है, ताकि वह अपनी खोज के बारे में जानकारी साझा कर सके। उसने दावा किया है कि उसके पास आतंकवादी हमलों से जुड़ी कुछ खास जानकारियाँ हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसके कारण रेलवे स्टेशनों और एयरलाइंस में सुरक्षा को बढ़ाया गया है और आतंकवाद-रोधी दस्ते भी सतर्क हो गए हैं।

इस घटना के बाद पुलिस ने उइके को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम बनाई है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उइके के भेजे गए ईमेल्स के कारण कई जगहों पर सुरक्षा की सख्ती बढ़ाई गई है ताकि कोई भी अनहोनी न हो सके।

इसी बीच, 22 अक्टूबर को लगभग 50 उड़ानों में बम की झूठी धमकी मिलने की घटनाएँ हुईं। इसमें इंडिगो और एयर इंडिया की 13-13 उड़ानें शामिल थीं। ऐसे में सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ इन सभी धमकियों को गंभीरता से ले रही हैं और सुरक्षा व्यवस्था को हर स्तर पर मजबूत किया जा रहा है।

अयोध्या में साधुओं ने नहीं छेड़ी कोई लड़की, इस्लामी पत्रकारों ने झूठ फैलाया: जाँच के बाद UP पुलिस ने सच बताया, रील के कारण हुआ विवाद

उत्तर प्रदेश के अयोध्या से एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बाइक सवार 2 साधुओं को कुछ लोगों से वाद-विवाद करते देखा जा सकता है। हिन्दू विरोधी अफवाह उड़ाने के लिए पहले से ही कुख्यात ज़ाकिर अली त्यागी और कविश अज़ीज़ जैसे हैंडलों से दावा किया गया है कि दोनों साधु महिलाओं से छेड़खानी कर रहे थे। इन्होने साधुओं पर एक व्यक्ति को पीटने का भी आरोप लगाया है। ऑपइंडिया ने इन दावों की जमीनी स्तर पर पड़ताल की।

वायरल वीडियो में एक बाइक पर सवार 2 साधु दिखाई दे रहे हैं। तीसरा साधु सड़क पर है। कुछ लोगों से बाइक सवार साधुओं की पहले बहस होती है। बाद में एक साधु की वीडियो बना रहे युवक से हाथापाई भी होती है। वीडियो बना रहा युवक साधुओं पर लड़कियों को छेड़ने का आरोप लगाता सुनाई दे रहा है। सड़क पर खड़ा तीसरा साधु बीच बचाव करता दिख रहा है। थोड़ी देर के झगड़े के बाद दोनों साधु बाइक से लौट जाते हैं।

लगभग 2 मिनट 6 सेकेण्ड लम्बे इस वीडियो को ज़ाकिर अली त्यागी ने 23 अक्टूबर को शेयर किया है। उसने अपने कैप्शन में लिखा, “अयोध्या में 2 साधुओं ने लड़की के साथ की छेड़छाड़ की तो हुई सरेआम धुनाई, साधुओं ने बाद में छेड़छाड़ का विरोध करने वाले युवक की भी पिटाई की, लड़की के साथ छेड़छाड़ करने के बाद बाइक पर भागे साधू।”

ज़ाकिर अली के साथ हिन्दू विरोधी अफवाहों का ही एजेंडा चलाने वाली कविश अज़ीज़ ने भी इसी वीडियो को शेयर किया है। कविश अज़ीज़ ने लिखा, “मतलब बिना मुसलमान के कुछ नहीं हो सकता। अयोध्या में तीन साधू लड़की छेड़ते पकड़े गए तो राहगीरों ने पिटाई कर दिया, बाबा की जब धुनाई होने लगी तो कहने लगे ‘इसीलिए मुसलमान हावी है’ मतलब लड़की छेड़ते हुए पकड़े गए अगर कोई कूट दे तो वहाँ भी धर्म का कार्ड खेलना है।”

