देश के 2 अलग-अलग हिस्सों से लव जिहाद के नए मामले सामने आए हैं। पहला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर का है, जहाँ पुलिस ने नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण और रेप के आरोप में निहाल खान को गिरफ्तार किया है। निहाल ने अपनी पड़ोसन पीड़िता पर घर से सोने-चाँदी के गहने और कैश भी ले चलने का दबाव बनाया था। वहीं एक अन्य मामले में मध्य प्रदेश के इंदौर में अमान खान पर अमन गुप्ता बन कर हिन्दू लड़कियों को अपने जान में फँसाने और उसके आर्थिक व शारीरिक शोषण का आरोप लगा है। पुलिस ने अमान खान को गिरफ्तार कर लिया है।
पहला मामला कानपुर शहर का है। यहाँ के बाबूपुरवा थानाक्षेत्र में 14 अक्टूबर को 17 साल की नाबालिग हिन्दू लड़की के पिता ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी इंटरमीडिएट की छात्रा है। पड़ोस में ही निहाल खान रहता है जो अक्सर पीड़िता से छेड़खानी किया करता था। सोमवार (14 अक्टूबर) को पीड़िता अपने घर से अचानक ही लापता हो गई। काफी खोजबीन के बाद भी वो परिजनों को कहीं नहीं मिली। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
दिनांक-14.10.2024 को थाना बाबूपुरवा क्षेत्रान्तर्गत रहने वाले वादी ने सूचना दी कि उनकी लड़की को गैर संप्रदाय का पड़ोसी युवक बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के प्रकरण में अभियोंग पंजीकृत कर पुलिस द्वारा 02 टीमें बनाई गई तत्पश्चात पीड़िता को बरामद कर लिया गया है एवं आरोपी को गिरफ्तार अन्य… pic.twitter.com/S3S3aIewHp
— POLICE COMMISSIONERATE KANPUR NAGAR (@kanpurnagarpol) October 26, 2024
जब लड़की के परिजनों ने और तलाश की तो घर से 1 लाख चालीस हजार रुपए, सोने के कुंडल और कुछ अन्य सामान गायब थे। लड़की के पिता ने इस घटना के पीछे निहाल को ही मुख्य आरोपित बताते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस ने यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 87 और 137 (2) के तहत दर्ज किया था। शनिवार (26 अक्टूबर) को पुलिस ने निहाल खान को गिरफ्तार कर लिया। पाँचजन्य के मुताबिक, निहाल पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं की वृद्धि की गई है। पीड़िता को बरामद कर के आरोपित को जेल भेज दिया गया है।
अमन गुप्ता बन कर हिन्दू लड़कियों को फँसाता था अमान खान
लव जिहाद का दूसरा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से है। यहाँ मूलतः छतरपुर का निवासी अमान खान पिछले लंबे समय से रहता था। हिन्दू जागरण मंच का आरोप है कि इंदौर में वह खुद को अमन गुप्ता बता कर हिन्दू लड़कियों को टारगेट करता था। हिन्दू जागरण मंच के जिला संयोजक राजकुमार टेटवाल के मुताबिक अमान खान न सिर्फ कलावा बाँध का तिलक लगता था बल्कि वो अक्सर मंदिर भी जाया करता था। जब हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने उसे भमोरी से पकड़ा, तो शुरू में उसने भी खुद को अमन गुप्ता बताया लेकिन बाद में उसे सच बोलना ही पड़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब अमान खान के मोबाइल को चेक किया गया तो उसमें से कई हिन्दू लड़कियों की आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिलीं। अमान खान पिछले 1 साल से एक हिन्दू लड़की के साथ रह रहा था। उस लड़की के परिजनों को इस बात की जानकारी ही नहीं थी। जिस फ़्लैट में अमान रह रहा था उसमें उसकी कई ऐसी भी तस्वीरें थी जिसमें वो हिन्दू के जैसे दिख भी रहा था। हिन्दू जागरण मंच ने अमान खान पर हिंदू लड़कियों को इस्लाम कबूल करवाने का भी आरोप लगाया है। फ़िलहाल उसे तमाम सबूतों के साथ पुलिस के हवाले कर दिया गया है।
CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि जजों और प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों के बीच मुलाक़ात का मतलब डील नहीं होता है। उन्होंने भारत में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की लम्बी छुट्टियों पर उठने वाले सवालों का भी जवाब दिया है। CJI चंद्रचूड़ ने कोलेजियम को लेकर भी अपनी राय दी है।
एक मराठी समाचार पत्र द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शनिवार (27 अक्टूबर, 2024) को उन्होंने इन मुद्दों पर अपनी राय रखी। CJI चंद्रचूड़ ने कहा, “हम (जज और CM/PM) मिलते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि डील हो गई है। हमें राज्य के मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करनी होती है क्योंकि बजट उन्हें ही देना होता है। यह बजट जजों के लिए नहीं होता। अगर हम ना मिलकर पत्राचार पर निर्भर रहें तो कोई काम नहीं होगा। लेकिन मेरी बात मानें मैं जब भी किसी मुख्यमंत्री से मिला उन्होंने कभी भी किसी भी मुकदमे के बारे में बात नहीं की।”
उन्होंने जजों के CM या PM के साथ मिलने को न्यायालय के काम से इतर चीज बताया। CJI चंद्रचूड़ ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच का रिश्ता कोर्ट के न्यायिक कार्य से इतर चीज है। यह परंपरा रही है कि त्योहारों या शोक के समय CM या चीफ जस्टिस एक दूसरे से मिलते हैं। लेकिन हमें समझना होगा कि इससे हमारे कोर्ट के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ता है। हमें ये भी समझना होगा कि जिस बैठक के बारे में सबको पता है, उसमे कुछ भी ‘एडजस्ट’ नहीं हो सकता है।”
CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट जो भी काम करते हैं, वह करने में स्वतंत्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट और सरकार के बीच अलग प्रकार का संबंध है। CJI चंद्रचूड़ ने CM और PM से मिलने वाली बात उनकी PM मोदी के साथ पूजा में शामिल होते हुए फोटो सामने आने के बाद कही। इस फोटो को लेकर वामपंथी गैंग ने खूब हल्ला मचाया था।
CJI चंद्रचूड़ ने जजों की छुट्टियों को लेकर होने वाली आलोचना पर कहा कि वह स्वयं सुबह 3:30 बजे उठते हैं और अपना काम निपटाते हैं। उन्होंने कहा कि देश में जजों पर काम का काफी अधिक बोझ है और यह बोझ वरिष्ठता बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ यूरोप में एक वर्ष में एक जज 181 मुकदमे सुनता है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में एक दिन में ही इतने मामले निपटाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में सुप्रीम कोर्ट एक वर्ष में 50,000 से अधिक मामले निपटाता है।
कोलेजियम को CJI चंद्रचूड़ ने इस बातचीत के दौरान कहा कि कोलेजियम के कारण केंद्र और राज्य सरकारें नए जज चुन पाती हैं। गौरतलब है कि CJI चंद्रचूड़ आगामी 10 नवम्बर, 2024 को रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह पर जस्टिस संजीव खन्ना देश के नए CJI बनेंगे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (28 अक्टूबर 2024) को पुलिस कस्टडी में मृत मोहित पांडेय के परिजनों से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, एक मकान व अन्य सरकारी सुविधाओं के लाभ सहित बच्चों की निशुल्क पढ़ाई का एलान किया। उन्होंने मामले की जाँच करवा के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के असल कारणों का पता नहीं चल पाया है। वृहद जाँच के लिए बिसरा सुरक्षित कर लिया गया है। SHO को सस्पेंड कर के उसके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक CM योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को मृतक के परिजनों से मुलाकात की। इस मुलाकात में मोहित पांडेय की माँ, उनकी पत्नी और 3 बच्चे शामिल थे। मुलाकात के बाद मोहित की माँ तपेश्वरी देवी ने खुद को संतुष्ट बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी की नजर पूरे मामले पर है और किसी प्रकार की भी ढिलाई न बरतने का भरोसा दिया गया है। वहीं मृतक मोहित की पत्नी ने कहा कि उनको CM योगी पर भरोसा है और कोई भी दोषी छोड़ा नहीं जाएगा।
Lucknow | Family of the person who died in police custody in the Chinhat area of the city met Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath today.
Immediate financial assistance of Rs 10 lakh has been given to the family. One house, arrangement for free education for children and benefits… pic.twitter.com/6gGD04cSNm
सुबह लगभग 10 बजे हुई इस मुलाकात में भाजपा विधायक योगेश शुक्ला भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री की तरफ से मोहित पांडेय के परिजनों को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, एक मकान व अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ देने की घोषणा की गई है। मोहित के बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सरकार उठाएगी। मृतक की पत्नी को भी कोई रोजगार देने का भरोसा मिला है। मोहित 3 नाबालिग बच्चों के पिता है। इसमें 2 बेटे और एक बेटी है।
लखनऊ के चिनहट थाने में पुलिस हिरासत में मोहित पांडे की मौत ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मोहित के परिवार से मुलाकात कर 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद, बच्चों की शिक्षा का जिम्मा और सरकारी आवास का आश्वासन दिया। उन्होंने दोषी… pic.twitter.com/bknUdgjUKt
इस बीच लखनऊ पुलिस के चिनहट थाने के SHO इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेदी को सस्पेंड कर दिया गया है। इसी थाने के एडिशनल SHO श्रीप्रकाश सिंह और इंस्पेक्टर आनंद भूषण को भी हटा कर अलग-अलग थानों में भेज दिया गया है। उनके व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ उच्चस्तरीय जाँच करवाई जा रही है। जाँच के बाद दोषी पाए गए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भरत कुमार पाठक को चिनहट का नया थानेदार बनाया गया है।
निलंबित थाना प्रभारी अश्वनी चतुर्वेदी पर FIR भी दर्ज कर ली गई है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (1) और 61 (2) के तहत चिनहट थाने में ही दर्ज हुई है। शिकायत मोहित पांडेय की माँ तपेश्वरी देवी द्वारा दी गई है।
600 रुपयों के तकादे से शुरू हुआ था विवाद
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे 600 रुपए के लिए हुआ विवाद बताया जा रहा है। इन्ही रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहित पांडेय एक कारोबारी हैं और आदेश उन्ही के यहाँ काम करता था। दोनों में पहले अच्छी जान-पहचान थी। मोहित का टाई-बेल्ट बनाने का कारखाना है। आदेश इसी कारख़ाने से दुकानों में माल सप्लाई करता था। आदेश का आरोप था कि मोहित ने उनके 600 रुपए हिसाब से काट लिए थे। इन्हीं पैसों का तकादा आदेश बार-बार कर रहा था। घटना के दिन भी एक बार फिर से दोनों में इतने ही रुपयों को ले कर विवाद हुआ था।
मृतक के परिजनों ने सड़क को जाम कर दिया था और कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस आदेश और उसके एक चाचा को भी आरोपित कर के जाँच कर रही है।
