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28 लाख दीपों से जगमग होंगे 55 घाट, 50 क्विंटल फूलों से सजेगा राम मंदिर… अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा के बाद पहली दीवाली: 30 हजार स्वयंसेवक सँभालेंगे जिम्मेदारी

अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर के श्रद्धालुओं के लिए खोले जाने के बाद 2024 में पहली दीवाली मनाई जाएगी। यह दीवाली विशेष रूप से आयोजित करने की योजना सरकार ने बनाई है। अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद 28 लाख दीए जलाए जाएँगे।

2024 की दीवाली में अयोध्या में नया कीर्तिमान बनाया जाएगा। इस दिन अयोध्या के सरयू घाटों और मंदिर समेत बाकी जगह 28 लाख दीए जलाए जाएँगे। यह दीए बिछाने के काम चालू हो गया है। इसके लिए वालंटियर लगाए गए हैं। यह काम धनतेरस (29 अक्टूबर, 2024) से पहले ही पूरा जाएगा।

अयोध्या में यह दीए 55 घाटों पर बिछाए जा रहे हैं। इनको जलाने का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हो सके, इसके लिए उनकी एक टीम को भी आमंत्रित किया गया है। यह दीए छोटी दीवाली (30 अक्टूबर, 2024) को जलाए जाएँगे।

इस कार्यक्रम को आयोजित कर रहे वालंटियरों का कहना है कि वह प्राण प्रतिष्ठा के बाद की पहली दीवाली को भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इस काम में 30,000 वालंटियर शामिल हैं। अयोध्या में जलने वाले दीयों के लिए 92 हजार लीटर सरसों का तेल उपयोग किया जाएगा। यह तेल अयोध्या पहुँच भी गया है।

अयोध्या में इन दीयो की निगरानी के लिए पुलिस प्रशासन और सुरक्षाबल भी लगाए गए हैं। वहीं घाटों के अलावा मंदिर परिसर के भीतर भी दीए जलाने का अलग इंतजाम किया गया है। मुख्य प्रांगण के लिए अलग तरह के दीए भी मँगवाए गए हैं।

मंदिर के भीतर जलाने के लिए मँगवाए गए दीए कालिख और धुआं नहीं छोड़ेंगे। इससे मंदिर की दीवालों और पत्थर पर निशान और दाग नहीं पड़ेंगे। यह दीए मोम के बने होंगे। मंदिर के गर्भगृह के लिए अलग तरह के दीए बनवाए गए हैं। यह दीए हाथी के आकार के हैं। इन्हें देशी घी से जलाया जाएगा।

गर्भ गृह के अलावा मंदिर प्रांगण में भी 1 लाख दीए जलाए जाएँगे। यह दीए सरसों के तेल से जलेंगे। दीयों के अलावा मंदिर में फूलों की सजावट भी की गई है। राम मंदिर को 50 कुंतल फूलों से सजाया जा रहा है। इसके साथ ही मंदिर के चारों प्रवेश द्वारों पर तोरण द्वार बन गए हैं। मंदिर को 29 अक्टूबर से अगले 4 दिनों तक खुला रखा जाएगा।

दिल्ली के जामिया में पुलिस ने रोकी तेज आवाज वाली बुलेट, आसिफ-रियाजुद्दीन ने SHO को पीटा: समझौता करने का डाल रहे थे दबाव, नहीं मानने पर बोला हमला

दक्षिण पूर्वी दिल्ली के बटला हाउस इलाके में आसिफ और रियाजुद्दीन नाम के बाप-बेटे ने एसएचओ को ही पीट दिया। जिसके बाद एसएचओ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। ये घटना जामिया नगर इलाके की है।

जानकारी के मुताबिक, जामिया नगर थाने के SHO नरपाल सिंह रात में गश्त पर थे, तभी उन्होंने एक तेज आवाज में चल रही बुलेट बाइक को रोका। बाइक में अवैध साइलेंसर लगाया गया था, जिससे उसकी आवाज तय सीमा से अधिक हो गई थी, जो मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन करता है।

SHO ने बाइक सवार 24 वर्षीय आसिफ को रुकने का इशारा किया और जाँच शुरू कर दी। जैसे ही आसिफ को कानून कार्रवाई का सामना करना पड़ा, उसने अपने अब्बू रियाजुद्दीन को मौके पर बुला लिया। दोनों ने मिलकर SHO से बुलेट वापस लेने और यहीं समझौता करने का दबाव बनाया।

बात नहीं मानने पर दोनों ने SHO के साथ हाथापाई शुरू कर दी। रियाजुद्दीन ने SHO को पकड़ लिया और आसिफ ने उनके चेहरे पर मुक्का मारा। यह मारपीट इतनी गंभीर हो गई कि SHO नरपाल सिंह को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

पुलिस ने इस घटना के बाद अब्बू रियाजुद्दीन और बिगड़ी औलाद आसिफ, दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने कानून व्यवस्था को चुनौती दी है और पुलिस इस पर सख्त कार्रवाई कर रही है।