चित्र – X/ज़ाकिर अली & कविश

अयोध्या पुलिस ने बताई सच्चाई

अयोध्या पुलिस ने इस पूरे मामले की असलियत बताई है। एडिशनल एसपी अयोध्या ने गुरुवार (22 अक्टूबर) को बताया कि घटना थानाक्षेत्र कैंट की है। घटनास्थल पंचमुखी हनुमान मंदिर तिराहा बताया गया। जब पुलिस ने जानकारी की तो पता चला कि एक पक्ष बाइक से वीडियो रील बनाता हुआ जा रहा था। रील बनाने पर दूसरे पक्ष ने कुछ टिप्पणी की जिस से दोनों पक्षों में वाद-विवाद हो गया। यही वाद-विवाद बाद में हाथापाई में बदल गया।

एडिशनल एसपी ने साफ तौर पर कहा कि इस पूरे मामले में छेड़खानी जैसी कोई घटना नहीं घटित हुई है। पुलिस ने इस मामले में 2 लोगों को हिरासत में लिया है। इनके खिलाफ जरूरी कानूनी कार्रवाई की गई है। अयोध्या पुलिस ने अपने मीडिया सेल में साफ तौर पर भ्रामक सूचना न फैलाने की हिदायत दी है।

सफाई के बावजूद नहीं सुधरा ज़ाकिर

अयोध्या पुलिस की सफाई के बावजूद अपने नाम में त्यागी लगाने वाला ज़ाकिर अली बाज नहीं आया। पोल खुलने के बाद उसने एक फैक्ट चेक करने वाले हैंडल को अपशब्द बोले। ज़ाकिर ने लिखा, “अबे अपना फ़र्ज़ी एनालिसिस अपने पिछवाड़े में घुसेड़ ले!”

ज़ाकिर अली ने अपने इस अपशब्द वाले ट्वीट में 2 अलग-अलग समाचार संस्थानों के स्क्रीनशॉट भी अटैच किए हैं। इन दोनों खबरों की हेडलाइन में भी ज़ाकिर के दावों से मिलती जुलती हेडलाइन लिखी हुई है।

शरिया काउंसिल नहीं जारी कर सकती तलाक सर्टिफिकेट, कोर्ट के आदेश तक निकाह रहेगा मान्य: HC में शौहर की याचिका खारिज, बीबी को देना पड़ेगा गुजारा भत्ता

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने हाल ही में यह निर्णय दिया कि शरिया काउंसिल एक निजी संगठन है और कानूनी अदालत नहीं है। यह निर्णय एक मुस्लिम दंपति के तलाक से जुड़े मामले में दिया गया। मामला तमिलनाडु शरिया काउंसिल के 2017 में एक शौहर को तलाक प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़ा था, जिसने अपनी बीवी से 2010 में निकाह किया था। कोर्ट ने कहा कि शरिया काउंसिल परिवार और वित्तीय मुद्दों में मदद कर सकती है, लेकिन तलाक सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकती और न ही किसी पर जुर्माना लगा सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच में जस्टिस जी.आर. स्वामिनाथन ने इस तलाक सर्टिफिकेट को “चौंकाने वाला” बताया और कहा, “केवल राज्य द्वारा स्थापित अदालतें ही फैसले दे सकती हैं।” जस्टिस स्वामिनाथन ने शौहर की याचिका को खारिज करते हुए यह पुष्टि की कि निकाह तब तक मान्य रहेगा जब तक कि कोई अधिकार प्राप्त अदालत इसे भंग नहीं करती।

जानकारी के मुताबिक, 2018 में बीवी ने इस तलाक को चुनौती दी थी और घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत के लिए मामला दायर किया था। उन्होंने दावा किया कि तीसरी बार “तलाक” उन्हें कभी नहीं दिया गया था। साल 2021 में मजिस्ट्रेट ने उनके पक्ष में फैसला दिया और घरेलू हिंसा के लिए उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा और उनके नाबालिग बच्चे के लिए मासिक भत्ता देने का आदेश दिया। शौहर की इस आदेश के खिलाफ अपील को भी खारिज कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने मौजूदा पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।