क्या कहती है FIR
26 अक्टूबर (शनिवार) को मोहित की माँ तपेश्वरी ने चिनहट थाने में शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने बताया कि शुक्रवार (25 अक्टूबर) को उनके बेटे और आदेश नाम के युवक में किसी बात को ले कर झगड़ा हो गया था। दोनों ने 112 नंबर डायल कर के पुलिस को बुलवाया। रात 10 बजे पुलिस मोहित और आदेश को ले कर थाने आ गई और उन्हें हवालात में बंद कर दिया गया। 1 घंटे बाद 11 बजे मोहित का भाई शोभाराम लॉकअप में मुलाकात करने गया।
आरोप है कि पुलिस ने शोभाराम को भी दारू पीने का आरोप लगाते हुए लॉकअप में बंद कर दिया। वहीं पुलिस ने दूसरे पक्ष के आदेश को छोड़ दिया। तपेश्वरी देवी के अनुसार आदेश के चाचा कोई नेता है जिसने मोहित और शोभाराम का काम खत्म करवाने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया। बकौल तपेश्वरी देवी उनके छोटे बेटे मोहित की पुलिस ने इतनी पिटाई कर दी कि लॉकअप में ही उसकी मौत हो गई। इस घटना की जानकारी भी मृतक के परिजनों को नहीं दी गई। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।
शिकायत में आगे बताया गया है कि मृतक के परिजनों को घटना की जानकारी तब हुई जब अगले दिन शोभाराम ने फोन पर अपने छोटे भाई की मौत की जानकारी दी। शोभाराम ने अपने घर वालों को लखनऊ के ही लोहिया अस्पताल में बुलवाया। जब परिजन वहाँ पहुँचे तब तक मोहित पांडेय ने दम तोड़ दिया था। आरोप है कि उनको मृतक का शव दूर से ही दिखाया और नजदीक भी नहीं आने दिया गया। शोभाराम ने परिजनों को मौत की वजह अपने भाई की पुलिस द्वारा की गई पिटाई बताई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं बता सकी मौत की वजह
अपनी शिकायत में तपेश्वरी देवी ने SHO अश्वनी चतुर्वेदी सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। वहीं 32 वर्षीय मोहित पांडेय की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आई है। लखनऊ पुलिस का दावा है कि रिपोर्ट से मौत की वजह का खुलासा नहीं हो पाया है। गहन परीक्षण के लिए विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।
आज तक की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मृतक के शरीर पर चोट के 4 निशान पाए गए हैं। ये चोटें सिर, हाथ और कमर पर मिली थीं। पिटाई के आरोपों से मुकर रही पुलिस का कहना है कि ये चोटें मोहित को आदेश से साथ हुए विवाद के दौरान लगीं थीं। पुलिसकर्मियों पर दर्ज FIR की जाँच गोमतीनगर थाने को ट्रांसफर कर दी गई है।
सामने आए थाने के CCTV फुटेज
इस घटनाक्रम से जुड़े कुछ CCTV फुटेज भी सामने आए हैं। ये दोनों फुटेज चिनहट थाने के हैं। पहले फुटेज में मोहित पांडेय थाने के बाहर खड़े हैं जबकि दूसरे में वो लॉकअप में अन्य बंदियों के साथ दिख रहे हैं। दूसरे फुटेज में साथी बंदी को मोहित की तबियत अचानक खराब होती दिखी तो वो अन्य बंदियों को बताने लगा। बंदियों ने गेट से बाहर पुलिस को बुलवाया। हालाँकि काफी देर तक कोई पुलिसकर्मी लॉकअप के अंदर नहीं आया।
लखनऊ के चिनहट थाने का CCTV फुटेज जिसमें हिरासत में लिए गए मोहित पांडे की मौत कैसे हुई साफ देखा जा सकता है । थाने के भीतर लाए जाने से लेकर लॉकअप में बंद किए जाने तक सभी चीजें CCTV में कैद हैं ।@lkopolice@LkoCp@dcp_northpic.twitter.com/a37ykuzRRZ
इस पूरे घटनाक्रम में विपक्षी दलों ने उत्तर प्रदेश सरकार के कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश यादव ने लॉकअप को टॉर्चर रूम कहा है। वहीं प्रियंका गाँधी से ले कर अन्य कॉन्ग्रेसी नेताओं ने पुलिस को बेलगाम बताया है।
बीते लगभग ढाई सालों से रूस के साथ युद्ध में फंसे यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युद्ध खत्म करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। जेलेंस्की ने इस बात की हामी भी भरी है कि युद्ध में फंसे दोंनो देशों के बीच बातचीत भारत में हो।
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए एकइंटरव्यू में जेलेंस्की ने युद्ध खत्म करने में भारत की भूमिका पर बात की है। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी काफी बड़े देश के नेता हैं और एक बड़ी आबादी का नजरिया तय करते हैं, ऐसे में वह युद्ध का अंजाम क्या हो यह तय कर सकते हैं।
जेलेंस्की ने कहा, “मोदी एक बड़े देश के प्रधानमंत्री हैं, ऐसा देश केवल इतना नहीं कह सकता कि यह युद्ध का समय नहीं है। पीएम मोदी युद्ध का अंत तय कर सकते हैं। रूसी अर्थव्यवस्था को रोकना, उसके एनर्जी स्रोतों को रोकने और रूस के साथ रक्षा सहयोग घटाने से मॉस्को की हमारे खिलाफ युद्ध करने की क्षमता कम हो सकेगी।
आप यह बातचीत नीचे लगे इंटरव्यू में 4 मिनट से 8 मिनट के बीच सुन सकते हैं।
जेलेंस्की ने उन बच्चों को वापस यूक्रेन लाने में मदद की माँग पीएम मोदी से की है, जिनका अपहरण करने का रूस पर आरोप है। जेलेंस्की ने कहा कि पीएम मोदी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए पुतिन से उन बच्चों को वापस लाने की बात कह सकते हैं। जेलेंस्की ने 1000 ऐसे बच्चों को वापस लाने की अपील पीएम मोदी से की है।
हाल ही में रूस में समाप्त हुई BRICS+ समिट की भी जेलेंस्की ने आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि रूस, चीन और ब्राजील का दिया हुआ उपाय भी नहीं मान रहा है। जेलेंस्की ने अपील की है कि सभी देश रूस से अपने रिश्ते तोड़ ले और यूक्रेन में युद्ध में खत्म करने में सहायता करें।