बता दें कि दिल्ली में तेज आवाज़ वाले साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न लगाने पर जुर्माना लगता है। मोटर व्हीकल्स एक्ट के नियम 39/192 के तहत, दिल्ली में प्रेशर हॉर्न बजाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। अगर किसी शांत इलाके में बार-बार हॉर्न बजाया जाए, तो 2,000 रुपये का जुर्माना लग सकता है। मॉडिफ़ाइड साइलेंसर लगाना रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट के उल्लंघन में आता है। इन्हीं कार्रवाईयों से बचने के लिए ही रियाजुद्दीन और आसिफ न सिर्फ एसएचओ जैसे सीनियर पुलिस कर्मी से भिड़ गए, बल्कि हमला कर उनकी आँख को भी चोट पहुँचाया।

झारखंड में सोनू बन शाहरुख ने नाबालिग लड़की को फँसाया, दोस्त संग मिल किया गैंगरेप: राँची से अदनान भी ST बच्ची को लेकर हुआ फरार, दिल्ली में कराता देह व्यापार

झारखंड में लव जिहाद के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ताजा मामला राँची का है, जहाँ अदनान नाम के युवक ने नाबालिग एसटी लड़की को इंस्टाग्राम के माध्यम से प्रेम के जाल में फंसाया, फिर उसे लेकर दिल्ली भाग गया और फिर वो दिल्ली में नाबालिग के देह व्यापार कराने की तैयारी कर रहा था। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिजनों और पुलिस की सक्रियता के चलते अदनान आखिरी समय में अपने मकसद में कामयाब होने से चूक गया। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, एक अन्य मामले में अदनान ने सोनू बनकर फंसाया और फिर गैंगरेप किया है।

इस घटनाक्रम की जानकारी बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बालूलाल मरांडी ने भी शेयर की है। झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा, “झारखंड में हिंदू, आदिवासी बेटियों के खिलाफ अपनी पहचान छुपाकर उन्हें प्रेमजाल में फंसाने, धर्मांतरित करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही है। लव जिहाद की ये घटनाएँ चिंतित करने वाली हैं।”

उन्होंने आगे लिखा, “ताजा मामले के अनुसार, राँची के विधानसभा थाना क्षेत्र की एक नाबालिग युवती को अदनान नामक मुस्लिम युवक ने अपनी वास्तविक पहचान छुपाकर इंस्टाग्राम के माध्यम से दोस्ती की, फिर बहला फुसलाकर अपने पास दिल्ली बुलाया और उसे देह व्यापार में धकेलने का प्रयास किया। अभिभावकों की संजीदगी और प्रशासन की तत्परता से लड़की को सकुशल बरामद कर लिया गया है, लेकिन ऐसी घटनाओं पर सरकार कब संज्ञान लेगी? लव जिहाद की साजिश दो लोगों के बीच का व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि हमारे हिंदू, आदिवासी समाज के विरुद्ध बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है।”

शाहरुख ने सोनू बनाकर फंसाया, किया गैंगरेप

दूसरा मामला, बिहार-झारखंड की सीमा पर गढ़वा का है। यहाँ शाहरुख नाम के युवक ने नाबालिग हिंदू लड़की को सोनू के नाम से प्रेम जाल में फंसाया। लड़की इंटरमीडिएट की छात्रा है। मूल रूप से औरंगाबाद की रहने वाली लड़की को कोचिंग जाते समय शाहरुख अपने दोस्त तौकीर अंसारी उर्फ फरहान के साथ एसयूवी गाड़ी में बैठाकर फरार हो गया। उसने गढ़वा के जंगलों में गैंगरेप को अंजाम दिया।

सोनू नाम बनाकर की थी दोस्ती, कलावा-टीका लगाकर मिलता

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद की है। माता-पिता दिल्ली में काम करते हैं, ऐसे में वो गढ़वा में रिश्तेदार के घर रहती है। यहाँ वो इंटरमीडिएट की पढ़ाई कर रही थी। उसे औरंगाबाद का रहने वाला मोहम्मद शाहरुख इंस्टाग्राम पर मिला था। वो कलावा बाँधता था और टीका लगाए रखता था, जब भी वो मिलता। वो अक्सर लड़की से मिलता। शनिवार (26 अक्टूबर 2024) सुबह छह बजे उसने लड़की को अपनी कार में बैठा लिया और जंगल में ले गया। दोनों ने गैंगरेप किया। घटनास्थल पर निर्वस्त्र हालत में पीड़िता रोती मिली। लोगों और परिजनों ने शाहरुख और तौकीर अंसारी उर्फ फरहान को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।

दिल्ली में 1 साल में 6 गुना बढ़े पराली जलाने के मामले, पंजाब में भी संंख्या 1983 पहुँची: AAP प्रदूषण का ठीकरा UP-हरियाणा पर फोड़ रही

आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार पंजाब के बाद अब दिल्ली में तक पराली जलना नहीं रोक पा रही है। राजधानी दिल्ली में 2024 में पराली जलने के मामले 6 गुने हो गए हैं। पंजाब में भी पराली जलाने का आँकड़ा लगभग 2000 के पास पहुँच रहा है। इस बीच दिल्ली-NCR वालों को सांस लेना दूभर हो रहा है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) के CREAMS द्वारा जारी किया गया आँकड़ा AAP की नाकामी बयान करता है। इसके अनुसार, दिल्ली में 2024 में पराली जलाने की कम से कम 12 घटनाएँ सामने आई हैं। यह आँकड़ा 2023 के मुकाबले 6 गुना है। 2023 में दिल्ली में पराली जलाने के मात्र 2 मामले सामने आए थे।