जस्टिस स्वामिनाथन ने यह भी कहा कि अदालत की मान्यता के बिना शौहर का एकतरफा तलाक देकर निकाह को तोड़ नहीं सकता। उन्होंने कहा कि दूसरा निकाह करना “मानसिक उत्पीड़न” का कारण बनता है, जो कि क्रूरता के दायरे में आता है। जस्टिस स्वामिनाथन ने यह साफ कहा कि दूसरी शादी का मामला किसी भी धर्म में क्रूरता की श्रेणी में आता है, और इससे प्रभावित जीवनसाथी घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत राहत पाने के हकदार होते हैं।

रोहतक से दिल्ली जा रही पैसेंजर ट्रेन में धमाका, आग लगने से 4 झुलसे: CCTV फुटेज से जाँच शुरू, विस्फोट के लिए सल्फर और पोटाशगन का हुआ इस्तेमाल

हरियाणा के रोहतक में एक पैसेंजर ट्रेन के अंदर ब्लास्ट हुआ है। इस धमाके से ट्रेन में अफरातफरी मच गई। पायलट ने इमरजेंसी ब्रेक लगा कर ट्रेन रोकी। हादसे में 4 लोगों के झुलसने की खबर है व कुछ लोग घायल हो गए हैं जिनका इलाज चल रहा है। अभी तक किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। यह धमाका हादसा है या साजिश इसकी जाँच के लिए उच्चस्तरीय जाँच शुरू कर दी गई है। घटना सोमवार (28 अक्टूबर 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जींद-दिल्ली मेमो ट्रेन के अंदर का है। सोमवार को यह ट्रेन जींद से दिल्ली के लिए अपने तय समय पर निकली। रास्ते में शाम लगभग 4:20 पर यह जैसे ही सांपला स्टेशन पार कर के खरखौदा और रोहद के बीच पहुँची, इसमें जोरदार धमाका हो गया। एक बोगी से लोगों को चिंगारी निकलती दिखाई दी। धमाके से घबरा कर यात्री चलती ट्रेन से कूदने लगे। लोको पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए।

हादसे में कई लोग घायल हुए हैं जिनका स्थानीय अस्पतालों में इलाज करवाया गया। किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। कई यात्री सड़क मार्ग से अपने घर चले गए। धमाके की सूचना कंट्रोल रूम को दी गई। मौके पर रेलवे के अधिकारी व पुलिस विभाग से जुड़े लोग पहुचे। यह घटना हादसा है या साजिश इसकी हाई लेवल जाँच शुरू कर दी गई है। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक धमाके में सल्फर और पोटाशगन का प्रयोग हुआ है।

तमाम स्टेशनों के CCTV फुटेज आदि खंगालें जा रहे हैं। रेलवे के सीपीआरओ हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि आरपीएफ व जीआरपीएफ से रिपोर्ट तलब की गई है। जिस बोगी में विस्फोट हुआ था उसे जीआरपी ने अपने कब्ज़े में ले कर गहन जाँच शुरू कर दी है। फ़िलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बिना तेल वाली सब्जी खाकर सो गई बुधनी, हिंदुओं ने फूँक डाले लाखों दीये… दिवाली के धुएँ में घुट रहे मछली-मगरमच्छ-मुस्लिम: वामपंथी मीडिया की रिपोर्ट

अयोध्या को दीवाली के लिए खूब सजाया गया है, क्योंकि भगवान राम के 14 साल के वनवास से लौटने की खुशी में यह त्योहार मनाया जाता है। लाखों हिंदू इस त्यौहार का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं। इस बार का दीवाली उत्सव वैसे भी खास है, क्योंकि पहली बार ये त्योहार उस अयोध्या में मनाया जा रहा है जहाँ हाल ही में राम मंदिर बनकर तैयार हुआ है।