जेलेंस्की और पीएम मोदी की अगस्त, 2024 में द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। यह वार्ता यूक्रेन की राजधानी कीव में हुई थी। पीएम मोदी ने यूक्रेन की यह यात्रा रूस जाने के कुछ दिनों बाद ही की थी। यूक्रेन के बाद पीएम मोदी हंगरी भी गए थे।
यूक्रेन और रूस के बीच फरवरी, 2022 से ही युद्ध छिड़ा हुआ है। रूस ने यूक्रेन के कुछ इलाकों को अपने कब्जे में ले रखा है। इस बीच यूक्रेन को अमेरिका समेत पश्चिमी देश लगातार हथियार और आर्थिक मदद दे रहे हैं। लगभग 2.5 साल बीत जाने के बाद भी इस युद्ध का कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इस बीच दोनों देशों में शांति समझौता भी नहीं हो सका है।
बहराइच में माँ दुर्गा के विसर्जन जुलूस में 13 अक्टूबर को भड़की हिंसा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में हालात अब सामान्य हो रहे हैं। पुलिस का पहरा भी काफी हद तक कम हो गया है। CCTV फुटेज, गवाहों व अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारियाँ कर रही है। पुलिस के हाथों से बेकाबू हुए हालात संभालने में PAC का बेहद अहम रोल रहा, जिसकी वजह से प्रशासन को केंद्रीय बलों की जरूरत नहीं पड़ी।
ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात निकल कर सामने आई कि पुलिस का ज्यादातर फोकस इस बात पर केंद्रित रहा कि पीड़ित हिन्दुओं की व्यथा सामने न आने पाए। उनके गाँवों के रास्तों पर बैरिकेड कर दिए गए थे जबकि सोशल मीडिया पर भी हिंदूवादियों को हड़काया गया। वहीं मुस्लिम पक्ष खुल कर मीडिया इंटरव्यू देता रहा। सोशल मीडिया पर भी पुलिस इस्लामी हैंडलों के प्रति नरम रही। हालाँकि इन सबके बावजूद हिन्दू पक्ष का कहना है कि वो डरने वाले नहीं हैं और आने वाले समय में इससे भी बड़ी शोभा यात्रा निकालेंगे।
पीड़ित हिन्दुओं से मिलने की राह पर ही पहरा
अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में हमने ये पाया कि शुरुआत में पुलिस का फोकस इस बात पर ज्यादा था कि हिंसा में पीड़ित हिन्दुओं की व्यथा सामने न आने पाए। इसकी शुरुआत रामगोपाल से ही करते हैं। मेरे द्वारा उनके घर जाने के कम से कम 5 अलग-अलग दिनों व भिन्न-भिन्न समय पर किए गए प्रयास सफल नहीं हो पाए। कभी घर के ठीक बाहर मौजूद भारी फ़ोर्स ने मुझे रोक दिया तो कभी 3 किलोमीटर पहले ही सोतिया भट्टा क्षेत्र में लगे बैरिकेड से आगे नहीं जाने दिया। हमने जब इसकी वजह पूछी तो बताया गया कि ‘ऊपर’ से आदेश हैं।
रामगोपाल मिश्रा के घर से 3 किलोमीटर पहले ही रोका गया हमें
रामगोपाल के बाद हमने विनोद और सत्यवान मिश्रा के भी गाँव सिपहिया प्यूली जाने के प्रयास किए तो रास्ते में पुलिस वाले मिल गए। यहाँ भी हमें रोका और आगे नहीं जाने दिया गया। तीसरी जगह गौरिया घाट थी, जहाँ प्रतिमाओं का विसर्जन होना था। वहाँ भी जाने के क्रम में खूब रोकटोक हुई। महसी बाजार के निवासी आदित्य मिश्रा ने ऑपइंडिया को जैसे-तैसे छिप कर इंटरव्यू दिया भी, तो अगले ही दिन उनके घर पुलिस पहुँच गई और गिरफ्तारी के बाद चालान कर जेल भेज दिया गया। बंद कैमरे पर चोटिल विनोद मिश्रा ने भी हमें बताया उन पर चुप रहने का दबाव है। तिवारी का पुरवा की तरफ जाने में भी कमोबेश यही दिक्क्तें झेलनी पड़ीं।
कई ऐसे हिन्दू भी रहे, जिन्होंने खुद को हिंसा पीड़ित बता कर हमसे फोन नंबर शेयर किया था। इन्होने अगले दिन या थोड़ी देर बाद मिलने का वादा किया था। हालाँकि बाद में उनको कई बार कॉल करने के बावजूद उनके फोन नहीं उठे। जब हम दिव्यांग पीड़ित सत्यवान मिश्रा का इंटरव्यू कर रहे थे, तब उनके परिवार के ही सदस्य विनोद मिश्रा के मोबाइल नंबर पर किसी की कॉल भी आई और उनको मीडिया से दूर रहने के लिए कहा गया। मीडिया से दूरी बनाने के लिए आदित्य मिश्रा पर भी दबाव बनाया गया है।
हालाँकि इसके ठीक उलट मुस्लिम पक्ष खुद को पीड़ित बताते हुए लगातार इंटरव्यूदेता रहा। उनके द्वारा दुकानों से सामान निकालने से ले कर घरों के हिस्से खुद तोड़े जाने के एक-एक पल को बाकायदा सभी चैनलों पर बिना आपत्ति के लाइव प्रसारित किया गया। नथुआपुर से महसी के बीच लगभग 8 किलोमीटर की दूरी में हमें तमाम मुस्लिम परिवार पूरी तरह से भयमुक्त हो, बिना किसी दबाव के मीडिया में इंटरव्यू देते मिले। इसी दोहरे रवैये की वजह से शुरुआत में हिंसा का एकतरफा पीड़ित मुस्लिम पक्ष और हमलावर के तौर पर हिन्दुओं को साबित करने की साजिश रची गई थी।
सोशल मीडिया पर भी हिंदूवादी ही हड़काए गए
बहराइच प्रशासन का दोतरफा रवैया सिर्फ जमीनी स्तर पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी साफ देखने को मिला। उन तमाम हैंडलों को बहराइच पुलिस द्वारा एक्शन लेने की धमकी दी गई, जिन्होंने या तो हिन्दुओं की पीड़ा दिखाई या मुस्लिम पक्ष के कारनामों को उजागर करना चाहा। यह धमकी ऑपइंडिया और पांचजन्य सहित कई अन्य संस्थानों को मिली। तमाम चश्मदीदों के बयानों के बावजूद मस्जिद से हमले के एलान की बात को सिरे से नकारने वाली पुलिस ने तो दैनिक जागरण को नोटिस भी जारी करने का फरमान सुना डाला। हिंदूवादी लोगों और संस्थानों से हर ट्वीट और हर शब्द का सबूत भी माँगा गया।
जियाउर रहमान और पांचजन्य के लिए बहराइच पुलिस की अलग-अलग शब्द शैली
