Home Blog Page 602

UN की राहत-बचाव कार्य करने वाली एजेंसी इजरायल में बैन: कड़ी निंदा पर बोले नेतान्याहू – ‘आतंकी गतिविधियों में शामिल UN कर्मियों को ठहराया जाए जिम्मेदार’

इजरायल ने हाल ही में एक कानून पारित किया है जिसके तहत संयुक्त राष्ट्र की राहत एजेंसी UNRWA (United Nations Relief and Works Agency) को देश के अंदर काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। ये एजेंसी गजा में राहत और बचाव अभियान चलाती है। इस कदम के बाद अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और इजरायल के कुछ सहयोगियों ने चिंता जताई है कि इससे गाजा में मानवाधिकार संकट और भी गंभीर हो सकता है।

इजरायली सांसदों ने कहा कि UNRWA के कई कर्मचारियों का अक्टूबर 2023 में हुए इजरायल पर हमले थे। इन कर्मचारियों पर हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के सदस्य होने का भी आरोप है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि जो UNRWA कर्मचारी इजरायल के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हैं, उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।

UNRWA के प्रमुख फिलिप लज़ारिनी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि इस तरह का निर्णय UNRWA की भूमिका को कमज़ोर करता है और फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद को असंवैधानिक रूप से प्रभावित करता है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इजरायल के इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए चेतावनी दी कि इसका फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों पर विनाशकारी प्रभाव हो सकता है। उन्होंने इजरायल से अपील की कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय कर्तव्यों का पालन करे और राष्ट्रीय कानून के जरिए इन कर्तव्यों में बदलाव न करे। गुटेरेस का कहना है कि यह कानून लागू हुआ तो UNRWA की गाजा में महत्वपूर्ण सेवाएं बाधित हो सकती हैं।

इसी बीच, इजरायली सेना ने उत्तरी गाजा में सैन्य अभियान तेज कर दिया है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई है। साथ ही, लगभग एक लाख नागरिक बुनियादी सुविधाओं और दवाइयों के अभाव में फंसे हुए हैं। गाजा के उत्तरी हिस्सों में तीन हफ्तों से चल रहे इजरायली हमलों के कारण वहाँ मानवीय सेवाओं का संचालन ठप हो गया है। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इजरायली हमलों में अब तक 43,020 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।

4 महीने में ₹120+ करोड़ की ठगी: म्यंमार, कम्बोडिया, लाओस में बैठा गैंग… जानिए क्या है वो डिजिटल अरेस्ट, जिससे PM मोदी ने भी किया आगाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (27 अक्टूबर) को अपने 115वें ‘मन की बात’ में देशवासियों को डिजिटल अरेस्ट के प्रति आगाह किया। उन्होंने इस नए फ्रॉड से बचने के लिए ‘रुको सोचो और एक्शन लो’ का मंत्र दिया है। इस बीच भारत सरकार गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट साल 2024 की पहली तिमाही में डिजिटल अरेस्ट का आँकड़ा जारी किया है। इन आँकड़ों के मुताबिक जनवरी से अप्रैल 2024 के बीच 120 करोड़ रुपयों से अधिक का फ्रॉड (ठगी) के इस नए तरीके से हो चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गृह मंत्रालय के अधीनस्थ आने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने 2024 में जनवरी से अप्रैल तक के डिजिटल अरेस्ट वाले मामलों का अध्ययन किया। इस रिसर्च के दौरान पता चला कि डिजिटल अरेस्ट को अंजाम देने वाले अधिकतर ठग दक्षिण एशियाई देशों कम्बोडिया, लाओस और म्यांमार से थे। इन तीन देशों से कुल अपराध का 46% हिस्सा ऑपरेट हुआ है। डिजिटल अरेस्ट का शिकार होने वाले पीड़ित अब तक 1776 करोड़ का नुकसान उठा चुके हैं।

I4C संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार ने इन आँकड़ों को थोड़ा और विस्तार से बताया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के पीड़ितों के अलावा भारतीयों को ट्रेडिंग घोटाले में लगभग 1420 करोड़, निवेश घोटाले में लगभग 223 करोड़ और रोमांस अथवा डेटिंग घोटाले में 13 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर 1 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच 7 लाख 40 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी है। 2023 में पूरे साल का ये आँकड़ा 15 लाख 56 हजार शिकायतों का ही था। जबकि साल 2022 में इस तरह की कुल शिकायतें महज 9 लाख 22 हजार ही थीं।

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट

डिजिटल ठगी का अपग्रेड वर्जन डिजिटल अरेस्ट है। इसका शिकार बनाने के लिए पहले आपकी डिटेल इकट्ठा करके आपको टारगेट किया जाता है। फिर आपसे जुड़ी कोई ऐसी जानकारी आपको बताई जाती है, जो वास्तविक में आपसे संबंधित हो। इसके बाद आपको कानून का डर दिखाकर आप पर ऐसे इल्जाम लगाए जाते हैं कि आप डर जाएँ और फिर धीरे-धीरे आपसे पैसे ऐंठे जाते हैं।

ठगी के इस नए रूप में कई पढ़े लिखे और उच्च शिक्षित लोग फँस रहे हैं। इसके शिकारों में डॉक्टर और इंजीनियर तक शामिल हैं। ऐसे ठगी के मामलों से बचने के लिए जरूरी है कि हमेशा खुद को सतर्क रखें। इसके बाद खुद पर यकीन रखें। अगर कोई अंजान नंबर से कॉल आपको आता है और वो अपने आपको कोई अधिकारी बताकर आपसे डिटेल माँगता है तो समझ जाएँ कि कुछ गड़बड़ है। तुरंत ऐसे मामलों में फोन काट दें और आगे ऐसे ठगों से आगे बात न करें। पुलिस को भी इसकी सूचना जरूर दें।