यह आँकड़ा देखने में भले छोटा लगे लेकिन दिल्ली जैसे राज्य के लिए यह खतरे की घंटी है। दिल्ली में AAP पराली खत्म करने के लिए अलग-अलग उपाय देने का दावा करती आई है। हालाँकि, फिर भी यहाँ यह घटनाएँ सामने आईं। इसके अलावा यह हवा सीधे तौर पर दिल्ली को दूषित करेगी।

दिल्ली के अलावा पंजाब का भी पराली से बुरा हाल है। CREAMS के आँकड़े के अनुसार, पंजाब में 27 अक्टूबर, 2024 तक पराली जलाने की कम से कम 1983 घटनाएँ सामने आई हैं। यह आँकड़ा लगातार बढ़ रहा है। पंजाब में पराली जलाने के सबसे अधिक मामले अमृतसर से सामने आए हैं।

पंजाब के अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी 1000+ पराली जलाने के मामले सामने आए हैं। इन सबके चक्कर में दिल्ली में हवा खराब होती जा रही है। 28 अक्टूबर, 2024 की सुबह दिल्ली के कई इलाकों में AQI 300+ है। AQI का 300+ वाला स्तर सभी के लिए हानिकारक है और ज्यादा देर खुले वातावरण में रहने पर आँखों में जलन और गले में खराश होती है।

दिल्ली में यह स्थिति तब है जब अभी पूरी तरीके से पंजाब में धान की कटाई नहीं हुई है और ठण्ड का मौसम अभी आने को है। इन सबके बीच हाल ही में दिल्ली सरकार ने दीवाली के पटाखों पर भी बैन लगा दिया था। हालाँकि, दीवाली आने से पहले ही राजधानी में हवा की स्थिति बिगड़ गई है।

AAP सरकार इस बार भी दिल्ली में प्रदूषण का ठीकरा उत्तर प्रदेश-हरियाणा से आने वाली बसों पर फोड़ने के चक्कर में है। जबकि असल बात यह है कि गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण का हिस्सा मात्र एक तिहाई है। इसमें भी जिम्मेदार केवल यूपी हरियाणा की बसें नहीं बल्कि सभी तरह की गाड़ियाँ हैं।

रामगोपाल मिश्रा की हत्या मामले में पुलिस ने अब मारूफ समेत 2 को दबोचा, सरफराज और तालिब पहले से जेल में: बहराइच पुलिस ने बताया- हिंसा केस में अब तक 115 गिरफ्तारियाँ

बहराइच हिंसा के दौरान हुई रामगोपाल मिश्रा की हत्या मामले में नया अपडेट है। पुलिस ने इस दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान ननकऊ और मारूफ के तौर पर हुई।

ये मालूम हो कि रामगोपाल हत्या मामले में 6 लोगों को नामजद किया गया था। इनमें से सरफराज और तालिब पहले गिरफ्तार किए गए थे जबकि ये मारूफ और ननकऊ दोनों अब हुए हैं और दो आरोपित अब भी पकड़ से फरार चल रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में थानाध्यक्ष कमलशंकर चतुर्वेदी ने बताया कि आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया गया है। वहीं हिंसा मामले में जहाँ पहले 113 लोग गिरफ्तार करके जेल भेजे गए थे, रविवार को भी सीसीटीवी फुटेज की जाँच के बाद तिवारी पुरवा के बहोरिकापुर निवासी सुशील कुमार द्विवेदी और सिपहिया प्यूली के रहने वाले मन्नू को अरेस्ट किया गया है जिसके बाद हिंसा में गिरफ्तार लोगों की संख्या 115 पहुँच गई है।

बता दें कि 13 अक्तूबर को दुर्गा विसर्जन के जुलूस के दौरान बहराइच के महाराजगंज में पथराव के बाद हिंसा भड़की थी। बाद में खबर आई कि एक रामगोपाल मिश्रा नाम के युवक की निर्मम हत्या कर दी गई है।

शुरुआत में प्रशासन ने सुरक्षा लिहाज से इंटरनेट को बंद रखा लेकिन बाद में जैसे ही इंटरनेट खुला। ऐसी वीडियोज सामने आई जिसमें रामगोपाल को गोली मारते लोग दिखे। बाद में पुलिस ने इनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए इन्हें पकड़ा।

ऑपइंडिया इस पूरी हिंसा और हत्या के मामले में ग्राउंड रिपोर्ट की है ताकि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठ और प्रोपगेंडे की पोल खुल सके। आप इन रिपोर्टों को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

‘जन्नती औरतों की निशानियाँ, जकात के पैसों का उपयोग’: बहराइच में जगह-जगह लगे हैं पोस्टर, लोगों ने कहा- इस्लामी गतिविधियों का केंद्र है महाराजगंज

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में 13 अक्टूबर 2024 को मुस्लिम भीड़ द्वारा हुई रामगोपाल मिश्रा की हत्या के बाद हालात सामान्य हो रहे हैं। पीड़ितों के घरों की तरफ वाले रास्तों पर अभी भी पुलिस का पहरा है। सरकार ने महराजगंज बाजार के कई घरों और दुकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का नोटिस चिपका दिया है, जिस पर फिलहाल कोर्ट ने रोक लगा दी है।