वहीं दूसरी तरफ द वायर जैसी संस्थाएँ अपने मनमाफिक खबरों को परोसती रहीं। एकतरफा हिन्दुओं को ही दोषी बताने वाले मुस्लिमों के इंटरव्यू पर बहराइच पुलिस ने न तो कोई आपत्ति जताई और न ही उनसे सबूत माँगा। गिरफ्तारी के बाद अपने परिजनों को बेगुनाह बताती मुस्लिम महिलाओं के बयानों के बीच प्यार भरे कमेंट कर के किसी बेगुनाह के साथ अन्याय न होने देने जैसा भरोसा भी दिया जाता था। हालत तो यहाँ तक पहुँच गए थे कि बहराइच पुलिस ने आतंकियों को वकील दिलाने वाली संस्था जमीयत को शाँति दूत समझा और उनके उर्दू भाषा में लिखे पत्रों को आधिकारिक तौर पर शेयर किया।
कुछ ऐसा ही हुआ था, जब सोशल मीडिया में खबर उड़ी कि रामगोपाल मिश्रा के शव के साथ बर्बरता हुई थी। तब नाखून आदि उखाड़ लेने का दावा कई जगहों पर हुआ जिस पर फ़ौरन ही बहराइच पुलिस एक्टिव हुई और इसे भ्रामक बताते हुए खंडन जारी कर दिया। हालाँकि इस खंडन के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। इसके उलट जब मुस्लिम पक्ष अपने घरों को बेरहमी से जलाने और महिलाओं संग छेड़खानी आदि करने जैसे गंभीर आरोप बिना सबूत के मढ़ रहे थे, तब बहराइच पुलिस की तरफ से कोई खंडन जारी नहीं हुआ।
कितना भी दबा लो, शोभा यात्रा निकलती रहेगी
पहले मज़हबी हमला और अब तमाम प्रकार के दबाव झेल रहे महसी क्षेत्र के पीड़ित हिन्दुओं का साफ ऐलान है कि वो अपनी धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात नहीं होने देंगे, भले ही इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़े। विनोद मिश्रा, सत्यवान, आदित्य और मारुति नंदन आदि ने साफ़ तौर पर कहा कि ये हमला सिर्फ इसलिए हुआ, जिससे हिन्दू समाज अपनी शोभा यात्रा निकालना बंद कर दे। इन सभी ने ‘मुस्लिम इलाका’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, लेकिन वो अगले साल भी आने वाले हर साल वो शोभा यात्रा निकालते रहेंगे।
हमले से ठीक पहले शोभा यात्रा का दृश्य
पीड़ित हिन्दुओं ने एक स्वर में एलान किया है कि ये तमाम सनातनी परम्पराएँ उनके पूर्वजों द्वारा एक धरोहर के तौर पर उनको सौंपी गई हैं। इन परम्पराओं पर कुठाराघात कतई सहन नहीं किया जाएगा, भले ही उनका किसी भी स्तर पर कितना ही दमन क्यों न हो। यहाँ तक कि पीड़ितों ने खुद को रामगोपाल की तरह बलिदान देने के लिए भी तैयार बताया। वहीं रामगोपाल मिश्रा की पत्नी ने भी एलान किया है कि वो अपने पति के हत्यारों को मृत्युदंड की सजा दिलाने के लिए अंतिम साँस तक संघर्ष करेंगी।
हिंसा काबू करने में PAC की भूमिका अहम, नहीं उतारने पड़े केंद्रीय बल
बहराइच हिंसा की शुरुआत में बहराइच पुलिस पर लापरवाही बरतने और लॉ एन्ड ऑर्डर न संभाल पाने के आरोप लगे हैं। ये आरोप मृतक रामगोपाल के परिजनों ने भी सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल कर लगाए। कार्रवाई के तौर पर तत्काल ही चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी और डिप्टी एसपी को सस्पेंड कर दिया गया। कुछ ही घंटों बाद एडिशनल एसपी को भी मुख्यालय अटैच कर दिया गया। हालत बिगड़ने के बाद UP पुलिस की ही एक विंग PAC ने मोर्चा संभाला था।
गाँव नथुआपुर में गश्त करते PAC के जवान
PAC ने कुछ ही घंटों में स्थिति को संभाल लिया था। कई मौकों पर हमें सीनियर आईपीएस अजय कुमार न सिर्फ घटनास्थल महराजगंज बल्कि आसपास के गाँवों में भी दल-बल के साथ गश्त करते मिले। STF प्रभारी आईपीएस अमिताभ यश के आने से भी सरकारी मशीनरी काफी एक्टिव हुई थी। इसी सामूहिक सक्रियता से 13 अक्टूबर को भड़की हिंसा उसी दिन रुक गई। यही वजह थी कि केंद्रीय बलों को भी उतारने की जरूरत नहीं पड़ी। थानों और जिले में तमाम नए अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं। वो भी आरोपितों को चिन्हित कर के आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटे हुए हैं।
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की दीवाली से पहले एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में वो दीवाली में पटाखे फोड़ने का विरोध कर रहे हैं और समझा रहे हैं कि पटाखे फोड़ने से जानवर डरते हैं और वायु प्रदूषण होता है इसलिए बिन पटाखे फोड़े दीवाली मनाई जाए।
उन्होंने इस वीडियो को साझा करते हुए कैप्शन में लिखा- दीवाली की मिठाई और रंगोली तो डबल हो सकती है लेकिन प्रदूषण नहीं। आइए दीवाली खुशियों के साथ मनाएँ न कि धुएँ के साथ क्योंकि प्रकृति माँ भी हैप्पी दीवाली मनाना डिजर्व करती हैं।
उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है। नेटीजन्स उनसे सवाल कर रहे हैं कि आखिर हिंदू त्योहार पर वो इस तरह का ज्ञान देने क्यों आए हैं। ईद पर करोड़ों जानवर कटते हैं तब कोई कुछ क्यों नहीं कहता या जब क्रिसमस पर पटाखे फोड़े जाते हैं तो क्यों उनका विरोध नहीं होता।
इसके अलावा राजपाल यादव की कुछ पुरानी वीडियोज भी शेयर की जा रही है। इन वीडियोज में राजपाल यादव उन विवादित पादरी बजिंदर सिंह के साथ दिखाई दे रहे हैं जो दावा करते हैं कि उनकी प्रार्थना से कैंसर, पैरालाइसिस जैसी बीमारी ठीक हो जाती हैं।
देख सकते हैं कि बजिंदर के पास राजपाल यादव कैसे भक्त बनकर खड़े है। किसी वीडियो में उन्हें चूम रहे हैं तो कहीं उन्हें गले लगाकर ‘यशु-यशु’ का म्यूजिक बनवाकर नाच रहे हैं और कहीं उनका हाथ पकड़कर चल रहे हैं।
Meet Rajpal Yadav @rajpalofficial who jumps like a monkey around shouting "Mera Yesu Yesu" is now lecturing Hindus not to burst crackers on Deepavali.