कर्नाटक में सभी नौकरी की भर्तियों पर रोक: आरक्षण के भीतर आरक्षण लेकर आ रही कॉन्ग्रेस सरकार, SC वर्ग के सब-कोटे के लिए बनाई कमिटी

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के लिए आंतरिक आरक्षण (Internal Reservation) को लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है, जो जरूरी डेटा जुटाकर आगे के कदम उठाएगा। सोमवार (28 अक्टूबर 2024) को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।

कानून मंत्री एच.के. पाटिल के अनुसार, इस आयोग का नेतृत्व एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज करेंगे और तीन महीनों के भीतर इसकी रिपोर्ट पेश की जाएगी। इस आयोग की सिफारिशों के आने तक, कर्नाटक सरकार सरकारी नौकरियों में नई भर्ती के लिए अधिसूचना जारी नहीं करेगी।

कर्नाटक सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर आधारित है। सोशल वेलफेयर मंत्री एच. सी. महादेवप्पा के अनुसार, इस आयोग को आंतरिक आरक्षण के लिए राष्ट्रीय जनगणना डेटा या फिर अपने स्तर पर डेटा जुटाने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल जनगणना में आंतरिक आरक्षण से संबंधित कोई डेटा नहीं है। नई रिपोर्ट राज्य कैबिनेट में चर्चा के लिए प्रस्तुत की जाएगी और फिर इसे राज्य विधानसभा में रखा जाएगा।

ग्रामीण विकास मंत्री प्रियंक खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आंतरिक आरक्षण देते समय व्यावहारिक डेटा का उपयोग करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण का डेटा कोर्ट में मान्य होगा और क्या इसे केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी मिल सकती है। मंत्री महादेवप्पा ने यह भी बताया कि सरकार सभी 101 अनुसूचित जाति समुदायों को भरोसे में लेकर ही आंतरिक आरक्षण लागू करेगी। इस मुद्दे पर SC लेफ्ट, SC राइट, लम्बानी और भोवी जैसे समुदायों से चर्चा की गई, और सभी ने व्यावहारिक डेटा पर आधारित आंतरिक आरक्षण की इच्छा व्यक्त की है।

बीजेपी सरकार ने दिया था आरक्षण, कानूनी दाँवपेंच में उलझकर रुका

बता दें कि पिछली बीजेपी सरकार के समय सदाशिवा आयोग ने अनुसूचित जातियों के लिए 15 प्रतिशत कोटा को आंतरिक रूप से 6 प्रतिशत SC लेफ्ट, 5 प्रतिशत SC राइट, और 3 प्रतिशत भोवी, लम्बानी, कोरचा और कोरमा समुदायों के लिए बाँटने की सिफारिश की थी। जिसके बाद अक्टूबर 2022 में बसवराज बोम्मई की सरकार ने आरक्षण को बढ़ाकर 15 से 17 प्रतिशत कर दिया था, जिसका काफी विरोध हुआ। यहाँ तक कि पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के घर पर पथराव तक किया गया था। बाद में कानूनी अड़चनों की वजह से ये आरक्षण रोक दिया गया था।

कर्नाटक के विजयपुरा में किसानों की जमीन के रिकॉर्ड में रातोंरात घुसाया गया वक्फ बोर्ड का नाम: बवाल के बाद खुलासा, कॉन्ग्रेस सरकार ने ‘गलती’ बता पलटी मारी

कर्नाटक में वक्फ बोर्ड द्वारा विजयपुरा जिले में किसानों की 1200 एकड़ जमीन पर दावा ठोके जाने के बाद से हड़कंप है। इस बीच जानकारी सामने आई है कि इस मामले में वक्फ की भूमिका संदिग्ध है। कहा जा रहा है कि किसानों की जमीन के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रातोंरात वक्फ का नाम जोड़ने का काम हुआ है वरना पहले रिकॉर्डों में ये नाम नहीं था।

दस्तावेजों में छेड़छाड़ की बात का खुलासा सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में किया है। उनके अलावा इस मामले की जानकारी भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर भी दी।

उन्होंने बताया कि पिछले तीन हफ्तों में 44 संपत्तियों के भूमि अभिलेखों में वक्फ बोर्ड का नाम शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव रातोंरात हुआ और इसके लिए आरटीसी (अधिकारों का रिकॉर्ड, किरायेदारी और फसलों का रिकॉर्ड) में म्यूटेशन किया गया। इस प्रक्रिया में किसानों को कोई सूचना नहीं दी गई थी, जिससे वे हैरान हैं।

वहीं किसानों द्वारा इस मामले में आवाज उठाए जाने के बाद कर्नाटक सरकार ने भी इस पर यूटर्न लिया है। राज्य के कानून मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि राजपत्रित अधिसूचना (गजट नोटिफिकेशन) में त्रुटि के कारण ऐसा हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का कोई इरादा किसानों की भूमि को वक्फ संपत्ति में बदलने का नहीं है और यदि कोई गलती हुई है तो उसे ठीक किया जाएगा।

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में विजयपुरा में किसानों को उनकी जमीन खाली करने के लिए नोटिस मिला था। जिसके बाद उन्होंने इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर चेतावनी दी थी कि अगर उनकी जमीनें वक्फ को सौंपी गईं तो उनके पास जीविका चलाने का कोई विकल्प नहीं बचेगा। कई किसान नेताओं ने यह आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस ऐसे काम एक विशेष समुदाय के लोगों को खुश करने के लिए उठा रही है।