ऑपइंडिया की टीम उन दुकानों और मकानों में पहुँची, जहाँ ये नोटिसें लगाई गईं हैं। इन दुकानों के अंदर तमाम मज़हबी बातें लिखी हुई हैं। ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय हिन्दुओं ने महराजगंज बाजार को इस्लामी गतिविधियों का सेंटर बताया है। यहाँ अक्सर संदिग्ध बाहरी लोग नजर आते हैं। कुछ मौलाना-मौलवी भी दिखते हैं।

मस्जिद कैम्पस में शेर ए खुदा अली मौला वाली दुकान

प्रशासन की तरफ से जिन दुकानों को नोटिस मिली है, उनमें से कई दुकानें मस्जिद के कैम्पस में बनी हुई हैं। मस्जिद का एक छोटा-सा गेट है, जिसके दाईं और बाईं ओर कई दुकानें हैं। इनमें बाइक रिपेयर, मेडिकल स्टोर और किराने आदि की दुकानें शामिल हैं। इनमें से अधिकतर ऐसी दुकानें हैं, जो खाली हो चुकी हैं।

यहाँ स्थित एक दुकान के अंदर अरबी भाषा में कुछ शब्दों को बब्बर शेर की शक्ल दे दी गई थी। इसी के ऊपर ‘शेर-ए-खुदा अली मौला’ लिखा हुआ है। नीचे अरबी भाषा में कुछ लिखा पन्ना था। हालाँकि, ये क्या लिखा है, ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। यह दुकान मुकर्रम अली के बेटे मेराज की है।

मस्जिद कैम्पस में मेराज की दुकान

जन्नती औरत की निशानियाँ

नोटिस मिले एक अन्य मकान में उन औरतों की निशानियाँ लिखी हुईं हैं, जिन्हें इस्लाम के मुताबिक जन्नत में दाखिल होना है। एस आलम के प्रिंटिंग प्रेस में छापे गए कागज के इस पोस्टर में खुर्शीद और जावेद सोनार ने फरमान जारी किया है। इसमें कहा गया है कि जो औरतें इन बातों को मानेंगी, वो जन्नत में किसी दरवाजे से जा सकती हैं।

इस कागज के मुताबिक, वही मुस्लिम महिलाएँ जन्नत यानी स्वर्ग जा सकती हैं जो 5 वक्त की नमाज़ी हो, रमज़ान की रोज़ेदार हो, अपनी इफ्फत (पवित्रता) और इस्मत (शील) की हिफाज़त करती हैं और शौहर का फरमान मानती हैं। नसीहत के तौर पर मुस्नद अहमद की दलील दी गई है।

जन्नती औरत की निशानियाँ
जन्नती औरत की निशानियाँ

इसी कागज में एक शायरी भी लिखी है। शायरी में कहा गया है कि ‘कुदरत को नापसंद हैं सख्ती जबान में। रखती नहीं इसलिए हड्डी जबान में’। इसी मकान में अकरम भाई नाम से किसी उर्स हशमती और रज़वी का भी प्रचार किया गया है। यह उर्स बरेली और पीलीभीत में होना था, जिसके लिए बस निकलने आदि का समय लिखा हुआ है। उर्स की तारीख पिछले साल 9 सितंबर लिखी हुई थी।

सुन्नी, हनफ़ी और बरेलवी मुस्लिमों को नसीहत

नोटिस मिले कुछ घरों में मौलाना राफे मोहम्मद बहराइची का फरमान भी चिपका हुआ है। इस फरमान में उन्होंने देवबंदी विचारधारा वालों को अनदेखा करते हुए बरेलवी, सुन्नी और हनफ़ी मुस्लिमों को नसीहत दी गई है। इस नसीहत को उन्होंने जरूरी एलान का नाम दिया है। जरूरी एलान में बताया गया है कि जकात, फ़ितरह, अतिया और सदका आदि माध्यमों से जुटाए गए पैसों का सही जगह इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

बरेलवी मुस्लिमों को नसीहत

हजरत खानकाह नाम की कोई जगह बताते हुए पोस्टर में अपील की गई है कि जकात आदि के पैसे वहाँ दिए जाएँ। हजरत खानकाह के पते के तौर पर महराजगंज बाजार के ही जलालिया अशरफिया करीमिया रजविया का जिक्र किया गया है। इसी के साथ कई मोबाइल नंबर भी लिखे हुए हैं। पोस्टर में ऊपर LOGO के तौर पर किसी मज़हबी किताब को छापा गया है। इस पोस्टर को छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस का नाम नहीं लिखा है।

महराजगंज ही इस्लामी गतिविधियों का सेंटर

ऑपइंडिया ने हिंसा के चश्मदीद मारुति नंदन त्रिपाठी से बात की। मारुति नंदन त्रिपाठी ने कहा कि महराजगंज बाजार आसपास होने वाली तमाम इस्लामी गतिविधियों का सेंटर है। इसी जगह से लगभग 10 किलोमीटर की परिधि में होने वाले जलसे, उर्स, तकरीरें और जुलूस आदि को यहीं से ऑपरेट किया जाता है।

मारुति नंदन त्रिपाठी के अनुसार, किस जुलूस में कितने लोग शामिल होंगे और कहाँ DJ आदि में क्या बजेगा, यह सब महराजगंज से ही तय किया जाता है। कई अन्य पीड़ित हिन्दुओं ने भी यही बताया कि महराजगंज में अक्सर बाहर से मौलवी और मौलाना के रूप में अनजान लोग आते रहते हैं।