This Pudiyawood ? made his fortune off Hindus and now, after selling out for a few bucks, has the nerve to preach about our… pic.twitter.com/QAHTbN0bPg
ऐसे में लोग उन्हें कह रहे हैं कि राजपल यादव जो आजकल ईसाई धर्म मान रहे हैं उन्हें हिंदुओं के त्योहार दीवाली से क्या समस्या हो रही है। पिक्चर पिट रही हो तो कम से कम काम तो अच्छे करने चाहिए।
बता दें कि राजपाल यादव भूल भुलैया जैसी फिल्मों में हिंदू धर्म और ब्राह्णणों की वेशभूषा का मजाक बना चुके हैं। इसके अलावा जो राजपल यादव आज दीवाली पर पशु प्रमी बनकर दिखा रहे हैं वो समय आने पर ‘बिरयानी बाय किलो’ के विज्ञापन कर चुके हैं।
लोगों का यही सारी वीडियोज देख पूछना है कि आखिर ये चिंताएँ बॉलीवुड कलाकारों में सिर्फ तभी क्यों जागती है जब हिंदू पर्व आए। न क्रिसमस और न ईद कोई प्रेम नहीं जागता।
उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने राज्य में मदरसों की जाँच के बाद अब मकतबों पर भी नज़र डालना शुरू कर दिया है। मौजूदा जानकारी के अनुसार, UP ATS ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के 473 मकतबों की जाँच शुरू की है, जिनमें से कई बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। इस बाबत अल्पसंख्यक विभाग से संबंधित दस्तावेज़ और रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं।
इन मकतबों में से अधिकांश मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर और शामली जिलों में स्थित हैं, और UP ATS इन संस्थानों की फंडिंग और उनके संचालन के स्रोतों की जाँच कर रही है। मकतब एक प्रकार का स्थान है, जहाँ इस्लामी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मुस्लिम बच्चों को दीनी शिक्षा प्रदान की जाती है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ATS की जाँच में अब तक सबसे अधिक 190 मकतब शामली में पाए गए हैं। इसके बाद मुज़फ्फरनगर में 165 और सहारनपुर में 118 मकतब संचालित हो रहे हैं। जाँच में ATS ने कई बिंदु तय किए हैं, जिनमें मकतबों की मान्यता न होने के कारण, फंडिंग के स्रोत, संचालन का समय, बच्चों की संख्या, सुरक्षा प्रबंध, रजिस्ट्रेशन की स्थिति और संबद्धता के स्रोत प्रमुख हैं। मकतबों की जाँच के लिए ATS ने सहारनपुर मंडल के तीन जिलों के अल्पसंख्यक अधिकारियों से रिकॉर्ड मंगवाए हैं।
शुरुआती जाँच में कई मकतबों में खामियाँ पाई गई हैं, साथ ही उनके वित्तीय लेन-देन में भी संदेहजनक गतिविधियाँ देखी गई हैं। ATS ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी है। इससे पहले, उत्तर प्रदेश सरकार ने पूरे राज्य में मदरसों का व्यापक सर्वेक्षण कराया था, जिसके तहत कई गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद कर दिया गया था।
सहारनपुर मंडल के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में आने वाले गोंडा जिले में भी कई मकतब चलते पाए गए हैं। यहाँ के अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने अपने जिले में चल रहे 20 मकतबों को बंद करने की सिफारिश शासन को भेजी है। यहाँ कुल 286 मकतब चलते पाए गए हैं जिसमें 19 गैर मान्यता प्राप्त हैं। मिली जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश ATS मुख्यालय से प्रदेश के हर जिले में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों से मकतबों की जाँच में सहयोग करने के लिए कहा गया है।
शासनादेश
क्या होता है मकतब
ऑपइंडिया ने मकतब के बारे में गाजियाबाद के मौलवी अब्दुल सलाम से जानकारी ली। उनके अनुसार, मकतब एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है ‘पढ़ाई-लिखाई का स्थान’। उन्होंने बताया कि मकतब और मदरसे में अंतर है। मदरसे में पढ़ाई के बाद एक औपचारिक डिग्री प्राप्त होती है, जबकि मकतब में ऐसी कोई डिग्री नहीं दी जाती। अब्दुल सलाम ने मकतब को एक तरह का ‘कोचिंग सेंटर’ बताया, जहाँ आस-पास के मुस्लिम बच्चों को दीनी तालीम दी जाती है। उन्होंने कहा कि देश की लगभग 95% मस्जिदों में मकतब चलते हैं।
अब्दुल सलाम ने आगे बताया कि मकतब खासतौर से मुस्लिम बच्चों के लिए होते हैं, जहाँ कुरान और हदीस की तालीम दी जाती है। मकतब संचालित करने वाले मौलवी, मौलाना या हाफिज आमतौर पर कोई शुल्क नहीं लेते, लेकिन कहीं-कहीं मेहनताना के लिए धन इकट्ठा किया जाता है। मौलवी के अनुसार, मकतब में पढ़ने वालों की उम्र सीमा नहीं होती, लेकिन सामान्यतः नाबालिग बच्चे ही इनमें पढ़ते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मकतब इस्लामी जानकारों के घरों में भी संचालित होते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो संशेज के साथ गुजरात के वडोदरा में C-295 विमान फैक्ट्री का उद्घाटन किया है। यह विमान ‘मेक इन इंडिया’ मुहिम के तहत एयरबस और टाटा मिलकर बनाएँगी। इनका उपयोग भारतीय वायुसेना करेगी। पीएम मोदी ने इस दौरान रक्षा क्षेत्र को बढ़ाने के लिए उठाए गए क़दमों पर भी बात की है।
वडोदरा में बनी इस फैक्ट्री के उद्घाटन पर पीएम मोदी ने कहा, “भारत में डिफेन्स निर्माण का इकोसिस्टम नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। अगर हमने 10 साल पहले ठोस कदम नहीं उठाए होते तो आज यह संभव नहीं होता… हमने डिफेन्स निर्माण में निजी सहभागिता को बढ़ाया है और सरकारी कम्पनियों को किफायती बनाया है।”
#WATCH | Vadodara, Gujarat: On the inauguration of TATA Aircraft Complex for manufacturing C-295 aircraft, PM Narendra Modi says, "…Today the defence manufacturing ecosystem in India is touching new heights. If we had not taken concrete steps 10 years ago, it would have been… pic.twitter.com/gUJTxEHfUz
पीएम मोदी ने इस दौरान टाटा संस के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा को याद किया और कहा कि यदि वह इस मौके पर मौजूद होते तो काफी खुश होते। रतन टाटा का हाल ही में बीमारी के चलते निधन हो गया था। पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ भी रतन टाटा की आत्मा होगी, वह प्रसन्न होगी।
वडोदरा में जिस फैक्ट्री का पीएम मोदी और स्पेन के पीएम ने उद्घाटन किया है, वह भारत की पहली निजी क्षेत्र की विमान निर्माण फैक्ट्री है। इससे पहले मात्र हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ही देश में विमानों का निर्माण करती रही है।
कौन से एयरक्राफ्ट बनेंगे, भारत को क्या फायदा?