अमन गुप्ता बन इंदौर में हिंदू लड़कियों को फँसाता था अमान खान, मोबाइल में मिले अपत्तिजनक चैट: कानपुर में नाबालिग को अगवा करने वाला निहाल खान गिरफ्तार

देश के 2 अलग-अलग हिस्सों से लव जिहाद के नए मामले सामने आए हैं। पहला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर का है, जहाँ पुलिस ने नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण और रेप के आरोप में निहाल खान को गिरफ्तार किया है। निहाल ने अपनी पड़ोसन पीड़िता पर घर से सोने-चाँदी के गहने और कैश भी ले चलने का दबाव बनाया था। वहीं एक अन्य मामले में मध्य प्रदेश के इंदौर में अमान खान पर अमन गुप्ता बन कर हिन्दू लड़कियों को अपने जान में फँसाने और उसके आर्थिक व शारीरिक शोषण का आरोप लगा है। पुलिस ने अमान खान को गिरफ्तार कर लिया है।

पहला मामला कानपुर शहर का है। यहाँ के बाबूपुरवा थानाक्षेत्र में 14 अक्टूबर को 17 साल की नाबालिग हिन्दू लड़की के पिता ने थाने में तहरीर दी है। तहरीर में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी इंटरमीडिएट की छात्रा है। पड़ोस में ही निहाल खान रहता है जो अक्सर पीड़िता से छेड़खानी किया करता था। सोमवार (14 अक्टूबर) को पीड़िता अपने घर से अचानक ही लापता हो गई। काफी खोजबीन के बाद भी वो परिजनों को कहीं नहीं मिली। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

जब लड़की के परिजनों ने और तलाश की तो घर से 1 लाख चालीस हजार रुपए, सोने के कुंडल और कुछ अन्य सामान गायब थे। लड़की के पिता ने इस घटना के पीछे निहाल को ही मुख्य आरोपित बताते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस ने यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 74, 87 और 137 (2) के तहत दर्ज किया था। शनिवार (26 अक्टूबर) को पुलिस ने निहाल खान को गिरफ्तार कर लिया। पाँचजन्य के मुताबिक, निहाल पर पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं की वृद्धि की गई है। पीड़िता को बरामद कर के आरोपित को जेल भेज दिया गया है।

अमन गुप्ता बन कर हिन्दू लड़कियों को फँसाता था अमान खान

लव जिहाद का दूसरा मामला मध्य प्रदेश के इंदौर से है। यहाँ मूलतः छतरपुर का निवासी अमान खान पिछले लंबे समय से रहता था। हिन्दू जागरण मंच का आरोप है कि इंदौर में वह खुद को अमन गुप्ता बता कर हिन्दू लड़कियों को टारगेट करता था। हिन्दू जागरण मंच के जिला संयोजक राजकुमार टेटवाल के मुताबिक अमान खान न सिर्फ कलावा बाँध का तिलक लगता था बल्कि वो अक्सर मंदिर भी जाया करता था। जब हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने उसे भमोरी से पकड़ा, तो शुरू में उसने भी खुद को अमन गुप्ता बताया लेकिन बाद में उसे सच बोलना ही पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब अमान खान के मोबाइल को चेक किया गया तो उसमें से कई हिन्दू लड़कियों की आपत्तिजनक फोटो और वीडियो मिलीं। अमान खान पिछले 1 साल से एक हिन्दू लड़की के साथ रह रहा था। उस लड़की के परिजनों को इस बात की जानकारी ही नहीं थी। जिस फ़्लैट में अमान रह रहा था उसमें उसकी कई ऐसी भी तस्वीरें थी जिसमें वो हिन्दू के जैसे दिख भी रहा था। हिन्दू जागरण मंच ने अमान खान पर हिंदू लड़कियों को इस्लाम कबूल करवाने का भी आरोप लगाया है। फ़िलहाल उसे तमाम सबूतों के साथ पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

जज और CM/PM के बीच न हो मीटिंग तो लटक जाएँगे काम: गणेश पूजा की तस्वीर में ‘डील’ खोजने वाले गैंग को CJI चंद्रचूड़ ने दिया जवाब, कहा- मुकदमों पर नहीं करते बात

CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा है कि जजों और प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्रियों के बीच मुलाक़ात का मतलब डील नहीं होता है। उन्होंने भारत में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों की लम्बी छुट्टियों पर उठने वाले सवालों का भी जवाब दिया है। CJI चंद्रचूड़ ने कोलेजियम को लेकर भी अपनी राय दी है।

एक मराठी समाचार पत्र द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शनिवार (27 अक्टूबर, 2024) को उन्होंने इन मुद्दों पर अपनी राय रखी। CJI चंद्रचूड़ ने कहा, “हम (जज और CM/PM) मिलते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि डील हो गई है। हमें राज्य के मुख्यमंत्री के साथ बातचीत करनी होती है क्योंकि बजट उन्हें ही देना होता है। यह बजट जजों के लिए नहीं होता। अगर हम ना मिलकर पत्राचार पर निर्भर रहें तो कोई काम नहीं होगा। लेकिन मेरी बात मानें मैं जब भी किसी मुख्यमंत्री से मिला उन्होंने कभी भी किसी भी मुकदमे के बारे में बात नहीं की।”