इस दिवारी पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार का प्लान है कि इस साल अयोध्या को लाखों दीयों से रोशन किया जाए और 25 से 28 लाख दीये जलाकर दुनिया में एक नया रिकॉर्ड बनाया जाए। उनका कहना है कि दीवाली के इस ‘दीपोत्सव’ में पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाएगा, इसलिए ईको-फ्रेंडली दीये जलाए जाएँगे जो राम मंदिर और पूरे शहर को जगमग कर देंगे।

लेकिन जहाँ एक तरफ़ लोग खुशी मना रहे हैं, वहीं कुछ लोग हैं जो इस दीवाली से ‘ख़तरा’ महसूस कर रहे हैं। वो कोई रावण नहीं बल्कि कुछ ‘परेशान पर्यावरण प्रेमी’ और ‘सेकुलर विचारधारा वाले’ हैं, जो कीबोर्ड और ट्विटर लेकर ‘हिंदू त्योहारों’ के खिलाफ मुहिम छेड़ने के लिए तैयार बैठे हैं। उनके मुताबिक, दीवाली का ये जश्न पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकता है, और जानवरों के लिए खतरा हो सकता है।

खास बात ये है कि ये ‘एक्टिविस्ट’ का ‘2BhK’ वाला ग्रुप अक्सर अपने फ्लैट पर महँगी पार्टियों और जश्न का आयोजन करते रहते हैं, हिंदुओं के खिलाफ फर्जी खबरें फैलाने का काम करते हैं। हालाँकि अब उन्हें दिवाली के बहाने ‘हिंदुओं’ पर जहर उगलने का मौका हाथ लगने वाला था, ऐसे में इन लोगों ने एक व्हाट्सऐप ग्रुप में चर्चा करते हुए दिल्ली के खान मार्केट के किसी शानदार सी-फूड रेस्टोरेंट में मुलाकात का प्लान बनाया, ताकि वे पर्यावरण और जानवरों की सुरक्षा का हवाला देकर योगी सरकार को निशाने पर ले सकें।

एक मशहूर ‘पत्रकार’ ने दीवाली के अगले दिन ट्वीट किया, “मोदी का नया भारत दीवाली पर पैसे उड़ा रहा है, जबकि यहाँ की आबादी को भरपेट खाना भी नसीब नहीं है।” उन्होंने इसे हाल ही में जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स से जोड़ा, जिसमें भारत की रैंकिंग 127 देशों में 105वें स्थान पर थी। इस रिपोर्ट को इस बात का सबूत बताया गया कि भारत में गरीबों की हालत खराब है, जबकि भारत ने इनमें से कई देशों को मुफ्त में राशन दिया, ताकि उनका पेट भर सके। और अब उस लिस्ट की आड़ में ये भारतीयों को ही भुखमरी का शिकार बता रहे हैं।

इस मशहूर पत्रकार की पत्नी, जो खुद एक यूट्यूबर है, उन्होंने प्रचार की इस मुहिम में योगदान देते हुए कहा कि अयोध्या में इस तरह दीवाली मनाना उस देश के लिए बुरा है, जहाँ बुधनी जैसे गरीब बच्चे दीयों का तेल इकठ्ठा करते हैं ताकि उनके परिवार के खाने के लिए तेल का इंतजाम हो सके।

इस ग्रुप का एक अन्य सदस्य, जो अमेरिका में स्कॉलरशिप कार्यक्रम में शामिल हुआ था, ने मुसलमानों के साथ भेदभाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि अयोध्या में दीवाली का ये भव्य जश्न भारतीय मुसलमानों के हाशिए पर होने का प्रमाण है। उसने एक मुस्लिम परिवार की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि वे लोग बिजली का बिल नहीं चुका सकते और अयोध्या का राम मंदिर रोशनी से जगमगा रहा है।

इस ग्रुप में एक और हैं जो पेशे से चुनावी विश्लेषक हैं लेकिन दावा करते हैं कि उन्हें हर चीज़ का ज्ञान है। उन्होंने ट्वीट किया, “अरे भई, सोचा दीवाली पर असली दीये जलाना ठीक है? क्या इन्हें कार्बन फुटप्रिंट के बारे में पता नहीं?” उनके इस ट्वीट में अयोध्या को इस तरह से दिखाया गया था जैसे वह धुएं से घिरा हुआ हो। इस पर एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा, “आज तो दुग्गल साहब पर्यावरणविद हैं!”