नेपाल की सबा खातून बिहार में बन गई मुखिया, अब पद से हटाकर केस दर्ज करने का आदेश: अम्मी भी लड़ चुकी है चुनाव, लोगों का आरोप- इनके पूर्वज बांग्लादेशी

बिहार के दरभंगा जिले में नेपाल की नागरिकता वाली सबा खातून नाम की मुस्लिम महिला पंचायत चुनाव में मुखिया बन गई। उसकी जानकारी सामने आने के बाद उसे पद से हटा दिया गया है। इसके साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी आदेश जारी किया गया है। सबा खातून के पास नेपाल के साथ-साथ भारत की भी नागरिकता थी।

इस मामले में निर्वाचन आयोग के आदेश पर बुधवार (23 अक्टूबर 2024) को कार्रवाई की गई है। सबा खातून के बारे में शिकायत जितेंद्र प्रसाद नाम के व्यक्ति ने की थी। मामला दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड में आने वाले गाँव कोठिया का है। यहाँ के जावेद आलम ने नेपाल की रहने वाली सबा खातून से काफी समय पहले निकाह किया था।

पिछले ग्राम पंचायत चुनावों में जावेद ने अपनी बीवी सबा खातून को मुखिया पद के लिए चुनाव लड़वाया था, जिसमें वह जीतकर मुखिया बनी थी। इसी गाँव के जितेंद्र प्रसाद ने इस निर्वाचन को रद्द करने की माँग की थी। उन्होंने शिकायत देकर सबा खातून पर नेपाल की नागरिक होने का आरोप लगाया था। इसकी जाँच जिला निर्वाचन अधिकारी ने की।

इस जाँच के बाद 9 सितंबर 2024 को बताया गया कि सबा खातून मूल रूप से नेपाल के मधेश प्रदेश में पड़ने वाले सिरहा की रहने वाली है। उसने 3 मार्च 2024 को नेपाल की नागरिकता छोड़ दी थी। हालाँकि, इससे पहले ही वो बिहार के ग्राम पंचायत चुनाव में हिस्सा लेकर मुखिया पद पर निर्वाचित हो चुकी थी।

जिला निर्वाचन अधिकारी ने इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए फ़ाइल उच्चाधिकारियों को भेज दी थी। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयुक्त डॉक्टर दीपक प्रसाद ने 23 अक्टूबर को अपना आदेश जारी किया। इसमें सबा खातून को तथ्यों को छिपाने, झूठा शपथ पत्र देने आदि का दोषी बताया गया है।

सबा खातून को मुखिया पद से हटाकर उसके खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया गया है। अब खाली हुए मुखिया पद पर फिर से नियमानुसार चुनाव करवाया जाएगा। अधीनस्थों को इस आदेश पर तत्काल अमल करके सूचित करने के भी निर्देश मिले हैं। ऑपइंडिया ने पास आदेश की प्रति मौजूद है।

सबा खातून ने आयोग को यह भी बताया कि उसकी माँ मूल रूप से नेपाल की रहने वाली है, जबकि उसके पिता बिहार के रहने वाले हैं। उसने बताया कि उसकी माँ हमदी खातून ने भी साल 2016 में पंचायत चुनाव में भाग लिया था। उनके पास मतदाता पहचान पत्र भी उपलब्ध है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इस महिला मुखिया के पूर्वज बांग्लादेश के रहने वाले हैं। इसकी माता के पास भी भारत और नेपाल की नागरिकता है। उनका यह भी कहना है कि सबा खातून ने मुखिया बनने के लिए छह समर्थक लोगों का अवैध पहचान पत्र बनवाया था।  

जिस ईरान को बिना हिजाब के औरत नहीं कबूल, उसके मिसाइल ठिकाने को तबाह करने वाली फाइटरों में महिला भी: सैन्य ही नहीं, महिला शक्ति का भी इजरायल ने कट्टरपंथी मुल्क को कराया एहसास

ईरान के सर्वोच्च कट्टरपंथी नेता अयातोल्लाह अली खामनेई को लेकर कई मीडिया रिपोर्टों में खबर आ रही है कि उनकी हालत गंभीर है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में खामनेई की सत्ता को उनके बेटे जवान खामनेई को सौंपा जाएगा। ये खबर ऐसे समय में सामने आई है जब पिछले दिनों खामनेई ने ईरानी सेना को इजरायल के खिलाफ युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश दिया था और इजरायल ने पहले ही उनपर हमला कर दिया।

ये हमला 80 के दशक में इराक के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद हुए ईरान पर हुए बड़े हमलों में से एक है। 1980 से 1988 के बीच जब ईरान-इराक युद्ध चला था उस समय ईरान की अर्थव्यवस्था को 600 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान हुआ था और 10 लाख से ज्यादा लोगों की जान गई थी। उस युद्ध ने जिस तरह ईरानी समाज पर गहरा असर डाला था वैसे ही इजरायल हमले के बाद ईरान का हाल हुआ है।

इजरायल हाल में 100 से अधिक फाइटर जेट्स को छोड़ ईरान पर हवाई हमले कराए थे। हमला तीन घंटे तक चला था और इस दौरान ईरान के सैन्य ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ अटैक हुए थे। ये अटैक तीन चरण में अंजाम दिए गए थे –