उन्होंने जजों के CM या PM के साथ मिलने को न्यायालय के काम से इतर चीज बताया। CJI चंद्रचूड़ ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट और सरकार के बीच का रिश्ता कोर्ट के न्यायिक कार्य से इतर चीज है। यह परंपरा रही है कि त्योहारों या शोक के समय CM या चीफ जस्टिस एक दूसरे से मिलते हैं। लेकिन हमें समझना होगा कि इससे हमारे कोर्ट के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ता है। हमें ये भी समझना होगा कि जिस बैठक के बारे में सबको पता है, उसमे कुछ भी ‘एडजस्ट’ नहीं हो सकता है।”

CJI चंद्रचूड़ ने कहा कि कोर्ट जो भी काम करते हैं, वह करने में स्वतंत्र हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोर्ट और सरकार के बीच अलग प्रकार का संबंध है। CJI चंद्रचूड़ ने CM और PM से मिलने वाली बात उनकी PM मोदी के साथ पूजा में शामिल होते हुए फोटो सामने आने के बाद कही। इस फोटो को लेकर वामपंथी गैंग ने खूब हल्ला मचाया था।

CJI चंद्रचूड़ ने जजों की छुट्टियों को लेकर होने वाली आलोचना पर कहा कि वह स्वयं सुबह 3:30 बजे उठते हैं और अपना काम निपटाते हैं। उन्होंने कहा कि देश में जजों पर काम का काफी अधिक बोझ है और यह बोझ वरिष्ठता बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जहाँ यूरोप में एक वर्ष में एक जज 181 मुकदमे सुनता है, वहीं सुप्रीम कोर्ट में एक दिन में ही इतने मामले निपटाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि भारत में सुप्रीम कोर्ट एक वर्ष में 50,000 से अधिक मामले निपटाता है।

कोलेजियम को CJI चंद्रचूड़ ने इस बातचीत के दौरान कहा कि कोलेजियम के कारण केंद्र और राज्य सरकारें नए जज चुन पाती हैं। गौरतलब है कि CJI चंद्रचूड़ आगामी 10 नवम्बर, 2024 को रिटायर हो रहे हैं। उनकी जगह पर जस्टिस संजीव खन्ना देश के नए CJI बनेंगे।

UP सरकार देगी ₹10 लाख, मकान, बच्चों की पढ़ाई का खर्च… मोहित पांडेय के परिवार से मिले CM योगी: जानिए क्या है 600 रुपए का विवाद जिसमें कारोबारी की तड़पते हुए लॉकअप में गई जान

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (28 अक्टूबर 2024) को पुलिस कस्टडी में मृत मोहित पांडेय के परिजनों से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने मृतक के परिजनों को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, एक मकान व अन्य सरकारी सुविधाओं के लाभ सहित बच्चों की निशुल्क पढ़ाई का एलान किया। उन्होंने मामले की जाँच करवा के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत के असल कारणों का पता नहीं चल पाया है। वृहद जाँच के लिए बिसरा सुरक्षित कर लिया गया है। SHO को सस्पेंड कर के उसके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक CM योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को मृतक के परिजनों से मुलाकात की। इस मुलाकात में मोहित पांडेय की माँ, उनकी पत्नी और 3 बच्चे शामिल थे। मुलाकात के बाद मोहित की माँ तपेश्वरी देवी ने खुद को संतुष्ट बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी की नजर पूरे मामले पर है और किसी प्रकार की भी ढिलाई न बरतने का भरोसा दिया गया है। वहीं मृतक मोहित की पत्नी ने कहा कि उनको CM योगी पर भरोसा है और कोई भी दोषी छोड़ा नहीं जाएगा।

सुबह लगभग 10 बजे हुई इस मुलाकात में भाजपा विधायक योगेश शुक्ला भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री की तरफ से मोहित पांडेय के परिजनों को 10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता, एक मकान व अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ देने की घोषणा की गई है। मोहित के बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सरकार उठाएगी। मृतक की पत्नी को भी कोई रोजगार देने का भरोसा मिला है। मोहित 3 नाबालिग बच्चों के पिता है। इसमें 2 बेटे और एक बेटी है।

SHO सस्पेंड FIR दर्ज

इस बीच लखनऊ पुलिस के चिनहट थाने के SHO इंस्पेक्टर अश्वनी चतुर्वेदी को सस्पेंड कर दिया गया है। इसी थाने के एडिशनल SHO श्रीप्रकाश सिंह और इंस्पेक्टर आनंद भूषण को भी हटा कर अलग-अलग थानों में भेज दिया गया है। उनके व अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ उच्चस्तरीय जाँच करवाई जा रही है। जाँच के बाद दोषी पाए गए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भरत कुमार पाठक को चिनहट का नया थानेदार बनाया गया है।

निलंबित थाना प्रभारी अश्वनी चतुर्वेदी पर FIR भी दर्ज कर ली गई है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 (1) और 61 (2) के तहत चिनहट थाने में ही दर्ज हुई है। शिकायत मोहित पांडेय की माँ तपेश्वरी देवी द्वारा दी गई है।

600 रुपयों के तकादे से शुरू हुआ था विवाद

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे 600 रुपए के लिए हुआ विवाद बताया जा रहा है। इन्ही रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहित पांडेय एक कारोबारी हैं और आदेश उन्ही के यहाँ काम करता था। दोनों में पहले अच्छी जान-पहचान थी। मोहित का टाई-बेल्ट बनाने का कारखाना है। आदेश इसी कारख़ाने से दुकानों में माल सप्लाई करता था। आदेश का आरोप था कि मोहित ने उनके 600 रुपए हिसाब से काट लिए थे। इन्हीं पैसों का तकादा आदेश बार-बार कर रहा था। घटना के दिन भी एक बार फिर से दोनों में इतने ही रुपयों को ले कर विवाद हुआ था।