इसी बीच कई अखबारों में अयोध्या की दीवाली को लेकर लेख छपने लगे, जिसमें पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की बात कही गई। एक लेख की हेडलाइन थी “योगी आदित्यनाथ सरकार ने अयोध्या को पर्यावरणीय संकट में धकेला।” लेख में कहा गया कि इतनी रोशनी से रात में जागने वाले जानवरों के अधिकारों का हनन हो रहा है। “बेचारे उल्लुओं का क्या हाल होगा,” लेखक ने लिखा।

उधर, जर्मनी में बैठा एक ‘मशहूर’ यूट्यूबर वीडियो में चर्चा कर रहा था कि “दीवाली तो रोशनी का ही त्यौहार है, लेकिन इसमें ‘सबको शामिल करना’ भी जरूरी है। क्या अंधेरे में रहने वाले लोगों से उनकी सहमति ली गई थी?” उसने अपने फॉलोअर्स से ये तक कहा कि वे इस ‘अन्याय’ के खिलाफ याचिका डालें ताकि इस पर रोक लग सके। उसने ये भी चिंता जताई कि सरयू नदी में रहने वाली मछलियाँ और मगरमच्छ इतनी रोशनी से ‘ट्रॉमेटाइज्ड’ यानी घबरा गए होंगे।

एक रेडियो जॉकी ने सवाल उठाया, “अरे भाई, हम अयोध्या में दीये जला रहे हैं, लेकिन अंधेरा पसंद करने वालों का क्या? क्या उन्हें भी अंधेरे में रहने का हक नहीं?” उन्होंने इसे भारतीय संविधान का उल्लंघन भी बताया।

जब सरकार ने पर्यावरण-अनुकूल दीयों का उपयोग करने की बात कही, तो एक ‘पर्यावरण कार्यकर्ता’ ने ट्वीट कर कहा, “लेकिन असली दीयों का क्या?” उन्होंने शिकायत की कि सरकार ने सभी को निराश किया है – चाहे वो हिंदू हों, पर्यावरणविद हों, जानवर हों या अल्पसंख्यक समुदाय के लोग।

इसी बीच एक और ‘पत्रकार’ ने, जिन पर अमेरिका के एक अखबार में अपने लेखों की चोरी करने के आरोप लगे हुए हैं, एक खबर शेयर की। इस खबर में बताया गया कि दीवाली के दिन अयोध्या में एक मुस्लिम व्यक्ति को चोरी करते पकड़ा गया। इस पत्रकार ने ट्वीट किया, “अब तो भारत में गरीब मुसलमानों को चोरी भी करने नहीं दिया जा रहा। पिछले दस साल में ये देश फासीवाद का अड्डा बन गया है।”

इस व्यंग्यात्मक लेख के जरिए ये समझाने की कोशिश की गई है कि किस तरह कुछ लोग किसी भी त्योहार या सांस्कृतिक आयोजन को लेकर तमाम अनावश्यक और बेतुके मुद्दे उठा लेते हैं। चाहे दीवाली हो, देश के विकास की बात हो, या किसी एक खास धर्म से जुड़ी खुशियाँ, एक तय एजेंडे के तहत आलोचना का माहौल बना दिया जाता है, ताकि असली मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके।

मूल रूप से यह व्यंग्य अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित है। मूल कॉपी पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

3000 हिंदू हर महीने बनते हैं ईसाई, 3.5 लाख अब तक हो भी चुके कन्वर्ट: हैदराबाद के कैल्वारी चर्च से चल रहा धर्मांतरण का खेल, ट्रैकिंग सिस्टम से जुटाए जाते हैं लोग