  • हमले के दौरान में ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए ठोस ईंधन बनाने वाली यूनिट पूरी तरह से नष्ट हो गई थी।
  • इसके अलावा इजरायली सूत्रों से पता चला था कि 12 ‘प्लेनेटरी मिक्सर’ जो ईरान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए आवश्यक चीज थी उनको भी इस हमले में ध्वस्त कर दिया गया।
  • ऐसे ही चार एस-300 एयर डिफेंस बैटरियों को भी नष्ट किया गया, जो ईरान की परमाणु और ऊर्जा सुविधाओं की रक्षा कर रही थीं।

ये हमला चूँकि 1 अक्टूबर को ईरान द्वारा किए गए हमले के जवाब में किया गया था इसलिए इजरायल ने इस कार्रवाई को ‘बदले का दिन (Days of Repentance)’ नाम दिया और आज इसकी तस्वीरें भी सामने आई हैं। चौंकने वाली बात ये है कि तस्वीरों में फायटर जेट को चलाने वाली महिलाएँ पायलटों दिख रही हैं।

इन तस्वीरों को जारी करते हुए इजरायल ने सिर्फ ये नहीं बताया कि उनके सैन्य अभियानों में महिला फाइटर्स की बराबर भागीदारी है या फिर उनके देश में लिंग समानता को महत्व दिया जा रहा है बल्कि ये महिला फायटरों के जरिए ईरान पर हमला कराने का संदेश साफ है कि खामनेई के नेतृत्व में ईरान जिन महिलाओं को खुले में घूमने की आजादी तक नहीं देता वो अगर अपने पर आ जाएँ तो क्या कर सकती हैं।

ईरान में हुआ हिजाब प्रदर्शन

याद दिला दें कि यही वो ईरान है जहाँ साल 2022 में एक 22 वर्षीय महिला महसा अमीनी को मोरल पुलिस ने इसलिए पीट-पीटकर मार डाला था क्योंकि उसने हिजाब ढंग से नहीं पहना था। इस एक मौत ने ईरान के सैंकड़ों लोगों को रोष से भर दिया था और महिलाएँ अपनी आजादी की आवाज लेकर सड़कों पर उतर आई थीं। जगह-जगह हिजाब उतारकर महिलाओं ने अपना प्रदर्शन किया था।कट्टरपंथी नेताओं के खिलाफ आवाज उठाई गई थी। मार्च निकले थे, प्रदर्शन हुए थे।

शुरुआत में ईरान की कट्टरपंथी पुलिस ने अत्यधिक बल प्रयोग करके प्रदर्शनकारियों को शांत कराने का प्रयास किया और यथास्थिति दिखाने वाले पत्रकारों को गिरफ्तार करने की कोशिश की। लेकिन जब तमाम अत्याचारों के बाद आवाजें उठना बंद नहीं हुई जब ईरान सरकार को फैसला लेकर मोरैलटी पुलिस को खत्म करना पड़ा जिनका काम महिलाओं पर नजर बनाए रखना था कि वो इस्लामी तौर-तरीकों के हिसाब से रह रही हैं या नहीं।

ईरान में महिलाओं की ‘आजादी’- एक संघर्ष

इस पूरे प्रदर्शन में दो हफ्तों के भीतर 83 के करीब लोगों की मौत हुई थी और कई लोगों को सरकार ने बाद में फाँसी भी दी। तमाम मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस प्रदर्शन को रोकने के लिए ईरान सरकार द्वारा दिखाई सख्ती के खिलाफ आवाज उठाई लेकिन फर्क कुछ नहीं पड़ा। आज भी भले मोरैलिटी पुलिस खत्म हो गई है लेकिन महिलाओं को ऐसी आजादी नहीं मिली है कि वो पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल सकें युद्ध में लड़ने की बात तो दूर है। वहाँ कहने को महिलाएँ कानून सैन्य सेवा कर सकती हैं लेकिन ये तो तब होगा न जब उन्हें सेना में भर्ती होने या फिर पदोन्नति का मौका दिया जाएगा। ऐसे देश पर महिलाओं फाइटर पायलटों से हमला कराकर इजरायल ने बड़ा संदेश दिया है।

‘हिजाब से बरसता है नूर, रेप उन्हीं का जो नहीं पहनती बुर्का’: जामिया में पत्रकारिता पढ़ने गई दिव्यांग हिंदू छात्रा, सहपाठी इस्लाम कबूलने का डालने लगे दबाव

दिल्ली स्थित जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में एक दिव्यांग हिन्दू छात्रा को इस्लाम कबूलने का दबाव दिया जा रहा है। इनकार करने पर पीड़िता को रेप की धमकी दी जा रही है। यहाँ से पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही पीड़िता को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। पीड़िता ने शनिवार (19 अक्टूबर 2024) को इब्ने सऊद, प्रोफेसर दानिश इकबाल और मीर कासिम के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है।

ऑर्गनाइजर के मुताबिक, पीड़िता ने अच्छे नंबरों से प्रवेश परीक्षा पास करके जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता कोर्स में एडमिशन लिया था। कुछ ही दिनों के बाद से पीड़िता यूनीवर्सिटी में गंदे-गंदे कमेंट, और यौन उत्पीड़न का शिकार होने लगी। जब पीड़िता ने उनसे ऐसा नहीं करने की अपील की तो उसको इस्लाम कबूल कर मुस्लिम बन जाने के लिए कहा जाने लगा।