मृतक के परिजनों ने सड़क को जाम कर दिया था और कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस आदेश और उसके एक चाचा को भी आरोपित कर के जाँच कर रही है।

क्या कहती है FIR

26 अक्टूबर (शनिवार) को मोहित की माँ तपेश्वरी ने चिनहट थाने में शिकायत दी है। शिकायत में उन्होंने बताया कि शुक्रवार (25 अक्टूबर) को उनके बेटे और आदेश नाम के युवक में किसी बात को ले कर झगड़ा हो गया था। दोनों ने 112 नंबर डायल कर के पुलिस को बुलवाया। रात 10 बजे पुलिस मोहित और आदेश को ले कर थाने आ गई और उन्हें हवालात में बंद कर दिया गया। 1 घंटे बाद 11 बजे मोहित का भाई शोभाराम लॉकअप में मुलाकात करने गया।

आरोप है कि पुलिस ने शोभाराम को भी दारू पीने का आरोप लगाते हुए लॉकअप में बंद कर दिया। वहीं पुलिस ने दूसरे पक्ष के आदेश को छोड़ दिया। तपेश्वरी देवी के अनुसार आदेश के चाचा कोई नेता है जिसने मोहित और शोभाराम का काम खत्म करवाने के लिए पुलिस पर दबाव बनाया। बकौल तपेश्वरी देवी उनके छोटे बेटे मोहित की पुलिस ने इतनी पिटाई कर दी कि लॉकअप में ही उसकी मौत हो गई। इस घटना की जानकारी भी मृतक के परिजनों को नहीं दी गई। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

शिकायत में आगे बताया गया है कि मृतक के परिजनों को घटना की जानकारी तब हुई जब अगले दिन शोभाराम ने फोन पर अपने छोटे भाई की मौत की जानकारी दी। शोभाराम ने अपने घर वालों को लखनऊ के ही लोहिया अस्पताल में बुलवाया। जब परिजन वहाँ पहुँचे तब तक मोहित पांडेय ने दम तोड़ दिया था। आरोप है कि उनको मृतक का शव दूर से ही दिखाया और नजदीक भी नहीं आने दिया गया। शोभाराम ने परिजनों को मौत की वजह अपने भाई की पुलिस द्वारा की गई पिटाई बताई।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं बता सकी मौत की वजह

अपनी शिकायत में तपेश्वरी देवी ने SHO अश्वनी चतुर्वेदी सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। वहीं 32 वर्षीय मोहित पांडेय की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आई है। लखनऊ पुलिस का दावा है कि रिपोर्ट से मौत की वजह का खुलासा नहीं हो पाया है। गहन परीक्षण के लिए विसरा सुरक्षित कर लिया गया है।

आज तक की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मृतक के शरीर पर चोट के 4 निशान पाए गए हैं। ये चोटें सिर, हाथ और कमर पर मिली थीं। पिटाई के आरोपों से मुकर रही पुलिस का कहना है कि ये चोटें मोहित को आदेश से साथ हुए विवाद के दौरान लगीं थीं। पुलिसकर्मियों पर दर्ज FIR की जाँच गोमतीनगर थाने को ट्रांसफर कर दी गई है।

सामने आए थाने के CCTV फुटेज

इस घटनाक्रम से जुड़े कुछ CCTV फुटेज भी सामने आए हैं। ये दोनों फुटेज चिनहट थाने के हैं। पहले फुटेज में मोहित पांडेय थाने के बाहर खड़े हैं जबकि दूसरे में वो लॉकअप में अन्य बंदियों के साथ दिख रहे हैं। दूसरे फुटेज में साथी बंदी को मोहित की तबियत अचानक खराब होती दिखी तो वो अन्य बंदियों को बताने लगा। बंदियों ने गेट से बाहर पुलिस को बुलवाया। हालाँकि काफी देर तक कोई पुलिसकर्मी लॉकअप के अंदर नहीं आया।

इस पूरे घटनाक्रम में विपक्षी दलों ने उत्तर प्रदेश सरकार के कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अखिलेश यादव ने लॉकअप को टॉर्चर रूम कहा है। वहीं प्रियंका गाँधी से ले कर अन्य कॉन्ग्रेसी नेताओं ने पुलिस को बेलगाम बताया है।

PM मोदी का लोहा यूक्रेन के राष्ट्रपति ने माना: बोले जेलिंस्की- वही खत्म करवा सकते हैं रूस से युद्ध, भारत में ही हो शांति वार्ता

बीते लगभग ढाई सालों से रूस के साथ युद्ध में फंसे यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युद्ध खत्म करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। जेलेंस्की ने इस बात की हामी भी भरी है कि युद्ध में फंसे दोंनो देशों के बीच बातचीत भारत में हो।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में जेलेंस्की ने युद्ध खत्म करने में भारत की भूमिका पर बात की है। उन्होंने कहा है कि पीएम मोदी काफी बड़े देश के नेता हैं और एक बड़ी आबादी का नजरिया तय करते हैं, ऐसे में वह युद्ध का अंजाम क्या हो यह तय कर सकते हैं।

जेलेंस्की ने कहा, “मोदी एक बड़े देश के प्रधानमंत्री हैं, ऐसा देश केवल इतना नहीं कह सकता कि यह युद्ध का समय नहीं है। पीएम मोदी युद्ध का अंत तय कर सकते हैं। रूसी अर्थव्यवस्था को रोकना, उसके एनर्जी स्रोतों को रोकने और रूस के साथ रक्षा सहयोग घटाने से मॉस्को की हमारे खिलाफ युद्ध करने की क्षमता कम हो सकेगी।