सोशल मीडिया पर पिछले दिनों सीबीएन न्यूज (The Christian Broadcasting Network Inc) की एक वीडियो सामने आई थी। इस वीडियो के वायरल होने के बाद हैदराबाद के कैल्वारी चर्च की चर्चा तेज हो गई।

दावा है कि ये चर्च हर माह 3000 हिंदुओं को ईसाई धर्म में लाता है और इसे चलाने वाले पादरी सतीश कुमार भी ये दावा करते हैं कि उन्होंने अभी तक 3.5 लाख हिंदुओं को धर्मांतरित किया है और उनका प्लान आने वाले समय में 40 कैल्वारी चर्चाों को देश भर में खोलने का है लेकिन भारत में आरएसएस उन्हें ऐसा करने से रोक रहा है।

चर्च परिसर को प्रशासन ने किया सील

वीडियो को सोशल मीडिया पर पत्रकार देविका ने साझा किया और उसके बाद लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम ने भी इस पर संज्ञान लिया। उन्होंने अपडेट देते हुए अपने ट्वीट में बताया कि इस चर्च की डिजिटल ब्रांच को काकीनाडा के जिला कलेक्टर के आदेश के बाद सील कर दिया गया है। अब ये तो नहीं मालूम कि वीडियो वायरल होने के बाद इस चर्च को लेकर कोई शिकायत हुई या नहीं लेकिन ये पता चला है कि मुख्य चर्च के अलावा इस चर्च की 10 ब्रांच और चल रही हैं।

विदेशी ताकतों को भारतीय मामलों में हस्तक्षेप कराता है

साल 2020 में मिशनकली हैंडल से एक वीडियो भी सामने आई थी। इसमें बताया जा रहा था कि कैसे पादरी सतीष, सरकार के पडार में आने से बचने के लिए धर्मांतरण और जबरन धर्मांतरण जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करते बल्कि इसके अतिरिक्त वो ये कहते हैं कि सरकार उनसे खुश हैं क्योंकि वो नेक उद्देश्यों से गरीबों को भोजन देते हैं। वीडियो में दावा किया गया था कि उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान 700 टन खाना बाँटा था।

पुराने पोस्ट अगर देखें तो पता चलता है कि सतीश पूर्व अमेरीकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस जैसे विदेशी नेताओं से मिलकर भारत में धार्मिक आजादी के मुद्दों पर चर्चा करते हैं और उन्हें यहाँ के मामलों में दखल देने का मौका देते हैं। बाद में विदेशी प्लेटफॉर्मों पर वो रिपोर्ट आती हैं जहाँ भारत पर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का आरोप लगता है।

मालूम हो कि पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम (USCIRF) भारत पर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करता है जिसमें अक्सर हिंदुओं और मौजूदा सरकार को निशाना बनाया जाता है और अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया जाता है।

कैल्वारी चर्च की स्थापना

बता दें कि कैल्वारी चर्च की स्थापना 2005 में डॉ. सतीश कुमार ने की थी। आज सतीश कुमार को दुनिया के सामने एक सम्मानित पादरी, लेखक और अंतर्राष्ट्रीय वक्ता के रूप में बताया जाता है, लेकिन उनकी मिशनरी गतिविधियों पर बात नहीं होती। भारत में उनकी मिशनरी गतिविधियों और आक्रामक धर्मांतरण रणनीति को लेकर चिंताएँ हैं। कैल्वारी चर्च का दावा है कि उसके पास 400,000 सदस्य हैं जो लगातार बढ़ रहे हैं। उनके लिए ये विस्तार एक उपलब्धि है लेकिन हिंदुओं के चिंता क्योंकि ये संख्या उन्हीं की मजबूरियों का फायदा उठाकर बढ़ाई जा रही है। चर्च को लेकर यह भी दावा है कि इसका निर्माण मात्र 52 दिनों में किया गया था।