वडोदरा में एयरबस और टाटा की संयुक्त फैक्ट्री में एयरबस के ही C-295 विमानों का निर्माण होगा। यह निर्माण वायुसेना के आर्डर के लिए किया जाएगा। भारतीय वायुसेना ने 2021 में 56 C-295 विमानों का आर्डर दिया था। इनमें से 16 विमान स्पेन से तैयार होकर आएँगे जबकि बाक़ी 40 का निर्माण भारत में ही होगा।
वडोदरा की फैक्ट्री में इनमें सारे सिस्टम और इंजन समेत बाकी पुर्जे लगाए जाएँगे जबकि इनकी बॉडी हैदराबाद में तैयार की जाएगी। हैदराबाद में स्थित टाटा की फैक्ट्री में ही बॉडी का निर्माण होगा। यह फैक्ट्री अन्य विमानों बॉडी का निर्माण भी करती है।
भारत में निजी क्षेत्र में विमान बनाने का यह पहला मौका है। इसके चलते देश में विमान पुर्जों का सप्लायरों का जला बिछ सकेगा और आगे भविष्य में भारत से विमानों का निर्यात भी संभव हो सकेगा। इसके अलावा यदि वायुसेना या नौसेना इसी तरह के और भी विमान आर्डर करती है, तो उन्हें यह जल्दी हासिल हो सकेंगे।
इस फैक्ट्री के चलते बड़ी संख्या में नौकरियाँ भी पैदा होंगी। भारत में इसके चलते विमान निर्माण का इकोसिस्टम बन सकेगा। साथ ही में वायुसेना को अपने पायलट समेत बाकी टीमों को स्पेन नहीं भेजना पड़ेगा। उनकी ट्रेनिंग भी यहीं हो सकेगी।
वायुसेना की बढ़ेगी ताकत
वायुसेना ने इन एयरबस विमानों का ऑर्डर अपने पुराने HS-748 विमानों को हटाने के लिए दिया है। HS-748 लगभग 60 साल पुराने हो गए हैं और आधुनिक समय के हिसाब से काम नहीं कर पाते। जबकि C-295 आधुनिक सिस्टम से लैस हैं और इनमे सैन्य साजोसामान ढोना अपेक्षाकृत आसान है। इसके अलावा इनकी क्षमता भी अधिक है और रखरखाव भी कम है।
सैन्य जानकारों का कहना है यदि वायुसेना को यह विमान शुरू में पसंद आए तो एक और ऑर्डर एयरबस और टाटा को मिल सकता है। वायुसेना को HS-748 के अलावा अपने पुराने हो रहे AN-32 विमान भी बदलने हैं। यदि वायुसेना इन्हें बदलने के लिए C-295 चुनती है तो यह काफी बड़ा ऑर्डर होगा।
क्या हैं इस विमान की क्षमताएँ
टाटा और एयरबस द्वारा मिलकर बनाया जा रहा यह विमान कई मायनों में ख़ास है। यह मूल रूप से एक कार्गो ट्रांसपोर्ट विमान है। इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य साजोसामान या फिर सैनिकों को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाना है। दो पायलटों द्वारा उड़ाया जाने वाला यह विमान, 73 सैनिकों को एक बार में लेकर जा सकता है।
यह विमान एक बार में लगभग 9 टन सामान ले जा सकता है। यह विमान एयर एम्बुलेंस की तरह भी काम कर सकता है। इसके अलावा यह विमान हथियार तक ले जा सकता है। इसे उतरने के लिए भी कोई विशेष रनवे की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे में यह दुर्गम क्षेत्रों में तैनात भारतीय सेना की मदद के लिए काम आएगा।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि पीड़ित बंगाली हिन्दू नहीं बल्कि रोहिंग्या मुस्लिम घुसपैठिए ही देश में घुस रहे हैं। उन्होंने बताया है कि बीते दो महीने में असम सीमा पर पकड़े गए सभी अवैध घुसपैठिए रोहिंग्या ही हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल से भी घुसपैठियों की पहचान में सहयोग करने को कहा है।
गुवाहाटी में रविवार (27 अक्टूबर, 2024) को CM सरमा ने घुसपैठ की समस्या पर बात की। उन्होंने कहा, “पिछले दो महीनों में हमने 138 घुसपैठियों का पता लगाया है और उन्हें वापस भी भेज दिया है। लेकिन एक बात मैं फिर से दोहराना चाहता हूँ कि बांग्लादेश में उत्पीड़न के चलते हिंदुओं के भारत में आने के कयासों के उलट हम घुसपैठियों में केवल रोहिंग्या मुसलमानों को ही देख रहे हैं ना कि हिंदू बंगाली। हिंदू बंगाली हमारे देश के भीतर नहीं आ रहे।”
Assam CM Himanta Biswa Sarma says, "Every day in the last two months, we have captured either one or a group of foreigners in our state. My feeling is that, because of the porous boundary between India and Bangladesh, despite best efforts by BSF, some people are still coming to… pic.twitter.com/UudNqLw0AF
उन्होंने कहा कि बीते दो माह में असम की सीमा पर 138 अवैध घुसपैठिए पकड़े गए और यह सारे ही रोहिंग्या मुस्लिम थे। उन्होंने कहा कि हिंदू बंगालियों के बारे में लगाए गए सारे कयास गलत साबित हुए हैं। उन्होंने हर राज्य से रोहिंग्या घुसपैठ पर सतर्क रहने को कहा है।
CM सरमा ने बताया है कि उन्होंने कुछ ऐसे लोगों की पहचान भी की है जो भारत में घुसपैठ के बाद वापस बांग्लादेश जाते हैं और नए घुसपैठियों को लाते हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से आने वाले जिन घुसपैठियों को असम रोक रहा है, वह पश्चिम बंगाल के रास्ते फिर घुस सकते हैं। CM सरमा ने कहा है कि यदि पश्चिम बंगाल सहयोग करे तो घुसपैठिए भारत में नहीं आ पाएँगे।