आप यह बातचीत नीचे लगे इंटरव्यू में 4 मिनट से 8 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

जेलेंस्की ने उन बच्चों को वापस यूक्रेन लाने में मदद की माँग पीएम मोदी से की है, जिनका अपहरण करने का रूस पर आरोप है। जेलेंस्की ने कहा कि पीएम मोदी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए पुतिन से उन बच्चों को वापस लाने की बात कह सकते हैं। जेलेंस्की ने 1000 ऐसे बच्चों को वापस लाने की अपील पीएम मोदी से की है।

हाल ही में रूस में समाप्त हुई BRICS+ समिट की भी जेलेंस्की ने आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि रूस, चीन और ब्राजील का दिया हुआ उपाय भी नहीं मान रहा है। जेलेंस्की ने अपील की है कि सभी देश रूस से अपने रिश्ते तोड़ ले और यूक्रेन में युद्ध में खत्म करने में सहायता करें।

जेलेंस्की और पीएम मोदी की अगस्त, 2024 में द्विपक्षीय वार्ता हुई थी। यह वार्ता यूक्रेन की राजधानी कीव में हुई थी। पीएम मोदी ने यूक्रेन की यह यात्रा रूस जाने के कुछ दिनों बाद ही की थी। यूक्रेन के बाद पीएम मोदी हंगरी भी गए थे।

यूक्रेन और रूस के बीच फरवरी, 2022 से ही युद्ध छिड़ा हुआ है। रूस ने यूक्रेन के कुछ इलाकों को अपने कब्जे में ले रखा है। इस बीच यूक्रेन को अमेरिका समेत पश्चिमी देश लगातार हथियार और आर्थिक मदद दे रहे हैं। लगभग 2.5 साल बीत जाने के बाद भी इस युद्ध का कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इस बीच दोनों देशों में शांति समझौता भी नहीं हो सका है।

‘ऊपर से आदेश’ है इसलिए राम गोपाल मिश्रा के घर नहीं जा सकते, हिंदू पीड़ित बात करने से डरते हैं क्योंकि ‘चुप रहने का दबाव’ है: बहराइच में 7 दिन तक ऑपइंडिया के रिपोर्टर ने जो भोगा, वह जस का तस

बहराइच में माँ दुर्गा के विसर्जन जुलूस में 13 अक्टूबर को भड़की हिंसा के बाद प्रभावित क्षेत्रों में हालात अब सामान्य हो रहे हैं। पुलिस का पहरा भी काफी हद तक कम हो गया है। CCTV फुटेज, गवाहों व अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारियाँ कर रही है। पुलिस के हाथों से बेकाबू हुए हालात संभालने में PAC का बेहद अहम रोल रहा, जिसकी वजह से प्रशासन को केंद्रीय बलों की जरूरत नहीं पड़ी।

ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात निकल कर सामने आई कि पुलिस का ज्यादातर फोकस इस बात पर केंद्रित रहा कि पीड़ित हिन्दुओं की व्यथा सामने न आने पाए। उनके गाँवों के रास्तों पर बैरिकेड कर दिए गए थे जबकि सोशल मीडिया पर भी हिंदूवादियों को हड़काया गया। वहीं मुस्लिम पक्ष खुल कर मीडिया इंटरव्यू देता रहा। सोशल मीडिया पर भी पुलिस इस्लामी हैंडलों के प्रति नरम रही। हालाँकि इन सबके बावजूद हिन्दू पक्ष का कहना है कि वो डरने वाले नहीं हैं और आने वाले समय में इससे भी बड़ी शोभा यात्रा निकालेंगे।

पीड़ित हिन्दुओं से मिलने की राह पर ही पहरा

अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में हमने ये पाया कि शुरुआत में पुलिस का फोकस इस बात पर ज्यादा था कि हिंसा में पीड़ित हिन्दुओं की व्यथा सामने न आने पाए। इसकी शुरुआत रामगोपाल से ही करते हैं। मेरे द्वारा उनके घर जाने के कम से कम 5 अलग-अलग दिनों व भिन्न-भिन्न समय पर किए गए प्रयास सफल नहीं हो पाए। कभी घर के ठीक बाहर मौजूद भारी फ़ोर्स ने मुझे रोक दिया तो कभी 3 किलोमीटर पहले ही सोतिया भट्टा क्षेत्र में लगे बैरिकेड से आगे नहीं जाने दिया। हमने जब इसकी वजह पूछी तो बताया गया कि ‘ऊपर’ से आदेश हैं।

रामगोपाल मिश्रा के घर से 3 किलोमीटर पहले ही रोका गया हमें

रामगोपाल के बाद हमने विनोद और सत्यवान मिश्रा के भी गाँव सिपहिया प्यूली जाने के प्रयास किए तो रास्ते में पुलिस वाले मिल गए। यहाँ भी हमें रोका और आगे नहीं जाने दिया गया। तीसरी जगह गौरिया घाट थी, जहाँ प्रतिमाओं का विसर्जन होना था। वहाँ भी जाने के क्रम में खूब रोकटोक हुई। महसी बाजार के निवासी आदित्य मिश्रा ने ऑपइंडिया को जैसे-तैसे छिप कर इंटरव्यू दिया भी, तो अगले ही दिन उनके घर पुलिस पहुँच गई और गिरफ्तारी के बाद चालान कर जेल भेज दिया गया। बंद कैमरे पर चोटिल विनोद मिश्रा ने भी हमें बताया उन पर चुप रहने का दबाव है। तिवारी का पुरवा की तरफ जाने में भी कमोबेश यही दिक्क्तें झेलनी पड़ीं।