हर महीने हो रहा 3000 हिंदुओं का धर्मांतरण

दिलचस्प बात ये है कि सीबीएन ने जो खबर कैल्वारी चर्च के समर्थन में चलाई उससे उस मिशनरी समूह की हकीकत उजागर हो गई। ये चर्च इतनी तादाद में जुड़ रहे लोगों और हर महीने 3000 हिंदुओं के होने ईसाई बनने को अपनी उपलब्धि बताता है लेकिन सामान्य नजरिए से देखें तो पता चलेगा कि किस तीव्रता से यहाँ धर्मांतरण का काम चल रहा है।

बड़ा कैंपस और उपस्थिति अनिवार्य

हैदराबाद के इस चर्च को देश का सबसे बड़ा चर्च कहा जाता है जिसका कैंपस बहुत बड़ा है। हर रविवार सैंकड़ों लोग सभा को अटेंड करने आते हैं। सुबह 4 बजे से भीड़ लगनी शुरू हो जाती है। चर्च के सदस्य भीड़ को नियंत्रित करते हैं। दिलचस्प ये है कि जरूरी नहीं ये भीड़ अपनी मर्जी से यहाँ आए। उनपर दबाव होता है कि वो चर्च आएँ ही आएँ। अगर कोई नहीं आता तो पूछा जाता है कि उशने ऐसा क्यों किया। दिन में करीबन पाँच सत्र रखे जाते हैं जहाँ पादरी लोगों को अपना ज्ञान देते हैं।

लालच देकर धर्मांतरण

कैल्वरी चर्च निर्धन हिंदुओं की गरीबी और आर्थिक अस्थिरता का फायदा उठाकर उन्हें धर्मांतरित करने का प्रयास करता है। यहाँ रविवार को सभा में आने वाले लोगों को तीन बार फ्री में खाने का लालच देकर बुलाया जाता है और दावा किया जाता है कि रविवार को यहाँ आने वाले लोगों की संख्या 50,000 तक पहुँच जाती है जिनके खाने की व्यवस्था महीने में दिए गए 2 लाख मुफ्त मील के बराबर है। इसके अलावा यहाँ मेडिकल सेवाएँ, विवाह व्यवस्था और अंतिम सस्कार के लिए सुविधा आदि देने की बात होती है। बाद में इन्हीं सेवाओं का हवाला देकर हिंदुओं को ईसाई धर्म की ओर आकर्षित करने के प्रयास होते हैं।

हिंदू मंदिरों में प्रथा पुरानी

गौरतलब हो कि ये सारी सेवाएँ वहीं हैं जिन्हें तमाम हिंदू मंदिर बिन किसी प्रचार के और बिन किसी को लालच दिए सालों से करते आए हैं। रही बात निशुल्क खाने की तो जगह-जगह मंदिरों में पवित्र ढंग से खाना बनाकर जरूरतमंदों को दिया जाता है और उसे भंडारा कहते हैं। बावजूद इतने प्रयासों लोग हिंदू मंदिरों पर जातिगत भेदभाव का आरोप लगाते हैं और कैल्वारी चर्च जैसे मिशनरी एजेंडे को परोपकार का नाम देते हैं।

देश में और वैश्विक स्तर पर विस्तार की मंशा

मालूम हो कि ये चर्च पहले ही अपनी 11 ब्रांच खोल चुका है और 40 और बड़े चर्च खोलने के इरादे रखता है। पादरी की यह मंशा चिंताजनक इसलिए है क्योंकि इस विस्तार के जरिए वो हिंदू और अन्य समुदाय के लोगों से जुड़ेंगे और इसके अलावा विदेशी ईसाई संस्थाओं की घुसपैठ होगी। यह चर्च पहले ही भारतीय भाषाओं में टेलिविजन कार्यक्रम प्रसारित करता है तथा खाड़ी देशों में लाखों लोगों तक पहुँचाता है।