पुलिस को दी गई शिकायत में पीड़िता ने बताया कि जब उसने इस्लाम कबूल करने से मना किया तो उसे जान से मारने और रेप करने की धमकी दी जाने लगीं। उससे कहा गया, “तुम कोलकाता कांड भूल गई क्या? जो भी हिजाब पहनने से मना करेगा, उसका यही अंजाम होगा।” आरोप है कि पीड़िता ने जब से पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है, तब से उसे और ज्यादा धमकियाँ मिल रही हैं।

इन धमकियों के कारण पीड़िता ही नहीं, बल्कि उसके परिजन भी मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। पीड़ित छात्रा ने बताया कि 10 जुलाई 2023 को इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हुई। तब उसे अनजान नम्बरों से कॉल आनी शुरू हुई थी। ये सभी पीड़िता पर अश्लील कमेंट करते थे। बाद में पीड़िता को पता चला कि इब्ने सऊद नाम के एक लड़के ने उसका नंबर पूरे जामिया नगर में बाँट रखा है।

पीड़िता के सामने राम मंदिर और हिंदुत्व को लेकर आपत्तिजनक कमेंट किए जाने लगे। तब पीड़िता को एहसास हो गया कि ये सब कुछ उसके हिंदू होने की वजह से किया जा रहा है। दिव्यांग छात्रा का आरोप है कि दानिश इक़बाल ने कुछ छात्रों के साथ मिलकर उसे अलग-थलग करने की कोशिश की। प्रताड़ना देने वालों में दानिश इकबाल के साथ मीर कासिम नाम का एक और युवक है।

ये सभी आवाज उठाने वाले छात्र और छात्राओं को प्रताड़ित किया करते थे। 14 मई 2024 को उसका पेपर और एक साक्षात्कार साथ रख दिया गया। इसके बाद उसने खुद को दिव्यांग बताते हुए इसे अलग-अलग तारीख पर रखने की गुहार लगाई, लेकिन उसका असर नहीं हुआ। फिर 16 मई 2024 को उस पर अवैध तौर पर अतिरिक्त फीस जमा करने का दबाव बनाया गया।

अपनी तमाम समस्याओं को लिखते हुए पीड़िता ने 10 जून को यूनिवर्सिटी को एक पत्र लिखा। हालाँकि, जामिया प्रशासन ने इसे अनदेखा कर दिया। इसके बाद 26 जुलाई से इब्ने सऊद पीड़िता के आगे-पीछे घूमने लगा। वह अचानक यूनिवर्सिटी की कैंटीन में उसके सामने आ जाता। कभी कॉलेज कैम्पस में सामने आ जाता तो कभी बाइक उसके पीछे लगा दिया करता था।

पर्याप्त अटेंडेंस होने के बावजूद 20 अगस्त 2024 को कम हाजिरी का आरोप लगाते हुए उसके घर एक नोटिस भेज दिया गया। पीड़िता ने इसके पीछे मीर कासिम की साजिश बताई है। इसी महीने दानिश इकबाल ने भरी क्लास में पीड़िता को अपमानजनक शब्द बोले। सितंबर में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पीड़िता को बुलाकर अपनी शिकायत वापस लेने का दबाव डाला और उसे तमाम तरह की धमकी दी।

हिजाब से आता है चेहरे पर नूर

पीड़िता का आरोप है कि जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक अधिकारियों ने सिर्फ उसी पर ही नहीं, बल्कि उसके परिजनों पर भी शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। इस दौरान पीड़िता को यूनिवर्सिटी प्रशासन से कुछ अधिकारियों ने हिजाब पहनने की हिदायत दी। उन्होंने कहा, “हिजाब पहनने से चेहरे पर नूर बरसता है। उन्हीं लड़कियों का बलात्कार होता है, जो हिजाब नहीं पहनती हैं।”

बकौल पीड़िता, उसके हिन्दू होने की वजह से उसे तंग किया जा रहा था और उसकी हिंदू पहचान खत्म करने की साजिश की जा रही है। इस साजिश के खिलाफ लड़ाई में लड़की ने सभी लोगों की मदद माँगी है। तमाम शिकायतों के बाद पीड़िता की मदद करने के बजाय जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उसे लीगल नोटिस भेजा है और एक तरह से और प्रताड़ित करना शुरू कर दिया है।

इस नोटिस में साफ कहा गया है कि या तो वो अपनी शिकायत वापस ले, वरना कानूनी कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहे। यह लीगल नोटिस समाचार चैनल क्राइम तक पर सितंबर 2024 में प्रकाशित हुए पीड़िता के एक इंटरव्यू के आधार पर भेजा गया है। इसी के साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पीड़िता द्वारा लगाए गए तमाम आरोपों को आधारहीन बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।

माल चाही रसियन, यही वाला लूँगा… इंडिया गेट पर विदेशी पर्यटकों के साथ ‘नंगई’ कर रहा है इंस्टाग्राम ‘इन्फ्लुएंसर’: नेटिजन्स बोले- भारत का नाम खराब कर रहा, कार्रवाई हो

दिल्ली से शनिवार (26 अक्टूबर 2024) को एक इंस्टाग्राम और फेसबुक इन्फ्लुएंसर, सचिन कुमार (जिसका फेसबुक और इंस्टाग्राम हैंडल ‘सचिन राज वायरल‘ के नाम से है) के वीडियो तेजी से वायरल हुए। इन वीडियो में सचिन को दिल्ली के इंडिया गेट पर विदेशी पर्यटकों को परेशान करते हुए देखा गया। उसके वीडियो सामने आने के बाद से लोगों में काफी गुस्सा है।