कई ऐसे हिन्दू भी रहे, जिन्होंने खुद को हिंसा पीड़ित बता कर हमसे फोन नंबर शेयर किया था। इन्होने अगले दिन या थोड़ी देर बाद मिलने का वादा किया था। हालाँकि बाद में उनको कई बार कॉल करने के बावजूद उनके फोन नहीं उठे। जब हम दिव्यांग पीड़ित सत्यवान मिश्रा का इंटरव्यू कर रहे थे, तब उनके परिवार के ही सदस्य विनोद मिश्रा के मोबाइल नंबर पर किसी की कॉल भी आई और उनको मीडिया से दूर रहने के लिए कहा गया। मीडिया से दूरी बनाने के लिए आदित्य मिश्रा पर भी दबाव बनाया गया है।

हालाँकि इसके ठीक उलट मुस्लिम पक्ष खुद को पीड़ित बताते हुए लगातार इंटरव्यूदेता रहा। उनके द्वारा दुकानों से सामान निकालने से ले कर घरों के हिस्से खुद तोड़े जाने के एक-एक पल को बाकायदा सभी चैनलों पर बिना आपत्ति के लाइव प्रसारित किया गया। नथुआपुर से महसी के बीच लगभग 8 किलोमीटर की दूरी में हमें तमाम मुस्लिम परिवार पूरी तरह से भयमुक्त हो, बिना किसी दबाव के मीडिया में इंटरव्यू देते मिले। इसी दोहरे रवैये की वजह से शुरुआत में हिंसा का एकतरफा पीड़ित मुस्लिम पक्ष और हमलावर के तौर पर हिन्दुओं को साबित करने की साजिश रची गई थी।

सोशल मीडिया पर भी हिंदूवादी ही हड़काए गए

बहराइच प्रशासन का दोतरफा रवैया सिर्फ जमीनी स्तर पर ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी साफ देखने को मिला। उन तमाम हैंडलों को बहराइच पुलिस द्वारा एक्शन लेने की धमकी दी गई, जिन्होंने या तो हिन्दुओं की पीड़ा दिखाई या मुस्लिम पक्ष के कारनामों को उजागर करना चाहा। यह धमकी ऑपइंडिया और पांचजन्य सहित कई अन्य संस्थानों को मिली। तमाम चश्मदीदों के बयानों के बावजूद मस्जिद से हमले के एलान की बात को सिरे से नकारने वाली पुलिस ने तो दैनिक जागरण को नोटिस भी जारी करने का फरमान सुना डाला। हिंदूवादी लोगों और संस्थानों से हर ट्वीट और हर शब्द का सबूत भी माँगा गया।

जियाउर रहमान और पांचजन्य के लिए बहराइच पुलिस की अलग-अलग शब्द शैली

वहीं दूसरी तरफ द वायर जैसी संस्थाएँ अपने मनमाफिक खबरों को परोसती रहीं। एकतरफा हिन्दुओं को ही दोषी बताने वाले मुस्लिमों के इंटरव्यू पर बहराइच पुलिस ने न तो कोई आपत्ति जताई और न ही उनसे सबूत माँगा। गिरफ्तारी के बाद अपने परिजनों को बेगुनाह बताती मुस्लिम महिलाओं के बयानों के बीच प्यार भरे कमेंट कर के किसी बेगुनाह के साथ अन्याय न होने देने जैसा भरोसा भी दिया जाता था। हालत तो यहाँ तक पहुँच गए थे कि बहराइच पुलिस ने आतंकियों को वकील दिलाने वाली संस्था जमीयत को शाँति दूत समझा और उनके उर्दू भाषा में लिखे पत्रों को आधिकारिक तौर पर शेयर किया।

कुछ ऐसा ही हुआ था, जब सोशल मीडिया में खबर उड़ी कि रामगोपाल मिश्रा के शव के साथ बर्बरता हुई थी। तब नाखून आदि उखाड़ लेने का दावा कई जगहों पर हुआ जिस पर फ़ौरन ही बहराइच पुलिस एक्टिव हुई और इसे भ्रामक बताते हुए खंडन जारी कर दिया। हालाँकि इस खंडन के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई। इसके उलट जब मुस्लिम पक्ष अपने घरों को बेरहमी से जलाने और महिलाओं संग छेड़खानी आदि करने जैसे गंभीर आरोप बिना सबूत के मढ़ रहे थे, तब बहराइच पुलिस की तरफ से कोई खंडन जारी नहीं हुआ।

कितना भी दबा लो, शोभा यात्रा निकलती रहेगी

पहले मज़हबी हमला और अब तमाम प्रकार के दबाव झेल रहे महसी क्षेत्र के पीड़ित हिन्दुओं का साफ ऐलान है कि वो अपनी धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात नहीं होने देंगे, भले ही इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत चुकानी पड़े। विनोद मिश्रा, सत्यवान, आदित्य और मारुति नंदन आदि ने साफ़ तौर पर कहा कि ये हमला सिर्फ इसलिए हुआ, जिससे हिन्दू समाज अपनी शोभा यात्रा निकालना बंद कर दे। इन सभी ने ‘मुस्लिम इलाका’ शब्द पर आपत्ति जताते हुए कहा उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, लेकिन वो अगले साल भी आने वाले हर साल वो शोभा यात्रा निकालते रहेंगे।