CM सरमा ने असम के अलावा त्रिपुरा द्वारा घुसपैठ रोकने के लिए किए गए प्रयासों की भी तारीफ़ की है। CM सरमा ने यह भी कहा कि उन्हें इससे मतलब नहीं है कि बांग्लादेश से कौन आ रहा है, वह बांग्लादेश से अवैध रूप से घुसने वाले लोगों को वापस भेजना चाहते हैं।
गौरतलब है कि म्यांमार से आने वाले रोहिंग्या घुसपैठिए लगातार भारत में घुसने की कोशिश करते रहते हैं। रोहिंग्या घुसपैठियों की बड़ी संख्या भारत में पहले ही आ चुकी है। असम, [पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के रास्ते घुसने वाले यह घुसपैठिए बाद में देश के अलग-अलग हिस्से में फ़ैल जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा शहर में शनिवार (26 अक्टूबर 2024) की दोपहर को नकाब पहने कट्टरपंथियों ने दो हिंदू मंदिरों पर हमला किया। इस घटना में उन्होंने तोड़फोड़ और चोरी की वारदात को अंजाम दिया। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव के शिवलिंग और अन्य मूर्तियों को भी नुकसान पहुँचाया।
ऑस्ट्रेलिया टुडे के अनुसार, चार नकाबपोश हमलावर एक काले रंग की होंडा वैन में फ्लोरी स्थित हिंदू मंदिर और सांस्कृतिक केंद्र पहुँचे। कट्टरपंथियों ने मंदिर के मुख्य द्वार को तोड़ दिया और अंदर से चार दान पेटियाँ उठा ले गए, जिनमें से एक का वजन करीब 200 किलोग्राम था और उसमें हजारों डॉलर की नकदी थी। यह हमला उस समय हुआ, जब राजधानी कैनबरा में हर साल आयोजिन होने वाले दीवाली मेले का आयोजन हो रहा था।
सीसीटीवी फुटेज में चरमपंथी फ्लोरी के हिंदू मंदिर में घुसते दिख रहे हैं, तस्वीर ऑस्ट्रेलिया टुडे से ली गई है।
मंदिर के उपाध्यक्ष तरुण अगस्ती ने ऑस्ट्रेलिया टुडे से बातचीत करते हुए कहा, “हम इस घटना से बेहद दुखी और परेशान हैं। यह हमारे पूजा स्थल और समुदाय के प्रति घोर अपमान है। हम अपनी समुदाय को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि हम स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर इस मामले की गहन जाँच कर रहे हैं ताकि दोषियों को सजा दिलाई जा सके।”
तरुण अगस्ती ने इस घटना पर कार्रवाई की माँग की और कहा, “यह घटना न केवल हमारे हिंदू समुदाय को प्रभावित करती है, बल्कि कैनबरा के विविधतापूर्ण समाज में आपसी सम्मान, सहिष्णुता और समावेशिता के मूल्यों पर भी चोट करती है।”
ऑस्ट्रेलिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इन कट्टरपंथियों ने इसके बाद करीब दोपहर 2 बजे श्री विष्णु शिव मंदिर का रुख किया। उस समय मंदिर के पुजारी और देखभालकर्ता लंच के लिए बाहर गए हुए थे। चारों कट्टरपंथियों ने मंदिर का मुख्य द्वार लोहे के रॉड से तोड़ा और प्रवेश किया। उन्होंने मंदिर के रिसेप्शन पर तोड़फोड़ की और कंक्रीट में जड़ी दान पेटियों को हथौड़े की मदद से तोड़कर नकदी लूट ली।
विष्णु शिव मंदिर में तोड़फोड़, फोटो साभार: ऑस्ट्रेलिया टुडे
कट्टरपंथी मंदिर के गर्भगृह में भी घुस गए और वहाँ कपड़े रखने की अलमारी और वसंत मंडप को नुकसान पहुँचाया। इसी दौरान उन्होंने मंदिर के शिवलिंग को भी तोड़ दिया।
इस मामले में श्री विष्णु शिव मंदिर के अध्यक्ष थामो श्रीथरन ने ऑस्ट्रेलिया टुडे से बातचीत करते हुए कहा, “मैं ऑस्ट्रेलियाई सरकार से अपील करना चाहूँगा कि हमारे मंदिरों और समुदाय की सुरक्षा के लिए हमें आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाए।”
इन हमलावरों द्वारा इस्तेमाल की गई होंडा वैन पर विक्टोरिया का नंबर प्लेट लगा हुआ था, लेकिन यह अभी यह साफ नहीं हो गया है कि घटना में इस्तेमाल की गई गाड़ी चोरी की थी, या नंबर प्लेट गलत लगाया गया था। फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की जाँच कर रही है।
ऑस्ट्रेलिया में कई मंदिरों पर हो चुके हैं हमले
यह पहली बार नहीं है जब ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर हमला हुआ है। साल 2023 में भी ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर पाँच हमले किए गए थे। ब्रिसबेन के लक्ष्मी नारायण मंदिर पर खालिस्तानी समर्थकों ने हमला कर मंदिर के बाहरी हिस्से पर नफरत भरी पेंटिंग की थी। इसी तरह मेलबर्न के अल्बर्ट पार्क में स्थित इस्कॉन मंदिर की दीवारों पर ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ लिखा गया था।
विक्टोरिया के कर्रुम डाउन्स में स्थित श्री शिव विष्णु मंदिर को भी तोड़फोड़ का निशाना बनाया गया और मेलबर्न के स्वामीनारायण मंदिर पर भारत विरोधी पेंटिंग की गई थी। सिडनी में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर को भी ‘मोदी को आतंकवादी घोषित करो’ जैसे शब्दों से अपमानित किया गया। खालिस्तानी समर्थकों ने मेलबर्न के काली माता मंदिर को धमकी दी थी कि वे ‘कट्टर हिंदू’ गायक कन्हैया मित्तल के भजन कार्यक्रम का आयोजन न करें।
ऑस्ट्रेलिया में हिंदू मंदिरों पर बढ़ते हमलों के कारण वहाँ के हिंदू समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है।