इन क्लिप्स में सचिन बार-बार पर्यटकों के साथ डांस करते हुए रील्स बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि पर्यटक उसे अनदेखा करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इस प्रकार के वीडियो ने ऑनलाइन कम्युनिटी के बीच भारत में विदेशी मेहमानों के साथ व्यवहार और उनकी सुरक्षा पर गंभीर चिंताएँ उठाई हैं, और लोगों ने इसके खिलाफ तुरंत पुलिस कार्रवाई की माँग की है।

वीडियो में दिखाया गया है कि पर्यटक अपने परिवारों के साथ इंडिया गेट घूमने आए हैं और अच्छा समय बिता रहे हैं। अचानक, सचिन वीडियो में आता है और भोजपुरी गानों पर डांस करने लगता है, साथ ही पर्यटकों को भी शामिल करने की कोशिश करता है। पर्यटक असहज महसूस करते हैं और वीडियो में उन्हें दूर हटते हुए देखा जा सकता है, जबकि सचिन बार-बार उन्हें रील्स में शामिल होने के लिए कहता है। एक वीडियो में जो सोशल मीडिया पर सबसे पहले वायरल हुआ, एक विदेशी पर्यटक के पिता ने हस्तक्षेप किया, जिसके बाद सचिन पीछे हट गया।

सचिन के अकाउंट का पता चलने पर ऑपइंडिया ने उसकी प्रोफ़ाइल का विश्लेषण किया और कई परेशान करने वाले वीडियो पाए। गौरतलब है कि सचिन के इंस्टाग्राम पर 1.6 लाख और फेसबुक पर 68,000 फॉलोअर्स हैं, जो बताते हैं कि उसके कई वीडियो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। इंडिया गेट की घटना के वीडियो में वह अलग-अलग पर्यटकों को परेशान करता हुआ दिखाई देता है।

एक वीडियो में उसने एक पर्यटक के पैर छूने की कोशिश की, जिससे उनके साथ आया व्यक्ति नाराज हो गया। एक अन्य वीडियो में उसने रूसी ग्रुप को बार-बार डांस में शामिल होने के लिए परेशान किया। एक अन्य वीडियो में उसने एक विदेशी जोड़े के चारों ओर नाचना शुरू किया, जिन्हें पहले से ही एक अन्य व्लॉगर परेशान कर रहा था।

सचिन के इन वायरल वीडियो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गुस्से की लहर पैदा कर दी है। कई लोगों ने उसके व्यवहार पर शर्म और निराशा जताई। नेटिज़न्स ने दिल्ली पुलिस और पर्यटन मंत्रालय को टैग करते हुए सचिन के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और पर्यटन स्थलों पर नियमों के सख्त पालन की माँग की है। नेटिज़न्स की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि “रील” बनाने की प्रवृत्ति, दूसरों की निजता और सम्मान को नजरअंदाज कर, कई लोगों को असहज कर रही है, खासकर तब जब पर्यटक इसका शिकार बनते हैं।

सबसे पहले यह वीडियो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मैक्सटर्न ने साझा किया। उन्होंने लिखा, “दिल्ली पुलिस से अनुरोध है कि यह व्यक्ति सचिन राज विदेशी महिलाओं को परेशान कर रहा है ताकि वायरल हो सके और भारत का नाम खराब कर रहा है। कृपया त्वरित कार्रवाई करें।”

उनके जवाब में X के लोकप्रिय हैंडल ‘द प्लाकार्ड गाई’ ने लिखा, “इस बंदे की पूरी फीड लोगों को कंटेंट क्रिएशन के नाम पर परेशान करने से भरी हुई है। इस पर और इसके जैसे लोगों पर कब कार्रवाई होगी?”

X यूजर कुमार राव ने लिखा, “दिल्ली पुलिस से अनुरोध है कि यह व्यक्ति सचिन राज विदेशी महिलाओं को परेशान कर रहा है ताकि वायरल हो सके और भारत का नाम खराब कर रहा है।”

एक अन्य X यूजर श्रीकृष्ण सेना ने लिखा, “बिहार पुलिस से अनुरोध है कि यह व्यक्ति सचिन राज विदेशी महिलाओं को परेशान कर रहा है ताकि वायरल हो सके और भारत का नाम खराब कर रहा है।”

भारत की संस्कृति में “अतिथि देवो भव:” का सिद्धांत सदियों से प्रमुख रहा है, जिसका अर्थ है कि अतिथि ईश्वर के समान होता है। हर साल लाखों पर्यटक भारत की संस्कृति, धरोहर और मेहमानवाजी का अनुभव करने आते हैं। अधिकांश के लिए यह अनुभव गर्मजोशी और स्वागत से भरा होता है। लेकिन, रील कल्चर का बेकाबू बढ़ता चलन और “वायरल” होने की चाह में बेतुका कंटेंट बनाना हाल के वर्षों में बढ़ा है।

सोशल मीडिया यूजर्स, व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान किए बिना, सनसनीखेज कंटेंट बनाकर मशहूर होने की कोशिश करते हैं, जो एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। ऐसी घटनाओं से भारत की छवि खराब होती है और विदेशी पर्यटकों के लिए यह एक नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।