हमले से ठीक पहले शोभा यात्रा का दृश्य

पीड़ित हिन्दुओं ने एक स्वर में एलान किया है कि ये तमाम सनातनी परम्पराएँ उनके पूर्वजों द्वारा एक धरोहर के तौर पर उनको सौंपी गई हैं। इन परम्पराओं पर कुठाराघात कतई सहन नहीं किया जाएगा, भले ही उनका किसी भी स्तर पर कितना ही दमन क्यों न हो। यहाँ तक कि पीड़ितों ने खुद को रामगोपाल की तरह बलिदान देने के लिए भी तैयार बताया। वहीं रामगोपाल मिश्रा की पत्नी ने भी एलान किया है कि वो अपने पति के हत्यारों को मृत्युदंड की सजा दिलाने के लिए अंतिम साँस तक संघर्ष करेंगी।

हिंसा काबू करने में PAC की भूमिका अहम, नहीं उतारने पड़े केंद्रीय बल

बहराइच हिंसा की शुरुआत में बहराइच पुलिस पर लापरवाही बरतने और लॉ एन्ड ऑर्डर न संभाल पाने के आरोप लगे हैं। ये आरोप मृतक रामगोपाल के परिजनों ने भी सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिल कर लगाए। कार्रवाई के तौर पर तत्काल ही चौकी इंचार्ज, थाना प्रभारी और डिप्टी एसपी को सस्पेंड कर दिया गया। कुछ ही घंटों बाद एडिशनल एसपी को भी मुख्यालय अटैच कर दिया गया। हालत बिगड़ने के बाद UP पुलिस की ही एक विंग PAC ने मोर्चा संभाला था।

गाँव नथुआपुर में गश्त करते PAC के जवान

PAC ने कुछ ही घंटों में स्थिति को संभाल लिया था। कई मौकों पर हमें सीनियर आईपीएस अजय कुमार न सिर्फ घटनास्थल महराजगंज बल्कि आसपास के गाँवों में भी दल-बल के साथ गश्त करते मिले। STF प्रभारी आईपीएस अमिताभ यश के आने से भी सरकारी मशीनरी काफी एक्टिव हुई थी। इसी सामूहिक सक्रियता से 13 अक्टूबर को भड़की हिंसा उसी दिन रुक गई। यही वजह थी कि केंद्रीय बलों को भी उतारने की जरूरत नहीं पड़ी। थानों और जिले में तमाम नए अधिकारी तैनात कर दिए गए हैं। वो भी आरोपितों को चिन्हित कर के आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटे हुए हैं।

‘हलुलुईया’ पर छमक-छमक कर डांस, दीवाली पर पटाखों से समस्या: राजपाल यादव का पाखंड देख भड़के नेटिजन्स, पूछा- ईद-क्रिसमस पर क्यों नहीं उमड़ता पशु प्रेम

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की दीवाली से पहले एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में वो दीवाली में पटाखे फोड़ने का विरोध कर रहे हैं और समझा रहे हैं कि पटाखे फोड़ने से जानवर डरते हैं और वायु प्रदूषण होता है इसलिए बिन पटाखे फोड़े दीवाली मनाई जाए।

उन्होंने इस वीडियो को साझा करते हुए कैप्शन में लिखा- दीवाली की मिठाई और रंगोली तो डबल हो सकती है लेकिन प्रदूषण नहीं। आइए दीवाली खुशियों के साथ मनाएँ न कि धुएँ के साथ क्योंकि प्रकृति माँ भी हैप्पी दीवाली मनाना डिजर्व करती हैं।

उनके इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर बवाल मचा हुआ है। नेटीजन्स उनसे सवाल कर रहे हैं कि आखिर हिंदू त्योहार पर वो इस तरह का ज्ञान देने क्यों आए हैं। ईद पर करोड़ों जानवर कटते हैं तब कोई कुछ क्यों नहीं कहता या जब क्रिसमस पर पटाखे फोड़े जाते हैं तो क्यों उनका विरोध नहीं होता।

इसके अलावा राजपाल यादव की कुछ पुरानी वीडियोज भी शेयर की जा रही है। इन वीडियोज में राजपाल यादव उन विवादित पादरी बजिंदर सिंह के साथ दिखाई दे रहे हैं जो दावा करते हैं कि उनकी प्रार्थना से कैंसर, पैरालाइसिस जैसी बीमारी ठीक हो जाती हैं।

देख सकते हैं कि बजिंदर के पास राजपाल यादव कैसे भक्त बनकर खड़े है। किसी वीडियो में उन्हें चूम रहे हैं तो कहीं उन्हें गले लगाकर ‘यशु-यशु’ का म्यूजिक बनवाकर नाच रहे हैं और कहीं उनका हाथ पकड़कर चल रहे हैं।

ऐसे में लोग उन्हें कह रहे हैं कि राजपल यादव जो आजकल ईसाई धर्म मान रहे हैं उन्हें हिंदुओं के त्योहार दीवाली से क्या समस्या हो रही है। पिक्चर पिट रही हो तो कम से कम काम तो अच्छे करने चाहिए।

बता दें कि राजपाल यादव भूल भुलैया जैसी फिल्मों में हिंदू धर्म और ब्राह्णणों की वेशभूषा का मजाक बना चुके हैं। इसके अलावा जो राजपल यादव आज दीवाली पर पशु प्रमी बनकर दिखा रहे हैं वो समय आने पर ‘बिरयानी बाय किलो’ के विज्ञापन कर चुके हैं।

लोगों का यही सारी वीडियोज देख पूछना है कि आखिर ये चिंताएँ बॉलीवुड कलाकारों में सिर्फ तभी क्यों जागती है जब हिंदू पर्व आए। न क्रिसमस और न ईद कोई प्रेम नहीं जागता।