ट्रैकिंग सिस्टम में समस्या

हैरान करने वाली बात ये हैं कि इस चर्च से जुड़ने के बाद ये चर्च लोगों को ट्रैक करता है। जब हर रविवार भीड़ जुटती है तो उसकी एंट्री के लिए एक एक्सेस कार्ड की व्यवस्था होता है। चर्च का कहना है कि इससे ये अनुपस्थित लोगों के बारे में पता लगाते हैं मगर ये सोचने वाली बात ये है कि क्या किसी धार्मिक व्यवस्था में इस तरह की निगरानी रखा जाना कोई खतरा नहीं है।

भ्रामक दावे

कैल्वारी चर्च ये आरोप लगाता रहा है कि हिंदू संगठन ईसाइयों पर हमले करते हैं जबकि वो ऐसा सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि हिंदू उन्हें अब लाचार लोगों को बरगलाने का मौका नहीं दे रहे या उनके चमत्कारों की पोल खोल रहे हैं।

फंडिग का अता-पता नहीं

कैल्वारी चर्च को फंडिंग कहाँ से मिलती है इसकी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालाँकि हमारी जाँच से पता चलता है कि उन्हें दो मौकों पर ब्रिटेन स्थित क्रिश्चियन विजन से पर्याप्त फंडिंग मिली थी। 2020 में, उन्हें £74,467 मिले , और 2021 में, उन्हें क्रिश्चियन विजन से £727,394 मिले । ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि नहीं कर सका कि कैल्वरी टेम्पल इंडिया के पास FCRA लाइसेंस है या नहीं।

धर्मांतरण पर बढ़ रही चिंताएँ

कैल्वारी चर्च अगर अपने मकसद पर आगे बढ़ता है तो ये भारत के लिए चिंताजनक बात होगी। सरकार को जल्द से जल्द धर्मांतरण कार्यक्रमों को रोकने के लिए कदम उठाने चाहिए वरना ऐसे लोग गरीब, वंचित और शोषित लोगों को बरगलाकर धर्मांतरित कराते रहेंगे।

मुंबई में पटाखे फोड़ रहे हिन्दुओं पर भीड़ का धारदार हथियारों से हमला: वीडियो वायरल में पीड़ित ने कहा – ‘मुस्लिम लोग आए, गाली दिए, चाकूओं से मारा’

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में साम्प्रदायिक तनाव की खबर है। यहाँ के मीरा रोड इलाके में पटाखे फोड़ने एक विवाद में 2 समुदाय आमने-सामने आ गए। हिन्दू पक्ष ने खुद पर धारदार हथियारों से हमले का आरोप लगाया है। इस विवाद का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

इस वीडियो को सबसे पहले X प्लेटफार्म पर @SuddhaVichar नाम के हैंडल से 27 अक्टूबर को शेयर किया गया है। शेयर करते हुए हैंडल ने कैप्शन दिया, “मीरा रोड पर हिन्दुओं पर हमला। चरमपंथियों के एक समूह ने अपने घरों के बाहर पटाखे फोड़ रहे हिन्दुओं पर हमला किया है। धारदार हथियारों से लैस लगभग 10 से 12 हमलावरों ने हिन्दुओं को निशाना बनाया। इसमें तीन घायलों की हालत गंभीर है।”

हमलावरों ने पीड़ितों की दौड़ा-दौड़ा कर पिटाई की, जिसमें कई लोग घायल हो गए। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वायरल वीडियो में एक समूह कुछ लोगों को पीटता नजर आ रहा है। पीड़ित ने अपने घाव भी दिखाए।

वायरल वीडियो में हरे रंग की टीशर्ट पहने एक पीड़ित ने बताया, “हम लोग बम फोड़ रहे थे। मुस्लिम लोग आए और गाली देकर कहने लगे कि पटाखे क्यों फोड़ रहे हो। जब हमने अकड़ दिखाई तो वो लोग हमें मारने लगे। हम लोग 10 लोग थे। चाकूओं से हम लोग को मारा। कुछ लोग को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है।”

मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई गई है। मामले की जाँच की जा रही है। ऑपइंडिया वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता। हमसे बातचीत में पुलिस ने घटना की पुष्टि तो की है लेकिन आरोपितों के नाम बताने से इनकार कर दिया।